📚 Subject: Science (विज्ञान)
📝 Chapter: 6
🔖 Topic: जीवों में श्वसन (Respiration in Organisms)
जीवों में श्वसन – Bihar Board Class 7 Science Chapter 6 Solutions
छात्रों, इस लेख में हम Bihar Board Class 7 Science Chapter 6 Solutions के अंतर्गत ‘जीवों में श्वसन’ (Respiration in Organisms) अध्याय का विस्तार से अध्ययन करेंगे। हम दौड़ने या भारी कार्य करने के बाद तेज़ी से साँस क्यों लेने लगते हैं? इसका उत्तर हमारे शरीर की ऊर्जा आवश्यकताओं में छिपा है।
भोजन में संचित ऊर्जा श्वसन के समय निर्मुक्त होती है, अतः सभी जीवों को भोजन से ऊर्जा प्राप्त करने के लिए श्वसन की आवश्यकता होती है।
कोशिकीय श्वसन (Cellular Respiration) क्या है?
हम जिस वायु को साँस द्वारा अंदर लेते हैं, उसमें उपस्थित ऑक्सीजन शरीर के सभी भागों में और अंततः प्रत्येक कोशिका में ले जायी जाती है। कोशिका में भोजन (ग्लूकोस) के विखंडन के प्रक्रम में ऊर्जा मुक्त होती है। इसे कोशिकीय श्वसन कहते हैं। सभी जीवों की कोशिकाओं में कोशिकीय श्वसन होता है।
📘 6.1 वायवीय और अवायवीय श्वसन
कोशिका के अंदर भोजन का विखंडन दो प्रकार से हो सकता है:
1. वायवीय श्वसन (Aerobic Respiration)
जब ग्लूकोस का विखंडन ऑक्सीजन के उपयोग द्वारा होता है, तो यह वायवीय श्वसन कहलाता है।
ग्लूकोस → (ऑक्सीजन की उपस्थिति में) → कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा
2. अवायवीय श्वसन (Anaerobic Respiration)
ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में भी भोजन विखंडित हो सकता है, यह प्रक्रम अवायवीय श्वसन कहलाता है। यीस्ट जैसे जीव वायु की अनुपस्थिति में जीवित रह सकते हैं और ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
ग्लूकोस → (ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में) → ऐल्कोहॉल + कार्बन डाइऑक्साइड + ऊर्जा
बहुत देर तक व्यायाम करने, तेज़ी से दौड़ने अथवा भारी वजन उठाने जैसे कार्यों के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऐसी स्थितियों में शरीर को ऑक्सीजन की आपूर्ति सीमित होती है, इसलिए हमारी पेशी कोशिकाएँ अवायवीय श्वसन करती हैं।
इस प्रक्रम में ग्लूकोस के आंशिक विखंडन से लैक्टिक अम्ल बनता है, जिसके संचयन से पेशियों में ऐंठन (Cramps) उत्पन्न होती है। गर्म पानी से स्नान करने या मालिश करने से रक्त का संचरण बढ़ जाता है और लैक्टिक अम्ल का पूर्ण विखंडन हो जाता है, जिससे आराम मिलता है।
साँस लेने (Breathing) का अर्थ है ऑक्सीजन से समृद्ध वायु को अंदर खींचना और कार्बन डाइऑक्साइड से समृद्ध वायु को बाहर निकालना।
- अंतःश्वसन (Inhalation): ऑक्सीजन से समृद्ध वायु को शरीर के अंदर लेना।
- उच्छ्वसन (Exhalation): कार्बन डाइऑक्साइड से समृद्ध वायु को बाहर निकालना।
श्वसन दर (Breathing Rate)
कोई व्यक्ति एक मिनट में जितनी बार श्वसन करता है, वह उसकी श्वसन दर कहलाती है। एक श्वास (साँस) का अर्थ है- एक अंतःश्वसन और एक उच्छ्वसन।
- कोई वयस्क व्यक्ति विश्राम की अवस्था में एक मिनट में औसतन 15-18 बार साँस अंदर लेता और बाहर निकालता है।
- अधिक व्यायाम करने पर श्वसन दर 25 बार प्रति मिनट तक बढ़ सकती है।
- जब हमें नींद या झपकी आती है, तो हमारी श्वसन दर कम हो जाती है, इसीलिए शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन देने के लिए हम जम्हाई (Yawn) लेते हैं।
📘 6.3 हम श्वास कैसे लेते हैं? (Mechanism of Breathing)
