Bihar Board Class 8 Civics Chapter 6 Solution

🔔 लेटेस्ट नोट्स और PDF के लिए अभी जुड़ें:

🎓 Class: 8 | 📚 Subject: सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन | 📝 Chapter: 6 – हाशियाकरण से निपटना

Bihar Board Class 8 Civics Chapter 6 Solution Hindi: हाशियाकरण से निपटना

नमस्ते छात्रों! आज हम bihar board class 8 civics chapter 6 solution hindi के अंतर्गत “हाशियाकरण से निपटना” अध्याय का गहराई से अध्ययन करेंगे। पिछले अध्याय में हमने समझा था कि हाशियाकरण क्या है, लेकिन इस अध्याय में हम जानेंगे कि हाशिये पर रहने वाले समुदाय (जैसे दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक) किस प्रकार अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते हैं और भारतीय संविधान उन्हें क्या सुरक्षा प्रदान करता है। यह लेख आपकी परीक्षा और समझ दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

हाशियाकरण के विरुद्ध संघर्ष और मौलिक अधिकार

📖 संविधान की भूमिका

भारत के संविधान में ऐसे कई सिद्धांत दिए गए हैं जो हमारे समाज को लोकतांत्रिक बनाते हैं। मौलिक अधिकार संविधान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं जो सभी नागरिकों को समान रूप से उपलब्ध हैं। जहाँ तक हाशियाई समुदायों का सवाल है, उन्होंने इन अधिकारों का दो तरह से इस्तेमाल किया है:

  1. अपने मौलिक अधिकारों पर जोर देकर उन्होंने सरकार को अपने साथ हुए अन्याय पर ध्यान देने के लिए मजबूर किया है।
  2. उन्होंने इस बात के लिए दबाव डाला है कि सरकार इन कानूनों को सही ढंग से लागू करे।

संविधान के अनुच्छेद 17 के अनुसार, अस्पृश्यता या छुआछूत का उन्मूलन कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब कोई भी व्यक्ति दलितों को पढ़ने, मंदिरों में जाने और सार्वजनिक सुविधाओं का इस्तेमाल करने से नहीं रोक सकता। इसी तरह, अनुच्छेद 15 कहता है कि भारत के किसी भी नागरिक के साथ धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा। निष्कर्ष यह है कि संविधान हाशिये पर मौजूद लोगों को सम्मान और समानता का अधिकार देता है।


हाशियाई समूहों के लिए विशेष कानून और नीतियां

📖 सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना

संविधान को लागू करने के लिए राज्य और केंद्र सरकारें हाशियाई समुदायों के लिए विशिष्ट योजनाएँ बनाती हैं। आरक्षण की व्यवस्था इसी का एक हिस्सा है। शिक्षा संस्थानों और सरकारी नौकरियों में दलितों और आदिवासियों के लिए सीटें आरक्षित की जाती हैं। इसके पीछे तर्क यह है कि हमारे जैसे समाज में जहाँ सदियों तक कुछ तबकों को पढ़ने-लिखने और आगे बढ़ने के मौकों से वंचित रखा गया है, वहाँ लोकतांत्रिक सरकार को इन समूहों की सहायता के लिए सक्रिय कदम उठाने चाहिए।

रत्नम की कहानी: रत्नम एक गाँव का युवक था जिसने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। उसके गाँव में एक रस्म थी जिसमें दलितों को पुजारियों के पैर धोने के पानी से नहाना पड़ता था। रत्नम ने इस रस्म को मानने से इनकार कर दिया। इसके कारण उसका सामाजिक बहिष्कार किया गया और उसके झोपड़े को जला दिया गया। रत्नम ने हार नहीं मानी और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत मामला दर्ज कराया। यह कहानी दिखाती है कि कैसे कानून हाशिये पर पड़े लोगों को सुरक्षा प्रदान करता है।

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989

📖 दमनकारी समुदायों के खिलाफ कानून

यह कानून 1989 में दलितों और आदिवासियों की माँगों के जवाब में बनाया गया था। इस कानून में अपराधों की कई श्रेणियां हैं:

