📚 Subject: Science (विज्ञान)
📝 Chapter: 12 (कुछ प्राकृतिक परिघटनाएँ)
कुछ प्राकृतिक परिघटनाएँ – Bihar Board Class 8 Science Chapter 12 Solutions
कक्षा 8 विज्ञान के इस अध्याय में हम प्रकृति की दो विनाशकारी परिघटनाओं— तड़ित (Lightning) और भूकम्प (Earthquakes) के बारे में विस्तार से जानेंगे। Bihar Board Class 8 Science Chapter 12 Solutions के इस नोट्स में हम न केवल इन परिघटनाओं के वैज्ञानिक कारणों को समझेंगे, बल्कि इनके द्वारा होने वाले विनाश को कम करने और अपनी सुरक्षा करने के उपायों पर भी चर्चा करेंगे।
📘 12.1 तड़ित (Lightning)
विद्युत के तार ढीले हो जाने पर आपने विद्युत खम्भों पर चिंगारियाँ (Sparks) देखी होंगी। यह परिघटना उस समय बहुत अधिक हो जाती है जब हवा (पवन) के चलने पर तार हिलते-डुलते हैं। आपने सॉकेट में प्लग के ढीले होने पर भी चिंगारियाँ निकलते देखी होंगी।
तड़ित भी एक विशाल स्तर की विद्युत चिंगारी ही है।
प्राचीन काल की मान्यताएँ: प्राचीन काल में लोग इन चिंगारियों का वास्तविक कारण नहीं समझते थे। इसलिए वे तड़ित (बिजली गिरने) से डरते थे और सोचते थे कि यह उन पर भगवान के क्रोध का परिणाम है। लेकिन आज विज्ञान के विकास से हम जानते हैं कि यह बादलों में आवेश (Charge) के एकत्रित होने के कारण होता है।
हमें तड़ित से डरना नहीं चाहिए, परन्तु इन घातक चिंगारियों से अपने बचाव के लिए सावधानियाँ जरूर बरतनी चाहिए।
📘 चिंगारियाँ जिनके विषय में यूनानी जानते थे
600 ई.पू. से भी पहले प्राचीन यूनानी यह जानते थे कि जब ऐम्बर (Amber – एक प्रकार की राल) को फर (Fur) से रगड़ते हैं, तो यह बालों जैसी हल्की वस्तुओं को आकर्षित कर लेता है।
आपने भी यह अनुभव किया होगा कि जब आप ऊनी अथवा पॉलिएस्टर के वस्त्रों को उतारते हैं तो आपके बाल खड़े हो जाते हैं। यदि आप अँधेरे में इन वस्त्रों को उतारते हैं, तो चट-चट की ध्वनि के साथ चिंगारी भी देख सकते हैं।
सन् 1752 में अमेरिकी वैज्ञानिक बेन्जामिन फ्रेंकलिन ने यह दर्शाया कि तड़ित और आपके वस्त्रों में उत्पन्न चिंगारी वास्तव में एक ही परिघटना है। परन्तु इस तथ्य को पूरी तरह साकार होने में 2000 वर्ष लग गए।
📘 12.2 रगड़ द्वारा आवेशन
जब हम कुछ विशिष्ट वस्तुओं को आपस में रगड़ते हैं, तो वे विद्युत आवेश (Electric Charge) अर्जित कर लेती हैं। इसे रगड़ द्वारा आवेशन कहते हैं।
जब एक प्लास्टिक की रिफिल को पॉलिथीन के साथ रगड़ते हैं, तो यह कुछ विद्युत आवेश अर्जित कर लेती है और कागज के छोटे टुकड़ों को आकर्षित करने लगती है। इसी प्रकार, जब प्लास्टिक की कंघी को सूखे बालों से रगड़ते हैं, तब वह भी कुछ विद्युत आवेश अर्जित कर लेती है। इन वस्तुओं को आवेशित वस्तुएँ (Charged Objects) कहते हैं। इस प्रक्रिया में पॉलिथीन तथा बाल भी आवेशित हो जाते हैं।
सारणी 12.1: रगड़ने पर वस्तुओं का आवेशन
| रगड़ी गयी वस्तु | पदार्थ जिससे रगड़ा जाए | कागज के टुकड़ों को आकर्षित करती है / नहीं करती है | आवेशित / आवेशित नहीं |
|---|---|---|---|
| रिफिल | पॉलिथीन, ऊनी वस्त्र | आकर्षित करती है | आवेशित |
| गुब्बारा | पॉलिथीन, ऊनी वस्त्र, शुष्क बाल | आकर्षित करती है | आवेशित |
| रबर (इरेज़र) | ऊन | आकर्षित करती है | आवेशित |
| स्टील का चम्मच | पॉलिथीन, ऊनी वस्त्र | आकर्षित नहीं करती है (धातु होने के कारण शरीर से आवेश निकल जाता है) | आवेशित नहीं |
📘 12.3 आवेशों के प्रकार तथा इनकी अन्योन्य क्रिया
