📚 Subject: Science (विज्ञान)
📝 Chapter: 5 (पौधे एवं जंतुओं का संरक्षण)
Bihar Board Class 8 Science Chapter 5: पौधे एवं जंतुओं का संरक्षण
इस लेख में हम Bihar Board Class 8 Science Chapter 5 के अंतर्गत पौधे एवं जंतुओं का संरक्षण के बारे में विस्तार से जानेंगे। यह अध्याय हमें बताता है कि राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजंतु अभ्यारण्यों एवं जैवमण्डल संरक्षित क्षेत्रों को बनाने का क्या उद्देश्य है और हम अपनी बहुमूल्य हरियाली और वन्य जीवन को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।
📘 5.1 वनोन्मूलन एवं इसके कारण
हमारी पृथ्वी पर नाना प्रकार के पौधे एवं जंतु पाए जाते हैं, जो मानवजाति के अस्तित्व एवं भली प्रकार से रहने के लिए आवश्यक होते हैं। आज इन जीवों के अस्तित्व के लिए वनोन्मूलन एक बहुत बड़ा खतरा बन गया है। वनोन्मूलन का अर्थ है वनों को समाप्त करने पर प्राप्त भूमि का अन्य कार्यों में उपयोग करना।
वन में वृक्षों की कटाई मुख्य रूप से निम्न उद्देश्यों से की जाती है:
- कृषि के लिए भूमि प्राप्त करना
- घरों एवं कारखानों का निर्माण
- फर्नीचर बनाने अथवा लकड़ी का ईंधन के रूप में उपयोग
क्या आप जानते हैं? केवल मानव ही नहीं, बल्कि दावानल (जंगल की आग) एवं भीषण सूखा भी वनोन्मूलन के कुछ प्रमुख प्राकृतिक कारक हैं।
अपनी सूची में वनोन्मूलन के अन्य कारणों को लिखिए तथा इन्हें प्राकृतिक एवं मानव निर्मित में वर्गीकृत कीजिए।
-
उत्तर:
- मानव निर्मित कारण: सड़क निर्माण, खनन (Mining), शहरीकरण।
- प्राकृतिक कारण: बाढ़, भूकंप, पौधों की बीमारियाँ।
📘 5.2 वनोन्मूलन के परिणाम
वनोन्मूलन से पृथ्वी पर ताप एवं प्रदूषण के स्तर में वृद्धि होती है। इससे वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ता और भौम जल स्तर का भी निम्नीकरण हो जाता है। वनोन्मूलन से प्राकृतिक संतुलन भी प्रभावित होता है।
यदि वृक्षों की अनवरत कटाई चलती रही तो वर्षा एवं भूमि की उर्वरता में भारी कमी आ जाएगी। इसके अतिरिक्त बाढ़ तथा सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।
विश्व ऊष्णन (Global Warming): प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में पौधों को भोजन बनाने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड की आवश्यकता होती है। कम वृक्षों का अर्थ है कार्बन डाइऑक्साइड के उपयोग में कमी आना, जिससे वायुमण्डल में इसकी मात्रा बढ़ जाती है। कार्बन डाइऑक्साइड पृथ्वी द्वारा उत्सर्जित ऊष्मीय विकिरणों का प्रग्रहण कर लेती है, जिसके परिणामस्वरूप विश्व ऊष्णन होता है।
मरुस्थलीकरण (Desertification): भूमि पर वृक्षों की कमी होने से मृदा अपरदन अधिक होता है। मृदा की ऊपरी परत हटाने से नीचे की कठोर चट्टानें दिखाई देने लगती हैं, जिससे मृदा में ह्यूमस की कमी होती है तथा इसकी उर्वरता भी कम हो जाती है। धीरे-धीरे उर्वर-भूमि मरुस्थल में परिवर्तित हो जाती है, इसे ही मरुस्थलीकरण कहते हैं।
