NCERT & Bihar Board Class 8 Science Chapter 13 Solutions

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🎓 Class: 8
📚 Subject: Science (विज्ञान)
📝 Chapter: 13 (प्रकाश – Light)

Bihar Board Class 8 Science Chapter 13: प्रकाश (Light) Notes & Solutions

प्रिय छात्रों और शिक्षकों, Bihar Board Class 8 Science Chapter 13 के इस संपूर्ण मार्गदर्शिका में आपका स्वागत है। इस अध्याय का नाम “प्रकाश” (Light) है। प्रकाश हमारे जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके बिना हम इस खूबसूरत दुनिया को नहीं देख सकते। इस पोस्ट में हम प्रकाश के गुण, परावर्तन के नियम, मानव नेत्र की संरचना और ब्रैल पद्धति के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे। साथ ही, अध्याय के अंत में आपको सभी अभ्यास प्रश्नों के सटीक उत्तर भी मिलेंगे।

📘 13.1 वस्तुओं को दृश्य कौन बनाता है?

संसार को हम मुख्य रूप से अपनी ज्ञानेन्द्रियों (sense organs) से जानते हैं। इनमें से दृष्टि (vision) एक सबसे महत्वपूर्ण ज्ञानेन्द्रिय है। इसकी सहायता से हम पर्वतों, नदियों, पेड़-पौधों और अपने चारों ओर की अन्य अनेक वस्तुओं को देखते हैं।

क्या आपने कभी सोचा है कि हम विभिन्न वस्तुओं को कैसे देख पाते हैं? आप कह सकते हैं कि हम वस्तुओं को नेत्रों से देखते हैं। लेकिन, क्या आप अंधेरे कमरे में किसी वस्तु को देख पाते हैं? नहीं! इसका अर्थ है कि केवल नेत्रों द्वारा हम किसी वस्तु को नहीं देख सकते।

किसी वस्तु को हम तब ही देख पाते हैं जब उस वस्तु से आने वाला प्रकाश हमारे नेत्रों में प्रवेश करे। यह प्रकाश वस्तुओं द्वारा उत्सर्जित (emitted) अथवा उनसे परावर्तित (reflected) हुआ हो सकता है।

📘 13.2 परावर्तन के नियम (Laws of Reflection)

कोई पॉलिश किया हुआ या चमकदार पृष्ठ (surface) दर्पण (mirror) की भांति कार्य कर सकता है। दर्पण अपने ऊपर पड़ने वाले प्रकाश की दिशा को परिवर्तित कर देता है। प्रकाश के किसी चिकने पृष्ठ से टकराकर वापस उसी माध्यम में लौटने की घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

📖 परावर्तन से संबंधित कुछ मुख्य पद
  • आपतित किरण (Incident Ray): किसी पृष्ठ पर पड़ने वाली प्रकाश-किरण को आपतित किरण कहते हैं।
  • परावर्तित किरण (Reflected Ray): पृष्ठ से परावर्तन के पश्चात वापस आने वाली प्रकाश-किरण को परावर्तित किरण कहते हैं।
  • अभिलंब (Normal): परावर्तक पृष्ठ के जिस बिन्दु पर आपतित किरण टकराती है, उस पर 90° का कोण बनाते हुए खींची गई रेखा अभिलंब कहलाती है।
  • आपतन कोण (Angle of Incidence – ∠i): आपतित किरण तथा अभिलंब के बीच के कोण को आपतन कोण कहते हैं।
  • परावर्तन कोण (Angle of Reflection – ∠r): परावर्तित किरण तथा अभिलंब के बीच के कोण को परावर्तन कोण कहते हैं।
Bihar Board Class 8 Science Chapter 13 - Laws of Reflection Diagram

चित्र 13.3 : आपतन कोण तथा परावर्तन कोण

💡 प्रकाश के परावर्तन के दो नियम हैं:
  1. प्रथम नियम: आपतन कोण सदैव परावर्तन कोण के बराबर होता है (∠i = ∠r)
  2. द्वितीय नियम: आपतित किरण, आपतन बिंदु पर अभिलंब तथा परावर्तित किरण — ये सभी एक ही तल (plane) में होते हैं।

📘 समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब (Image formed by Plane Mirror)

जब हम समतल दर्पण में किसी वस्तु को देखते हैं, तो प्रकाश की किरणें दर्पण से परावर्तित होकर हमारी आँखों तक पहुँचती हैं। चूँकि परावर्तित किरणें वास्तव में किसी बिंदु पर नहीं मिलतीं, बल्कि पीछे की ओर बढ़ाने पर मिलती हुई प्रतीत होती हैं, इसलिए समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब आभासी (Virtual) होता है।