आवेशों की प्रकृति समझने के लिए जब हम दो समान रूप से आवेशित वस्तुओं (जैसे दो गुब्बारे जिन्हें ऊनी कपड़े से रगड़ा गया हो) को पास लाते हैं, तो वे एक-दूसरे से दूर भागते हैं। लेकिन जब एक आवेशित गुब्बारे को आवेशित रिफिल के पास लाते हैं, तो वे एक-दूसरे की ओर खिंचते हैं।
- सजातीय (समान) आवेश: एक ही प्रकार के आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित (Repel) करते हैं।
- विजातीय (विपरीत) आवेश: अलग-अलग प्रकार के आवेश एक-दूसरे को आकर्षित (Attract) करते हैं।
मान्यता के अनुसार:
- रेशम से रगड़ने पर काँच की छड़ द्वारा अर्जित आवेश को धनावेश (Positive Charge) कहते हैं।
- अन्य प्रकार के आवेश (जैसे पॉलिथीन से रगड़े गए प्लास्टिक स्ट्रॉ पर) को ऋणावेश (Negative Charge) कहते हैं।
रगड़ने पर उत्पन्न विद्युत आवेश स्थैतिक (Static) होते हैं, वे स्वयं गति नहीं करते। जब आवेश गति करते हैं, तो विद्युत धारा (Electric Current) बनती है, जिससे परिपथ में बल्ब चमकता है या तार गरम होता है।
📘 12.4 आवेश का स्थानान्तरण (Transfer of Charge)
विद्युत आवेश को किसी आवेशित वस्तु से अन्य वस्तु में धात्विक चालक (जैसे धातु की क्लिप या तार) द्वारा भेजा जा सकता है।
यह एक सरल युक्ति है जिसका उपयोग यह परीक्षण करने के लिए किया जाता है कि कोई वस्तु आवेशित है अथवा नहीं। जब एक आवेशित रिफिल को धातु की पेपर-क्लिप से स्पर्श कराते हैं, तो ऐलुमिनियम की पन्नी की पट्टियाँ आवेश प्राप्त करती हैं। चूँकि समान आवेश वाली पट्टियाँ एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करती हैं, इसलिए वे फैल जाती हैं।
भूसम्पर्कण (Earthing): जब हम आवेशित पेपर-क्लिप को हाथ से छूते हैं, तो पन्नी की पट्टियों का आवेश हमारे शरीर से होकर पृथ्वी में चला जाता है। किसी आवेशित वस्तु से आवेश को पृथ्वी में भेजने की इस प्रक्रिया को भूसम्पर्कण कहते हैं। विद्युत धारा के लीक होने से उत्पन्न आघात से बचाने के लिए भवनों में भूसम्पर्कण (अर्थिंग) की व्यवस्था की जाती है।
📘 12.5 तड़ित की कहानी (The Story of Lightning)
रगड़ द्वारा उत्पन्न आवेशों के आधार पर हम तड़ित (बिजली कड़कने) की व्याख्या कर सकते हैं।
गरज वाले तूफ़ानों (Thunderstorms) के बनते समय वायु की धाराएँ ऊपर की ओर जाती हैं जबकि जल की बूँदें नीचे की ओर आती हैं। इन प्रबल गतियों के कारण आवेशों का पृथकन (Separation) होता है। बादलों के ऊपरी किनारे के निकट धनावेश (Positive Charge) एकत्र हो जाते हैं तथा ऋणावेश (Negative Charge) बादलों के निचले किनारे पर संचित हो जाते हैं। धरती के निकट भी धनावेश का संचय होता है।
जब संचित आवेशों का परिमाण अत्यधिक हो जाता है, तो वायु (जो विद्युत की हीन चालक है) आवेशों के प्रवाह को नहीं रोक पाती। ऋणात्मक तथा धनात्मक आवेश आपस में मिलते हैं और प्रकाश की चमकीली धारियाँ तथा ध्वनि उत्पन्न होती है, जिसे हम तड़ित (Lightning) के रूप में देखते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को विद्युत विसर्जन (Electric Discharge) कहते हैं।
विद्युत विसर्जन की प्रक्रिया दो या अधिक बादलों के बीच, अथवा बादलों और पृथ्वी के बीच हो सकती है।
📘 12.6 तड़ित से सुरक्षा (Lightning Safety)
तड़ित एवं झंझा (गरज वाले तूफ़ान) के समय कोई भी खुला स्थान सुरक्षित नहीं होता। गर्जन सुनना किसी सुरक्षित स्थान पर तुरंत पहुँचने की चेतावनी है।
बाहर खुले में क्या करें और क्या न करें?