वनोन्मूलन से वन्यप्राणी-जीवन भी प्रभावित होता है। कैसे? इन कारणों की सूची बना कर अपनी कक्षा में इसकी चर्चा कीजिए।
उत्तर: वनों की कटाई से जंतुओं का प्राकृतिक आवास छिन जाता है। उन्हें भोजन और सुरक्षा नहीं मिल पाती, जिससे वे धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुँच जाते हैं या मानव बस्तियों की ओर पलायन करने को मजबूर हो जाते हैं।
📘 5.3 वन एवं वन्यप्राणियों का संरक्षण
जैविक महत्त्व के क्षेत्रों का संरक्षण हमारी राष्ट्रीय परम्परा का एक भाग है। जैवमण्डल पृथ्वी का वह भाग है जिसमें सजीव पाए जाते हैं अथवा जो जीवनयापन के योग्य है। जैव विविधता का अर्थ है पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न जीवों की प्रजातियाँ, उनके पारस्परिक संबंध एवं पर्यावरण से उनका संबंध।
वनस्पतिजात, प्राणिजात और उनके आवासों के संरक्षण हेतु सरकार द्वारा संरक्षित क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं:
- वन्यजीव अभ्यारण्य: वह क्षेत्र जहाँ जंतु एवं उनके आवास किसी भी प्रकार के विक्षोभ से सुरक्षित रहते हैं।
- राष्ट्रीय उद्यान: वन्य जंतुओं के लिए आरक्षित क्षेत्र जहाँ वह स्वतंत्र (निर्बाध) रूप से आवास एवं प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं।
- जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र: वन्य जीवन, पौधों और जंतु संसाधनों और उस क्षेत्र के आदिवासियों के पारंपरिक ढंग से जीवनयापन हेतु विशाल संरक्षित क्षेत्र।
इन क्षेत्रों में वृक्षारोपण, कृषि, चारागाह, वृक्षों की कटाई, शिकार, खाल प्राप्त करने हेतु शिकार (पोचिंग) पूरी तरह निषिद्ध हैं।
अपने जिले, प्रदेश एवं देश के राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजन्तु अभ्यारयों एवं जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्रों की संख्या ज्ञात कीजिए। सारणी 5.1 को भरिए। इन क्षेत्रों को अपने प्रदेश एंव भारत के रेखाचित्र में भी दर्शाइए ।
उत्तर: अपने जिले, प्रदेश एवं देश के राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजन्तु अभ्यारण्यों एवं जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्रों की संख्या ज्ञात कीजिए। सारणी 5.1 को भरिए।
(नोट: छात्र अपने राज्य के अनुसार आँकड़े भरें।)📘 5.4 जैवमण्डल आरक्षण
जैव विविधता के संरक्षण के उद्देश्य से जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र बनाए गए हैं। किसी क्षेत्र का जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र उस क्षेत्र की जैव विविधता एवं संस्कृति को बनाए रखने में सहायक होता है। किसी जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र के अंतर्गत अन्य संरक्षित क्षेत्र भी हो सकते हैं।
उदाहरण के लिए: पचमढ़ी जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र में सतपुड़ा नामक एक राष्ट्रीय उद्यान तथा बोरी एवं पचमढ़ी नामक दो वन्यजंतु अभ्यारण्य आते हैं ।