पार्श्व-परिवर्तन (Lateral Inversion): दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब में वस्तु का बायाँ भाग दाईं ओर तथा दायाँ भाग बाईं ओर दिखाई पड़ता है। इस परिघटना को पार्श्व-परिवर्तन कहते हैं।

📘 13.3 नियमित तथा विसरित परावर्तन

परावर्तन मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है, जो परावर्तक पृष्ठ की प्रकृति पर निर्भर करता है:

विसरित या अनियमित परावर्तन (Diffused Reflection) नियमित परावर्तन (Regular Reflection)
जब सभी समान्तर किरणें किसी खुरदुरे या अनियमित पृष्ठ (जैसे गत्ता, लकड़ी) से परावर्तित होने के पश्चात् समान्तर नहीं होतीं, तो इसे विसरित परावर्तन कहते हैं। दर्पण जैसे चिकने पृष्ठ से होने वाले परावर्तन को नियमित परावर्तन कहते हैं।
इसमें परावर्तित किरणें विभिन्न दिशाओं में फैल जाती हैं। इसमें परावर्तित किरणें एक निश्चित दिशा में और एक-दूसरे के समान्तर होती हैं।
इसके द्वारा प्रतिबिंब (image) का निर्माण स्पष्ट नहीं होता है। नियमित परावर्तन द्वारा स्पष्ट प्रतिबिंब बनते हैं।

नोट: याद रखिए कि विसरित परावर्तन में भी परावर्तन के नियमों का सफलतापूर्वक पालन होता है। प्रकाश का विसरण पृष्ठ पर अनियमितताओं के कारण होता है, नियमों की विफलता के कारण नहीं।

📘 दीप्त और प्रदीप्त पिण्ड (Luminous and Illuminated Objects)

क्या हम सभी वस्तुओं को परावर्तित प्रकाश के कारण ही देखते हैं? हमारे चारों ओर की लगभग सभी वस्तुएँ हमें परावर्तित प्रकाश के कारण ही दिखाई देती हैं।

  • प्रदीप्त पिण्ड (Illuminated Objects): जो पिण्ड दूसरी वस्तुओं के प्रकाश में चमकते हैं उन्हें प्रदीप्त पिण्ड कहते हैं। उदाहरण: चन्द्रमा (यह सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करता है)।
  • दीप्त पिण्ड (Luminous Objects): जो पिण्ड स्वयं का प्रकाश उत्सर्जित करते हैं वे दीप्त पिण्ड कहलाते हैं। उदाहरण: सूर्य, मोमबत्ती की ज्वाला, विद्युत बल्ब आदि।

📘 13.4 परावर्तित प्रकाश को पुनः परावर्तित किया जा सकता है

क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि जब आप किसी केश प्रसाधक (नाई) की दुकान पर जाते हैं, तो बाल कटने के बाद वह आपके पीछे एक दर्पण रखता है? इस दूसरे दर्पण की सहायता से आप सामने वाले दर्पण में यह देख पाते हैं कि आपके पीछे के बाल कैसे कटे हैं। इसका अर्थ है कि एक दर्पण से परावर्तित प्रकाश, दूसरे दर्पण पर पड़कर पुनः परावर्तित हो सकता है।

🔍 परिदर्शी (Periscope):

परिदर्शी में दो समतल दर्पणों का उपयोग किया जाता है। दो दर्पणों से प्रकाश के बार-बार परावर्तन के कारण हम उन वस्तुओं को देखने योग्य बन पाते हैं जिन्हें हम सीधे नहीं देख सकते। परिदर्शियों का उपयोग पनडुब्बियों, टैंकों तथा बंकरों में छिपे सैनिकों द्वारा बाहर की वस्तुओं को देखने के लिए किया जाता है।

📘 13.5 बहु प्रतिबिंब (Multiple Images)

हम जानते हैं कि समतल दर्पण किसी वस्तु का केवल एक ही प्रतिबिंब बनाता है। लेकिन यदि दो समतल दर्पणों को एक साथ किसी कोण पर रखा जाए, तो हमें कई प्रतिबिंब दिखाई देते हैं।

एक दूसरे से किसी कोण पर रखे दर्पणों द्वारा अनेक प्रतिबिंबों के बनने की धारणा का उपयोग बहुमूर्तिदर्शी (कैलाइडोस्कोप) में भांति-भांति के आकर्षक पैटर्न बनाने के लिए किया जाता है।