- खुले वाहन जैसे मोटर साइकिल, ट्रैक्टर, खुली कार सुरक्षित नहीं हैं।
- खुले मैदान, ऊँचे वृक्ष तथा पार्कों में शरण स्थल तड़ित से हमारी सुरक्षा नहीं करते।
- तड़ित झंझा के समय छाता लेकर चलना बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है।
- यदि आप वन (जंगल) में हैं, तो छोटे वृक्ष के नीचे शरण लें।
- यदि कोई शरण स्थल नहीं है, तो जमीन पर सिमटकर नीचे बैठें। अपने हाथों को घुटनों पर तथा सिर को हाथों के बीच रखें।
घर के भीतर सुरक्षा
- तड़ित टेलीफ़ोन के तारों, विद्युत तारों तथा धातु के पाइपों पर आघात कर सकती है, इसलिए इन्हें छूने से बचें।
- मोबाइल फोन अथवा बिना डोरी वाले फोन का उपयोग करना सुरक्षित है।
- बहते जल के सम्पर्क से बचने के लिए तड़ित झंझा के समय स्नान से बचना चाहिए।
- टी.वी., कम्प्यूटर आदि विद्युत उपकरणों के प्लग सॉकेट से निकाल देने चाहिए।
तड़ित चालक एक ऐसी युक्ति है जिसका उपयोग भवनों को तड़ित के प्रभाव से बचाने के लिए किया जाता है। भवन निर्माण के समय उसकी दीवारों में, भवन की ऊँचाई से अधिक लम्बाई की एक धातु की छड़ स्थापित कर दी जाती है। इसका एक सिरा हवा में खुला रहता है और दूसरा जमीन में गहराई तक दबा दिया जाता है। यह धातु की छड़ विद्युत आवेश को सुरक्षित रूप से जमीन तक पहुँचाने का सरल पथ प्रदान करती है।
चित्र 12.6 : भवन में स्थापित तड़ित चालक जो आवेश को पृथ्वी में सुरक्षित भेजता है।
📘 12.7 भूकम्प (Earthquakes)
तड़ित और चक्रवात की भविष्यवाणी मौसम विभाग कुछ हद तक कर सकता है। लेकिन, भूकम्प (Earthquake) एक ऐसी परिघटना है जिसकी भविष्यवाणी करने की क्षमता हम अभी तक विकसित नहीं कर पाए हैं। भारत में 8 अक्टूबर 2005 को उत्तरी कश्मीर (उरी तथा तंगधार) और 26 जनवरी 2001 को गुजरात के भुज में विनाशकारी भूकम्प आए थे।
भूकम्प क्या होता है और इसके कारण?