  • अपमानजनक कृत्य: किसी दलित या आदिवासी को कोई अखाद्य पदार्थ पीने या खाने के लिए मजबूर करना।
  • मानवीय गरिमा का हनन: उन्हें नंगा करके घुमाना या उनके चेहरे पर रंग लगाना।
  • संसाधनों पर कब्जा: दलितों या आदिवासियों की जमीन पर कब्जा करना या उनसे बेगार करवाना।

निष्कर्ष यह है कि 1989 का यह कानून पीड़ितों को न्याय दिलाने और अपराधियों को दंडित करने का एक शक्तिशाली हथियार है।


अध्याय के मुख्य रोचक तथ्य
  • तथ्य 1: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 17 छुआछूत को पूरी तरह प्रतिबंधित करता है।
  • तथ्य 2: 1989 का अधिनियम विशेष रूप से दलितों और आदिवासियों के विरुद्ध होने वाले हिंसक अपराधों को रोकने के लिए बना था।
  • तथ्य 3: आरक्षण की नीति का लाभ उठाने के लिए दलितों और आदिवासियों को अपनी जाति या जनजाति का प्रमाण पत्र देना होता है।
  • तथ्य 4: सी.के. जानू जैसे आदिवासी कार्यकर्ताओं ने जमीन की वापसी के लिए संघर्ष किया है।
  • तथ्य 5: हाथ से मैला उठाने की प्रथा को 1993 और 2013 के कानूनों द्वारा गैर-कानूनी घोषित किया गया है।

महत्वपूर्ण शब्दावली (Vocabulary Box)
  • आग्रही: अपनी बात को जोर देकर रखने वाला व्यक्ति या समूह।
  • बहिष्कार: किसी व्यक्ति या समूह को समाज या समूह से बाहर निकाल देना।
  • नीति: एक घोषित कार्यदिशा जो भविष्य का रास्ता तय करती है।
  • अस्पृश्यता: जाति के आधार पर कुछ लोगों को अछूत मानने की बुराई।
  • हाशियाकरण: किसी समुदाय को समाज की मुख्यधारा से बाहर कर देना।
  • अत्याचार: किसी के विरुद्ध किया गया क्रूर या अपमानजनक व्यवहार।
  • वर्चस्व: दूसरे समूह पर शक्ति या प्रभाव जमाना।
  • सांत्वना: दुख की स्थिति में दिया जाने वाला सहारा।
  • परिष्कार: किसी चीज को सुधारना या शुद्ध करना।
  • निवारण: किसी समस्या या बुराई को रोकना या दूर करना।

अध्याय का सारांश (Chapter Summary)
इस अध्याय “हाशियाकरण से निपटना” में हमने सीखा कि लोकतांत्रिक समाज में हाशिये पर रहने वाले लोग चुपचाप भेदभाव नहीं सहते। वे शिक्षा, संघर्ष और कानूनों का सहारा लेकर समानता की माँग करते हैं। भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार (विशेषकर अनुच्छेद 15 और 17) दलितों के लिए सुरक्षा कवच हैं। सरकार की आरक्षण नीति ऐतिहासिक अन्यायों को सुधारने का एक प्रयास है। इसके अतिरिक्त, 1989 का कानून और मैला ढोने के विरुद्ध कानून यह सुनिश्चित करते हैं कि हर नागरिक मानवीय गरिमा के साथ जी सके।

NCERT अभ्यास प्रश्न-उत्तर (Complete Solutions)

प्रश्न 1. ऐसे दो मौलिक अधिकार बताइए जिनका दलित समुदाय गरिमापूर्ण और समानता के व्यवहार के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं?

उत्तर: दलित समुदाय निम्नलिखित दो मौलिक अधिकारों का उपयोग कर सकते हैं: 1. समानता का अधिकार (अनुच्छेद 15): इसके तहत धर्म, जाति या लिंग के आधार पर भेदभाव वर्जित है। 2. अस्पृश्यता का अंत (अनुच्छेद 17): यह कानूनन छुआछूत को अपराध घोषित करता है और दलितों को सार्वजनिक स्थानों के उपयोग का अधिकार देता है।


प्रश्न 2. रत्नम की कहानी और 1989 के कानून के प्रावधानों को पढ़िए। क्या आपको लगता है कि रत्नम ने इस कानून का सहारा क्यों लिया?

