Complete Bihar Board Class 8 Science Chapter 7 Question Answer (Easy Notes)

🔔 लेटेस्ट नोट्स और PDF के लिए अभी जुड़ें:
🎓 Class: 8
📚 Subject: Science (विज्ञान)
📝 Chapter: 7 – किशोरावस्था की ओर

Complete Bihar Board Class 8 Science Chapter 7 Question Answer

Bihar Board Class 8 Science Chapter 7 Question Answer

चित्र: किशोरावस्था की ओर (Bihar Board Class 8 Science Chapter 7 Question Answer)

स्वागत है आपका Bihar Board Class 8 Science Chapter 7 Question Answer के इस विशेष लेख में। अगर आप परीक्षा की तैयारी के लिए Bihar Board Class 8 Science Chapter 7 Question Answer खोज रहे हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। पिछले अध्याय में हमने पढ़ा कि जंतु किस प्रकार जनन करते हैं। मानव एवं बहुत से अन्य जंतु एक निश्चित आयु तक पहुँचने के बाद ही जनन कर सकते हैं। इस अध्याय में हम मानव के शरीर में होने वाले उन परिवर्तनों के विषय में पढ़ेंगे जिनके उपरान्त वह जनन हेतु सक्षम हो पाता है।

💡 सुझाव: आप हमारी वेबसाइट पर Bihar Board Class 8 Science के अन्य चैप्टर्स के सम्पूर्ण हल भी पढ़ सकते हैं।

📘 7.1 किशोरावस्था एवं यौवनारम्भ

वृद्धि जन्म के समय से ही होने लगती है। परन्तु 10 या 11 वर्ष की आयु के बाद वृद्धि में एकाएक तीव्रता आती है और वृद्धि साफ़ दिखाई देने लगती है। शरीर में होने वाले परिवर्तन वृद्धि प्रक्रिया का एक भाग हैं। यह इस बात का संकेत है कि अब आप बच्चे नहीं रहे तथा युवावस्था में कदम रख रहे हैं।

किशोरावस्था (Adolescence): जीवन काल की वह अवधि जब शरीर में ऐसे परिवर्तन होते हैं जिसके परिणामस्वरूप जनन परिपक्वता आती है, किशोरावस्था कहलाती है।

किशोरावस्था लगभग 11 वर्ष की आयु से प्रारम्भ होकर 18 अथवा 19 वर्ष की आयु तक रहती है। यह अवधि क्योंकि अंग्रेजी के “teens” (Thirteen से Eighteen या Nineteen वर्ष की आयु) तक होती है, किशोरों को ‘टीनेजर्स’ (Teenagers) भी कहा जाता है। लड़कियों में यह अवस्था लड़कों की अपेक्षा एक या दो वर्ष पूर्व प्रारम्भ हो जाती है।

किशोरावस्था के दौरान मनुष्य के शरीर में अनेक परिवर्तन आते हैं। यह परिवर्तन यौवनारम्भ (Puberty) का संकेत हैं। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन है, लड़के एवं लड़कियों की जनन क्षमता का विकास। किशोर की जनन परिपक्वता के साथ ही यौवनारम्भ समाप्त हो जाता है।

📘 7.2 यौवनारम्भ में होने वाले परिवर्तन

📖 लंबाई में वृद्धि

लंबाई में एकाएक वृद्धि यौवनारम्भ के दौरान होने वाला सबसे अधिक दृष्टिगोचर परिवर्तन है। इस समय शरीर की लंबी अस्थियों की, अर्थात् हाथ एवं पैरों की अस्थियों (हड्डियों) की, लंबाई में वृद्धि होती है और व्यक्ति लंबा हो जाता है।

प्रारंभ में लड़कियाँ लड़कों की अपेक्षा अधिक तीव्रता से बढ़ती हैं। परन्तु लगभग 18 वर्ष की आयु तक दोनों अपनी अधिकतम लंबाई प्राप्त कर लेते हैं। अलग-अलग व्यक्तियों की लंबाई में वृद्धि की दर भी भिन्न-भिन्न होती है।

पूर्ण लंबाई के लिए गणना (cm में):
पूर्ण लंबाई = (वर्तमान लंबाई (cm) / वर्तमान आयु में पूर्ण लम्बाई का %) × 100
📖 शारीरिक आकृति में परिवर्तन