Bihar Board Class 8 Science Chapter 13 - Kaleidoscope Construction

चित्र 13.12 : बहुमूर्तिदर्शी (कैलाइडोस्कोप) बनाना

कैलाइडोस्कोप की एक रोचक विशेषता यह है कि आप कभी भी एक पैटर्न दोबारा नहीं देख पाएँगे। प्रायः दीवारों वाले कागज़ों तथा वस्त्रों के डिज़ाइन बनाने वाले कलाकार कैलाइडोस्कोप का उपयोग नए-नए पैटर्न की कल्पना करने के लिए करते हैं।

📘 13.6 सूर्य का प्रकाश: श्वेत या रंगीन?

सूर्य के प्रकाश को श्वेत प्रकाश (White Light) के रूप में जाना जाता है। वास्तव में, इस श्वेत प्रकाश में सात रंग होते हैं।

जल और दर्पण से बना एक उपकरण प्रिज़्म की तरह कार्य करता है, जो प्रकाश को उसके मूल रंगों में विभक्त कर देता है। प्रकाश के अपने रंगों में विभाजित होने को प्रकाश का विक्षेपण (Dispersion of Light) कहते हैं। इन्द्रधनुष विक्षेपण को दर्शाने वाली एक प्राकृतिक परिघटना है।

📘 13.7 हमारे नेत्रों की संरचना क्या है? (Structure of Human Eye)

हम वस्तुओं को केवल तभी देख पाते हैं जब उनसे आने वाला प्रकाश हमारे नेत्रों में प्रवेश करता है। हमारे नेत्र की आकृति लगभग गोलाकार है। इसका बाहरी आवरण सफेद और कठोर होता है ताकि यह नेत्र के आंतरिक भागों की दुर्घटनाओं से बचाव कर सके।

👁️ मानव नेत्र के मुख्य भाग
  • कॉर्निया या स्वच्छ मंडल (Cornea): नेत्र के पारदर्शी अग्र भाग को कॉर्निया कहते हैं।
  • परितारिका (Iris): कॉर्निया के पीछे गहरे रंग की पेशियों की संरचना होती है, जिसे परितारिका कहते हैं। यह नेत्र को विशिष्ट रंग प्रदान करती है और प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करती है।
  • पुतली (Pupil): आइरिस में एक छोटा सा द्वार होता है जिसे पुतली कहते हैं। इसके साइज़ को परितारिका नियंत्रित करती है।
  • लेंस (Lens): पुतली के पीछे एक लेंस होता है जो प्रकाश को आँख के पीछे एक परत पर फ़ोकसित करता है।
  • रेटिना या दृष्टि पटल (Retina): लेंस जिस परत पर प्रकाश को केंद्रित करता है, उसे रेटिना कहते हैं। इसमें दो प्रकार की तंत्रिका कोशिकाएँ होती हैं:
    • शंकु (Cones): जो तीव्र प्रकाश और रंगों (वर्णों) के लिए सुग्राही होते हैं।
    • शलाकाएँ (Rods): जो मंद प्रकाश के लिए सुग्राही होती हैं।
  • अंध बिंदु (Blind Spot): दृक् तंत्रिकाओं तथा रेटिना की संधि पर कोई तंत्रिका कोशिका नहीं होती। यहाँ प्रकाश गिरने पर मस्तिष्क तक कोई सूचना नहीं जाती, इसे अंध बिंदु कहते हैं।
🎬 क्या आप जानते हैं? (दृष्टि-निर्बंध)

रेटिना पर बने प्रतिबिंब का प्रभाव, वस्तु को हटा लेने पर, तुरन्त ही समाप्त नहीं होता। यह लगभग 1/16 सेकंड तक बना रहता है। इसलिए, यदि नेत्र पर प्रति सेकंड 16 या इससे अधिक दर पर किसी गतिशील वस्तु के स्थिर प्रतिबिंब बनें, तो नेत्र को वह वस्तु चलचित्र की भाँति चलती फिरती अनुभव होगी। हम जो चलचित्र (Movies) देखते हैं, उनमें प्रायः 24 प्रतिबिंब प्रति सेकंड की दर से परिवर्तित होते हैं।

📘 13.8 नेत्रों की देखभाल (Care of Eyes)

हमारे नेत्र बहुत अनमोल हैं, इसलिए इनकी उचित देखभाल आवश्यक है:

