Bihar Board Class 8 Science Chapter 4: दहन और ज्वाला (Notes & Question Answer)
📘 परिचय: ईंधन और दहन (Introduction)
हम घर पर, उद्योगों में और वाहनों को चलाने के लिए विभिन्न प्रकार के ईंधनों का उपयोग विविध प्रयोजन के लिए करते हैं। व्यापार और उद्योगों में अनेक प्रकार के ईंधन उपयोग होते हैं, और मोटर-गाड़ियाँ चलाने में भी विभिन्न ईंधन काम में आते हैं। हमारी सूची में सम्मिलित ईंधन गोबर, लकड़ी, कोयला, काष्ठ-कोयला, पेट्रोल, डीजल, संपीडित प्राकृतिक गैस (CNG) आदि हो सकते हैं।
अगर आप Bihar Board Class 8 Science Chapter 4 के सबसे बेहतरीन नोट्स ढूंढ रहे हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं।
मोमबत्ती के जलने और कोयले जैसे ईंधन के जलने में एक मुख्य अंतर यह है कि मोमबत्ती ज्वाला के साथ जलती है जबकि कोयला नहीं। इसी प्रकार, अनेक ऐसे पदार्थ पाए जाते हैं जो बिना ज्वाला के जलते हैं।
“इस पोस्ट में हमने Bihar Board Class 8 Science Chapter 4 (दहन और ज्वाला) के सभी महत्वपूर्ण कॉन्सेप्ट्स को आसान भाषा में समझाया है।”
📘 दहन क्या है? (What is Combustion?)
दहन एक रासायनिक प्रक्रम जिसमें पदार्थ ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर ऊष्मा देता है, दहन कहलाता है। दहन के समय कभी-कभी ज्वाला के रूप में अथवा एक लौ के रूप में प्रकाश भी उत्पन्न होता है [INTERNAL_LINK: रासायनिक अभिक्रियाएँ] ।
- दाह्य पदार्थ (Combustible): जिस पदार्थ का दहन होता है, वह दाह्य कहलाता है। इसे ईंधन भी कहते हैं। ईंधन ठोस, द्रव या गैस हो सकता है।
- अदाह्य पदार्थ (Non-Combustible): वे पदार्थ जो सरलता से नहीं जलते (जैसे काँच, पत्थर का टुकड़ा, लोहे की कीलें)।
क्या आप जानते हैं? भोजन हमारे शरीर के लिए एक ईंधन है। हमारे शरीर में भोजन ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर अपघटित होता है और ऊष्मा उत्पन्न होती है। सूर्य में ऊष्मा और प्रकाश नाभिकीय अभिक्रियाओं द्वारा उत्पन्न होते हैं ।
📘 दहन के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ
चित्र 4.2: दहन के लिए वायु आवश्यक है (प्रदर्शित करने हेतु प्रयोग)
प्रयोगों द्वारा यह सिद्ध होता है कि दहन के लिए वायु आवश्यक है। यदि किसी जलती हुई मोमबत्ती को काँच की चिमनी से ढक दिया जाए और वायु का प्रवेश रोक दिया जाए, तो ज्वाला बुझ जाती है क्योंकि उसे वायु उपलब्ध नहीं हो पाती । इसी सिद्धांत का उपयोग आग बुझाने में किया जाता है; जब किसी व्यक्ति के वस्त्र आग पकड़ लेते हैं तो आग बुझाने के लिए व्यक्ति को कम्बल से ढक देते हैं ताकि वायु का संपर्क टूट जाए।
📘 ज्वलन-ताप (Ignition Temperature)
विभिन्न पदार्थ विभिन्न ताप पर आग पकड़ते हैं। वह न्यूनतम ताप जिस पर कोई पदार्थ जलने लगता है, उसका ज्वलन-ताप कहलाता है। यही कारण है कि कमरे के ताप पर माचिस की तीली या मिट्टी का तेल अपने आप आग नहीं पकड़ता।
