📚 Subject: Science (विज्ञान)
📝 Chapter: 11
🏷️ Chapter Title: प्रकाश (Light)
Bihar Board Class 7 Science Chapter 11 Solutions: प्रकाश
प्रिय छात्रों और शिक्षकों, BSEBHub पर आपका स्वागत है! इस लेख में हम Bihar Board Class 7 Science Chapter 11 Solutions के तहत “प्रकाश” (Light) का विस्तार से अध्ययन करेंगे। यह लेख विशेष रूप से NCERT और बिहार बोर्ड के नवीनतम पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
इस अध्याय में हम जानेंगे कि प्रकाश कैसे गमन (यात्रा) करता है, परावर्तन (Reflection) क्या है, समतल, अवतल और उत्तल दर्पण कैसे काम करते हैं, लेंसों के प्रकार क्या हैं, और इंद्रधनुष (Rainbow) में कितने रंग होते हैं।
📘 11.1 प्रकाश सरल रेखा के अनुदिश गमन करता है
आपने पतली झिरी अथवा छिद्र से सूर्य के प्रकाश के किरण पुंज (Beam of light) को कमरे में प्रवेश करते हुए देखा होगा। स्कूटर, कार तथा रेलगाड़ी के इंजनों की हेडलाइट और टॉर्च से आते प्रकाश के किरण पुंज भी आपने अवश्य देखे होंगे।
📘 11.2 प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light)
प्रकाश की दिशा को परिवर्तित (बदलने) करने की एक विधि यह है कि इसे किसी चमकदार पृष्ठ (सतह) पर डाला जाए। स्टेनलेस इस्पात की चमकदार प्लेट, चम्मच या शांत जल का पृष्ठ भी दर्पण की भाँति कार्य कर सकता है तथा प्रकाश के पथ को बदल सकता है।
समतल दर्पण (Plane Mirror) हमारे घरों में उपयोग होने वाला सामान्य आईना होता है। इसके द्वारा बने प्रतिबिंब (Image) के निम्नलिखित गुण होते हैं:
- प्रतिबिंब दर्पण के पीछे बनता है।
- प्रतिबिंब सीधा (Erect) होता है।
- प्रतिबिंब का आकार (साइज़) बिंब (वस्तु) के साइज़ के समान होता है।
- दर्पण से प्रतिबिंब की दूरी, दर्पण के सामने रखे बिंब की दूरी के बिल्कुल बराबर होती है।
- प्रतिबिंब आभासी (Virtual) होता है, अर्थात् इसे पर्दे (Screen) पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।
📘 11.3 दक्षिण या वाम (Left or Right)
जब आप समतल दर्पण में अपना प्रतिबिंब देखते हैं, तो ध्यान दीजिए कि प्रतिबिंब में ‘दक्षिण’ (दायाँ – Right) भाग ‘वाम’ (बायाँ – Left) दिखाई पड़ता है तथा ‘वाम’ भाग ‘दक्षिण’ दिखाई पड़ता है। केवल पार्श्व (साइड) में ही यह अदला-बदली होती है, प्रतिबिंब उल्टा (ऊपर का भाग नीचे) नहीं होता।
📘 11.4 गोलीय दर्पणों से खेल (Spherical Mirrors)
Bihar Board Class 7 Science Chapter 11 Solutions के इस भाग में हम वक्रित (Curved) दर्पणों के बारे में पढ़ेंगे। चम्मच का चमकदार वक्रित पृष्ठ एक दर्पण की भाँति कार्य करता है। ऐसे दर्पणों को गोलीय दर्पण (Spherical Mirrors) कहते हैं।
