क्या आपने कभी सोचा है कि अगर आपको सिर्फ आपके धर्म के कारण किसी स्कूल में दाखिला न मिले या किराए पर घर न मिले, तो आपको कैसा लगेगा? यह विचार ही हमें क्रोध और असुरक्षा से भर देता है। यही कारण है कि भारतीय संविधान ने धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत को अपनाया है। आज के इस विशेष लेख bihar board class 8 civics chapter 2 solution hindi में हम समझेंगे कि धर्म और राज्य का अलग होना क्यों जरूरी है और भारत में यह व्यवस्था कैसे काम करती है।
धर्मनिरपेक्षता क्या है? (What is Secularism)
साधारण शब्दों में कहें तो धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है—धर्म को राज्य (शासन) से अलग रखना। भारतीय संविधान के अनुसार, राज्य का अपना कोई राजकीय धर्म नहीं होगा और न ही वह किसी खास धर्म को बढ़ावा देगा।
इतिहास गवाह है कि जब भी किसी एक धर्म को राजकीय संरक्षण मिला है, दूसरे धर्म के लोगों के साथ भेदभाव हुआ है। उदाहरण के लिए, हिटलर के समय जर्मनी में यहूदियों पर हुए अत्याचार या सऊदी अरब में गैर-मुसलमानों को अपने मंदिर या चर्च बनाने की मनाही। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में धर्मनिरपेक्षता ही वह सूत्र है जो सबको बराबरी का हक देता है।
धर्म को राज्य से अलग रखना क्यों महत्वपूर्ण है?
लोकतांत्रिक समाजों में धर्म को राज्य से अलग रखने के मुख्य रूप से दो कारण हैं:
- बहुमत की निरंकुशता से बचाव: यदि राज्य की शक्ति किसी एक धर्म के पास होगी, तो वह बहुमत वाले लोग अल्पसंख्यक समूहों के साथ भेदभाव कर सकते हैं और उन्हें अपने धर्म का पालन करने से रोक सकते हैं।
- धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा: प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसंद का धर्म चुनने, उसे बदलने या उसकी व्याख्या करने की व्याख्या की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
भारतीय धर्मनिरपेक्षता अमेरिकी धर्मनिरपेक्षता से थोड़ी अलग है। जहाँ अमेरिका में राज्य और धर्म एक-दूसरे के मामले में बिल्कुल हस्तक्षेप नहीं करते, वहीं भारतीय धर्मनिरपेक्षता में राज्य धार्मिक बुराइयों (जैसे छुआछूत) को खत्म करने के लिए हस्तक्षेप कर सकता है।
भारतीय संविधान के अनुसार, राज्य निम्नलिखित तीन लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास करता है:
- कोई एक धार्मिक समुदाय किसी दूसरे धार्मिक समुदाय को न दबाए।
- एक ही धर्म के भीतर कुछ लोग अपने ही धर्म के अन्य सदस्यों को न दबाएँ।
- राज्य न तो किसी खास धर्म को थोपेगा और न ही लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता छीनेगा।
- सऊदी अरब में गैर-मुसलमानों को सार्वजनिक रूप से प्रार्थना करने की अनुमति नहीं है।
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत छुआछूत को प्रतिबंधित किया गया है, जो धार्मिक हस्तक्षेप का उदाहरण है।
- फ्रांस में 2004 में स्कूलों में धार्मिक प्रतीकों (जैसे हिजाब या बड़ी क्रॉस) पहनने पर रोक लगा दी गई थी।
- भारतीय संविधान में ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द 42वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया था।