कागज़ के कप को दी जाने वाली ऊष्मा, चालन द्वारा जल में चली जाती है। अतः जल की उपस्थिति में ताप कागज़ के ज्वलन-ताप तक नहीं पहुँच पाता, इसलिए वह जलता नहीं ।
ज्वलनशील पदार्थ: जिन पदार्थों का ज्वलन-ताप बहुत कम होता है और जो ज्वाला के साथ सरलतापूर्वक आग पकड़ लेते हैं, ज्वलनशील पदार्थ कहलाते हैं। उदाहरण: पेट्रोल, ऐल्कोहल, द्रवित पेट्रोलियम गैस (LPG), आदि ।
📘 माचिस का इतिहास
माचिस का इतिहास बहुत पुराना है। पाँच हजार से अधिक वर्ष पूर्व प्राचीन मिश्र में गंधक में डुबोए गए चीड़ की लकड़ी के छोटे टुकड़े माचिस की तरह उपयोग किए जाते थे। आधुनिक निरापद माचिस का विकास लगभग दो सौ वर्ष पूर्व हुआ था ।
पहले श्वेत फ़ॉस्फोरस का उपयोग होता था जो खतरनाक सिद्ध हुआ। आजकल निरापद माचिस के सिरे पर केवल ऐन्टिमनी ट्राइसल्फाइड और पोटैशियम क्लोरेट लगा रहता है। रगड़ने वाली सतह पर चूर्णित काँच और थोड़ा सा लाल फ़ॉस्फोरस लगाते हैं जो कम खतरनाक होता है। रगड़ने पर लाल फ़ॉस्फोरस, श्वेत फ़ॉस्फोरस में परिवर्तित हो जाता है और अभिक्रिया कर दहन प्रारम्भ कर देता है ।
📘 आग पर नियंत्रण कैसे पाते हैं? (How do we control fire?)
आग उत्पन्न करने के लिए तीन आवश्यकताएँ होती हैं: ईंधन, वायु (ऑक्सीजन) और ऊष्मा (ताप को ज्वलन ताप तक पहुँचाना)। इनमें से एक या अधिक आवश्यकताओं को हटाकर आग को नियंत्रित किया जा सकता है। आग बुझाने वाले (फायर ब्रिगेड) का कार्य वायु का प्रवाह काटना या ईंधन का ताप कम करना या दोनों होते हैं।
जल (Water) का उपयोग: जल सबसे अधिक प्रचलित अग्निशामक है। जल, ज्वलनशील पदार्थों को ठंडा करता है जिससे उनका ताप उनके ज्वलन ताप से कम हो जाता है और जलवाष्प वायु की आपूर्ति बंद कर देती है। परन्तु, जल तभी कार्य कर पाता है जब लकड़ी और कागज़ जैसी वस्तुओं में आग लगी हो।
सावधानी: यदि विद्युत् उपकरणों में आग लगी हो तो जल विद्युत् का चालन कर सकता है और आग बुझाने वालों को हानि हो सकती है। साथ ही, तेल और पेट्रोल में लगी आग बुझाने हेतु भी जल का उपयोग उचित नहीं है क्योंकि जल तेल से भारी होता है और नीचे चला जाता है, जबकि तेल ऊपर जलता रहता है।
कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) अग्निशामक
विद्युत उपकरण और पेट्रोल जैसे ज्वलनशील पदार्थों में लगी आग के लिए कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) सबसे अच्छा अग्निशामक है। ऑक्सीजन से भारी होने के कारण CO₂ आग को एक कम्बल की तरह लपेट लेती है, जिससे ईंधन और ऑक्सीजन के बीच सम्पर्क टूट जाता है। सामान्यतः यह विद्युत उपकरणों को कोई हानि नहीं पहुँचाती ।
CO₂ प्राप्त करने का दूसरा तरीका सोडियम बाइकार्बोनेट (बेकिंग सोडा) या पोटैशियम बाइकार्बोनेट जैसे रसायनों के पाउडर का भारी मात्रा में छिड़काव है, जिनसे बहुत सी कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है [INTERNAL_LINK: अम्ल, क्षारक और लवण] ।