आपके अपने क्षेत्र में जैव विविधता को विक्षोभित करने वाले कारकों की सूची बनाइए। इनमें से कुछ क्रियाकलाप अनजाने में ही जैव विविधता में विक्षोभ उत्पन्न कर सकते हैं। मनुष्य की इन गतिविधियों की सूची बनाइए। इन्हे कैसे रोका जा सकता है? अपनी कक्षा में इसकी चर्चा कीजिए तथा इसकी संक्षिप्त रिपोर्ट अपनी कॉपी में नोट कीजिए।
उत्तर: बढ़ती जनसंख्या, प्रदूषण, पेड़ों की कटाई और प्लास्टिक का उपयोग मुख्य कारक हैं। जन-जागरूकता, सख्त नियम और वृक्षारोपण से इन्हें रोका जा सकता है।
📘 5.5 पेड़-पौधे एवं जीव-जंतु (वनस्पतिजात एवं प्राणिजात)
कुछ जंतु एवं पौधे एक क्षेत्र विशेष में पाए जाते हैं। किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले पेड़-पौधे उस क्षेत्र के ‘वनस्पतिजात’ एवं जीव-जंतु ‘प्राणिजात’ कहलाते हैं।
पचमढ़ी जैवमण्डल के उदाहरण:
- वनस्पतिजात: साल, सागौन, आम, जामुन, सिल्वर फर्न, अर्जुन इत्यादि।
- प्राणिजात: चिंकारा, नील गाय, बार्किंग हिरण, चीतल, तेंदुआ, जंगली कुत्ता, भेड़िया इत्यादि ।
अपने स्थानीय क्षेत्र के वनस्पतिजात और प्राणिजात की पहचान कर उनकी सूची बनाइए।
उत्तर:(छात्र अपने आस-पास पाए जाने वाले आम, नीम, बरगद जैसे पेड़ और गाय, कुत्ता, गिलहरी जैसे जीवों की सूची बनाएँ।)
📘 5.6 विशेष क्षेत्री प्रजाति
पौधों एवं जन्तुओं की वह स्पीशीज़ जो किसी विशेष क्षेत्र में विशिष्ट रूप से पाई जाती है उसे विशेष क्षेत्री स्पीशीज़ (Endemic Species) कहते हैं। ये किसी अन्य क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से नहीं पाई जाती अर्थात् किसी विशेष प्रकार का पौधा या जन्तु किसी विशेष क्षेत्र, राज्य अथवा देश का विशेष क्षेत्री हो सकता है ।
पचमढ़ी जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र के विशेष क्षेत्री जीव और पौधे:
- वनस्पति: साल और जंगली आम।
- जंतु: विसन (Bison), भारतीय विशाल गिलहरी तथा उड़ने वाली गिलहरी।
चित्र: (a) जंगली आम (b) विशाल गिलहरी
इनके आवास के नष्ट होने, बढ़ती हुई जनसंख्या एवं नयी स्पीशीज़ के प्रवेश से विशेष क्षेत्री स्पीशीज़ के प्राकृतिक आवास पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है तथा इनके अस्तित्व को भी खतरा हो सकता है ।
स्पीशीज़ (Species) क्या है?
स्पीशीज़ सजीवों की समष्टि का वह समूह है जो एक दूसरे से अंतर्जनन करने में सक्षम होते हैं। इसका अर्थ है कि एक जाति के सदस्य केवल अपनी जाति के सदस्यों के साथ जननक्षम संतान उत्पन्न कर सकते हैं。
जिस क्षेत्र में आप रहते हैं वहाँ के विशेष क्षेत्री पौधों और जंतुओं का पता लगाइए।
उत्तर:(छात्र अपने स्थानीय क्षेत्र के आधार पर पता करें।)
📘 5.7 वन्यप्राणी अभ्यारण्य
आरक्षित वनों की तरह ही कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ वन्यप्राणी (जंतु) सुरक्षित एवं संरक्षित रहते हैं। इन्हें वन्यप्राणी अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary) कहते हैं। अभ्यारण्य वह स्थान हैं जहाँ प्राणियों अथवा जंतुओं को मारना, शिकार करना अथवा पकड़ना पूर्णतः निषिद्ध एवं दंडनीय अपराध है。