यौवनारम्भ में प्रवेश करने के कारण लड़कों के कंधे फैल कर चौड़े हो जाते हैं। लड़कियों में कमर का निचला भाग चौड़ा हो जाता है। वृद्धि के कारण लड़कों में शारीरिक पेशियाँ लड़कियों की अपेक्षा सुस्पष्ट एवं गठी दिखाई देती हैं। अतः किशोरावस्था के दौरान लड़कों एवं लड़कियों में होने वाले परिवर्तन अलग-अलग हैं।

📖 स्वर में परिवर्तन

यौवनारम्भ में स्वरयंत्र अथवा लैरिन्क्स (Larynx) में वृद्धि का प्रारंभ होता है। लड़कों का स्वरयंत्र विकसित होकर अपेक्षाकृत बड़ा हो जाता है। लड़कों में बढ़ता हुआ ‘स्वरयंत्र’ गले के सामने की ओर सुस्पष्ट उभरे भाग के रूप में दिखाई देता है जिसे एडम्स ऐपल (कंठमणि) कहते हैं।

लड़कियों में ‘स्वरयंत्र’ अपेक्षाकृत छोटा होता है अतः बाहर से सामान्यतः दिखाई नहीं देता। सामान्यतः लड़कियों का स्वर उच्चतारत्व (High pitch) वाला होता है जबकि लड़कों का स्वर गहरा होता है।

📖 स्वेद एवं तैल ग्रंथियों की क्रियाशीलता में वृद्धि

किशोरावस्था में स्वेद एवं तैल ग्रंथियों का स्राव बढ़ जाता है। इन ग्रंथियों की अधिक क्रियाशीलता के कारण कुछ व्यक्तियों के चेहरे पर फुंसियाँ और मुँहासे आदि हो जाते हैं।

📖 जनन अंगों का विकास

यौवनारम्भ में नर जननांग, जैसे कि वृषण एवं शिश्न, पूर्णतः विकसित हो जाते हैं। वृषण से शुक्राणुओं का उत्पादन भी प्रारंभ हो जाता है। लड़कियों में अंडाशय साइज़ में वृद्धि हो जाती है तथा अंड परिपक्व होने लगते हैं। अंडाशय से अंडाणुओं का निर्मोचन भी प्रारंभ हो जाता है।

📖 मानसिक, बौद्धिक एवं संवेदनात्मक परिपक्वता प्राप्त होना

किशोरावस्था व्यक्ति के सोचने के ढंग में परिवर्तन की अवधि भी है। पहले की अपेक्षा किशोर अधिक स्वतंत्र एवं अपने प्रति अधिक सचेत होता है। उनमें बौद्धिक विकास भी होता है तथा वे सोचने-विचारने में काफी समय लेते हैं। वास्तव में किसी व्यक्ति के जीवन में यह वह समय है जब उसके मस्तिष्क की सीखने की क्षमता सर्वाधिक होती है।

📘 7.3 गौण लैंगिक लक्षण

वृषण एवं अंडाशय जनन अंग हैं। वे युग्मक अर्थात शुक्राणु एवं अंडाणु उत्पन्न करते हैं। युवावस्था में लड़कियों में स्तनों का विकास होने लगता है तथा लड़कों के चेहरे पर बाल उगने लगते हैं अर्थात् दाढ़ी-मूँछ आने लगती है। ये लक्षण क्योंकि लड़कियों को लड़कों से पहचानने में सहायता करते हैं अतः इन्हें गौण लैंगिक लक्षण (Secondary Sexual Characters) कहते हैं।

लड़कों के सीने पर भी बाल आ जाते हैं। लड़कों एवं लड़कियों दोनों में ही बगल एवं जाँघ के ऊपरी भाग अथवा प्यूबिक क्षेत्र में भी बाल आ जाते हैं।

📘 7.4 जनन प्रकार्य प्रारम्भ करने में हार्मोन की भूमिका

किशोरावस्था में होने वाले परिवर्तन हार्मोन द्वारा नियंत्रित होते हैं। हार्मोन रासायनिक पदार्थ हैं। यह अंतःस्रावी ग्रंथियों (Endocrine Glands) अथवा अंतःस्रावी तंत्र द्वारा स्रावित किए जाते हैं।

  • पौरुष हार्मोन (Testosterone): यौवनारम्भ के साथ ही वृषण पौरुष हार्मोन अथवा टेस्टोस्टेरॉन का स्रवण प्रारम्भ कर देता है। यह लड़कों में परिवर्तनों का कारक है (जैसे चेहरे पर बालों का आना)।
  • स्त्री हार्मोन (Estrogen): लड़कियों में यौवनारम्भ के साथ ही अंडाशय स्त्री हार्मोन अथवा एस्ट्रोजन उत्पादित करना प्रारम्भ कर देता है जिससे स्तन विकसित हो जाते हैं।