- भारत में धार्मिक उत्सवों के लिए सरकारी कार्यालयों और स्कूलों में छुट्टी दी जाती है ताकि समानता बनी रहे।
- धर्मनिरपेक्षता: धर्म और राज्य को अलग-अलग रखने की अवधारणा।
- निरंकुशता: शक्ति का क्रूर और मनमाना इस्तेमाल।
- हस्तक्षेप: किसी मामले को प्रभावित करने के लिए राज्य का प्रयास।
- व्याख्या की स्वतंत्रता: अपने हिसाब से चीजों को समझने की छूट।
- बेदखली: किसी को उसके अधिकारों या जगह से बाहर करना।
- वर्चस्व: किसी एक समूह का दबदबा होना।
- मौलिक अधिकार: संविधान द्वारा नागरिकों को दिए गए बुनियादी अधिकार।
- बहुमत: संख्या में अधिक होने वाला समूह।
- अल्पसंख्यक: संख्या में कम होने वाला समूह।
- लोकतंत्र: जनता का शासन जहाँ सबको बराबरी का अधिकार हो।
NCERT अभ्यास: प्रश्न और उत्तर
उत्तर: हमारे आस-पास निम्नलिखित धार्मिक क्रियाकलाप प्रचलित हैं:
- मंदिरों में भजन और आरती, मस्जिदों में अज़ान और नमाज़, गुरुद्वारों में शबद कीर्तन और चर्च में प्रेयर।
- दीपावली, ईद, गुरुपर्व और क्रिसमस जैसे त्योहारों का सार्वजनिक उत्सव।
- गंगा स्नान, जगन्नाथ यात्रा और रोज़े रखना।
उत्तर: हाँ, सरकार निश्चित रूप से हस्तक्षेप करेगी। यद्यपि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, लेकिन यदि कोई धार्मिक प्रथा किसी व्यक्ति के जीवन के अधिकार का उल्लंघन करती है या कानून व्यवस्था बिगाड़ती है, तो राज्य को हस्तक्षेप करने का पूरा अधिकार है। नवजात शिशु की हत्या एक जघन्य अपराध है, और कोई भी धर्म कानून से ऊपर नहीं हो सकता।
उत्तर:
| उद्देश्य | यह क्यों महत्वपूर्ण है? | उदाहरण |
|---|---|---|
| एक धार्मिक समुदाय दूसरे पर वर्चस्व न रखे | ताकि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा हो सके। | किसी भी सार्वजनिक स्थान पर एक धर्म थोपा नहीं जा सकता। |
| राज्य किसी धर्म को नहीं थोपेगा | ताकि नागरिकों की निजी धार्मिक स्वतंत्रता बनी रहे। | सरकारी स्कूलों में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाती। |
| एक ही धर्म के लोग अपनों को न दबाएँ | ताकि धर्म के भीतर समानता और सुधार हो सके। | अस्पृश्यता (छुआछूत) पर कानूनी प्रतिबंध। |
उत्तर: मुख्य अंतर यह है कि अमेरिकी धर्मनिरपेक्षता में राज्य और धर्म के बीच पूर्ण अलगाव है; वे एक-दूसरे के मामलों में बिल्कुल दखल नहीं देते। इसके विपरीत, भारतीय धर्मनिरपेक्षता में राज्य ‘सैद्धांतिक दूरी’ रखता है, यानी वह धर्म से अलग तो है लेकिन सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है (जैसे दलितों को मंदिर प्रवेश दिलाना)।
उत्तर:
- (क) भारत का कोई राजकीय धर्म नहीं है। — सही ✅
कारण: भारतीय संविधान सबको समान मानता है और किसी एक धर्म को राजधर्म घोषित नहीं करता। - (ख) सरकारी स्कूलों में सुबह की प्रार्थना में धार्मिक गीत गाए जा सकते हैं। — गलत ❌
कारण: सरकारी स्कूल किसी खास धर्म को बढ़ावा नहीं दे सकते क्योंकि वे धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर चलते हैं। - (ग) राज्य धार्मिक आधार पर भेदभाव कर सकता है। — गलत ❌
कारण: अनुच्छेद 15 के अनुसार धर्म के आधार पर भेदभाव कानूनन अपराध है।
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