📘 दहन के प्रकार (Types of Combustion)
दहन मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:
- तीव्र दहन (Rapid Combustion): गैस तेज़ी से जलने लगती है तथा ऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न करती है। (जैसे – रसोई गैस या LPG का जलना)।
- स्वतः दहन (Spontaneous Combustion): वह दहन जिसमें पदार्थ, बिना किसी प्रत्यक्ष कारण के, अचानक लपटों के साथ जल उठता है। फ़ॉस्फोरस जैसे पदार्थ कमरे के ताप पर वायु में जल उठते हैं। कोयले की खानों में कोयले की धूल के स्वतः दहन से कई खतरनाक अग्निकाण्ड हो चुके हैं।
- विस्फोट (Explosion): जब पटाखे को जलाते हैं तो एक आकस्मिक अभिक्रिया होने से ऊष्मा, प्रकाश और ध्वनि पैदा होती है। अभिक्रिया में बनी गैस बड़ी मात्रा में निकलती है। इस प्रकार की अभिक्रिया विस्फोट कहलाती है।
📘 ज्वाला और ज्वाला की संरचना (Flame & Structure)
दहन के समय जो पदार्थ वाष्पित होते हैं वे ज्वाला का निर्माण करते हैं। उदाहरण के लिए, मिट्टी का तेल और पिघली हुई मोमबत्ती वाष्पित होकर ज्वाला का निर्माण करते हैं। इसके विपरीत लकड़ी का कोयला वाष्पित नहीं होता और कोई ज्वाला नहीं देता।
मोमबत्ती की ज्वाला के विभिन्न क्षेत्र
ज्वाला के मुख्य रूप से तीन क्षेत्र होते हैं :
- सबसे बाहरी क्षेत्र (अदीप्त क्षेत्र / पूर्ण दहन): यह नीले रंग का होता है। यह ज्वाला का सबसे गर्म भाग होता है ।
- मध्य भाग (दीप्त क्षेत्र / आंशिक दहन): यह पीले रंग का होता है और कम गर्म होता है। इस क्षेत्र में बिना जले कार्बन कण मौजूद होते हैं।
- सबसे आंतरिक क्षेत्र (ज्योतिहीन क्षेत्र): यह बिना जली मोमबत्ती का सबसे आंतरिक क्षेत्र (काला) होता है और यह सबसे कम गर्म होता है।
क्या आप जानते हैं? सोने और चाँदी को पिघलाने के लिए सुनार धातु की फुकनी से ज्वाला के सबसे बाहरी भाग (नीले और सबसे गर्म भाग) का उपयोग करते हैं ।
📘 ईंधन क्या है? और ईंधन दक्षता (Fuel & Efficiency)
अच्छा ईंधन वह है जो सहज उपलब्ध हो, सस्ता हो, वायु में सामान्य दर से सुगमतापूर्वक जलता हो, अधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न करता हो और जलने के उपरांत कोई अवांछनीय पदार्थ नहीं छोड़ता हो। ऐसे ईंधन को आदर्श ईंधन कहा जाता है。
ऊष्मीय मान (Calorific Value): किसी ईंधन के 1 किलोग्राम के पूर्ण दहन से प्राप्त ऊष्मा ऊर्जा की मात्रा, उसका ऊष्मीय मान कहलाती है। ईंधन के उष्मीय मान को किलोजूल प्रति किलोग्राम (kJ/kg) मात्रक द्वारा प्रदर्शित किया जाता है ।
विभिन्न ईंधनों के ऊष्मीय मान (सारणी 4.4)
| ईंधन | ऊष्मीय मान (kJ/kg) |
|---|---|
| गोबर के उपले | 6,000 – 8,000 |
| लकड़ी | 17,000 – 22,000 |
