Bihar Board Class 8 Civics Chapter 6 Solution Hindi: हाशियाकरण से निपटना
नमस्ते छात्रों! आज हम bihar board class 8 civics chapter 6 solution hindi के अंतर्गत “हाशियाकरण से निपटना” अध्याय का गहराई से अध्ययन करेंगे। पिछले अध्याय में हमने समझा था कि हाशियाकरण क्या है, लेकिन इस अध्याय में हम जानेंगे कि हाशिये पर रहने वाले समुदाय (जैसे दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक) किस प्रकार अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते हैं और भारतीय संविधान उन्हें क्या सुरक्षा प्रदान करता है। यह लेख आपकी परीक्षा और समझ दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
हाशियाकरण के विरुद्ध संघर्ष और मौलिक अधिकार
भारत के संविधान में ऐसे कई सिद्धांत दिए गए हैं जो हमारे समाज को लोकतांत्रिक बनाते हैं। मौलिक अधिकार संविधान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं जो सभी नागरिकों को समान रूप से उपलब्ध हैं। जहाँ तक हाशियाई समुदायों का सवाल है, उन्होंने इन अधिकारों का दो तरह से इस्तेमाल किया है:
- अपने मौलिक अधिकारों पर जोर देकर उन्होंने सरकार को अपने साथ हुए अन्याय पर ध्यान देने के लिए मजबूर किया है।
- उन्होंने इस बात के लिए दबाव डाला है कि सरकार इन कानूनों को सही ढंग से लागू करे।
संविधान के अनुच्छेद 17 के अनुसार, अस्पृश्यता या छुआछूत का उन्मूलन कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब कोई भी व्यक्ति दलितों को पढ़ने, मंदिरों में जाने और सार्वजनिक सुविधाओं का इस्तेमाल करने से नहीं रोक सकता। इसी तरह, अनुच्छेद 15 कहता है कि भारत के किसी भी नागरिक के साथ धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा। निष्कर्ष यह है कि संविधान हाशिये पर मौजूद लोगों को सम्मान और समानता का अधिकार देता है।
हाशियाई समूहों के लिए विशेष कानून और नीतियां
संविधान को लागू करने के लिए राज्य और केंद्र सरकारें हाशियाई समुदायों के लिए विशिष्ट योजनाएँ बनाती हैं। आरक्षण की व्यवस्था इसी का एक हिस्सा है। शिक्षा संस्थानों और सरकारी नौकरियों में दलितों और आदिवासियों के लिए सीटें आरक्षित की जाती हैं। इसके पीछे तर्क यह है कि हमारे जैसे समाज में जहाँ सदियों तक कुछ तबकों को पढ़ने-लिखने और आगे बढ़ने के मौकों से वंचित रखा गया है, वहाँ लोकतांत्रिक सरकार को इन समूहों की सहायता के लिए सक्रिय कदम उठाने चाहिए।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989
यह कानून 1989 में दलितों और आदिवासियों की माँगों के जवाब में बनाया गया था। इस कानून में अपराधों की कई श्रेणियां हैं:
- अपमानजनक कृत्य: किसी दलित या आदिवासी को कोई अखाद्य पदार्थ पीने या खाने के लिए मजबूर करना।
- मानवीय गरिमा का हनन: उन्हें नंगा करके घुमाना या उनके चेहरे पर रंग लगाना।
- संसाधनों पर कब्जा: दलितों या आदिवासियों की जमीन पर कब्जा करना या उनसे बेगार करवाना।
निष्कर्ष यह है कि 1989 का यह कानून पीड़ितों को न्याय दिलाने और अपराधियों को दंडित करने का एक शक्तिशाली हथियार है।
- तथ्य 1: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 17 छुआछूत को पूरी तरह प्रतिबंधित करता है।
- तथ्य 2: 1989 का अधिनियम विशेष रूप से दलितों और आदिवासियों के विरुद्ध होने वाले हिंसक अपराधों को रोकने के लिए बना था।