कुछ महत्वपूर्ण संकटापन्न वन्य जंतु जैसे कि काले हिरण, श्वेत आँखों वाले हिरण, हाथी, सुनहरी बिल्ली, गुलाबी सिर वाली बतख, घड़ियाल, कच्छ-मगरमच्छ, अजगर, गेंडा इत्यादि हमारे वन्यप्राणी अभ्यारण्यों में सुरक्षित एवं संरक्षित हैं ।
निकट के चिड़ियाघर (प्राणी उद्यान) का भ्रमण कीजिए। वहाँ के प्राणियों को किन परिस्थितियों (वातावरण) में रखा गया है। इसका प्रेक्षण कीजिए।
निष्कर्ष: चिड़ियाघर में जंतुओं को कृत्रिम आवास में रखा जाता है, जबकि वन्यप्राणी अभ्यारण्य में वे अपने प्राकृतिक आवास में स्वतंत्र रहते हैं। जंतु चिड़ियाघर की अपेक्षा अपने प्राकृतिक आवास में अधिक आराम से रहते हैं।
📘 5.8 राष्ट्रीय उद्यान
यह विशाल आरक्षित क्षेत्र है तथा पर्यावरण के संपूर्ण संघटकों का संरक्षण करने में पर्याप्त है। इन्हें राष्ट्रीय उद्यान (National Park) कहते हैं। यह वनस्पतिजात, प्राणीजात, दृश्यभूमि तथा ऐतिहासिक वस्तुओं का संरक्षण करते हैं । सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान भारत का प्रथम आरक्षित वन है, जहाँ सर्वोत्तम किस्म की टीक (सागौन) मिलती है।
प्रागैतिहासिक प्रमाण: सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान की चट्टानों में आदिमानव के आवास (शरण) भी स्थित हैं। इन चट्टानों के आवासों में कुछ पेंटिंग कलाकृतियाँ भी मिलती हैं। पचमढ़ी जैवमण्डल संरक्षित क्षेत्र में 55 चट्टान आवास की पहचान की जा चुकी है, जिनमें जंतु एवं मनुष्य को लड़ते हुए, शिकार करते, नृत्य करते एवं वाद्ययंत्र बजाते दर्शाया गया है ।
बाघ परियोजना (Project Tiger): हमारी सरकार ने बाघों के संरक्षण हेतु प्रोजेक्ट टाइगर लागू किया। इसका उद्देश्य अपने देश में बाघों की उत्तरजीविता एवं संवर्धन करना था। बाघ उन स्पीशीज़ में से एक हैं जो धीरे-धीरे हमारे वनों से विलुप्त होते जा रहे हैं, परन्तु सतपुड़ा आरक्षित क्षेत्र में बाघों की संख्या में वृद्धि हो रही है ।
संकटापन्न जंतु: वे जंतु जिनकी संख्या एक निर्धारित स्तर से कम होती जा रही है और वे विलुप्त हो सकते हैं, ‘संकटापन्न जंतु’ कहलाते हैं। (जैसे: डायनासोर जो लाखों वर्ष पूर्व विलुप्त हो चुके हैं)।
पारितंत्र (Ecosystem): [INTERNAL_LINK: पारितंत्र और इसके घटक] किसी क्षेत्र के सभी पौधे, प्राणी एवं सूक्ष्मजीव अजैव घटकों जैसे जलवायु, भूमि (मिट्टी), नदी, डेल्टा इत्यादि संयुक्त रूप से किसी पारितंत्र का निर्माण करते हैं।
📘 5.9 रेड डाटा पुस्तक
रेड डाटा पुस्तक (Red Data Book) वह पुस्तक है जिसमें सभी संकटापन्न स्पीशीज़ का रिकार्ड रखा जाता है। पौधों, जंतुओं और अन्य स्पीशीज़ के लिए अलग-अलग रेड डाटा पुस्तकें हैं।
📘 5.10 प्रवास (Migration)
जलवायु में परिवर्तन के कारण प्रवासी पक्षी प्रत्येक वर्ष सुदूर क्षेत्रों से एक निश्चित समय पर उड़ कर आते हैं। वह यहाँ अंडे देने के लिए आते हैं क्योंकि उनके मूल आवास में बहुत अधिक शीत के कारण वह स्थान उस समय जीवनयापन हेतु अनुकूल नहीं होता। ऐसे पक्षी जो उड़कर सुदूर क्षेत्रों तक लम्बी यात्रा करते हैं, प्रवासी पक्षी कहलाते हैं।