भूकम्प जो बहुत कम समय तक रहता है, पृथ्वी का कम्पन अथवा कोई झटका होता है। यह पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत (भूपर्पटी) के भीतर गहराई में गड़बड़ के कारण उत्पन्न होता है। भूकम्पों से बाढ़, भूस्खलन तथा सुनामी आ सकते हैं (जैसे 26 दिसम्बर 2004 को हिन्द महासागर में आई सुनामी)।
पृथ्वी की प्लेटें (Earth’s Plates): पृथ्वी की ऊपरी परत (Crust) एक खण्ड में नहीं है, बल्कि यह टुकड़ों में विभाजित है जिन्हें प्लेट कहते हैं। ये प्लेटें निरंतर गति करती रहती हैं। जब ये एक-दूसरे से रगड़ खाती हैं या टकराकर एक प्लेट दूसरी के नीचे चली जाती है, तो भूपर्पटी में विक्षोभ उत्पन्न होता है, जो सतह पर भूकम्प के रूप में दिखाई देता है।
भूकम्पी क्षेत्र (Seismic Zones): चूँकि भूकम्प प्लेटों की गतियों के कारण उत्पन्न होते हैं, अतः जहाँ प्लेटों की सीमाएँ दुर्बल होती हैं, वहाँ भूकम्प आने की संभावना अधिक होती है। इन्हें भूकम्पी क्षेत्र अथवा भ्रंश क्षेत्र (Fault Zones) कहते हैं। भारत में कश्मीर, हिमालय, उत्तर-पूर्व, कच्छ का रन, राजस्थान आदि अति भूकम्प आशंकित क्षेत्र हैं।
भूकम्प की माप (Measurement of Earthquake)
- भूकम्प की शक्ति के परिमाण को रिक्टर पैमाने (Richter Scale) पर मापा जाता है।
- 7 से अधिक परिमाण वाले भूकम्प अत्यधिक विनाशकारी होते हैं।
- भूस्पन्द सतह पर जो तरंगें उत्पन्न करते हैं, उन्हें भूकम्पी तरंगें (Seismic Waves) कहते हैं। इन तरंगों को भूकम्पलेखी (Seismograph) नामक उपकरण द्वारा रिकॉर्ड किया जाता है।
भूकम्प की भविष्यवाणी संभव नहीं है, अतः बचाव के उपाय अति आवश्यक हैं।
- भूकम्पी क्षेत्रों में भवनों का डिजाइन भूकम्प निरापद (Quake-safe) होना चाहिए।
- भवन निर्माण में मिट्टी अथवा इमारती लकड़ी का उपयोग अधिक अच्छा होता है।
- दीवार घड़ी, फोटो फ्रेम, वॉटर हीटर आदि को सुरक्षित रूप से टाँगना चाहिए ताकि वे लोगों पर न गिरें।
भूकम्प आने पर क्या करें?
यदि आप घर में हैं: किसी मजबूत मेज़ के नीचे आश्रय लें। भारी वस्तुओं से दूर रहें। यदि बिस्तर पर हैं, तो उठें नहीं, तकिए से सिर का बचाव करें।
यदि आप घर से बाहर हैं: भवनों, वृक्षों और बिजली की लाइनों से दूर खुले स्थान पर धरती पर लेट जाएँ। यदि बस या कार में हैं, तो बाहर न निकलें और ड्राइवर से खुले स्थान की ओर धीरे-धीरे चलने को कहें।
📘 Bihar Board Class 8 Science Chapter 12 Solutions – अभ्यास (NCERT Textbook Questions)
- (क) प्लास्टिक का पैमाना
- ✅ (ख) तांबे की छड़
- (ग) फूला हुआ गुब्बारा
- (घ) ऊनी वस्त्र
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: तांबा (Copper) एक धातु है और यह विद्युत का सुचालक (Good Conductor) होता है। जब हम तांबे की छड़ को रगड़ते हैं, तो उत्पन्न आवेश छड़ पर नहीं रुकता, बल्कि यह इसे पकड़े हुए हमारे शरीर से होकर पृथ्वी में चला जाता है (इसे भूसम्पर्कण कहते हैं)। वहीं प्लास्टिक, गुब्बारा और ऊन विद्युत के हीन चालक (कुचालक) हैं, इसलिए घर्षण से इन पर आवेश आसानी से रुक जाता है और ये आवेशित हो जाते हैं।
- (क) तथा कपड़ा दोनों धनावेश अर्जित कर लेते हैं।
- ✅ (ख) धनावेशित हो जाती है तथा कपड़ा ऋणावेशित हो जाता है।
- (ग) तथा कपड़ा दोनों ऋणावेश अर्जित कर लेते हैं।
- (घ) ऋणावेशित हो जाती है तथा कपड़ा धनावेशित हो जाता है।