| कोयला | 25,000 – 33,000 |
| पेट्रोल | 45,000 |
| मिट्टी का तेल | 45,000 |
| डीजल | 45,000 |
| मेथेन | 50,000 |
| सीएनजी (CNG) | 50,000 |
| एलपीजी (LPG) | 55,000 |
| जैव गैस (Biogas) | 35,000 – 40,000 |
| हाइड्रोजन | 1,50,000 |
📘 ईंधन के दहन से हानिकारक प्रभाव (Harmful Effects)
ईंधन का बढ़ता हुआ उपभोग पर्यावरण पर हानिकारक प्रभाव डालता है:
- श्वास रोग (Asthma): लकड़ी, कोयले और पेट्रोल जैसे कार्बन ईंधन, बिना जले कार्बन कण छोड़ते हैं, जो खतरनाक प्रदूषक होते हैं और दमा जैसे श्वास रोग उत्पन्न करते हैं।
- विषैली गैस (Carbon Monoxide): ईंधनों का अपूर्ण दहन कार्बन मोनोक्साइड गैस देता है। यह अत्यंत विषैली गैस है। बंद कमरे में कोयला जलाना और उसमें सोना बहुत खतरनाक होता है, इससे व्यक्तियों की मृत्यु भी हो सकती है ।
- विश्व ऊष्णन (Global Warming): ईंधनों के दहन से पर्यावरण में कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है। इसकी अधिक मात्रा विश्व ऊष्णन (ग्लोबल वार्मिंग) का कारण बनती है। इससे हिमनद पिघलने लगते हैं और समुद्र का जल-स्तर बढ़ जाता है।
- अम्ल वर्षा (Acid Rain): कोयले और डीजल के दहन से सल्फर डाइऑक्साइड गैस निकलती है। पेट्रोल इंजन नाइट्रोजन के ऑक्साइड छोड़ते हैं। ये ऑक्साइड वर्षा जल में घुलकर अम्ल बनाते हैं जिसे अम्ल वर्षा कहते हैं। यह फसलों, भवनों और मृदा के लिए बहुत हानिकारक होती है।
स्वच्छ ईंधन (Cleaner Fuel): मोटर वाहनों में ईंधन के रूप में डीजल और पेट्रोल का स्थान अब सीएनजी (CNG – संपीडित प्राकृतिक गैस) ले रही है क्योंकि यह सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइडों का उत्पादन अल्प मात्रा में करती है। सीएनजी एक अधिक स्वच्छ ईंधन है ।
“नीचे Bihar Board Class 8 Science Chapter 4 के सभी अभ्यास प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं।”
📘 अभ्यास (NCERT Textbook Questions)
ऊपर दिए गए टॉपिक्स को पढ़ने के बाद, आइए अब Bihar Board Class 8 Science Chapter 4 के अभ्यास प्रश्नों को हल करते हैं।
प्रश्न 1: दहन की परिस्थितियों की सूची बनाइए।उत्तर: दहन के लिए निम्नलिखित तीन परिस्थितियाँ आवश्यक हैं:
1. दाह्य पदार्थ (ईंधन) की उपस्थिति।
2. वायु (ऑक्सीजन) की उपस्थिति।
3. ऊष्मा (पदार्थ का ताप उसके ज्वलन-ताप तक पहुँचाने के लिए)।
उत्तर:
(क) लकड़ी और कोयला जलने से वायु का प्रदूषण होता है।
(ख) घरों में काम आने वाला एक द्रव ईंधन एलपीजी (LPG) / मिट्टी का तेल है।
(ग) जलना प्रारम्भ होने से पहले ईंधन को उसके ज्वलन-ताप तक गर्म करना आवश्यक है।
(घ) तेल द्वारा उत्पन्न आग को जल द्वारा नियंत्रित नहीं किया जा सकता।