आइए, अब हम श्वसन की क्रियाविधि जानें। सामान्यतः हम अपने नथुनों (नासा-द्वार) से वायु अंदर लेते हैं। वायु का हमारे शरीर में मार्ग इस प्रकार होता है:
नथुने (Nostrils) → नासा-गुहा (Nasal Cavity) → श्वास नली (Trachea) → फेफड़े (Lungs)
चित्र 6.4 : मानव श्वसन तंत्र (Human Respiratory System)।
फेफड़े और डायाफ्राम (Lungs and Diaphragm)
फेफड़े वक्ष-गुहा (Chest cavity) में स्थित होते हैं। वक्ष-गुहा पार्श्व में पसलियों से घिरी रहती है। एक बड़ी पेशीय परत, जो डायाफ्राम (मध्यपट) कहलाती है, वक्ष-गुहा को आधार प्रदान करती है। श्वसन में डायाफ्राम और पसलियों से बने पिंजर की गति सम्मिलित होती है:
- अंतःश्वसन के समय: पसलियाँ ऊपर और बाहर की ओर गति करती हैं और डायाफ्राम नीचे की ओर गति करता है। इससे वक्ष-गुहा का आयतन बढ़ जाता है और वायु फेफड़ों में आ जाती है।
- उच्छ्वसन के समय: पसलियाँ नीचे और अंदर की ओर आ जाती हैं, जबकि डायाफ्राम ऊपर की ओर अपनी पूर्व स्थिति में आ जाता है। इससे वक्ष-गुहा का आयतन कम हो जाता है और वायु फेफड़ों से बाहर धकेल दी जाती है।
वायु में अनेक अवांछित कण (धूल, परागकण आदि) होते हैं। जब हम अंतःश्वसन करते हैं, तो ये कण हमारी नासा-गुहा में उपस्थित रोमों में फँस जाते हैं। कभी-कभी ये कण नासा-गुहा के पार चले जाते हैं और कोमल परत को उत्तेजित करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप हमें छींक आती है। छींकने से अवांछित कण बाहर निकल जाते हैं और केवल स्वच्छ वायु शरीर में जाती है।
हम जिस वायु का अंतःश्वसन अथवा उच्छ्वसन करते हैं, वह गैसों का मिश्रण होती है। अंतःश्वसित और उच्छ्वसित वायु में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का प्रतिशत इस प्रकार होता है:
| गैस | अंतःश्वसित वायु (अंदर ली गई) | उच्छ्वसित वायु (बाहर निकाली गई) |
|---|---|---|
| ऑक्सीजन (O₂) | 21% | 16.4% |
| कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) | 0.04% | 4.4% |
यदि आप दर्पण के आगे उच्छ्वास (साँस) छोड़ते हैं, तो उसकी सतह धुँधली दिखाई देती है। यह जलवाष्प (नमी) के कारण होता है, जो हमारे शरीर से बाहर निकलती है।
📘 6.5 अन्य जंतुओं में श्वसन
हाथी, शेर, गाय, बकरी, मेंढक, छिपकली, सर्प और पक्षियों आदि जंतुओं की वक्ष-गुहाओं में मनुष्यों की भाँति फेफड़े होते हैं। परंतु सभी जीवों में फेफड़े नहीं होते हैं।
1. कॉकरोच (तिलचट्टा) और अन्य कीट
कॉकरोच के शरीर के पार्श्व भाग में छोटे-छोटे छिद्र होते हैं, जो श्वास रंध्र (Spiracles) कहलाते हैं। कीटों में गैस के विनिमय के लिए वायु नलियों का जाल बिछा होता है, जो श्वासप्रणाल या वातक (Tracheae) कहलाते हैं। ऑक्सीजन समृद्ध वायु श्वास रंध्रों से श्वास नालों में जाकर शरीर की प्रत्येक कोशिका में पहुँचती है।
2. केंचुआ और मेंढक
केंचुए अपनी त्वचा (Skin) से श्वसन करते हैं। केंचुए की त्वचा आर्द्र और श्लेष्मीय होती है, जिससे गैसों का आवागमन आसानी से हो जाता है। यद्यपि मेंढक में फेफड़े होते हैं, तथापि वे अपनी नम त्वचा से भी श्वसन कर सकते हैं।
मछली (Fish) में श्वसन
मछलियों में क्लोम या गिल (Gills) पाए जाते हैं। क्लोम जल में घुली ऑक्सीजन का उपयोग करने में उनकी सहायता करते हैं। क्लोम में रक्त वाहिनियों की संख्या अधिक होती है, जो गैस-विनिमय में सहायता करती हैं।
चित्र 6.10 : मछलियों में श्वसन अंग (क्लोम)।
क्या पादप (Plants) भी श्वसन करते हैं?