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: विज्ञान की मान्यता के अनुसार, जब काँच की छड़ को रेशम के कपड़े से रगड़ा जाता है, तो कुछ आवेश (इलेक्ट्रॉन) काँच की छड़ से निकलकर रेशम के कपड़े में चले जाते हैं। आवेश खोने के कारण काँच की छड़ धनावेशित (Positively Charged) हो जाती है, और वह अतिरिक्त आवेश प्राप्त करने के कारण रेशम का कपड़ा ऋणावेशित (Negatively Charged) हो जाता है।
- (क) सजातीय आवेश एक दूसरे को आकर्षित करते हैं। (F)
व्याख्या: यह कथन गलत है। विज्ञान के नियम के अनुसार सजातीय (एक जैसे) आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित (Repel) करते हैं, जबकि विजातीय (अलग-अलग) आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। - (ख) आवेशित काँच की छड़ आवेशित प्लास्टिक स्ट्रा को आकर्षित करती है। (T)
व्याख्या: यह कथन सही है। आवेशित काँच की छड़ पर धनावेश (+) होता है और आवेशित प्लास्टिक स्ट्रॉ पर ऋणावेश (-) होता है। विजातीय (विपरीत) आवेश होने के कारण वे एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। - (ग) तड़ित चालक किसी भवन की तड़ित से सुरक्षा नहीं कर सकता। (F)
व्याख्या: यह कथन गलत है। तड़ित चालक (Lightning Conductor) विशेष रूप से इसी काम के लिए बनाया जाता है। यह तड़ित (बिजली) के भारी आवेश को भवन को नुकसान पहुँचाए बिना सुरक्षित रूप से जमीन (पृथ्वी) में भेज देता है। - (घ) भूकम्प की भविष्यवाणी की जा सकती है। (F)
व्याख्या: यह कथन गलत है। मौसम विज्ञान तड़ित और बारिश की भविष्यवाणी कर सकता है, लेकिन अभी तक ऐसी कोई तकनीक विकसित नहीं हुई है जिससे भूकम्प के आने के सटीक समय और स्थान की भविष्यवाणी की जा सके।
उत्तर: सर्दियों में ऊनी स्वेटर उतारते समय हमारे शरीर (या अन्य वस्त्रों) और स्वेटर के बीच घर्षण (rubbing) होता है। इस घर्षण के कारण स्वेटर आवेशित (Charged) हो जाता है। जब इन स्थिर आवेशों का विसर्जन (Discharge) होता है, तो ऊर्जा प्रकाश (चिंगारी) और ध्वनि (चट-चट की आवाज़) के रूप में उत्पन्न होती है।
उत्तर: मानव शरीर विद्युत का सुचालक (Good Conductor) होता है। जब हम किसी आवेशित वस्तु को हाथ से छूते हैं, तो वस्तु का सारा आवेश हमारे शरीर से होते हुए पृथ्वी (जमीन) में चला जाता है। इस प्रक्रिया को भूसम्पर्कण (Earthing) कहते हैं। इसी कारण वह वस्तु अपना आवेश खो देती है (अनावेशित हो जाती है)।
उत्तर: भूकम्पों की विनाशी ऊर्जा मापने वाले पैमाने का नाम रिक्टर पैमाना (Richter Scale) है। हाँ, रिक्टर पैमाने पर 3 माप वाले भूकम्प को भूकम्पलेखी (Seismograph) उपकरण द्वारा आसानी से रिकॉर्ड किया जा सकेगा। नहीं, इससे अधिक हानि नहीं होगी क्योंकि आमतौर पर 7 से अधिक माप वाले भूकम्प ही अधिक विनाशकारी होते हैं।
उत्तर: तड़ित (बिजली गिरने) से सुरक्षा के तीन प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं:
- तड़ित झंझा के समय खुले मैदान या छत पर न रहें; तुरंत किसी सुरक्षित पक्के मकान या भवन में आश्रय लें।
- घर के भीतर टीवी, कम्प्यूटर आदि विद्युत उपकरणों के प्लग सॉकेट से निकाल दें और धातु के पाइपों को न छुएँ।
- यदि आप खुले जंगल में हैं, तो छोटे पेड़ों के नीचे आश्रय लें। यदि कोई आश्रय न हो, तो जमीन पर घुटनों के बल सिमटकर बैठ जाएँ और सिर को हाथों के बीच रख लें।