- अवतल दर्पण (Concave Mirror): यदि किसी गोलीय दर्पण का परावर्तक पृष्ठ अंदर की ओर (चम्मच के भीतरी पृष्ठ की तरह) वक्रित है, तो उसे अवतल दर्पण कहते हैं।
- उत्तल दर्पण (Convex Mirror): यदि परावर्तक पृष्ठ बाहर की ओर (चम्मच के बाहरी पृष्ठ की तरह) उभरा हुआ है, तो उसे उत्तल दर्पण कहते हैं।
चित्र 11.12 : (a) अवतल दर्पण तथा (b) उत्तल दर्पण
- वास्तविक प्रतिबिंब (Real Image): पर्दे पर बनने वाले (यानी जिन्हें पर्दे पर प्राप्त किया जा सके) प्रतिबिंब को वास्तविक प्रतिबिंब कहते हैं।
- आभासी प्रतिबिंब (Virtual Image): जिस प्रतिबिंब को पर्दे पर प्राप्त न किया जा सके, उसे आभासी प्रतिबिंब कहते हैं।
अवतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब: यह वास्तविक तथा उल्टा प्रतिबिंब बना सकता है। जब बिंब (वस्तु) को दर्पण के अत्यंत निकट रखते हैं, तो प्रतिबिंब आभासी, सीधा तथा आवर्धित (बड़ा) होता है।
उपयोग: आँख, कान, नाक तथा गले के डॉक्टरों (ENT Specialist) द्वारा, दंत चिकित्सकों (Dentists) द्वारा दाँतों का बड़ा प्रतिबिंब देखने के लिए, और टॉर्च तथा वाहनों की हेडलाइट के परावर्तक (Reflectors) के रूप में।
उत्तल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब: यह सदैव सीधा, आभासी तथा साइज़ में बिंब (वस्तु) से छोटा होता है।
उपयोग: वाहनों के पार्श्व दर्पणों (Rear-view / Side mirrors) के रूप में, क्योंकि ये बाहर की ओर वक्रित होने के कारण अधिक क्षेत्र का दृश्य (Wide view) दिखा सकते हैं।
📘 11.5 लेंसों द्वारा बने प्रतिबिंब (Images Formed by Lenses)
लेंस पारदर्शी होते हैं और प्रकाश इनमें से आर-पार गुजर सकता है। लेंसों का उपयोग चश्मों, दूरबीनों (Telescopes), और सूक्ष्मदर्शियों (Microscopes) में किया जाता है।
मुख्य रूप से लेंस दो प्रकार के होते हैं:
- उत्तल लेंस (Convex Lens): जो लेंस किनारों की अपेक्षा बीच में मोटे प्रतीत होते हैं, उत्तल लेंस कहलाते हैं। यह प्रकाश को अंदर की ओर मोड़ता है, इसलिए इसे अभिसारी लेंस (Converging Lens) भी कहते हैं। आवर्धक लेंस (Magnifying glass) वास्तव में एक उत्तल लेंस ही है।
- अवतल लेंस (Concave Lens): जो लेंस किनारों की अपेक्षा बीच में पतले महसूस होते हैं, अवतल लेंस कहलाते हैं। यह प्रकाश को बाहर की ओर फैलाता है, इसलिए इसे अपसारी लेंस (Diverging Lens) कहते हैं।
चित्र 11.22 : (a) उत्तल लेंस तथा (b) अवतल लेंस
लेंसों द्वारा प्रतिबिंब: उत्तल लेंस वास्तविक तथा उल्टा प्रतिबिंब बना सकता है, लेकिन बिंब को पास रखने पर यह आभासी और बड़ा (आवर्धित) प्रतिबिंब बनाता है। वहीं, अवतल लेंस सदैव आभासी, सीधा तथा साइज़ में छोटा प्रतिबिंब ही बनाता है।
📘 11.6 सूर्य का प्रकाश – श्वेत अथवा रंगीन? (Sunlight: White or Coloured?)