हाँ, अन्य जीवों की भाँति पादप भी जीवित रहने के लिए श्वसन करते हैं।
- पादप की पत्तियों में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड के विनिमय के लिए सूक्ष्म छिद्र होते हैं, जो रंध्र (Stomata) कहलाते हैं।
- पादप की जड़ों (मूल) को भी ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। मूलरोम (Root hairs) मृदा कणों के बीच के खाली स्थानों (वायु अवकाशों) में उपस्थित वायु से ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं।
(यही कारण है कि गमले के पौधे में बहुत अधिक पानी डाल देने से मूलरोमों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और पौधा मुरझा सकता है।)
📘 अभ्यास प्रश्न – Bihar Board Class 7 Science Chapter 6 Solutions
उत्तर: दौड़ते समय धावक को अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इस अतिरिक्त ऊर्जा को उत्पन्न करने के लिए शरीर की कोशिकाओं को अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। इसलिए, दौड़ समाप्त होने पर धावक ऑक्सीजन की इस बढ़ी हुई माँग को पूरा करने के लिए सामान्य से अधिक तेज़ी से और गहरी साँसें लेता है, ताकि फेफड़ों में अधिक से अधिक ऑक्सीजन जा सके।
उत्तर: समानताएँ (Similarities):
- दोनों ही प्रकार के श्वसन में भोजन (ग्लूकोस) का विखंडन होता है।
- दोनों ही प्रक्रियाओं के परिणामस्वरूप ऊर्जा (Energy) उत्पन्न (निर्मुक्त) होती है।
- दोनों ही जीवों की कोशिकाओं के अंदर संपन्न होते हैं (कोशिकीय श्वसन)।
अंतर (Differences):
| वायवीय श्वसन (Aerobic Respiration) | अवायवीय श्वसन (Anaerobic Respiration) |
|---|---|
| यह ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है। | यह ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है। |
| इसमें ग्लूकोस का पूर्ण विखंडन होता है। | इसमें ग्लूकोस का आंशिक (अधूरा) विखंडन होता है। |
| अंतिम उत्पाद कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और जल (H₂O) होते हैं। | अंतिम उत्पाद ऐल्कोहॉल (या लैक्टिक अम्ल) और कार्बन डाइऑक्साइड होते हैं। |
| इसमें बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है। | इसमें अपेक्षाकृत बहुत कम ऊर्जा उत्पन्न होती है। |
उत्तर: धूल भरी वायु में अनेक अवांछित कण (धूल, धुँआ, परागकण आदि) होते हैं। जब हम ऐसी वायु में साँस लेते हैं, तो ये कण हमारी नासा-गुहा (नाक) के रोमों को पार करके नासा-गुहा की संवेदनशील (कोमल) परत तक पहुँच जाते हैं और उसे उत्तेजित करते हैं। इस उत्तेजना के परिणामस्वरूप हमें छींक आ जाती है। छींकने से ये अवांछित कण वायु के साथ तेज़ झटके से बाहर निकल जाते हैं और केवल स्वच्छ वायु ही फेफड़ों तक पहुँच पाती है।
उत्तर: परखनली A में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) की सांद्रता सबसे अधिक होगी।