  • नेत्रों के लिए बहुत कम या बहुत अधिक प्रकाश हानिकारक है। अपर्याप्त प्रकाश से नेत्र-खिंचाव तथा सरदर्द हो सकता है।
  • सूर्य या किसी शक्तिशाली लैम्प के अत्यधिक तीव्र प्रकाश को सीधा मत देखिए, यह रेटिना को क्षति पहुँचा सकता है।
  • अपने नेत्रों को कभी मत रगड़िए। धूल गिरने पर स्वच्छ जल से धोइए।
  • पठन सामग्री को सदैव दृष्टि की सामान्य दूरी (लगभग 25 cm) पर रखकर पढ़िए।
  • भोजन में विटामिन A का अभाव नेत्रों के अनेक रोगों, जैसे रतौंधी (Night Blindness) के लिए उत्तरदायी होता है। इसलिए आहार में कच्ची गाजर, हरी सब्जियाँ, दूध, पनीर और फल (आम, पपीता) शामिल करने चाहिए।

वृद्धावस्था में कई बार नेत्र लेंस धुँधला हो जाता है, जिसे मोतियाबिंद (Cataract) कहते हैं। इसकी चिकित्सा कृत्रिम लेंस लगाकर संभव है।

📘 13.9 & 13.10 चाक्षुष-विकृति वाले व्यक्ति और ब्रैल पद्धति

कुछ व्यक्ति दृष्टि संबंधी अक्षमता (Visual impairment) से पीड़ित होते हैं। वे अपनी दूसरी ज्ञानेन्द्रियों (स्पर्श और श्रवण) को अधिक तीक्ष्णता से विकसित कर लेते हैं। इनकी सहायता के लिए अप्रकाशिक साधन (जैसे ब्रैल पाटी, बोलने वाली पुस्तकें) और प्रकाशिक साधन (जैसे संस्पर्श लेंस, आवर्धक) उपलब्ध हैं।

📖 ब्रैल पद्धति (Braille System) का विकास:

चाक्षुषविकृति युक्त व्यक्तियों के लिए सर्वाधिक लोकप्रिय साधन ब्रैल कहलाता है। लुई ब्रेल (Louis Braille), जो स्वयं एक दृष्टिहीन व्यक्ति थे, ने 1821 में इस पद्धति को प्रकाशित किया। ब्रैल पद्धति में 63 बिंदुकित पैटर्न (Dot patterns) होते हैं, जिन्हें स्पर्श करके अक्षरों और शब्दों को पहचाना जाता है।

हेलन ए. केलर (Helen A. Keller) जैसी महान लेखिका ने भी दृष्टि बाधित होने के बावजूद “स्टोरी ऑफ माई लाइफ़” सहित अनेक पुस्तकें लिखीं और दुनिया को प्रेरित किया।


[ Class 8 Science Chapter 12: कुछ प्राकृतिक परिघटनाएं ]

📘 अभ्यास प्रश्न – Bihar Board Class 8 Science Chapter 13 Question Answer

यहाँ कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 13 (प्रकाश) के सभी NCERT अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत और सटीक उत्तर दिए गए हैं।

प्रश्न 1: मान लीजिए आप एक अंधेरे कमरे में हैं। क्या आप कमरे में वस्तुओं को देख सकते हैं? क्या आप कमरे के बाहर वस्तुओं को देख सकते हैं। व्याख्या कीजिए।

उत्तर: नहीं, हम अंधेरे कमरे में रखी वस्तुओं को नहीं देख सकते हैं। परंतु यदि कमरे के बाहर प्रकाश है, तो हम कमरे के बाहर की वस्तुओं को देख सकते हैं।

व्याख्या: हम किसी वस्तु को तभी देख पाते हैं जब उस वस्तु से आने वाला प्रकाश (चाहे वह उत्सर्जित हो या परावर्तित) हमारे नेत्रों में प्रवेश करता है। अंधेरे कमरे में प्रकाश का कोई स्रोत नहीं होता, इसलिए वस्तुओं से कोई प्रकाश परावर्तित होकर हमारी आँखों तक नहीं पहुँचता। जबकि कमरे के बाहर प्रकाश होने के कारण वहाँ की वस्तुएँ प्रकाश को परावर्तित करती हैं, जिससे हम उन्हें देख पाते हैं।


प्रश्न 2: नियमित तथा विसरित परावर्तन में अन्तर बताइए। क्या विसरित परावर्तन का अर्थ है कि परावर्तन के नियम विफल हो गए हैं?