क्या आपने कभी वर्षा के पश्चात् आकाश में इंद्रधनुष (Rainbow) देखा है? इंद्रधनुष में सात वर्ण (रंग) होते हैं: लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, जामुनी तथा बैंगनी (VIBGYOR)। यह दर्शाता है कि सूर्य के प्रकाश में सात रंग विद्यमान हैं। ऐसे प्रकाश को श्वेत प्रकाश (White Light) कहते हैं।
चित्र 11.30 : प्रिज़्म सूर्य के प्रकाश के किरण पुंज को सात वर्णों में विभक्त कर देता है
न्यूटन की डिस्क (Newton’s Disc): यदि एक गोल डिस्क को सात बराबर हिस्सों में बाँटकर उन पर इंद्रधनुष के सात रंग कर दिए जाएँ और उस डिस्क को तेज़ी से घुमाया जाए, तो रंग आपस में मिल जाते हैं और डिस्क ‘श्वेत (White)’ प्रतीत होने लगती है। इसे न्यूटन की डिस्क कहते हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि श्वेत प्रकाश वास्तव में सात रंगों का मिश्रण है।
ऊपर हमने थ्योरी को अच्छी तरह से समझा। अब हम परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण Bihar Board Class 7 Science Chapter 11 Solutions के सभी अभ्यास (Exercise) प्रश्नों को हल करेंगे।
📘 अभ्यास प्रश्न – Bihar Board Class 7 Science Chapter 11 Solutions
ऊपर हमने थ्योरी को अच्छी तरह से समझा। अब हम परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण Bihar Board Class 7 Science Chapter 11 Solutions के सभी अभ्यास प्रश्नों को हल करेंगे।
उत्तर:
- (क) जिस प्रतिबिंब को पर्दे पर न प्राप्त किया जा सके, वह आभासी प्रतिबिंब कहलाता है।
- (ख) यदि प्रतिबिंब सदैव आभासी तथा साइज़ में छोटा हो, तो यह किसी उत्तल दर्पण द्वारा बना होगा।
- (ग) यदि प्रतिबिंब सदैव बिंब के साइज़ का बने, तो दर्पण समतल होगा।
- (घ) जिस प्रतिबिंब को पर्दे पर प्राप्त किया जा सके, वह वास्तविक प्रतिबिंब कहलाता है।
- (च) अवतल लेंस द्वारा बनाया गया प्रतिबिंब पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।
उत्तर:
(क) हम उत्तल दर्पण से आवर्धित तथा सीधा प्रतिबिंब प्राप्त कर सकते हैं। — (असत्य)
व्याख्या: उत्तल दर्पण सदैव सीधा, आभासी और वस्तु (बिंब) से छोटा प्रतिबिंब बनाता है, आवर्धित (बड़ा) नहीं।
(ख) अवतल लेंस सदैव आभासी प्रतिबिंब बनाता है। — (सत्य)
व्याख्या: यह कथन सत्य है। अवतल लेंस द्वारा बना प्रतिबिंब हमेशा आभासी, सीधा और छोटा होता है।
(ग) वास्तविक प्रतिबिंब को पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता। — (असत्य)
व्याख्या: वास्तविक प्रतिबिंब की परिभाषा ही यही है कि इसे पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है।
(घ) अवतल दर्पण से हम वास्तविक, आवर्धित तथा उल्टा प्रतिबिंब प्राप्त कर सकते हैं। — (सत्य)
व्याख्या: यह कथन सत्य है। जब वस्तु अवतल दर्पण के फोकस और वक्रता केंद्र के बीच होती है, तो उसका बड़ा, वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब बनता है।
(च) अवतल दर्पण सदैव वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है। — (असत्य)
व्याख्या: यह कथन असत्य है। जब वस्तु अवतल दर्पण के अत्यंत निकट (फोकस और ध्रुव के बीच) रखी जाती है, तब यह आभासी और सीधा प्रतिबिंब भी बनाता है।