कारण: परखनली A में केवल घोंघा (जंतु) है, जो श्वसन के दौरान ऑक्सीजन ग्रहण करेगा और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ेगा। परखनली B में जलीय पादप है, जो प्रकाश संश्लेषण के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग कर लेगा। परखनली C में पादप और घोंघा दोनों हैं, अतः घोंघे द्वारा छोड़ी गई कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग पादप द्वारा प्रकाश संश्लेषण में कर लिया जाएगा। इसलिए, केवल परखनली A में CO₂ जमा होती रहेगी और उसकी सांद्रता सर्वाधिक होगी।
(क) तिलचट्टों के शरीर में वायु प्रवेश करती है, उनके-
- (i) फेफड़ों द्वारा
- (ii) क्लोमों द्वारा
- ✅ (iii) श्वास रंध्रों द्वारा
- (iv) त्वचा द्वारा
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: तिलचट्टों (कॉकरोच) और अन्य कीटों के शरीर के पार्श्व भाग में छोटे-छोटे छिद्र होते हैं जिन्हें श्वास रंध्र (Spiracles) कहते हैं। इन्हीं छिद्रों से ऑक्सीजन समृद्ध वायु उनके शरीर (श्वासप्रणाल) में प्रवेश करती है।
(ख) अत्यधिक व्यायाम करते समय हमारी टाँगों में जिस पदार्थ के संचयन के कारण ऐंठन होती है, वह है-
- (i) कार्बन डाइऑक्साइड
- ✅ (ii) लैक्टिक अम्ल
- (iii) ऐल्कोहॉल
- (iv) जल
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: अत्यधिक व्यायाम के समय ऑक्सीजन की कमी होने पर पेशी कोशिकाएँ अवायवीय श्वसन करती हैं, जिससे ग्लूकोस के आंशिक विखंडन से ‘लैक्टिक अम्ल’ बनता है। इसी लैक्टिक अम्ल के संचयन (इकट्ठा होने) से पेशियों में ऐंठन (Cramps) होती है।
(ग) किसी सामान्य वयस्क व्यक्ति की विश्राम-अवस्था में औसत श्वसन दर होती है-
- (i) 9-12 प्रति मिनट
- ✅ (ii) 15-18 प्रति मिनट
- (iii) 21-24 प्रति मिनट
- (iv) 30-33 प्रति मिनट
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: एक स्वस्थ और सामान्य वयस्क व्यक्ति जब विश्राम की अवस्था में होता है, तो वह एक मिनट में औसतन 15 से 18 बार साँस अंदर लेता और बाहर निकालता है।
(घ) उच्छ्वसन के समय, पसलियाँ-
- (i) बाहर की ओर गति करती हैं,
- ✅ (ii) नीचे की ओर गति करती हैं।
- (iii) ऊपर की ओर गति करती हैं।
- (iv) बिल्कुल गति नहीं करती हैं।
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: उच्छ्वसन (साँस बाहर छोड़ते) के समय पसलियाँ नीचे और अंदर की ओर आ जाती हैं तथा डायाफ्राम अपनी पूर्व स्थिति में आ जाता है, जिससे वक्ष-गुहा का आयतन कम हो जाता है और वायु बाहर धकेल दी जाती है।
उत्तर:
| कॉलम A | कॉलम B (सही मिलान) |
|---|---|
| (क) यीस्ट | (iii) ऐल्कोहॉल |
| (ख) डायाफ्राम (मध्यपट) | (iv) वक्ष-गुहा |
| (ग) त्वचा | (i) केंचुआ |
| (घ) पत्तियाँ | (v) रंध्र |
| (च) मछली | (ii) क्लोम |
| (छ) मेंढक (अतिरिक्त जानकारी) | (vi) फेफड़े और त्वचा |
(क) अत्यधिक व्यायाम करते समय व्यक्ति की श्वसन दर धीमी हो जाती है。
उत्तर: (F) असत्य
व्याख्या: अत्यधिक व्यायाम करते समय शरीर को अधिक ऊर्जा और ऑक्सीजन चाहिए होती है, इसलिए श्वसन दर धीमी नहीं बल्कि बहुत तेज़ (बढ़) हो जाती है।
(ख) पादपों में प्रकाश संश्लेषण केवल दिन में, जबकि श्वसन केवल रात्रि में होता है。
