Bihar Board Class 8 History Chapter 8 Solution Hindi: राष्ट्रीय आंदोलन का संघटन (1870-1947)
क्या आप जानते हैं कि भारत की आज़ादी की नींव केवल युद्धों से नहीं, बल्कि वैचारिक क्रांति और जन-आंदोलनों से रखी गई थी? bihar board class 8 history chapter 8 solution hindi के इस विशेष लेख में, हम 1870 से लेकर 1947 तक के उस रोमांचक सफर को समझेंगे जिसने मुट्ठी भर प्रदर्शनकारियों को एक विशाल राष्ट्रीय शक्ति में बदल दिया। यदि आप कक्षा 8 के छात्र हैं या शिक्षक, तो यह लेख आपके लिए इतिहास को रटने के बजाय उसे जीने का माध्यम बनेगा।
राष्ट्रवाद का उदय और प्रारंभिक संगठन
1870 के दशक तक आते-आते भारतीयों के मन में यह सवाल उठने लगा था कि “यह देश किसके लिए है?” इसका उत्तर मिला – भारत यहाँ रहने वाले तमाम लोगों का घर है। लेकिन ब्रिटिश शासन भारत के संसाधनों और लोगों के जीवन पर नियंत्रण कर रहा था। इस चेतना ने राजनीतिक संगठनों को जन्म दिया।
1870 और 1880 के दशक में कई संगठनों की स्थापना हुई, जैसे पूना सार्वजनिक सभा, इंडियन एसोसिएशन, और मद्रास महाजन सभा। इन संगठनों का मुख्य लक्ष्य भारतीयों को सशक्त बनाना और उन्हें अपने देश के मामलों में निर्णय लेने का अधिकार दिलाना था। 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना ने इस आंदोलन को एक राष्ट्रीय स्वरूप दिया।
कांग्रेस के शुरुआती 20 वर्षों (1885-1905) को ‘नरमपंथी’ चरण कहा जाता है। इनका मानना था कि अंग्रेज न्यायप्रिय हैं और वे बातचीत के माध्यम से सुधार लाएंगे। वे “प्रार्थना और याचिका” की राजनीति में विश्वास करते थे।
इसके विपरीत, लाल-बाल-पाल (लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और विपिन चंद्र पाल) जैसे नेताओं ने अधिक आमूल परिवर्तनवादी (Radical) रास्ता अपनाया। तिलक ने नारा दिया – “स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँँगा!” उन्होंने आत्मनिर्भरता और रचनात्मक कार्य पर जोर दिया।
- 1. 1885 में कांग्रेस के पहले अधिवेशन में केवल 72 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था।
- 2. बाल गंगाधर तिलक ने लोगों में राष्ट्रवाद जगाने के लिए ‘केसरी’ नामक अखबार निकाला।
- 3. गांधीजी ने साबरमती से दांडी तक 240 मील की यात्रा कर नमक कानून तोड़ा था।
- 4. 1930 में पहली बार ‘पूर्ण स्वराज्य’ के लिए स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था।
- 5. सुभाष चंद्र बोस ने ‘आज़ाद हिंद फ़ौज’ का पुनर्गठन कर ‘दिल्ली चलो’ का नारा दिया।
- संप्रभु: बाहरी हस्तक्षेप के बिना स्वतंत्र रूप से कदम उठाने की क्षमता।
- सार्वजनिक: जो सब लोगों का हो या सबके लिए हो।
- निरस्त करना: किसी कानून को आधिकारिक रूप से समाप्त करना।
- क्रांतिकारी हिंसा: समाज में बदलाव के लिए ताकत का प्रयोग।
- परिषद: सलाह देने या नियम बनाने वाली निर्वाचित संस्था।
- सत्याग्रह: सत्य और अहिंसा पर आधारित शांतिपूर्ण विरोध।
- स्वदेशी: अपने देश में निर्मित वस्तुओं का उपयोग।
- पृथक निर्वाचन: धर्म या जाति के आधार पर अलग चुनाव क्षेत्र।
- असहयोग: शासन व्यवस्था के साथ सहयोग न करना।
- पूर्ण स्वराज्य: पूरी तरह से स्वतंत्रता या अपना राज।
पाठ के बीच की गतिविधियाँ (Gatiwidhi Solution)
उत्तर: मीरा बेन के अनुसार, आज़ादी का मतलब केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं थी, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलन बिठाकर जीना था। उनका मानना था कि यदि भारत पश्चिम की अंधी नकल करते हुए केवल औद्योगीकरण पर ध्यान देगा, तो वह जल्द ही विनाश की ओर बढ़ जाएगा। असली आज़ादी नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा में थी।
उत्तर: स्वदेशी आंदोलन ने लोगों में आत्मनिर्भरता की भावना जगाई। लोगों ने विदेशी सामानों का बहिष्कार किया, सरकारी शिक्षण संस्थानों को छोड़ दिया और भारतीय उद्योगों व राष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा दिया। इसने ‘वंदे मातरम’ के नारे के साथ पूरे देश में एकता का संचार किया।
अभ्यास के प्रश्न-उत्तर (NCERT Solutions)
