नमस्ते छात्रों, आज हम Bihar Board Class 8 Geography Chapter 2 के सभी प्रश्न-उत्तर और NCERT Solutions को विस्तार से समझेंगे। यह चैप्टर ‘भूमि, मृदा, जल, प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवन’ परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
प्यारे बच्चों! कल्पना कीजिए कि आप सुबह सोकर उठें और नल में पानी न हो, नाश्ते के लिए अनाज न हो और साँस लेने के लिए ताजी हवा न हो। डरावना लगता है न?
आज हम जिस चैप्टर को पढ़ने वाले हैं, वह सिर्फ ‘भूगोल’ नहीं है, बल्कि हमारी जिंदगी की डोर (Life Line) है। इस चैप्टर में हम जानेंगे कि आखिर क्यों तंजानिया की ‘माम्बा’ और न्यूज़ीलैंड का ‘पीटर’ अलग-अलग तरह की जिंदगी जीते हैं। चलिए, इस सफर की शुरुआत करते हैं!
📖 दो बच्चों की कहानी: माम्बा और पीटर
🌍 माम्बा (तंजानिया, अफ्रीका): माम्बा सुबह बहुत जल्दी उठकर दूर से पानी लाती है। उसके पिता पथरीली जमीन पर बड़ी मुश्किल से कुछ मक्का और सेम उगा पाते हैं। यह मेहनत के बावजूद साल भर के खाने के लिए काफी नहीं है।
🐑 पीटर (न्यूज़ीलैंड): पीटर का परिवार ऊन (Wool) का कारखाना चलाता है। उनके पास हरे-भरे घास के मैदान हैं जहाँ वैज्ञानिक तरीके से भेड़ पालन होता है। वे जैविक कृषि (Organic Farming) भी करते हैं।
🤔 सवाल: दोनों की जिंदगी में इतना अंतर क्यों?
जवाब: भूमि की गुणवत्ता, मृदा (Soil), जल और तकनीक के कारण।
🏞️ 1. भूमि संसाधन (Land Resources)
भूमि सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों में से एक है। लेकिन क्या आप जानते हैं? पूरी पृथ्वी का केवल 30% हिस्सा ही भूमि है और इसमें भी हर जगह रहने लायक नहीं है।
- विरल जनसंख्या (Low Population): पहाड़ों की खड़ी ढलान, रेगिस्तान, घने जंगल और जल भराव वाले क्षेत्र।
- सघन जनसंख्या (High Population): नदी घाटियाँ और उपजाऊ मैदान (जैसे भारत में गंगा का मैदान)।
वह भूमि जिस पर पूरे समुदाय का अधिकार हो (जैसे चारागाह, गाँव का तालाब, या पार्क)। इसे सामुदायिक भूमि भी कहते हैं।
पृथ्वी की सतह पर दानेदार कणों के आवरण की पतली परत को मृदा कहते हैं। मृदा बनने में सैकड़ों साल लग जाते हैं। केवल 1 सेंटीमीटर मृदा बनने में कई सौ वर्ष लग सकते हैं!
चित्र 2.3: मृदा परिच्छेदिका (Soil Profile) – मृदा की विभिन्न परतें
मृदा निर्माण के कारक (Factors of Soil Formation):
मृदा का बनना एक जटिल प्रक्रिया है जो कई कारकों पर निर्भर करती है। इसे नीचे दिए गए चार्ट से आसानी से समझा जा सकता है:
चित्र 2.4: मृदा निर्माण को प्रभावित करने वाले कारक
- जनक शैल (Parent Rock): यह मृदा का रंग और गठन तय करती है।
- जलवायु (Climate): तापमान और बारिश अपक्षय (Weathering) को प्रभावित करते हैं।
- उच्चावच (Relief): ढलान तय करती है कि मिट्टी कितनी जमा होगी।
- जैव पदार्थ (Flora/Fauna): ह्यूमस (Humus) बनाने में मदद करते हैं।
- समय (Time): यह मिट्टी की परत की मोटाई तय करता है।
मृदा अपरदन (Soil Erosion) को रोकने के लिए हमें इन तरीकों को अपनाना चाहिए:
| विधि (Method) | विवरण (Description) |
|---|---|
| मल्च बनाना (Mulching) | पौधों के बीच खाली जमीन को घास-फूस से ढक देना ताकि नमी बनी रहे। |
| वेदिका फार्म (Terrace Farming) | पहाड़ी ढलानों पर सीढ़ीदार खेत बनाना ताकि बारिश का पानी मिट्टी न बहा ले जाए। |
| समोच्चरेखीय जुताई (Contour Ploughing) | पहाड़ की ढलान के समानांतर जुताई करना। |
| रक्षक मेखला (Shelter Belts) | खेतों के किनारे पेड़ों की कतार लगाना ताकि हवा की गति कम हो सके। |
चित्र 2.5: वेदिका फार्म (Terrace Farming) – मृदा संरक्षण की विधि
पृथ्वी को ‘जल ग्रह’ (Blue Planet) कहा जाता है क्योंकि इसका 70% भाग पानी है। लेकिन रुकिए! पीने लायक मीठा पानी (Freshwater) केवल 2.7% है।
समाधान:
- रेनवाटर हार्वेस्टिंग (वर्षा जल संग्रहण)।
- ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) और स्प्रिंकलर का उपयोग।