इन हार्मोनों के उत्पादन का नियंत्रण एक अन्य हार्मोन द्वारा किया जाता है जो पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) द्वारा स्रावित किया जाता है। अंतःस्रावी ग्रंथियाँ हार्मोन रुधिरप्रवाह में स्रावित करती हैं जिससे वह शरीर के विशिष्ट भाग अथवा लक्ष्य-स्थल (Target Site) तक पहुँच सकें। लक्ष्य-स्थल हार्मोन के प्रति अनुक्रिया करता है।

📘 7.5 मानव में जनन-काल की अवधि

जब किशोरों के वृषण तथा अंडाशय युग्मक उत्पादित करने लगते हैं तब वे जनन के योग्य हो जाते हैं। युग्मक की परिपक्वता एवं उत्पादन की क्षमता पुरुषों में स्त्रियों की अपेक्षा अधिक अवधि तक रहती है।

स्त्रियों में जननावस्था का प्रारम्भ यौवनारम्भ (10 से 12 वर्ष की आयु) से हो जाता है तथा सामान्यतः 45 से 50 वर्ष की आयु तक चलता रहता है। यौवनारम्भ पर अंडाणु परिपक्व होने लगते हैं। अंडाशयों में एक अंडाणु परिपक्व होता है तथा लगभग 28 से 30 दिनों के अंतराल पर किसी एक अंडाशय द्वारा निर्मोचित होता है।

ऋतुस्राव (Menstruation): यदि अंडाणु का निषेचन नहीं हो पाता तब उस स्थिति में अंडाणु तथा गर्भाशय का मोटा स्तर उसकी रुधिर वाहिकाओं सहित निस्तारित हो जाता है। इससे स्त्रियों में रक्तस्राव होता है जिसे ऋतुस्राव अथवा रजोधर्म कहते हैं।

ऋतुस्राव लगभग 28 से 30 दिन में एक बार होता है। पहला ऋतुस्राव यौवनारम्भ में होता है जिसे रजोदर्शन (Menarche) कहते हैं। लगभग 45 से 50 वर्ष की आयु में ऋतुस्राव होना रुक जाता है। ऋतुस्राव के रुक जाने को रजोनिवृत्ति (Menopause) कहते हैं। प्रारंभ में ऋतुस्राव चक्र अनियमित हो सकता है तथा उसके नियमित होने में कुछ समय लग सकता है।

ऋतुस्राव चक्र का नियंत्रण हार्मोन द्वारा होता है। इस चक्र में अंडाणु का परिपक्व होना, इसका निर्मोचन, गर्भाशय की दीवार का मोटा होना एवं निषेचन न होने की स्थिति में उसका टूटना शामिल है। यदि अंडाणु का निषेचन हो जाता है तो वह विभाजन करता है तथा गर्भाशय में विकास के लिए स्थापित हो जाता है।

📘 7.6 संतति का लिंग-निर्धारण किस प्रकार होता है?

निषेचित अंडाणु अथवा युग्मनज में, जन्म लेने वाले शिशु के लिंग निर्धारण का संदेश होता है। यह संदेश निषेचित अंडाणु में धागे-सी संरचना अर्थात् गुणसूत्रों (Chromosomes) में निहित होता है। गुणसूत्र प्रत्येक कोशिका के केंद्रक में उपस्थित होते हैं।

सभी मनुष्यों की कोशिकाओं के केन्द्रक में 23 जोड़े गुणसूत्र पाए जाते हैं। इनमें से 2 गुणसूत्र (1 जोड़ी) लिंग-सूत्र हैं जिन्हें X एवं Y कहते हैं।

  • स्त्री (Female): दो X गुणसूत्र (XX) होते हैं।
  • पुरुष (Male): एक X तथा एक Y गुणसूत्र (XY) होता है।

युग्मक (अंडाणु तथा शुक्राणु) में गुणसूत्रों का एक जोड़ा होता है। अनिषेचित अंडाणु में सदा एक X गुणसूत्र होता है। परन्तु शुक्राणु दो प्रकार के होते हैं जिनमें एक प्रकार में X गुणसूत्र एवं दूसरे प्रकार में Y गुणसूत्र होता है।