उत्तर: नियमित और विसरित परावर्तन में निम्नलिखित अंतर हैं:

नियमित परावर्तन (Regular Reflection) विसरित परावर्तन (Diffused Reflection)
यह चिकने और पॉलिश किए हुए पृष्ठों (जैसे दर्पण) से होता है। यह खुरदरे और अनियमित पृष्ठों (जैसे गत्ता, लकड़ी) से होता है।
इसमें सभी परावर्तित किरणें एक-दूसरे के समान्तर होती हैं। इसमें परावर्तित किरणें विभिन्न दिशाओं में फैल जाती हैं और समान्तर नहीं होतीं।
इससे वस्तु का स्पष्ट प्रतिबिंब बनता है। इससे प्रतिबिंब स्पष्ट नहीं बनता है।

नहीं, विसरित परावर्तन का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि परावर्तन के नियम विफल हो गए हैं। विसरित परावर्तन में भी परावर्तन के नियमों का पूरी तरह से पालन होता है। प्रकाश का विसरण या अनियमित फैलाव पृष्ठ (surface) की अनियमितताओं (खुरदरेपन) के कारण होता है, नियमों की विफलता के कारण नहीं।


प्रश्न 3: निम्न में से प्रत्येक के स्थान के सामने लिखिए, यदि प्रकाश की एक समान्तर किरण-पुंज इनसे टकराए तो नियमित परावर्तन होगा या विसरित परावर्तन होगा। प्रत्येक स्थिति में अपने उत्तर का औचित्य बताइए।

उत्तर:

  • (क) पॉलिश युक्त लकड़ी की मेज: नियमित परावर्तन। क्योंकि पॉलिश करने से लकड़ी का पृष्ठ चिकना हो जाता है।
  • (ख) चॉक पाउडर: विसरित परावर्तन। क्योंकि चॉक पाउडर के कण अनियमित और खुरदरे होते हैं।
  • (ग) गत्ते का पृष्ठ: विसरित परावर्तन। क्योंकि गत्ते का पृष्ठ देखने में समतल लग सकता है, लेकिन सूक्ष्म स्तर पर इसमें कई अनियमितताएँ होती हैं।
  • (घ) संगमरमर के फर्श पर फैला जल: नियमित परावर्तन। क्योंकि फर्श पर फैला हुआ जल एक चिकने और समतल दर्पण की तरह कार्य करता है।
  • (ङ) दर्पण: नियमित परावर्तन। क्योंकि दर्पण का पृष्ठ अत्यधिक चिकना और पॉलिश किया हुआ होता है।
  • (च) कागज का टुकड़ा: विसरित परावर्तन। क्योंकि कागज का पृष्ठ सूक्ष्म रूप से खुरदरा (रेशेदार) होता है।

प्रश्न 4: परावर्तन के नियम बताइए।

उत्तर: प्रकाश के परावर्तन के दो नियम हैं:

  1. प्रथम नियम: आपतन कोण (Angle of incidence) सदैव परावर्तन कोण (Angle of reflection) के बराबर होता है (∠i = ∠r)।
  2. द्वितीय नियम: आपतित किरण, आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब तथा परावर्तित किरण — ये सभी एक ही तल में होते हैं।

प्रश्न 5: यह दर्शाने के लिए कि आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर अभिलंब एक ही तल में होते हैं, एक क्रियाकलाप का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
क्रियाकलाप:

  1. एक मेज पर सफेद कागज की शीट इस प्रकार फैलाएं कि शीट का कुछ हिस्सा मेज के किनारे से बाहर निकला हो।
  2. एक कंघा लें और उसके बीच के एक दाँते को छोड़कर बाकी सभी खुले स्थानों को काले कागज से बंद कर दें।
  3. कंघे को कागज की शीट के लंबवत पकड़ें और एक टॉर्च की सहायता से कंघे के खुले स्थान पर प्रकाश डालें। आपको कागज पर प्रकाश की एक किरण (आपतित किरण) दिखाई देगी।
  4. प्रकाश-किरण के रास्ते में एक समतल दर्पण की पट्टी लंबवत रखें। दर्पण से टकराकर किरण परावर्तित हो जाएगी (परावर्तित किरण)।
  5. अब शीट के उस बाहर निकले हुए भाग को नीचे की ओर मोड़ दें जहाँ से परावर्तित किरण गुजर रही है।
  6. प्रेक्षण (Observation): आप देखेंगे कि मुड़े हुए भाग पर परावर्तित किरण दिखाई नहीं देती। जब कागज को वापस सीधा किया जाता है, तो किरण फिर से दिखने लगती है।
  7. निष्कर्ष: सीधा कागज एक तल (plane) को निरूपित करता है। चूँकि कागज मोड़ने पर तल बदल जाता है और किरण अदृश्य हो जाती है, यह सिद्ध करता है कि आपतित किरण, आपतन बिंदु पर अभिलंब और परावर्तित किरण तीनों एक ही तल में होते हैं।

