📚 Subject: Science (विज्ञान)
📝 Chapter: 3
🔖 Topic: ऊष्मा (Heat)
ऊष्मा – Bihar Board Class 7 Science Chapter 3 Solutions
छात्रों, इस लेख में हम Bihar Board Class 7 Science Chapter 3 Solutions के अंतर्गत ‘ऊष्मा’ (Heat) अध्याय का विस्तार से अध्ययन करेंगे। हम शीतकाल में ऊनी वस्त्र पहनते हैं जो हमें गर्म रखते हैं, जबकि गर्म मौसम में हम हल्के रंग के सूती वस्त्र पहनना पसन्द करते हैं क्योंकि ये हमें ठंडक का अनुभव कराते हैं।
शीतकाल में हम घर के अंदर ठंड और बाहर धूप में गर्मी का अनुभव करते हैं, जबकि ग्रीष्मकाल में घर के अंदर भी गर्मी लगती है। कोई वस्तु कितनी गर्म अथवा कितनी ठंडी है, इसका पता हम कैसे लगाते हैं, यही इस अध्याय का मुख्य विषय है।
📘 3.1 गर्म तथा ठंडा (Hot and Cold)
अपने दैनिक जीवन में हम अनेक वस्तुओं के संपर्क में आते हैं, जिनमें से कुछ गर्म होती हैं और कुछ ठंडी। उदाहरण के लिए, चाय गरम तथा बर्फ ठंडी होती है। हम यह भी देखते हैं कि कुछ वस्तुएँ दूसरों की अपेक्षा अधिक गर्म या अधिक ठंडी होती हैं।
प्रायः हम इसका पता वस्तुओं को स्पर्श करके लगाते हैं, लेकिन यह जानने के लिए कि कोई वस्तु कितनी गर्म या ठंडी है, हमारी स्पर्श-इंद्रिय हमेशा विश्वसनीय नहीं होती और यह हमें धोखा दे सकती है।
ताप (Temperature) क्या है?
किसी वस्तु की उष्णता (गर्मी) की विश्वसनीय माप उसके ताप (Temperature) से की जाती है। ताप मापने के लिए उपयोग की जाने वाली युक्ति को तापमापी (थर्मामीटर) कहते हैं।
ताप मापने के लिए विभिन्न प्रकार के तापमापियों का उपयोग किया जाता है। जिस तापमापी से हम अपने शरीर के ताप को मापते हैं, उसे डॉक्टरी थर्मामीटर (Clinical Thermometer) कहते हैं।
डॉक्टरी थर्मामीटर की संरचना:
- इसमें एक लंबी, बारीक तथा एक समान व्यास की काँच की नली होती है।
- इसके एक सिरे पर एक बल्ब होता है जिसमें पारा (Mercury) भरा होता है।
- बल्ब के बाहर नली में पारे की एक पतली चमकीली धारी देखी जा सकती है।
- ताप मापने के लिए इसमें सेल्सियस स्केल (°C) का उपयोग किया जाता है।
मापन सीमा (Range):
डॉक्टरी थर्मामीटर से हम केवल 35°C से 42°C तक का ताप ही माप सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि मानव शरीर का ताप सामान्यतः 35°C से कम तथा 42°C से अधिक नहीं होता।
📘 थर्मामीटर उपयोग करने की सावधानियाँ
डॉक्टरी थर्मामीटर का उपयोग करते समय निम्नलिखित सावधानियाँ बरतनी चाहिए:
- उपयोग से पहले और बाद में इसे किसी पूतिरोधी (ऐंटीसेप्टिक) घोल से धोना चाहिए।
- सुनिश्चित करना चाहिए कि उपयोग से पहले पारे का तल 35°C से नीचे हो।
- थर्मामीटर को पढ़ते समय पारे का तल दृष्टि-रेखा की सीध में होना चाहिए।
- इसे सावधानीपूर्वक पकड़ना चाहिए और पढ़ते समय बल्ब से नहीं पकड़ना चाहिए।