जब X गुणसूत्र वाला शुक्राणु अंडाणु को निषेचित करता है तो युग्मनज में दो X गुणसूत्र होंगे तथा वह मादा शिशु (लड़की) में विकसित होगा। यदि अंडाणु को निषेचित करने वाले शुक्राणु में Y गुणसूत्र है तो युग्मनज नर शिशु (लड़का) में विकसित होगा।

अतः जन्म से पूर्व शिशु के लिंग का निर्धारण उसके पिता के लिंग गुणसूत्रों द्वारा किया जाता है। यह धारणा कि बच्चे के लिंग के लिए उसकी माँ उत्तरदायी है, पूर्णतः निराधार है एवं अन्यायसंगत है।

📘 7.7 लिंग हार्मोन के अतिरिक्त अन्य हार्मोन

पीयूष ग्रंथि द्वारा स्रावित हार्मोन जननांगों को उनके हार्मोन उत्पन्न करने के लिए उद्दीपित करते हैं। पीयूष ग्रंथि एक अंतःस्रावित ग्रंथि है जो मस्तिष्क से जुड़ी होती है।

पीयूष ग्रंथि, वृषण एवं अंडाशय के अतिरिक्त हमारे शरीर में थायरॉइड, अग्न्याशय एवं एड्रिनल (अधिवृक्क) जैसी कुछ अन्य अंतःस्रावी ग्रंथियाँ भी हैं।

ग्रंथि का नाम हार्मोन का नाम कार्य / रोग
थायरॉइड (Thyroid) थायरॉक्सिन (Thyroxine) इसकी कमी से ‘गॉयटर’ (Goiter) रोग होता है (गला फूल जाता है)।
अग्न्याशय (Pancreas) इन्सुलिन (Insulin) इसकी कमी से ‘मधुमेह’ (Diabetes) रोग होता है।
एड्रिनल (Adrenal) एड्रिनेलिन (Adrenaline) रुधिर में नमक की मात्रा संतुलित करता है। क्रोध, चिंता एवं उत्तेजना की अवस्था में तनाव का संयोजन करता है।
पीयूष ग्रंथि (Pituitary) वृद्धि हार्मोन (Growth Hormone) व्यक्ति की सामान्य वृद्धि के लिए आवश्यक है।

थायरॉइड एवं एड्रिनल ग्रंथि पीयूष ग्रंथि द्वारा स्रावित हार्मोन के माध्यम से प्राप्त आदेश के अनुसार ही अपने हार्मोन का स्रवण करती है।

📘 7.8 कीट एवं मेंढक में जीवन-चक्र पूर्ण करने में हार्मोन का योगदान

टैडपोल को वयस्क मेंढक बनने के लिए अनेक चरणों से गुजरना पड़ता है। लार्वा से वयस्क बनने के इस परिवर्तन को कायांतरण (Metamorphosis) कहते हैं।

कीटों में कायांतरण का नियंत्रण कीट हार्मोन द्वारा होता है। मेंढक में थायरॉइड द्वारा स्रावित हार्मोन थायरॉक्सिन इसका नियमन करता है। थायरॉक्सिन के उत्पादन के लिए जल में आयोडीन की उपस्थिति आवश्यक है। यदि जल में जिसमें टैडपोल वृद्धि कर रहे हैं, पर्याप्त मात्रा में आयोडीन नहीं है तो टैडपोल वयस्क मेंढक में परिवर्धित नहीं हो सकते।

📘 7.9 जननात्मक स्वास्थ्य

व्यक्ति का कायिक एवं मानसिक विसंगतिमुक्त होना उस व्यक्ति का स्वास्थ्य कहलाता है। किसी भी आयु के व्यक्ति के शरीर को स्वस्थ रखने के लिए उसे संतुलित आहार की आवश्यकता होती है। व्यक्ति को वैयक्तिक स्वच्छता एवं सफ़ाई का नियमित रूप से पालन एवं पर्याप्त शारीरिक व्यायाम भी करना चाहिए।

📖 किशोर की पोषण आवश्यकताएँ

किशोरावस्था तीव्र वृद्धि एवं विकास की अवस्था है। अतः किसी भी किशोर को आहार नियोजन अत्यंत सावधानीपूर्वक करना चाहिए। संतुलित आहार (Balanced Diet) का अर्थ है भोजन में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, वसा, विटामिन एवं खनिज का पर्याप्त मात्रा में समावेश।