उत्तर: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारत के तमाम लोगों के पक्ष में बोल रही थी, चाहे वे किसी भी वर्ग, रंग, जाति, भाषा या लिंग के हों। उनका मानना था कि भारत यहाँ रहने वाले सभी लोगों का घर है और अंग्रेज यहाँ के संसाधनों पर अवैध कब्जा जमाए हुए हैं।
उत्तर: पहले विश्व युद्ध ने भारत की आर्थिक स्थिति बदल दी:
- ब्रिटिश भारत सरकार के रक्षा व्यय में भारी इजाफा हुआ।
- खर्चों की भरपाई के लिए सरकार ने व्यक्तिगत आय और व्यावसायिक लाभ पर कर (Tax) बढ़ा दिया।
- युद्ध की जरूरतों के कारण कीमतों में भारी उछाल आया, जिससे आम जनता की परेशानियाँ बढ़ गईं।
- दूसरी ओर, युद्ध सामग्री की आपूर्ति के कारण भारतीय उद्योगों को विस्तार का मौका मिला।
उत्तर: 1940 में मुस्लिम लीग ने देश के उत्तर-पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों में मुसलमानों के लिए “स्वतंत्र राज्यों” (Independent States) की माँग का एक प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव में ‘विभाजन’ या ‘पाकिस्तान’ शब्द का ज़िक्र नहीं था, लेकिन इसने भविष्य के पृथक राष्ट्र की नींव रख दी थी।
उत्तर: कांग्रेस के शुरुआती नेता जैसे दादाभाई नौरोजी और सुरेन्द्रनाथ बनर्जी मध्यमार्गी (Moderates) कहलाते थे। वे ब्रिटिश शासन के खिलाफ शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीका अपनाना चाहते थे:
- वे अखबारों के माध्यम से ब्रिटिश सरकार को भारतीय समस्याओं से अवगत कराते थे।
- वे न्याय और स्वतंत्रता के ब्रिटिश सिद्धांतों में विश्वास करते थे।
- वे भाषणों और लेखों द्वारा जनमत तैयार करना चाहते थे ताकि अंग्रेज उनकी मांगों पर विचार करें।
उत्तर: आमूल परिवर्तनवादियों (जैसे तिलक, लाजपत राय) की राजनीति मध्यमार्गियों से काफी अलग थी:
- मध्यमार्गी “प्रार्थना” में विश्वास करते थे, जबकि रेडिकल्स “आत्मनिर्भरता और रचनात्मक कार्य” पर जोर देते थे।
- रेडिकल्स का मानना था कि लोगों को सरकार के “नेक इरादों” पर भरोसा करने के बजाय अपनी ताकत पर भरोसा करना चाहिए।
- रेडिकल्स “स्वराज्य” को अपना अधिकार मानते थे, जबकि मध्यमार्गी केवल सुधार चाहते थे।
उत्तर: असहयोग आंदोलन ने देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय रूप लिए:
- खेड़ा (गुजरात): पाटीदार किसानों ने अंग्रेजों की भारी लगान माँग के खिलाफ अहिंसक अभियान चलाया।
- तटीय आंध्र और तमिलनाडु: शराब की दुकानों की पिकेटिंग की गई और वन सत्याग्रह हुए।
- सिंध (अब पाकिस्तान): मुस्लिम व्यापारियों और किसानों ने खिलाफत के आह्वान का समर्थन किया।
- पंजाब: सिखों के अकाली आंदोलन ने भ्रष्ट महंतों को हटाने के लिए प्रदर्शन किया।
उत्तर: गांधीजी ने नमक कानून तोड़ने का फैसला इसलिए लिया क्योंकि नमक जीवन की बुनियादी ज़रूरत थी। उस समय नमक बनाने पर सरकार का एकाधिकार था और उस पर टैक्स लगाया जाता था। गांधीजी का मानना था कि भोजन की इस आवश्यक वस्तु पर टैक्स लगाना सरासर पाप है। दांडी यात्रा के माध्यम से उन्होंने इस कानून को चुनौती दी और देश के सभी वर्गों को एकजुट किया।
उत्तर: पाकिस्तान के जन्म की मुख्य घटनाएँ निम्नलिखित थीं:
- 1937 के चुनाव: मुस्लिम लीग को लगा कि वह एक अल्पसंख्यक है और उसे हिंदू बहुल देश में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा।
- कांग्रेस का रुख: कांग्रेस द्वारा लीग के साथ मिलकर सरकार बनाने से इनकार करने ने दूरी बढ़ा दी।
- 1940 का प्रस्ताव: लीग ने मुसलमानों के लिए स्वतंत्र राज्यों की माँग रखी।
- कैबिनेट मिशन (1946): मिशन की विफलता के बाद लीग ने ‘प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस’ मनाया जिससे दंगे भड़क गए।
- विभाजन: अंततः लॉर्ड माउंटबेटन की योजना के तहत भारत का विभाजन तय हुआ।
उत्तर (बिहार के संदर्भ में): बिहार में राष्ट्रीय आंदोलन अत्यंत उग्र और संगठित था। चंपारण सत्याग्रह से गांधीजी ने यहीं से भारत में अपनी पहली बड़ी जीत दर्ज की थी। असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान पटना, मुजफ्फरपुर और गया जैसे शहरों में भारी प्रदर्शन हुए। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बिहार में रेल पटरियां उखाड़ दी गईं और समानांतर सरकारें तक बनाई गईं।
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