- तथ्य 3: आरक्षण की नीति का लाभ उठाने के लिए दलितों और आदिवासियों को अपनी जाति या जनजाति का प्रमाण पत्र देना होता है।
- तथ्य 4: सी.के. जानू जैसे आदिवासी कार्यकर्ताओं ने जमीन की वापसी के लिए संघर्ष किया है।
- तथ्य 5: हाथ से मैला उठाने की प्रथा को 1993 और 2013 के कानूनों द्वारा गैर-कानूनी घोषित किया गया है।
- आग्रही: अपनी बात को जोर देकर रखने वाला व्यक्ति या समूह।
- बहिष्कार: किसी व्यक्ति या समूह को समाज या समूह से बाहर निकाल देना।
- नीति: एक घोषित कार्यदिशा जो भविष्य का रास्ता तय करती है।
- अस्पृश्यता: जाति के आधार पर कुछ लोगों को अछूत मानने की बुराई।
- हाशियाकरण: किसी समुदाय को समाज की मुख्यधारा से बाहर कर देना।
- अत्याचार: किसी के विरुद्ध किया गया क्रूर या अपमानजनक व्यवहार।
- वर्चस्व: दूसरे समूह पर शक्ति या प्रभाव जमाना।
- सांत्वना: दुख की स्थिति में दिया जाने वाला सहारा।
- परिष्कार: किसी चीज को सुधारना या शुद्ध करना।
- निवारण: किसी समस्या या बुराई को रोकना या दूर करना।
NCERT अभ्यास प्रश्न-उत्तर (Complete Solutions)
उत्तर: दलित समुदाय निम्नलिखित दो मौलिक अधिकारों का उपयोग कर सकते हैं: 1. समानता का अधिकार (अनुच्छेद 15): इसके तहत धर्म, जाति या लिंग के आधार पर भेदभाव वर्जित है। 2. अस्पृश्यता का अंत (अनुच्छेद 17): यह कानूनन छुआछूत को अपराध घोषित करता है और दलितों को सार्वजनिक स्थानों के उपयोग का अधिकार देता है।
उत्तर: रत्नम ने 1989 के अधिनियम का सहारा इसलिए लिया क्योंकि गाँव के शक्तिशाली लोगों ने उसका सामाजिक बहिष्कार किया था और उसके घर को जला दिया था। 1989 का कानून विशेष रूप से ऐसे मामलों के लिए बना है जहाँ दलितों को अपमानित किया जाए या उनके संसाधनों को नुकसान पहुँचाया जाए।
उत्तर: सी.के. जानू का तर्क है कि 1989 का कानून आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखल करने को अपराध मानता है। इस कानून की धारा के अनुसार, यदि कोई गैर-आदिवासी व्यक्ति आदिवासियों की जमीन पर कब्जा करता है, तो उसे सजा दी जा सकती है। इसलिए आदिवासी अपनी जमीन वापस पाने के लिए इस कानून का सहारा लेते हैं।
- (क) अनुच्छेद 17 दलितों को मंदिर में प्रवेश से रोकने की अनुमति देता है। — गलत ❌
कारण: अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता को समाप्त करता है और मंदिर प्रवेश जैसे अधिकारों को सुनिश्चित करता है। - (ख) 1989 का कानून केवल दलितों के लिए है। — गलत ❌
कारण: यह कानून अनुसूचित जाति (दलित) और अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) दोनों समुदायों की सुरक्षा के लिए है। - (ग) आरक्षण केवल शिक्षा संस्थानों के लिए है। — गलत ❌
कारण: आरक्षण शिक्षा के साथ-साथ सरकारी नौकरियों और विधायी निकायों में भी लागू है।
- भारत का संविधान सबको ______ का अधिकार देता है। (उत्तर: समानता)
- हाथ से मैला उठाने की प्रथा को रोकने के लिए ______ में कानून बना। (उत्तर: 1993)
- आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कार्यकर्ता ______ सक्रिय हैं। (उत्तर: सी.के. जानू)
- अनुच्छेद 17 — अस्पृश्यता उन्मूलन
- रत्नम — 1989 का कानून
- हाथ से मैला उठाना — सफाई कर्मचारी
- दलित — दमित या कुचला हुआ
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Suraj Kumar Mishra