हमारा भारतीय भोजन जिसमें रोटी, चावल, दाल एवं सब्जियाँ होती हैं, एक संतुलित आहार है। दूध अपने आप में संतुलित भोजन है। फल भी हमें पोषण देते हैं। लौह (आयरन) तत्त्व रुधिर का निर्माण करता है तथा लौह-प्रचुर खाद्य जैसे कि पत्तीदार सब्जियाँ, गुड़, मांस, संतरा, आँवला इत्यादि किशोर के लिए अच्छे खाद्य हैं।

चिप्स तथा पैक किए हुए अथवा डिब्बाबंद खाद्य यद्यपि स्वादिष्ट होते हैं परन्तु उन्हें नियमित भोजन के स्थान पर नहीं खाना चाहिए क्योंकि उनमें पोषक मात्रा पर्याप्त नहीं होती।

📖 व्यक्तिगत स्वच्छता

प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन एक बार स्नान करना चाहिए। यह किशोरों के लिए और भी आवश्यक है क्योंकि स्वेद ग्रंथियों की अधिक क्रियाशीलता के कारण शरीर से गंध आने लगती है। शरीर के सभी भागों को स्नान करते समय भली प्रकार धोकर करना चाहिए। यदि सफ़ाई नहीं रखी गई तो जीवाणु संक्रमण (Bacterial Infection) होने का खतरा रहता है।

लड़कियों को ऋतुस्राव के समय सफ़ाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्हें अपने ऋतुस्राव चक्र का ध्यान रखते हुए ऋतुस्राव के लिए तैयार रहना चाहिए। हमेशा साफ़ सैनिट्री नैपकिन अथवा घर पर तैयार किए गए कपड़े के पैड इत्यादि का उपयोग करें।

📖 शारीरिक व्यायाम

ताज़ी हवा में टहलना एवं खेलना शरीर को चुस्त एवं स्वस्थ रखता है। सभी युवा/किशोर लड़के एवं लड़कियों को टहलना, व्यायाम करना एवं बाहर खेलना चाहिए।

📖 नशीली दवाओं (ड्रग्स) का ‘निषेध’ करें

किशोरावस्था व्यक्ति के शारीरिक एवं मानसिक रूप से अधिक सक्रियता का समय है जो वृद्धिकाल का एक सामान्य भाग है। अतः भ्रमित अथवा असुरक्षित न महसूस करें। यदि कोई व्यक्ति आपको यह बताता है कि किसी ‘ड्रग’ (नशीली दवा) के सेवन से आप अच्छा अथवा तनावमुक्त महसूस करेंगे, तो आपको इसके लिए ‘न’ ही कहना चाहिए जब तक वह दवा डॉक्टर द्वारा न दी गई हो।

ड्रग्स नशीले पदार्थ हैं जिनकी लत पड़ जाती है। यदि आप इन्हें एक बार लेते हैं तो आपको इन्हें बार-बार लेने की इच्छा होती है। परन्तु कालांतर में यह हानिकारक है। यह स्वास्थ्य एवं खुशी दोनों को ही बरबाद कर देते हैं।

AIDS (एड्स): आपने AIDS के विषय में तो अवश्य ही सुना होगा जो HIV नामक खतरनाक विषाणु (वायरस) द्वारा होता है। यह वायरस एक पीड़ित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में ड्रग के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सीरिंज द्वारा भी जा सकता है।

वायरस का संक्रमण दूसरे माध्यमों जैसे कि पीड़ित (रोगी) माँ से दूध द्वारा उसके शिशु में हो सकता है। HIV से पीड़ित व्यक्ति के साथ लैंगिक संपर्क स्थापित करने द्वारा भी इस रोग का संक्रमण हो सकता है।

📖 किशोर द्वारा गर्भधारण

हमारे देश में विवाह की विधिसंगत (कानूनी) आयु लड़कियों के लिए 18 वर्ष एवं लड़कों के लिए 21 वर्ष है। इसका कारण है कि टीन-आयु (किशोर) लड़कियाँ/माँ शारीरिक एवं मानसिक रूप से मातृत्व के लिए तैयार नहीं होतीं। बाल विवाह (कम उम्र में विवाह) तथा मातृत्व से माँ एवं संतान दोनों में ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

इससे युवा स्त्रियों के लिए व्यवसाय के अवसरों में भी कमी आती है क्योंकि वे मातृत्व की जिम्मेदारी उठाने के लिए सक्षम नहीं होतीं। अतः वह मानसिक पीड़ा से ग्रस्त रहती हैं।

📘 भ्रांतियाँ एवं असत्य अवधारणाएँ – करें और न करें

मनुष्य के जनन संबंधी वैज्ञानिक तथ्य एवं सिद्धांतों के विषय में बहुत सी असत्य अवधारणाएँ प्रचलित हैं जिन्हें आपको जानकार किशोर होने के नाते छोड़ना चाहिए।