📘 5.11 कागज का पुनः चक्रण
क्या आप जानते हैं? 1 टन कागज़ प्राप्त करने के लिए पूर्णरूपेण विकसित 17 वृक्षों को काटा जाता है। अतः हमें कागज़ की बचत करनी चाहिए।
कागज़ का 5 से 7 बार तक पुनः चक्रण (Recycling) किया जा सकता है। यदि कोई छात्र दिन में मात्र एक कागज़ की बचत करता है तो हम एक वर्ष में अनेक वृक्ष बचा सकते हैं। इससे न केवल वृक्षों की बचत होगी बल्कि कागज़ उत्पादन में उपयोग होने वाले जल, ऊर्जा और हानिकारक रसायनों में भी भारी कमी आएगी।
📘 5.12 पुनर्वनरोपण
वनोन्मूलन का स्थायी हल पुनर्वनरोपण (Reforestation) है। पुनर्वनरोपण में काटे गए वृक्षों की कमी पूरी करने के उद्देश्य से नए वृक्षों का रोपण करना है। हमें कम से कम उतने वृक्ष तो लगाने ही चाहिए जितने हम काटते हैं । प्राकृतिक रूप से भी वन का पुनर्वनरोपण हो सकता है यदि वनोन्मूलित क्षेत्र को अबाधित छोड़ दिया जाए ।
वन (संरक्षण) अधिनियम: भारत में इस अधिनियम का उद्देश्य प्राकृतिक वनों का परिरक्षण और संरक्षण करना है, साथ ही साथ ऐसे उपाय भी करना जिससे वन में और उसके समीप रहने वाले लोगों की आधारभूत आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके ।
📘 अभ्यास (Bihar Board Class 8 Science Chapter 5)
(क) वह क्षेत्र जिसमें जंतु अपने प्राकृतिक आवास में संरक्षित होते हैं, वन्यप्राणी अभ्यारण्य कहलाता है।
(ख) किसी क्षेत्र विशेष में पाई जाने वाली स्पीशीज़ विशेष क्षेत्री स्पीशीज़ कहलाती हैं।
(ग) प्रवासी पक्षी सुदूर क्षेत्रों से जलवायु परिवर्तन के कारण पलायन करते हैं।
(क) वन्यप्राणी उद्यान एवं जैवमण्डलीय आरक्षित क्षेत्र
| वन्यप्राणी उद्यान (अभ्यारण्य) | जैवमण्डलीय आरक्षित क्षेत्र |
|---|---|
| यह वह क्षेत्र है जहाँ जंतु एवं उनके आवास किसी भी प्रकार के विक्षोभ से सुरक्षित रहते हैं। | यह वन्य जीवन, पौधों, जंतु संसाधनों और उस क्षेत्र के आदिवासियों के पारंपरिक जीवनयापन हेतु विशाल संरक्षित क्षेत्र है। |
(ख) चिड़ियाघर एवं अभ्यारण्य
| चिड़ियाघर (प्राणी उद्यान) | अभ्यारण्य |
|---|---|
| जहाँ प्राणियों (जंतुओं) का संरक्षण कृत्रिम आवास में किया जाता है। | जहाँ वन्यप्राणी (जंतु) अपने प्राकृतिक आवास में सुरक्षित एवं संरक्षित रहते हैं। |
(ग) संकटापन्न एवं विलुप्त स्पीशीज़
| संकटापन्न स्पीशीज़ | विलुप्त स्पीशीज़ |
|---|---|
| वे जंतु जिनकी संख्या एक निर्धारित स्तर से कम होती जा रही है और वे विलुप्त हो सकते हैं। (उदा: बाघ) | वे जंतु जो पृथ्वी से हमेशा के लिए समाप्त हो चुके हैं। (उदा: डायनासोर) |
(घ) वनस्पतिजात एवं प्राणिजात
| वनस्पतिजात | प्राणिजात |
|---|---|
| किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले पेड़-पौधे उस क्षेत्र के वनस्पतिजात कहलाते हैं। | किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले जीव-जंतु उस क्षेत्र के प्राणिजात कहलाते हैं। |
- (क) वन्यप्राणी: वनों की कटाई से जंतुओं का प्राकृतिक आवास और भोजन नष्ट हो जाता है, जिससे उनके अस्तित्व पर खतरा आ जाता है।