विभंग (Kink) का लाभ: डॉक्टरी थर्मामीटर के बल्ब के पास एक विभंग (किंक) होता है, जो पारे के तल को मुँह से बाहर निकालने पर अपने आप नीचे गिरने से रोकता है।
डॉक्टरी थर्मामीटर का उपयोग मानव शरीर का ताप मापने को छोड़कर किसी अन्य वस्तु (जैसे गर्म दूध) का ताप मापने के लिए कभी नहीं करना चाहिए। इसे धूप तथा आग के पास रखने से भी बचाना चाहिए, अन्यथा यह टूट सकता है।
📘 3.3 प्रयोगशाला तापमापी (Laboratory Thermometer)
हम अन्य वस्तुओं के ताप कैसे मापते हैं? इसके लिए अन्य तापमापी काम में लाए जाते हैं, जिनमें से एक प्रयोगशाला तापमापी है।
परिसर (Range): प्रयोगशाला तापमापी का परिसर प्रायः -10°C से 110°C होता है। मौसम की रिपोर्ट में दिए गए अधिकतम तथा न्यूनतम तापों की जानकारी देने के लिए ‘अधिकतम-न्यूनतम तापमापी’ का उपयोग किया जाता है।
चित्र 3.5 : प्रयोगशाला तापमापी द्वारा जल का ताप मापना।
प्रयोगशाला तापमापी के उपयोग की सावधानियाँ:
- तापमापी को ऊर्ध्वाधर (सीधा) रखना चाहिए, तिरछा नहीं।
- तापमापी का बल्ब चारों ओर से उस पदार्थ से घिरा होना चाहिए जिसका ताप मापना है।
- बल्ब बर्तन की दीवारों को नहीं छूना चाहिए।
- ताप का पाठ्यांक तभी नोट करना चाहिए जब उसका बल्ब जल या उस वस्तु में रखा हो (अर्थात इसे बाहर निकालकर नहीं पढ़ना चाहिए)।
अंकीय तापमापी (Digital Thermometer):
तापमापी में पारे के प्रयोग के विषय में अनेक चिंताएँ हैं क्योंकि पारा एक विषाक्त (जहरीला) पदार्थ है। यदि तापमापी टूट जाए, तो इसका निपटान अत्यंत कठिन है। आजकल अंकीय तापमापी (डिजिटल थर्मामीटर) उपलब्ध हैं जिनमें पारे का उपयोग नहीं होता है।
ऊष्मा सदैव गर्म वस्तु से अपेक्षाकृत ठंडी वस्तु की ओर प्रवाहित होती है। ऊष्मा स्थानांतरण की मुख्य रूप से तीन विधियाँ हैं: चालन, संवहन और विकिरण।
1. चालन (Conduction)
वह प्रक्रम जिसमें ऊष्मा किसी वस्तु के गर्म सिरे से ठंडे सिरे की ओर स्थानांतरित होती है, चालन कहलाता है। ठोसों में ऊष्मा प्रायः चालन के प्रक्रम द्वारा स्थानांतरित होती है।
- ऊष्मा के चालक (Conductors): जो पदार्थ अपने से होकर ऊष्मा को आसानी से जाने देते हैं, उन्हें ऊष्मा का चालक कहते हैं। उदाहरण: ऐलुमिनियम, लोहा (आयरन) तथा ताँबा (कॉपर)।
- ऊष्मा के कुचालक (Insulators): जो पदार्थ अपने से होकर ऊष्मा को आसानी से नहीं जाने देते, उन्हें ऊष्मा का कुचालक या ऊष्मा-रोधी कहते हैं। उदाहरण: प्लास्टिक, लकड़ी, जल तथा वायु।
2. संवहन (Convection)
जल तथा वायु ऊष्मा के कुचालक हैं, इनमें ऊष्मा का स्थानांतरण संवहन द्वारा होता है। जब जल या वायु को गर्म करते हैं, तो गर्म भाग हल्का होकर ऊपर उठता है और उसका स्थान लेने के लिए आस-पास का ठंडा भाग नीचे आ जाता है। यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक संपूर्ण जल या वायु गर्म न हो जाए।