  1. भ्रांति: ऋतुस्राव के समय यदि कोई लड़की किसी लड़के को देखती है तो वह गर्भवती हो जाती है। (निराधार)
  2. भ्रांति: संतान के लिंग के लिए उसकी माँ उत्तरदायी है। (निराधार, पिता के गुणसूत्र उत्तरदायी होते हैं)
  3. भ्रांति: ऋतुस्राव की अवस्था में लड़की का रसोई का काम करना निषिद्ध है। (निराधार)

आपको ऐसे अन्य अनेक कथन या मिथ मिलेंगे जिनका कोई आधार नहीं है। उनको उखाड़ फेंकिए/छोड़ दीजिए।

📘 Complete Bihar Board Class 8 Science Chapter 7 Question Answer (अभ्यास) (NCERT Question Answer)

प्रश्न 1: शरीर में होने वाले परिवर्तनों के लिए उत्तरदायी अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित पदार्थ का क्या नाम है?

उत्तर: शरीर में होने वाले परिवर्तनों के लिए उत्तरदायी अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित पदार्थ का नाम हार्मोन (Hormone) है।


प्रश्न 2: किशोरावस्था को परिभाषित कीजिए।

उत्तर: जीवन काल की वह अवधि जब शरीर में ऐसे परिवर्तन होते हैं जिसके परिणामस्वरूप जनन परिपक्वता आती है, किशोरावस्था (Adolescence) कहलाती है। यह अवस्था लगभग 11 वर्ष की आयु से प्रारम्भ होकर 18 अथवा 19 वर्ष की आयु तक रहती है।


प्रश्न 3: ऋतुस्राव क्या है? वर्णन कीजिए।

उत्तर: स्त्रियों में यौवनारम्भ के बाद अंडाशय हर महीने एक परिपक्व अंडाणु निर्मोचित करता है। इस दौरान गर्भाशय की दीवार मोटी हो जाती है ताकि वह निषेचित अंडाणु को ग्रहण कर सके। यदि अंडाणु का निषेचन नहीं हो पाता है, तब उस स्थिति में अंडाणु तथा गर्भाशय का मोटा स्तर उसकी रुधिर वाहिकाओं सहित टूटकर शरीर से बाहर निकल जाता है। इससे स्त्रियों में रक्तस्राव होता है, जिसे ऋतुस्राव अथवा रजोधर्म (Menstruation) कहते हैं। यह चक्र लगभग 28 से 30 दिनों का होता है।


प्रश्न 4: यौवनारम्भ के समय होने वाले शारीरिक परिवर्तनों की सूची बनाइए।

उत्तर: यौवनारम्भ के समय शरीर में निम्नलिखित प्रमुख परिवर्तन होते हैं:

  • लंबाई में वृद्धि: हाथ और पैरों की हड्डियाँ तेजी से बढ़ती हैं और व्यक्ति लंबा हो जाता है।
  • शारीरिक आकृति में परिवर्तन: लड़कों के कंधे चौड़े हो जाते हैं और लड़कियों का कमर का निचला भाग चौड़ा हो जाता है।
  • स्वर में परिवर्तन: लड़कों का स्वरयंत्र (एडम्स ऐपल) बढ़कर उभर जाता है और आवाज़ भारी हो जाती है। लड़कियों की आवाज़ उच्च तारत्व वाली (पतली) हो जाती है।
  • स्वेद एवं तैल ग्रंथियों में वृद्धि: पसीने और तेल ग्रंथियों का स्राव बढ़ जाता है, जिससे चेहरे पर मुँहासे हो सकते हैं।
  • जनन अंगों का विकास: नर और मादा जननांग पूर्णतः विकसित हो जाते हैं और युग्मकों का उत्पादन शुरू हो जाता है।
  • गौण लैंगिक लक्षणों का विकास: लड़कों में दाढ़ी-मूँछ आना और लड़कियों में स्तनों का विकास होना।

प्रश्न 5: दो कॉलम वाली एक सारणी बनाइए जिसमें अंतःस्रावी ग्रंथियों के नाम तथा उनके द्वारा स्रावित हार्मोन के नाम दर्शाए गए हों।

उत्तर:

अंतःस्रावी ग्रंथि का नाम स्रावित हार्मोन का नाम
पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) वृद्धि हार्मोन (Growth Hormone)
थायरॉइड ग्रंथि (Thyroid Gland) थायरॉक्सिन (Thyroxine)
एड्रिनल ग्रंथि (Adrenal Gland) एड्रिनेलिन (Adrenaline)
अग्न्याशय (Pancreas) इन्सुलिन (Insulin)
वृषण (Testis) – नर में टेस्टोस्टेरॉन (Testosterone)
अंडाशय (Ovary) – मादा में एस्ट्रोजन (Estrogen)

प्रश्न 6: लिंग हार्मोन क्या हैं? उनका नामकरण इस प्रकार क्यों किया गया? उनके प्रकार्य बताइए।

उत्तर: जनन ग्रंथियों (वृषण और अंडाशय) द्वारा स्रावित होने वाले हार्मोन को लिंग हार्मोन कहते हैं। नर में यह टेस्टोस्टेरॉन और मादा में एस्ट्रोजन होता है।

नामकरण का कारण: इनका नामकरण ‘लिंग हार्मोन’ इसलिए किया गया है क्योंकि ये हार्मोन सीधे तौर पर व्यक्ति के लिंग (नर या मादा) से जुड़े होते हैं और गौण लैंगिक लक्षणों के विकास के लिए उत्तरदायी होते हैं, जो लड़के और लड़की में भेद करने में मदद करते हैं।

प्रकार्य (Functions):

  • टेस्टोस्टेरॉन (नर हार्मोन): यह लड़कों में शुक्राणुओं के निर्माण को प्रेरित करता है तथा दाढ़ी-मूँछ आने, सीने पर बाल उगने और आवाज़ भारी होने जैसे परिवर्तनों को नियंत्रित करता है।
  • एस्ट्रोजन (मादा हार्मोन): यह लड़कियों में अंडाणुओं के निर्माण को प्रेरित करता है तथा स्तनों के विकास और अन्य शारीरिक परिवर्तनों को नियंत्रित करता है।

प्रश्न 7: सही विकल्प चुनिए

उत्तर:

(क) किशोर को सचेत रहना चाहिए कि वह क्या खा रहे हैं, क्योंकि
(i) उचित भोजन से उनके मस्तिष्क का विकास होता है।
(ii) शरीर में तीव्रगति से होने वाली वृद्धि के लिए उचित आहार की आवश्यकता होती है।
(iii) किशोर को हर समय भूख लगती रहती है।
(iv) किशोर में स्वाद कलिकाएँ (ग्रंथियाँ) भलीभाँति विकसित होती हैं।
सही उत्तर: (ii) शरीर में तीव्रगति से होने वाली वृद्धि के लिए उचित आहार की आवश्यकता होती है।

(ख) स्त्रियों में जनन आयु (काल) का प्रारम्भ उस समय होता है जब उनके :
(i) ऋतुस्राव प्रारम्भ होता है।
(ii) स्तन विकसित होना प्रारम्भ करते हैं।
(iii) शारीरिक भार में वृद्धि होने लगती है।
(iv) शरीर की लंबाई बढ़ती है।
सही उत्तर: (i) ऋतुस्राव प्रारम्भ होता है।

(ग) निम्न में से कौन सा आहार किशोर के लिए सर्वोचित है :
(i) चिप्स, नूडल्स, कोक
(ii) रोटी, दाल, सब्जियाँ
(iii) चावल, नूडल्स, बर्गर
(iv) शाकाहारी टिक्की, चिप्स तथा लेमन पेय
सही उत्तर: (ii) रोटी, दाल, सब्जियाँ


प्रश्न 8: निम्न पर टिप्पणी लिखिए

उत्तर:

  • (i) एडम्स ऐपल (Adam’s Apple): यौवनारम्भ के दौरान लड़कों का स्वरयंत्र (Larynx) विकसित होकर अपेक्षाकृत बड़ा हो जाता है। यह बढ़ता हुआ स्वरयंत्र गले के सामने की ओर सुस्पष्ट उभरे भाग के रूप में दिखाई देता है, जिसे एडम्स ऐपल या कंठमणि कहते हैं। इसके कारण लड़कों की आवाज़ भारी या गहरी हो जाती है।
  • (ii) गौण लैंगिक लक्षण (Secondary Sexual Characters): युवावस्था में लड़कों और लड़कियों के शरीर में कुछ ऐसे परिवर्तन होते हैं जो उन्हें एक-दूसरे से शारीरिक रूप से अलग पहचानने में मदद करते हैं। इन्हें गौण लैंगिक लक्षण कहते हैं। जैसे- लड़कियों में स्तनों का विकास होना और लड़कों के चेहरे पर दाढ़ी-मूँछ का आना।
  • (iii) गर्भस्थ शिशु में लिंग निर्धारण: शिशु का लिंग निर्धारण उसके पिता के गुणसूत्रों द्वारा होता है। सभी मनुष्यों की कोशिकाओं में 23 जोड़े गुणसूत्र होते हैं, जिनमें 1 जोड़ा लिंग गुणसूत्र (X और Y) होता है। स्त्रियों में (XX) और पुरुषों में (XY) गुणसूत्र होते हैं। यदि पिता का ‘X’ गुणसूत्र वाला शुक्राणु माता के अंडाणु (X) से मिलता है, तो शिशु लड़की (XX) होगी। यदि पिता का ‘Y’ गुणसूत्र वाला शुक्राणु अंडाणु (X) से मिलता है, तो शिशु लड़का (XY) होगा।