उत्तर: मोटर वाहनों में पेट्रोल और डीजल के जलने से बिना जले कार्बन कण और सल्फर तथा नाइट्रोजन के ऑक्साइड निकलते हैं, जो जहरीले और प्रदूषक होते हैं। इसके विपरीत, सीएनजी (संपीडित प्राकृतिक गैस) सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइडों का उत्पादन अल्प मात्रा में करती है तथा बिना जले कार्बन कण (धुआँ) भी नहीं छोड़ती। यह एक बहुत ही स्वच्छ ईंधन है। इसलिए इसके उपयोग से शहरों का प्रदूषण कम हुआ है।
उत्तर:
| एलपीजी (LPG) | लकड़ी |
|---|---|
| इसका ऊष्मीय मान बहुत अधिक (55,000 kJ/kg) होता है। | इसका ऊष्मीय मान एलपीजी से कम (17,000 – 22,000 kJ/kg) होता है। |
| यह बिना धुएँ के जलती है, जिससे प्रदूषण नहीं होता। | यह जलने पर बहुत अधिक धुआँ और हानिकारक गैसें छोड़ती है। |
| यह जलने के बाद कोई ठोस अवशेष (राख) नहीं छोड़ती। | यह जलने के बाद राख छोड़ती है। |
| इसके उपयोग से पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचता है। | लकड़ी के लिए पेड़ काटने पड़ते हैं, जिससे वनोन्मूलन (Deforestation) होता है। |
उत्तर:
(क) विद्युत उपकरण से संबद्ध आग पर नियंत्रण पाने हेतु जल का उपयोग नहीं किया जाता।
कारण: जल विद्युत का सुचालक होता है। यदि विद्युत उपकरणों की आग पर जल डाला जाए, तो जल के माध्यम से विद्युत धारा प्रवाहित हो सकती है और आग बुझाने वाले व्यक्ति को भयंकर करंट लग सकता है।
(ख) एलपीजी लकड़ी से अच्छा घरेलू ईंधन है।
कारण: एलपीजी का ऊष्मीय मान लकड़ी से अधिक होता है। यह आसानी से जलती है, धुआँ या हानिकारक गैसें उत्पन्न नहीं करती और जलने के बाद कोई राख या अवशेष नहीं छोड़ती है।
(ग) कागज स्वयं सरलता से आग पकड़ लेता है जबकि ऐलुमिनियम पाइप के चारों ओर लपेटा कागज का टुकड़ा आग नहीं पकड़ता।
कारण: कागज का ज्वलन-ताप कम होता है इसलिए वह सरलता से आग पकड़ लेता है। लेकिन जब इसे ऐलुमिनियम पाइप पर लपेटा जाता है, तो दी जाने वाली ऊष्मा चालन द्वारा ऐलुमिनियम (जो ऊष्मा का अच्छा सुचालक है) में चली जाती है। इसके कारण कागज का ताप उसके ज्वलन-ताप तक नहीं पहुँच पाता और वह आग नहीं पकड़ता।
उत्तर:
चित्र 4.13: मोमबत्ती की ज्वाला के विभिन्न क्षेत्र (सबसे गर्म, कम गर्म और सबसे कम गर्म भाग)
मोमबत्ती की ज्वाला के मुख्य रूप से तीन क्षेत्र होते हैं: सबसे बाहरी क्षेत्र (नीला, पूर्ण दहन, सबसे गर्म), मध्य भाग (पीला, आंशिक दहन, कम गर्म), और सबसे आंतरिक क्षेत्र (काला, बिना जली मोमबत्ती, सबसे कम गर्म)।
उत्तर: ईंधन के ऊष्मीय मान को किलोजूल प्रति किलोग्राम (kJ/kg) मात्रक द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
उत्तर: कार्बन डाइऑक्साइड (\(CO_2\)) ऑक्सीजन से भारी होती है। जब इसे आग पर छोड़ा जाता है, तो यह आग को एक कम्बल की तरह चारों ओर से लपेट लेती है। इससे दाह्य पदार्थ (ईंधन) और ऑक्सीजन के बीच का सम्पर्क टूट जाता है, जिससे आग बुझ जाती है। इसके अलावा, सिलिंडर से छोड़े जाने पर \(CO_2\) बहुत अधिक फैलती है और ठंडी हो जाती है, जो ईंधन के ताप को भी कम कर देती है।