तटीय क्षेत्रों में यह एक मनोरंजक परिघटना है:
- समुद्र समीर (दिन में): दिन के समय स्थल (धरती) जल की अपेक्षा शीघ्र गर्म होता है। स्थल की गर्म वायु ऊपर उठती है और समुद्र की ओर से ठंडी वायु स्थल की ओर बहती है। इसे समुद्र समीर कहते हैं।
- थल समीर (रात में): रात्रि में समुद्र का जल स्थल की अपेक्षा धीमी गति से ठंडा होता है। इसलिए, स्थल की ओर से ठंडी वायु समुद्र की ओर बहती है, जिसे थल समीर कहते हैं।
चित्र 3.11 : समुद्र समीर तथा थल समीर की परिघटना।
3. विकिरण (Radiation)
सूर्य से हम तक ऊष्मा एक अन्य प्रक्रम द्वारा आती है जिसे विकिरण कहते हैं। विकिरण द्वारा ऊष्मा के स्थानांतरण में किसी माध्यम (जैसे वायु अथवा जल) की आवश्यकता नहीं होती। हम हीटर के सामने बैठते हैं तो हमें इसी प्रक्रम द्वारा ऊष्मा प्राप्त होती है। सभी गर्म पिंड विकिरणों के रूप में ऊष्मा विकिरित करते हैं।
📘 3.5 सर्दियों तथा गर्मियों में हमारे पहनने के वस्त्रों के प्रकार
गर्मियों में हम हल्के रंग के वस्त्रों को वरीयता देते हैं तथा सर्दियों में हम गहरे रंग के कपड़े पहनना पसंद करते हैं।
- गहरे रंग के वस्त्र: गहरे रंग के पृष्ठ अपेक्षाकृत अधिक ऊष्मा अवशोषित करते हैं। इसलिए, सर्दियों में गहरे रंग के वस्त्र पहनना हमें सुखद लगता है।
- हल्के रंग के वस्त्र: हल्के रंग के कपड़े ऊष्मीय विकिरणों के अधिकांश भाग को परावर्तित कर देते हैं। इसलिए, गर्मियों में हमें हल्के रंग के वस्त्र अधिक आरामदेह लगते हैं।
सर्दियों में ऊनी वस्त्र हमें उष्ण क्यों बनाए रखते हैं?
सर्दियों में हम ऊनी वस्त्र पहनते हैं। ऊन ऊष्मा-रोधी है। इसके अतिरिक्त, ऊन के रेशों के बीच में वायु फंसी (ट्रैप) रहती है। वायु भी ऊष्मा की कुचालक है। यह वायु हमारे शरीर की ऊष्मा को ठंडे परिवेश की ओर विकिरित होने से रोकती है, अतः हमें उष्णता (गर्मी) का अनुभव होता है।
(यही कारण है कि एक मोटे कंबल की तुलना में एक के ऊपर एक जुड़े दो पतले कंबल अधिक गर्मी देते हैं, क्योंकि दोनों कंबलों के बीच वायु की एक परत विद्यमान होती है।)
📘 अभ्यास प्रश्न – Bihar Board Class 7 Science Chapter 3 Solutions
उत्तर: समानताएँ (Similarities):
- दोनों तापमापियों का उपयोग ताप (Temperature) मापने के लिए किया जाता है।
- दोनों काँच की एक लंबी, बारीक तथा समान व्यास वाली नली से बने होते हैं।
- दोनों के एक सिरे पर बल्ब होता है, जिसमें सामान्यतः पारा (Mercury) भरा होता है।
- दोनों में ताप मापने के लिए सेल्सियस स्केल (°C) का उपयोग किया जाता है।
अंतर (Differences):
| प्रयोगशाला तापमापी | डॉक्टरी थर्मामीटर |
|---|---|
| इसका परिसर (Range) प्रायः -10°C से 110°C तक होता है। | इसका परिसर केवल 35°C से 42°C तक होता है। |
| इसमें पारे के तल को नीचे गिरने से रोकने के लिए विभंग (Kink) नहीं होता है। | इसके बल्ब के पास एक विभंग (Kink) होता है। |