- (ख) पर्यावरण: वनोन्मूलन से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे विश्व ऊष्णन (ग्लोबल वार्मिंग) होता है और प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है।
- (ग) गाँव (ग्रामीण क्षेत्र): वनों की कटाई से वर्षा कम होती है और सूखे की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही मृदा अपरदन से भूमि की उर्वरता घट जाती है, जिससे कृषि प्रभावित होती है।
- (घ) शहर (शहरी क्षेत्र): शहरों में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है, तापमान में वृद्धि होती है और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
- (ङ) पृथ्वी: पृथ्वी के ताप में वृद्धि से जलचक्र का संतुलन बिगड़ता है। उपजाऊ भूमि धीरे-धीरे मरुस्थल में बदल जाती है (मरुस्थलीकरण)।
- (च) अगली पीढ़ी: यदि वन नष्ट हो गए, तो अगली पीढ़ी को स्वच्छ हवा, पानी और कई प्राकृतिक संसाधन नहीं मिल पाएंगे। उन्हें एक प्रदूषित और गर्म पृथ्वी मिलेगी।
(क) हम वृक्षों की कटाई करते रहे?
उत्तर: यदि वृक्षों की अनवरत कटाई चलती रही तो वर्षा एवं भूमि की उर्वरता में कमी आ जाएगी। बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं की संभावनाएँ बढ़ जाएंगी तथा वन्य जीवों का आवास छिन जाएगा।
(ख) किसी जंतु का आवास बाधित हो?
उत्तर: किसी जंतु का प्राकृतिक आवास बाधित होने से उनके अस्तित्व को खतरा पैदा हो जाता है और वे संकटापन्न या विलुप्त स्पीशीज़ की श्रेणी में आ सकते हैं。
(ग) मिट्टी की ऊपरी परत अनावरित हो जाए?
उत्तर: मृदा की ऊपरी परत हटने (अनावरित होने) से नीचे की कठोर चट्टानें दिखाई देने लगती हैं। इससे मृदा में ह्यूमस की कमी होती है और भूमि धीरे-धीरे मरुस्थल में परिवर्तित हो जाती है (मरुस्थलीकरण)।
(क) हमें जैव विविधता का संरक्षण क्यों करना चाहिए?
उत्तर: जैव विविधता हमारे अस्तित्व और पर्यावरण के संतुलन के लिए आवश्यक है। विभिन्न पौधे और जंतु एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं, इसलिए पारितंत्र को सुरक्षित रखने के लिए इसका संरक्षण जरूरी है।
(ख) संरक्षित वन भी वन्य जंतुओं के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं हैं, क्यों?
उत्तर: संरक्षित वन भी सुरक्षित नहीं रहे क्योंकि इनके आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग वनों का अतिक्रमण करके उन्हें नष्ट कर देते हैं और अवैध शिकार (पोचिंग) करते हैं।
(ग) कुछ आदिवासी वन (जंगल) पर निर्भर करते हैं। कैसे?
उत्तर: आज भी अनेक आदिवासी जंगल में रहते हैं और अपने जीवनयापन की बुनियादी जरूरतों—जैसे भोजन, आश्रय, जलावन लकड़ी और औषधियों—के लिए पूरी तरह वनों पर निर्भर होते हैं।
(घ) वनोन्मूलन के कारक और उनके प्रभाव क्या हैं?
उत्तर: कारक: कृषि के लिए भूमि, घर-कारखानों का निर्माण और लकड़ी का ईंधन/फर्नीचर में उपयोग। प्रभाव: ताप एवं प्रदूषण में वृद्धि, भौम जल स्तर में कमी, वर्षा में कमी और मरुस्थलीकरण।
(ङ) रेड डाटा पुस्तक क्या है?