प्रश्न 9: शब्द पहेली : शब्द बनाने के लिए संकेत संदेश का प्रयोग कीजिए

उत्तर:

बाईं से दाईं ओर:
3. एड्रिनल ग्रंथि से स्रावित हार्मोन – एड्रिनेलिन
4. मेंढक में लार्वा से वयस्क तक होने वाला परिवर्तन – कायांतरण
5. अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित पदार्थ – हार्मोन
6. किशोरावस्था को कहा जाता है – टीनेजर्स

ऊपर से नीचे की ओर:
1. अंतःस्रावी ग्रंथियों का दूसरा नाम – नलिकाविहीन
2. स्वर पैदा करने वाला अंग – स्वरयंत्र
3. स्त्री हार्मोन – एस्ट्रोजन


प्रश्न 10: नीचे दी गई सारणी में आयु वृद्धि के अनुपात में लड़कों एवं लड़कियों की अनुमानित लंबाई के आँकड़े दर्शाए गए हैं। इस ग्राफ से आप क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?

उत्तर:

आयु (वर्षों में) लड़के की लम्बाई (cm) लड़कियों की लम्बाई (cm)
05353
49692
8114110
12129133
16150150
20173165

निष्कर्ष: इस सारणी और ग्राफ के अध्ययन से यह निष्कर्ष निकलता है कि जन्म के समय लड़के और लड़कियों की लंबाई लगभग समान होती है। 8 वर्ष की आयु तक लड़के लड़कियों से थोड़े लंबे होते हैं, लेकिन 12 वर्ष की आयु के आसपास लड़कियों की लंबाई में अचानक तीव्र वृद्धि होती है और वे लड़कों से आगे निकल जाती हैं। 16 वर्ष की आयु तक दोनों की लंबाई लगभग बराबर हो जाती है। इसके बाद लड़कों की लंबाई में फिर से वृद्धि होती है और 20 वर्ष की आयु तक लड़के, लड़कियों की तुलना में अधिक लंबे हो जाते हैं। 18-20 वर्ष के बाद दोनों की अधिकतम लंबाई प्राप्त हो जाती है।


Teacher Tip
शिक्षक ध्यान दें: किशोरावस्था से जुड़े शारीरिक और मानसिक परिवर्तनों को पढ़ाते समय कक्षा का वातावरण सहज और वैज्ञानिक रखें। छात्रों को यह समझाना आवश्यक है कि ये सभी परिवर्तन प्राकृतिक हैं और इनमें घबराने या शर्मिंदा होने की कोई बात नहीं है। भ्रांतियों को दूर करने पर विशेष ज़ोर दें।

📥 Bihar Board Class 8 Science Chapter 7 Question Answer, Solutions & PDF Download

छात्रों, इस अध्याय (किशोरावस्था की ओर) के हस्तलिखित नोट्स और पीडीएफ डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

Join Telegram Channel

📖 और पढ़ें: अन्य सभी विषय और अध्यायों के प्रश्न-उत्तर यहाँ देखें

BSEBHub: Bihar Board & NCERT Solutions| Author: Suraj Mishra

⚖️
Intellectual Property Rights

This content is intellectually owned by BSEBHub.in.
Concept & Created by: Suraj Kumar Mishra


COPYRIGHT ACT 1957: बिना अनुमति के इस पोस्ट का उपयोग चोरी माना जाएगा और आपके खिलाफ बिना चेतावनी के DMCA / Copyright Action की जाएगी।
🎓 Research & Solutions by
Suraj Kumar Mishra
"Simplifying Education for Bihar's Future Leaders."

Leave a Comment