| इसका उपयोग विभिन्न वस्तुओं और जल का ताप मापने के लिए किया जाता है। | इसका उपयोग केवल मानव शरीर का ताप मापने के लिए किया जाता है। |
| ताप पढ़ते समय इसे वस्तु (जैसे पानी) के अंदर ही रखना पड़ता है। | ताप पढ़ने के लिए इसे मुँह से बाहर निकाला जा सकता है। |
उत्तर:
- ऊष्मा चालक (Conductors) के दो उदाहरण: लोहा (Iron) और ताँबा (Copper)। (अन्य: ऐलुमिनियम, स्टील)
- ऊष्मा-रोधी (Insulators) के दो उदाहरण: लकड़ी (Wood) और प्लास्टिक (Plastic)। (अन्य: वायु, रबर, जल)
- (क) कोई वस्तु कितनी गरम है इसकी जानकारी तापमापी (थर्मामीटर) द्वारा प्राप्त होती है।
- (ख) उबलते हुए पानी का ताप डॉक्टरी तापमापी से नहीं मापा जा सकता।
- (ग) ताप को डिग्री सेल्सियस में मापते हैं।
- (घ) बिना किसी माध्यम द्वारा ऊष्मा स्थानांतरण के प्रक्रम को विकिरण कहते हैं।
- (च) स्टील की एक ठंडी चम्मच गर्म दूध के प्याले में रखी गई है। यह अपने दूसरे सिरे तक ऊष्मा का स्थानांतरण चालन प्रक्रम द्वारा करेगी।
- (छ) हल्के रंग के वस्त्रों की अपेक्षा गहरे रंग के वस्त्र ऊष्मा का अधिक अवशोषण करते हैं।
उत्तर:
| कॉलम A | कॉलम B (सही मिलान) |
|---|---|
| (क) थल समीर के बहने का समय | (iv) रात |
| (ख) समुद्र समीर के बहने का समय | (iii) दिन |
| (ग) गहरे रंग के कपड़े पसन्द करने का समय | (ii) सर्दियाँ |
| (घ) हल्के रंग के कपड़े पसन्द करने का समय | (i) गर्मियाँ |
उत्तर: सर्दियों में एक मोटे वस्त्र की तुलना में कई परतों का बना वस्त्र अधिक उष्णता (गर्मी) प्रदान करता है क्योंकि वस्त्रों की परतों के बीच वायु (Air) फँस (ट्रैप हो) जाती है। वायु ऊष्मा की कुचालक (ऊष्मा-रोधी) होती है। यह फँसी हुई वायु हमारे शरीर की ऊष्मा को ठंडे परिवेश की ओर विकिरित (स्थानांतरित) होने से रोकती है। जितनी अधिक परतें होंगी, उनके बीच उतनी ही अधिक वायु फँसेगी और हमें उतनी ही अधिक गर्मी का अनुभव होगा।
उत्तर: (छात्रों, चित्र में चूल्हे पर रखे बर्तन और पानी को देखकर निम्न प्रकार से नामांकन करें:)
- चालन (Conduction): चूल्हे की लौ से बर्तन की तली में और बर्तन की दीवारों में ऊष्मा का स्थानांतरण ‘चालन’ द्वारा हो रहा है।
- संवहन (Convection): बर्तन के अंदर मौजूद पानी में ऊष्मा का स्थानांतरण (गर्म पानी का ऊपर उठना और ठंडे पानी का नीचे आना) ‘संवहन’ द्वारा हो रहा है।
- विकिरण (Radiation): चूल्हे (गर्म स्रोत) से आस-पास के वातावरण में बिना किसी माध्यम के ऊष्मा का फैलना ‘विकिरण’ कहलाता है।
उत्तर: श्वेत (सफ़ेद) या हल्के रंग ऊष्मीय विकिरणों (Heat Radiations) के बुरे अवशोषक (Bad Absorbers) और अच्छे परावर्तक (Good Reflectors) होते हैं। गरम जलवायु वाले स्थानों पर घरों की बाहरी दीवारों पर सफ़ेद पेन्ट करने से सूर्य से आने वाली अधिकांश ऊष्मा परावर्तित होकर वापस लौट जाती है और दीवारें ऊष्मा को कम अवशोषित करती हैं। इससे घर के अंदर का तापमान कम रहता है और घर ठंडा बना रहता है।