उत्तर: रेड डाटा पुस्तक वह पुस्तक है जिसमें सभी संकटापन्न स्पीशीज़ का रिकार्ड रखा जाता है।
(च) प्रवास से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: प्रवास वह परिघटना है जिसमें किसी स्पीशीज़ (जैसे पक्षी) का अपने मूल आवास में अत्यधिक कठोर जलवायु से बचने और प्रजनन हेतु किसी अन्य अनुकूल आवास में हर वर्ष उड़कर जाना होता है।
उत्तर: फैक्ट्रियों और आवास के लिए वनों की अंधाधुंध कटाई बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है। विकास महत्वपूर्ण है, लेकिन पर्यावरण की कीमत पर नहीं। वनों की कटाई से प्राकृतिक आपदाएं, ग्लोबल वार्मिंग और जीवों का विलुप्तीकरण बढ़ रहा है। अतः हमें ‘सतत विकास’ (Sustainable Development) का मार्ग अपनाना चाहिए, जहाँ अगर कुछ पेड़ काटे जाएँ तो उनके बदले दुगुने पेड़ लगाए जाएँ (पुनर्वनरोपण) और कागज व लकड़ी का उचित विकल्प खोजा जाए।
उत्तर: हम निम्न क्रियाओं द्वारा हरियाली बनाए रख सकते हैं:
- अधिक से अधिक पेड़ (पौधारोपण) लगाकर और उनकी देखभाल करके।
- कागज का पुनः चक्रण (Recycling) एवं बचत करके।
- जन्मदिन या अन्य अवसरों पर लोगों को पौधे उपहार में देकर।
- वनों और पेड़ों की कटाई का विरोध करके और जन-जागरूकता फैलाकर।
उत्तर: पेड़ प्रकाश संश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करते हैं। वृक्षों की कटाई (वनोन्मूलन) से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है। चूँकि कार्बन डाइऑक्साइड पृथ्वी द्वारा उत्सर्जित ऊष्मीय विकिरणों को रोक लेती है, इससे पृथ्वी के ताप में वृद्धि होती है (विश्व ऊष्णन)। ताप बढ़ने से जलचक्र का संतुलन बिगड़ता है और इसी कारण वर्षा दर में कमी आती है।
उत्तर: (छात्र स्वयं अपने राज्य, जैसे बिहार के ‘वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान’, आदि को भारत के मानचित्र पर चिह्नित करें।)
उत्तर: 1 टन कागज़ प्राप्त करने के लिए पूर्णरूपेण विकसित 17 वृक्षों को काटा जाता है। इसलिए वृक्षों को कटने से बचाने और जल व ऊर्जा बचाने के लिए हमें कागज़ की बचत करनी चाहिए।
कागज़ बचाने के कार्य:
- कागज़ का 5 से 7 बार पुनः चक्रण (Recycling) करना।
- कागज़ के दोनों ओर लिखना।
- पुरानी कॉपियों के बचे हुए पन्नों से रफ कॉपी बनाना।
ऊपर से नीचे की ओर:
(1) विलुप्त स्पीशीज की सूचना वाली पुस्तक: रेड डाटा पुस्तक
(2) पौधों, जंतुओं एवं सूक्ष्मजीवों की किस्में एवं विभिन्नताएँ: जैव विविधता
बाईं से दाईं ओर:
(2) पृथ्वी का वह भाग जिसमें सजीव पाए जाते हैं: जैवमण्डल
(3) विलुप्त हुई स्पीशीज़: संकटापन्न
(4) एक विशिष्ट आवास में पाई जाने वाली स्पीशीज: विशेष क्षेत्री
छात्रों को अपने आस-पास के पार्कों या चिड़ियाघर (प्राणी उद्यान) का भ्रमण करने के लिए प्रेरित करें। उन्हें यह सोचने दें कि जंतु पिंजरे में अधिक सुखी हैं या प्राकृतिक वन (अभ्यारण्य) में। बच्चों को जन्मदिन पर पौधे भेंट करने की आदत डलवाएं ताकि उनमें पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का विकास हो।
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