उत्तर: (F) असत्य
व्याख्या: प्रकाश संश्लेषण केवल दिन में (सूर्य के प्रकाश में) होता है, लेकिन श्वसन (साँस लेना) पादपों में भी दिन और रात हर समय लगातार चलता रहता है।
(ग) मेंढक अपनी त्वचा के अतिरिक्त अपने फेफड़ों से भी श्वसन करते हैं。
उत्तर: (T) सत्य
व्याख्या: मेंढक में मनुष्यों की तरह फेफड़े होते हैं, लेकिन वे जल में या बाहर अपनी नम और श्लेष्मीय त्वचा (Skin) से भी श्वसन कर सकते हैं।
(घ) मछलियों में श्वसन के लिए फेफड़े होते हैं。
उत्तर: (F) असत्य
व्याख्या: मछलियों में श्वसन के लिए फेफड़े नहीं, बल्कि ‘क्लोम’ (गिल्स / Gills) पाए जाते हैं।
(च) अंतःश्वसन के समय वक्ष-गुहा का आयतन बढ़ जाता है。
उत्तर: (T) सत्य
व्याख्या: अंतःश्वसन (साँस अंदर लेते) के समय पसलियाँ बाहर की ओर और डायाफ्राम नीचे की ओर जाता है, जिससे वक्ष-गुहा का आयतन बढ़ जाता है और हवा फेफड़ों में भर जाती है।
उत्तर: छात्रों, पहेली में ढूँढने के लिए सही शब्द निम्नलिखित हैं:
- कीटों की वायु नलियाँ – श्वासप्रणाल
- वक्ष-गुहा को घेरे हुए हड्डियों की संरचना – पसलियाँ
- वक्ष-गुहा का पेशीय तल – डायाफ्राम
- पत्ती की सतह पर सूक्ष्म छिद्र – रंध्र
- कीट के शरीर के पार्श्व भागों के छोटे छिद्र – श्वासरंध्र
- मनुष्यों के श्वसन अंग – फेफड़े
- वे छिद्र जिनसे हम साँस भीतर लेते (अंतःश्वसन) करते हैं – नासाद्वार
- एक अवायवीय जीव – यीस्ट
- श्वासप्रणाल तंत्र वाला एक जीव – तिलचट्टा (कॉकरोच)
- (क) 5 km से अधिक ऊँचाई पर वायु नहीं होती है।
- ✅ (ख) वहाँ उपलब्ध वायु की मात्रा भू-तल पर उपलब्ध मात्रा से कम होती है।
- (ग) वहाँ वायु का ताप भू-तल के ताप से अधिक होता है।
- (घ) पर्वत पर वायुदाब भू-तल की अपेक्षा अधिक होता है।
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: जैसे-जैसे हम पहाड़ों (अधिक ऊँचाई) पर जाते हैं, वायु विरल (पतली) होती जाती है। अतः ऊँचाई पर वायु (और उसमें मौजूद ऑक्सीजन) की मात्रा भू-तल (ज़मीन) की तुलना में बहुत कम हो जाती है। इसलिए पर्वतारोही साँस लेने के लिए अपने साथ ऑक्सीजन सिलिंडर ले जाते हैं।
शिक्षकों के लिए सुझाव: छात्रों को समझाएँ कि पौधों की जड़ें (मूल) भी श्वसन करती हैं और मिट्टी के कणों के बीच मौजूद वायु (ऑक्सीजन) का उपयोग करती हैं। यही कारण है कि गमलों में अत्यधिक पानी (Overwatering) डाल देने से मिट्टी के बीच की वायु बाहर निकल जाती है और पौधों की जड़ें ऑक्सीजन न मिलने के कारण सड़ या मुरझा सकती हैं। इसके अलावा, यीस्ट (खमीर) में होने वाले अवायवीय श्वसन का उदाहरण देकर यह भी बताएँ कि इसी प्रक्रिया से बेकरी और शराब (Wine) उद्योग चलता है।
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छात्रों, इस अध्याय (जीवों में श्वसन) के हस्तलिखित नोट्स (Handwritten Notes) और पीडीएफ डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:
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Suraj Kumar Mishra