उत्तर: दो आवेशित गुब्बारों पर एक ही प्रकार का (सजातीय) आवेश होता है। चूँकि समान आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित (Repel) करते हैं, इसलिए वे एक-दूसरे से दूर हटते हैं। दूसरी ओर, जब किसी आवेशित गुब्बारे को एक अनावेशित (बिना चार्ज वाले) गुब्बारे के पास लाया जाता है, तो अनावेशित गुब्बारे की पास वाली सतह पर प्रेरण (Induction) के कारण विपरीत आवेश उत्पन्न हो जाता है। विपरीत (विजातीय) आवेश हमेशा एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं, इसीलिए अनावेशित गुब्बारा आवेशित गुब्बारे की ओर खिंच जाता है।
उत्तर: किसी वस्तु पर विद्युत आवेश है या नहीं, इसकी पहचान करने वाले उपकरण को सरल विद्युतदर्शी (Electroscope) कहते हैं।
बनावट एवं कार्यविधि: इसमें एक काँच की खाली बोतल होती है। इसके मुँह पर एक गत्ते का टुकड़ा लगा होता है, जिसके बीच से एक धातु की पेपर-क्लिप घुसाई जाती है। क्लिप के निचले सिरे पर ऐलुमिनियम पन्नी की दो छोटी पट्टियाँ लटकाई जाती हैं।
जब किसी आवेशित वस्तु (जैसे रगड़ी हुई रिफिल) को क्लिप के ऊपरी सिरे से स्पर्श कराते हैं, तो विद्युत आवेश धातु की क्लिप से होता हुआ दोनों पट्टियों तक पहुँच जाता है। चूँकि दोनों पट्टियों पर एक समान (सजातीय) आवेश आता है, वे एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करती हैं और फैल जाती हैं। पट्टियों का यह फैलना सिद्ध करता है कि वस्तु आवेशित है।
चित्र 12.4 : सरल विद्युतदर्शी (Electroscope) का आरेख जो विद्युत आवेश की पहचान करता है।
उत्तर: भारत के तीन अत्यधिक भूकम्प आशंकित (भ्रंश क्षेत्र / Fault Zones) राज्य निम्नलिखित हैं:
- कश्मीर (जम्मू और कश्मीर)
- गुजरात (विशेषकर कच्छ का रन)
- असम (पूर्वोत्तर क्षेत्र के अंतर्गत)
उत्तर: यदि मैं घर से बाहर हूँ और भूकम्प आ जाए, तो मैं निम्नलिखित सावधानियाँ बरतूँगा:
- इमारतों, ऊँचे वृक्षों और ऊपर जाती विद्युत लाइनों से दूर किसी खुले स्थान पर चला जाऊँगा और धरती पर लेट जाऊँगा।
- यदि मैं किसी बस या कार में यात्रा कर रहा हूँ, तो मैं बाहर नहीं निकलूँगा। मैं ड्राइवर से कहूँगा कि वह वाहन को धीरे-धीरे किसी सुरक्षित खुले स्थान तक ले चले।
- जब तक भूकम्प के झटके पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाते, मैं वाहन के अंदर या खुले स्थान पर ही सुरक्षित रहूँगा।
उत्तर: नहीं, तड़ित झंझा (गरज वाले तूफ़ान) के समय हम छाता (छतरी) लेकर बाहर बिल्कुल नहीं जाएँगे।
छतरी की डंडी और उसका ऊपरी सिरा धातु (Metal) का बना होता है, जो विद्युत का सुचालक है। आसमान से गिरने वाली बिजली (तड़ित) हमेशा ऊँची और नुकीली धात्विक वस्तुओं पर आसानी से आघात करती है। ऐसे में तड़ित छतरी पर गिर सकती है और छतरी पकड़ने वाले व्यक्ति के शरीर से होकर गुजर सकती है, जिससे उसे भयंकर और जानलेवा विद्युत आघात लग सकता है।
शिक्षक ध्यान दें: कक्षा में क्रियाकलाप या अभ्यास प्रश्न कराते समय बच्चों को ‘भूसम्पर्कण’ और ‘तड़ित से सुरक्षा’ के वैज्ञानिक कारणों (Scientific Reasons) पर चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित करें। बहुविकल्पीय और सत्य/असत्य प्रश्नों के ‘क्यों’ और ‘कैसे’ पर जोर दें, जिससे उनका वैचारिक ज्ञान (Conceptual Knowledge) मजबूत हो सके।
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छात्रों, इस अध्याय (कुछ प्राकृतिक परिघटनाएँ) के हस्तलिखित नोट्स (Handwritten Notes) और आसान भाषा में हल किए गए प्रश्नों का पीडीएफ डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:
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Suraj Kumar Mishra