Reflection of Light Activity - Bihar Board Class 8 Science Chapter 13

चित्र 13.4 : आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिन्दु पर अभिलंब एक ही तल में होते हैं


प्रश्न 6: नीचे दिए गए रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

उत्तर:

  1. एक समतल दर्पण के सामने 1m दूर खड़ा एक व्यक्ति अपने प्रतिबिंब से 2 m दूर दिखाई देता है।
  2. यदि किसी समतल दर्पण के सामने खड़े होकर आप अपने दाएँ हाथ से अपने बाएँ कान को छुएँ तो दर्पण में ऐसा लगेगा कि आपका दायाँ कान बाएँ हाथ से छुआ गया है।
  3. जब आप मंद प्रकाश में देखते हैं तो आपकी पुतली का साइज़ बड़ा हो जाता है।
  4. रात्रि पक्षियों के नेत्रों में शलाकाओं की संख्या की अपेक्षा शंकुओं की संख्या कम होती है।

प्रश्न 7: आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है :

(क) सदैव
(ख) कभी-कभी
(ग) विशेष दशाओं में
(घ) कभी नहीं

(क) सदैव

उत्तर की विस्तृत व्याख्या: प्रकाश के परावर्तन के प्रथम नियम के अनुसार, आपतन कोण (Incident Angle) हमेशा परावर्तन कोण (Reflected Angle) के बराबर होता है। चाहे सतह चिकनी हो या खुरदरी (नियमित हो या विसरित परावर्तन), यह नियम ‘सदैव’ (Always) लागू होता है।


प्रश्न 8: समतल दर्पण द्वारा बनाया गया प्रतिबिंब होता है

(क) आभासी, दर्पण के पीछे तथा आवर्धित।
(ख) आभासी, दर्पण के पीछे तथा बिंब के साइज़ के बराबर।
(ग) वास्तविक, दर्पण के पृष्ठ पर तथा आवर्धित ।
(घ) वास्तविक, दर्पण के पीछे तथा बिंब के साइज के बराबर।

(ख) आभासी, दर्पण के पीछे तथा बिंब के साइज़ के बराबर।

उत्तर की विस्तृत व्याख्या: समतल दर्पण (Plane Mirror) हमेशा एक आभासी (Virtual) और सीधा प्रतिबिंब बनाता है जिसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता। यह प्रतिबिंब दर्पण के ठीक पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है जितनी दूरी पर वस्तु रखी होती है, और इसका आकार (size) बिल्कुल वस्तु (बिंब) के आकार के बराबर होता है।


प्रश्न 9: कैलाइडोस्कोप की रचना का वर्णन कीजिए।

उत्तर: कैलाइडोस्कोप (बहुमूर्तिदर्शी) एक ऐसा प्रकाशीय यंत्र है जिसमें परावर्तन के कारण सुंदर और आकर्षक पैटर्न बनते हैं।
रचना (Construction):

  1. कैलाइडोस्कोप बनाने के लिए समतल दर्पण की तीन आयताकार पट्टियाँ (लगभग 15 cm लंबी और 4 cm चौड़ी) ली जाती हैं।
  2. इन्हें एक-दूसरे के साथ 60° का कोण बनाते हुए एक प्रिज़्म (Prism) की आकृति में जोड़ा जाता है।
  3. इस दर्पणों के ढांचे को गत्ते या मोटे चार्ट पेपर की बनी एक बेलनाकार ट्यूब में दृढ़ता से लगा दिया जाता है।
  4. ट्यूब के एक सिरे को गत्ते की एक डिस्क से बंद कर दिया जाता है, जिसमें देखने के लिए एक छोटा छिद्र होता है।
  5. ट्यूब के दूसरे सिरे पर एक समतल पारदर्शी काँच की वृत्ताकार प्लेट लगाई जाती है, जिस पर रंगीन काँच के छोटे-छोटे टुकड़े (या चूड़ियों के टुकड़े) रखे जाते हैं।
  6. अंत में, इस सिरे को घिसे हुए (Rough) काँच की प्लेट से बंद कर दिया जाता है, ताकि रंगीन टुकड़ों को हिलने-डुलने के लिए जगह मिल सके। छिद्र से देखने पर दर्पणों द्वारा बहु-परावर्तन के कारण अनेकों सुंदर डिज़ाइन दिखाई देते हैं।