उत्तर: हरी पत्तियों में जल (नमी) की मात्रा बहुत अधिक होती है। जब हम हरी पत्तियों को जलाते हैं, तो दी जाने वाली ऊष्मा उस जल को वाष्पित करने में खर्च हो जाती है, जिससे पत्तियों का ताप उनके ज्वलन-ताप तक नहीं पहुँच पाता। इसके विपरीत, सूखी पत्तियों में नमी नहीं होती, इसलिए उनका ताप शीघ्र ही ज्वलन-ताप तक पहुँच जाता है और वे आसानी से आग पकड़ लेती हैं।
उत्तर: सोने और चाँदी को पिघलाने के लिए स्वर्णकार (सुनार) धातु की फुकनी से ज्वाला के सबसे बाहरी क्षेत्र (नीले भाग) का उपयोग करते हैं। इसका कारण यह है कि ज्वाला का यह बाहरी भाग ऑक्सीजन की पूर्ण आपूर्ति के कारण पूर्ण दहन करता है और ज्वाला का सबसे गर्म भाग होता है, जो कठोर धातुओं को आसानी से पिघला सकता है।
उत्तर:
हम जानते हैं कि, ऊष्मीय मान = उत्पन्न ऊष्मा / ईंधन का द्रव्यमान
यहाँ, उत्पन्न ऊष्मा = 180,000 kJ
ईंधन का द्रव्यमान = 4.5 kg
अतः ऊष्मीय मान = \[ \frac{180,000}{4.5} \] = 40,000 kJ/kg
ईंधन का ऊष्मीय मान 40,000 kJ/kg है।
उत्तर: हाँ, जंग लगने के प्रक्रम को एक प्रकार का ‘धीमा दहन’ (Slow Combustion) कहा जा सकता है। दहन एक रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें कोई पदार्थ ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके ऊष्मा उत्पन्न करता है। लोहे में जंग लगने की प्रक्रिया में भी लोहा, हवा की ऑक्सीजन और नमी के साथ अभिक्रिया करके आयरन ऑक्साइड (जंग) बनाता है और इस प्रक्रिया में भी बहुत धीमी गति से ऊष्मा निकलती है। हालांकि इसमें ज्वाला या प्रकाश उत्पन्न नहीं होता, फिर भी रासायनिक दृष्टि से यह एक ऑक्सीकरण (दहन) प्रक्रम है।
उत्तर: रमेश का पानी कम समय में गर्म हो जाएगा। इसका कारण यह है कि उसने बीकर को ज्वाला के सबसे बाहरी भाग (अदीप्त क्षेत्र / नीले रंग) के पास रखा था, जो कि पूर्ण दहन के कारण ज्वाला का सबसे गर्म भाग होता है। आबिदा ने बीकर को पीले भाग में रखा था जो कि आंशिक दहन का क्षेत्र है और बाहरी भाग की तुलना में कम गर्म होता है।
छात्रों की बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए Bihar Board Class 8 Science Chapter 4 के ये प्रश्न उत्तर बहुत मददगार साबित होंगे।
प्रिय छात्रों, दहन और आग से संबंधित सभी क्रियाकलाप (जैसे मोमबत्ती जलाना, ज्वलन-ताप का परीक्षण आदि) हमेशा अपने शिक्षक या माता-पिता की देखरेख में ही करें। आग के साथ खिलवाड़ खतरनाक हो सकता है। अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher) के उपयोग और आपातकालीन नंबरों की जानकारी हमेशा याद रखें।
“हमें उम्मीद है कि Bihar Board Class 8 Science Chapter 4 का यह नोट्स आपको पसंद आया होगा।”
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Suraj Kumar Mishra