- (क) 80°C
- (ख) 50°C से अधिक लेकिन 80°C से कम
- (ग) 20°C
- ✅ (घ) 30°C तथा 50°C के बीच
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: जब हम ठंडे जल (30°C) और गर्म जल (50°C) को मिलाते हैं, तो ऊष्मा गर्म जल से ठंडे जल की ओर स्थानांतरित होती है जब तक कि दोनों का ताप समान न हो जाए। अतः परिणामी ताप दोनों के बीच का होगा (लगभग 40°C), इसलिए विकल्प (घ) सही है।
- (क) लोहे की गोली से जल की ओर स्थानांतरित होगी।
- ✅ (ख) न तो लोहे की गोली से जल की ओर और न ही जल से लोहे की गोली की ओर स्थानांतरित होगी।
- (ग) जल से लोहे की गोली की ओर स्थानांतरित होगी।
- (घ) दोनों के ताप में वृद्धि कर देगी।
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: ऊष्मा का स्थानांतरण हमेशा उच्च ताप वाली वस्तु से निम्न ताप वाली वस्तु की ओर होता है। चूँकि लोहे की गोली और जल दोनों का ताप समान (40°C) है, इसलिए उनके बीच ऊष्मा का कोई स्थानांतरण नहीं होगा।
- (क) चालन के कारण ठंडा हो जाएगा।
- (ख) संवहन के कारण ठंडा हो जाएगा।
- (ग) विकिरण के कारण ठंडा हो जाएगा।
- ✅ (घ) ठंडा नहीं होगा।
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: लकड़ी ऊष्मा की कुचालक (ऊष्मा-रोधी) होती है। इसलिए, यह अपने अंदर से ऊष्मा का स्थानांतरण नहीं होने देती। परिणामस्वरूप, आइसक्रीम में डुबोने पर भी चम्मच का दूसरा सिरा ठंडा नहीं होगा।
- (क) ताँबे की तली कड़ाही को अधिक टिकाऊ बना देती है।
- (ख) ऐसी कड़ाही देखने में सुन्दर लगती है।
- ✅ (ग) स्टेनलेस इस्पात की अपेक्षा ताँबा ऊष्मा का अच्छा चालक है।
- (घ) स्टेनलेस इस्पात की अपेक्षा ताँबे को साफ करना अधिक आसान है।
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: ताँबा (Copper) स्टेनलेस इस्पात की तुलना में ऊष्मा का बहुत अच्छा चालक है। कड़ाही के नीचे ताँबे की तली लगाने से ऊष्मा गैस से कड़ाही में बहुत जल्दी और समान रूप से फैलती है, जिससे खाना जल्दी पकता है और ईंधन की बचत होती है।
शिक्षकों के लिए सुझाव: छात्रों को ऊष्मा स्थानांतरण की तीनों विधियों (चालन, संवहन, विकिरण) को कक्षा में व्यावहारिक उदाहरणों से समझाएँ। जैसे- लोहे की छड़ का एक सिरा गर्म करने पर दूसरा सिरा गर्म होना (चालन), पानी का उबलना (संवहन), और सर्दियों में अलाव या हीटर के सामने बैठने पर गर्मी लगना (विकिरण)। इसके अलावा, अंकीय (डिजिटल) तापमापी का उपयोग करना सुरक्षित होता है, इस पर भी जोर दें क्योंकि पारे वाला तापमापी टूटने पर हानिकारक हो सकता है।
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