प्रश्न 10: मानव नेत्र का एक नामांकित रेखाचित्र बनाइए।

उत्तर:

Human Eye Diagram - Bihar Board Class 8 Science Chapter 13

चित्र 13.14 : मानव नेत्र का नामांकित आरेख


प्रश्न 11: गुरमीत लेज़र टॉर्च के द्वारा क्रियाकलाप 13.8 को करना चाहता था। उसके अध्यापक ने ऐसा करने से मना किया। क्या आप अध्यापक की सलाह के आधार की व्याख्या कर सकते हैं?

उत्तर: अध्यापक की सलाह बिल्कुल सही थी क्योंकि लेज़र टॉर्च का प्रकाश बहुत अधिक तीव्र (Highly intense) और केंद्रित होता है। यदि लेज़र टॉर्च का प्रकाश सीधे आँखों में चला जाए, तो यह आँख के रेटिना (दृष्टि पटल) को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर सकता है। इससे आँखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है। इसलिए, लेज़र लाइट को कभी भी आँखों पर नहीं डालना चाहिए।


प्रश्न 12: वर्णन कीजिए कि आप अपने नेत्रों की देखभाल कैसे करेंगे।

उत्तर: हम अपने नेत्रों की देखभाल निम्नलिखित तरीकों से कर सकते हैं:

  • बहुत कम या बहुत अधिक प्रकाश में पढ़ाई नहीं करनी चाहिए।
  • सूर्य या किसी शक्तिशाली प्रकाश स्रोत (जैसे लेज़र) को सीधे कभी नहीं देखना चाहिए।
  • आँखों को कभी नहीं रगड़ना चाहिए। धूल कण जाने पर आँखों को साफ पानी से धोना चाहिए।
  • पढ़ते समय पुस्तक को आँखों से उचित दूरी (लगभग 25 cm) पर रखना चाहिए।
  • अपने आहार में विटामिन ‘A’ से भरपूर चीजें (जैसे गाजर, पालक, पपीता, दूध) शामिल करनी चाहिए।
  • नियमित रूप से नेत्र विशेषज्ञ से आँखों की जाँच करवानी चाहिए।

प्रश्न 13: यदि परावर्तित किरण आपतित किरण से 90° का कोण बनाए तो आपतन कोण का मान कितना होगा?

उत्तर: हम जानते हैं कि परावर्तन के नियम के अनुसार, आपतन कोण (∠i) सदैव परावर्तन कोण (∠r) के बराबर होता है।
दिया गया है कि: आपतित किरण और परावर्तित किरण के बीच का कुल कोण = 90°
अर्थात्, ∠i + ∠r = 90°
चूँकि ∠i = ∠r,
इसलिए, 2 × ∠i = 90°
∠i = 90° / 2 = 45°
अतः, आपतन कोण का मान 45° होगा।


प्रश्न 14: यदि दो समान्तर समतल दर्पण एक-दूसरे से 40 cm के अन्तराल पर रखे हों तो इनके बीच रखी एक मोमबत्ती के कितने प्रतिबिंब बनेंगे?

उत्तर: यदि दो समतल दर्पण एक-दूसरे के समान्तर (Parallel) रखे हों, तो उनके बीच रखी किसी भी वस्तु के अनंत (Infinite) प्रतिबिंब बनते हैं। यह बार-बार होने वाले बहु-परावर्तन (Multiple reflection) के कारण होता है। दर्पणों के बीच की दूरी (40 cm) प्रतिबिंबों की संख्या को प्रभावित नहीं करती है।


प्रश्न 15: दो दर्पण एक-दूसरे के लंबवत् रखे हैं। प्रकाश की एक किरण एक दर्पण पर 30° के कोण पर आपतित होती है जैसा कि चित्र 13.19 में दर्शाया गया है। दूसरे दर्पण से परावर्तित होने वाली परावर्तित किरण बनाइए।

उत्तर:
Perpendicular Mirrors Ray Diagram - Bihar Board Class 8 Science Chapter 13