- प्रदूषित जल को साफ (Treatment) करके नदियों में छोड़ना।
चित्र 2.9: स्प्रिंकलर (Sprinkler) सिंचाई पद्धति – जल संरक्षण
📝 Bihar Board Class 8 Geography Chapter 2 Question Answer
यहाँ आपकी पाठ्यपुस्तक के सभी प्रश्नों (1 से 4 तक) के विस्तृत उत्तर दिए गए हैं।
प्रश्न 1. निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
- तापमान (Temperature): तापमान में उतार-चढ़ाव चट्टानों के टूटने (अपक्षय) का कारण बनता है।
- वर्षण (Rainfall): बारिश से चट्टानों में नमी आती है, जिससे वे कमजोर होकर मिट्टी में बदल जाती हैं।
- वनोन्मूलन (Deforestation): वनों की अंधाधुंध कटाई से मिट्टी की पकड़ कमजोर हो जाती है।
- अतिचारण (Overgrazing): पशुओं द्वारा अत्यधिक चराई से जमीन की ऊपरी परत हट जाती है।
- राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य: सरकार ने नेशनल पार्क्स और वाइल्डलाइफ सेंचुरी बनाई हैं जहाँ जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रखा जाता है।
- CITES समझौता: सरकार ने अवैध शिकार और जानवरों के अंगों के व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
- वर्षा जल संग्रहण (Rainwater Harvesting): बारिश के पानी को टंकियों में जमा करके उपयोग करना।
- टपकन सिंचाई (Drip Irrigation): शुष्क प्रदेशों में पौधों की जड़ों में बूंद-बूंद पानी देना।
- नहरों को पक्का करना: रिसाव से होने वाली पानी की बर्बादी को रोकने के लिए नहरों को पक्का करना।
प्रश्न 2. सही उत्तर को चिह्नित कीजिए (MCQ):
(क्योंकि समय और जैव पदार्थ कारक हैं, जबकि गठन एक परिणाम है।)
(पहाड़ी ढलानों पर सीढ़ीदार खेत बनाकर मिट्टी को बहने से रोका जाता है।)
(ख) नल को उपयोग के बाद तुरंत बंद कर देना चाहिए।
(ग) खरीददारी के बाद पॉली पैक को नष्ट कर देना चाहिए।
(पॉली पैक यानी प्लास्टिक को जलाने या फेंकने से प्रदूषण होता है, यह संरक्षण के खिलाफ है।)
प्रश्न 3. निम्नलिखित का मिलान कीजिए:
| शब्द | सही मिलान |
|---|---|
| (क) भूमि उपयोग | (iii) भूमि का उत्पादनकारी उपयोग |
| (ख) ह्यूमस | (iv) ऊपरी मृदा पर निक्षेपित जैव पदार्थ |
| (ग) चट्टान बाँध | (i) मृदा अपरदन को रोकना |
| (घ) जैवमंडल | (ii) स्थलमंडल, जलमंडल और वायुमंडल के बीच जुड़ा एक संकरा क्षेत्र |
प्रश्न 4. सत्य/असत्य और कारण:
💡 क्या आप जानते हैं? (Did You Know?)
- एक टपकता हुआ नल (Leaking Tap) एक वर्ष में लगभग 1,200 लीटर पानी बर्बाद कर देता है।
- गिद्ध (Vulture) पर्यावरण के सफाईकर्मी हैं। वे मरे हुए जानवरों को खाते हैं। लेकिन ‘डिक्लोफिनैक’ (एक दर्द निवारक दवा) खाने वाले पशुओं के मांस से गिद्ध मर रहे हैं। हमें उन्हें बचाना होगा!
Exam Tip 🎯: परीक्षा में अक्सर ‘मृदा परिच्छेदिका’ (Soil Profile) का चित्र बनाने को आता है। इसे जरूर याद कर लें। साथ ही, ‘CITES’ की फुल फॉर्म याद रखें: Convention on International Trade in Endangered Species.
परीक्षा से पहले इन बिंदुओं को जरूर दोहराएं:
- भूमि: केवल 30% भाग रहने योग्य है। बढ़ती जनसंख्या के कारण भूमि पर दबाव बढ़ रहा है।
- मृदा: यह एक नवीकरणीय संसाधन है लेकिन इसे बनने में बहुत समय लगता है। मल्चिंग और वेदिका फार्म से इसे बचाया जा सकता है।
- जल: अलवण जल (Freshwater) केवल 1% मानव उपयोग के लिए उपलब्ध है।
- वन्य जीवन: वनस्पति और जीव-जंतु मिलकर पारितंत्र (Ecosystem) बनाते हैं। हमें इनका संरक्षण करना चाहिए।
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Join Telegram Channelनिष्कर्ष (Conclusion)
दोस्तों, उम्मीद है कि अब आप समझ गए होंगे कि माम्बा और पीटर की जीवनशैली में इतना अंतर क्यों है। संसाधन सीमित हैं, इसलिए इनका उपयोग समझदारी से करें। अगर आपके कोई सवाल हैं, तो नीचे कमेंट करें! 👇
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Concept & Created by:
Suraj Kumar Mishra