उत्तर: रत्नम ने 1989 के अधिनियम का सहारा इसलिए लिया क्योंकि गाँव के शक्तिशाली लोगों ने उसका सामाजिक बहिष्कार किया था और उसके घर को जला दिया था। 1989 का कानून विशेष रूप से ऐसे मामलों के लिए बना है जहाँ दलितों को अपमानित किया जाए या उनके संसाधनों को नुकसान पहुँचाया जाए।


प्रश्न 3. सी.के. जानू और अन्य आदिवासी कार्यकर्ताओं को ऐसा क्यों लगता है कि आदिवासी भी अपने परंपरागत संसाधनों के छीने जाने के खिलाफ 1989 के कानून का इस्तेमाल कर सकते हैं?

उत्तर: सी.के. जानू का तर्क है कि 1989 का कानून आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखल करने को अपराध मानता है। इस कानून की धारा के अनुसार, यदि कोई गैर-आदिवासी व्यक्ति आदिवासियों की जमीन पर कब्जा करता है, तो उसे सजा दी जा सकती है। इसलिए आदिवासी अपनी जमीन वापस पाने के लिए इस कानून का सहारा लेते हैं।


प्रश्न 4. निम्नलिखित कथनों को सही (✅) या गलत (❌) के रूप में चिह्नित करें और कारण स्पष्ट करें:
  • (क) अनुच्छेद 17 दलितों को मंदिर में प्रवेश से रोकने की अनुमति देता है। — गलत ❌
    कारण: अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता को समाप्त करता है और मंदिर प्रवेश जैसे अधिकारों को सुनिश्चित करता है।
  • (ख) 1989 का कानून केवल दलितों के लिए है। — गलत ❌
    कारण: यह कानून अनुसूचित जाति (दलित) और अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) दोनों समुदायों की सुरक्षा के लिए है।
  • (ग) आरक्षण केवल शिक्षा संस्थानों के लिए है। — गलत ❌
    कारण: आरक्षण शिक्षा के साथ-साथ सरकारी नौकरियों और विधायी निकायों में भी लागू है।

प्रश्न 5. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें:
  • भारत का संविधान सबको ______ का अधिकार देता है। (उत्तर: समानता)
  • हाथ से मैला उठाने की प्रथा को रोकने के लिए ______ में कानून बना। (उत्तर: 1993)
  • आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कार्यकर्ता ______ सक्रिय हैं। (उत्तर: सी.के. जानू)

प्रश्न 6. शब्द मिलान (Matching) करें:
  • अनुच्छेद 17 — अस्पृश्यता उन्मूलन
  • रत्नम — 1989 का कानून
  • हाथ से मैला उठाना — सफाई कर्मचारी
  • दलित — दमित या कुचला हुआ

Teacher Tip
छात्रों के लिए सलाह: इस अध्याय में अनुच्छेद 15, 17 और 1989 के अधिनियम को रटने के बजाय उनके पीछे के उद्देश्यों को समझें। परीक्षा में अक्सर रत्नम की कहानी के माध्यम से कानून के प्रभाव पर प्रश्न पूछे जाते हैं। BSEBHub के इन नोट्स को दो बार जरूर पढ़ें!

BSEBHub: Bihar Board & NCERT Solutions| Author: Suraj Mishra
⚖️
Intellectual Property Rights

This content is intellectually owned by BSEBHub.in.
Concept & Created by: Suraj Kumar Mishra


COPYRIGHT ACT 1957: बिना अनुमति के इस पोस्ट का उपयोग चोरी माना जाएगा और आपके खिलाफ बिना चेतावनी के DMCA / Copyright Action की जाएगी।
🎓 Research & Solutions by
Suraj Kumar Mishra
"Simplifying Education for Bihar's Future Leaders."

Leave a Comment