चित्र 13.19 : दो लंबवत समतल दर्पणों से प्रकाश का परावर्तन

(छात्र इस प्रश्न का चित्र अपनी कॉपी में इस प्रकार बनाएंगे:)
1. पहले दर्पण पर किरण 30° के आपतन कोण पर गिरती है, अतः वह 30° के परावर्तन कोण पर ही परावर्तित होगी।
2. यह परावर्तित किरण दूसरे लंबवत दर्पण पर टकराएगी। ज्यामिति के अनुसार, यहाँ किरण का आपतन कोण 60° होगा (90° – 30° = 60°)।
3. अतः, दूसरे दर्पण से किरण 60° के कोण पर परावर्तित होकर बाहर निकलेगी। परावर्तित किरण प्रारंभिक आपतित किरण के समानांतर और विपरीत दिशा में होगी।


प्रश्न 16: चित्र 13.20 में दर्शाए अनुसार बूझो एक समतल दर्पण के ठीक सामने पार्श्व से कुछ हटकर एक किनारे A पर खड़ा होता है। क्या वह स्वयं को दर्पण में देख सकता है? क्या वह P, Q तथा R पर स्थित वस्तुओं के प्रतिबिंब भी देख सकता है?

उत्तर:
Plane Mirror Image Formation Boojho - Bihar Board Class 8 Science Chapter 13

चित्र 13.20 : समतल दर्पण के सामने पार्श्व से हटकर खड़ा बूझो

1. नहीं, बूझो स्वयं को दर्पण में नहीं देख सकता है, क्योंकि वह दर्पण के परावर्तक क्षेत्र की सीध से बाहर (किनारे A पर) खड़ा है। उसके शरीर से जाने वाली किरणें दर्पण पर नहीं पड़ रही हैं।
2. हाँ, वह बिंदु P और Q पर रखी वस्तुओं के प्रतिबिंब देख सकता है क्योंकि P और Q से चलने वाली प्रकाश किरणें दर्पण से परावर्तित होकर बूझो (स्थिति A) की आँखों तक पहुँच सकती हैं।
3. नहीं, वह R पर स्थित वस्तु का प्रतिबिंब नहीं देख सकता है क्योंकि R से आने वाली किरणें परावर्तन के बाद बूझो तक नहीं पहुंच पाएंगी।


प्रश्न 17: (a) A पर स्थित किसी वस्तु के समतल दर्पण में बनने वाले प्रतिबिंब की स्थिति ज्ञात कीजिए (चित्र 13.21)।
(b) क्या स्थिति B से पहेली प्रतिबिंब को देख सकती है?
(c) क्या स्थिति C से बूझो इस प्रतिबिंब को देख सकता है?
(d) जब पहेली B से C पर चली जाती है तो A का प्रतिबिंब किस ओर खिसक जाता है?

उत्तर:
Plane Mirror Position Paheli Boojho - Bihar Board Class 8 Science Chapter 13

चित्र 13.21 : समतल दर्पण में वस्तु A के प्रतिबिंब की स्थिति

(a) वस्तु A का प्रतिबिंब दर्पण के ठीक पीछे उतनी ही दूरी पर बनेगा, जितनी दूरी पर A दर्पण के सामने है।
(b) हाँ, स्थिति B से पहेली A के प्रतिबिंब को देख सकती है क्योंकि परावर्तित किरणें उस तक पहुँचती हैं।
(c) हाँ, स्थिति C से बूझो भी A के प्रतिबिंब को देख सकता है।
(d) जब पहेली B से C पर जाती है, तो A का प्रतिबिंब बिल्कुल नहीं खिसकेगा (अपनी जगह पर ही रहेगा)। किसी वस्तु का प्रतिबिंब केवल वस्तु या दर्पण के खिसकने पर ही स्थान बदलता है, दर्शक के स्थान बदलने से प्रतिबिंब की वास्तविक स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होता।

Teacher Tip
अध्यापकों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश: कक्षा में क्रियाकलाप 13.8 करवाते समय छात्रों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दें कि वे टॉर्च के प्रकाश को सीधे किसी भी सहपाठी की आँखों में न डालें। लेज़र लाइट का उपयोग कक्षा प्रयोगों में पूरी तरह से प्रतिबंधित रखें, क्योंकि यह बच्चों के रेटिना को हमेशा के लिए क्षतिग्रस्त कर सकता है। बच्चों को आँखों की सुरक्षा के प्रति जागरूक करें।

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छात्रों, इस अध्याय (प्रकाश – Light) के हस्तलिखित नोट्स (Handwritten Notes) और पीडीएफ डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

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