उत्तर:
| कॉलम A | कॉलम B (सही मिलान) |
|---|---|
| (क) समतल दर्पण | (v) प्रतिबिंब सीधा तथा बिंब के साइज़ का प्रतिबिंब बनाता है। |
| (ख) उत्तल दर्पण | (ii) अधिक क्षेत्र के दृश्य का प्रतिबिंब बना सकता है। |
| (ग) उत्तल लेंस | (i) आवर्धक लेंस की भाँति उपयोग होता है। |
| (घ) अवतल दर्पण | (iii) दंत चिकित्सक दाँतों का आवर्धित प्रतिबिंब देखने के लिए उपयोग करते हैं। |
| (च) अवतल लेंस | (vi) सीधा तथा बिंब के साइज़ से छोटा प्रतिबिंब बनाता है। |
उत्तर: समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब के मुख्य अभिलक्षण (विशेषताएँ) निम्नलिखित हैं:
- प्रतिबिंब सीधा होता है।
- प्रतिबिंब आभासी होता है (पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता)।
- प्रतिबिंब का आकार (साइज़) बिल्कुल वस्तु के आकार के बराबर होता है।
- प्रतिबिंब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है, जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने होती है।
- प्रतिबिंब में पार्श्व व्युत्क्रमण (Lateral Inversion) होता है (अर्थात् बायाँ भाग दायाँ और दायाँ भाग बायाँ दिखाई देता है)।
उत्तर: अंग्रेजी वर्णमाला (English Alphabet) के वे अक्षर जो समतल दर्पण में बिल्कुल अपने जैसे (सदृश्य) दिखाई देते हैं, वे हैं:
A, H, I, M, O, T, U, V, W, X, Y
परिणामों की विवेचना: इन अक्षरों का प्रतिबिंब मूल अक्षरों के समान इसलिए दिखाई देता है क्योंकि ये अक्षर ऊर्ध्वाधर अक्ष (Vertical axis) के परितः सममित (Symmetrical) होते हैं। पार्श्व व्युत्क्रमण (दाएं का बायां होना) होने के बावजूद भी इनका आकार नहीं बदलता है।
उत्तर: जिस प्रतिबिंब को पर्दे (Screen) पर प्राप्त नहीं किया जा सकता, उसे आभासी प्रतिबिंब (Virtual Image) कहते हैं। यह हमेशा सीधा होता है और ऐसा प्रतीत होता है कि प्रकाश की किरणें दर्पण के पीछे या लेंस के अंदर से आ रही हैं।
स्थिति (उदाहरण): जब हम अपने घर के समतल दर्पण (आईने) में अपना चेहरा देखते हैं, तो बनने वाला हमारा प्रतिबिंब आभासी प्रतिबिंब होता है।
उत्तर:
| उत्तल लेंस (Convex Lens) | अवतल लेंस (Concave Lens) |
|---|---|
| यह लेंस किनारों पर पतला और बीच में मोटा होता है। | यह लेंस किनारों पर मोटा और बीच में पतला होता है। |
| यह प्रकाश की किरणों को एक बिंदु पर सिकोड़ता (अभिसरित) है। | यह प्रकाश की किरणों को बाहर की ओर फैलाता (अपसरित) है। |
| यह वास्तविक और आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिंब बना सकता है। | यह सदैव आभासी और वस्तु से छोटा प्रतिबिंब ही बनाता है। |
उत्तर:
- अवतल दर्पण का उपयोग: दंत चिकित्सकों (Dentists) द्वारा दाँतों का बड़ा (आवर्धित) और स्पष्ट प्रतिबिंब देखने के लिए किया जाता है।
- उत्तल दर्पण का उपयोग: वाहनों (कार, बाइक) में साइड मिरर (पार्श्व दर्पण) के रूप में किया जाता है ताकि ड्राइवर पीछे के अधिक क्षेत्र का दृश्य देख सके।
उत्तर: केवल अवतल दर्पण (Concave Mirror) ही वास्तविक प्रतिबिंब बना सकता है।
उत्तर: अवतल लेंस (Concave Lens) सदैव आभासी, सीधा और वस्तु से छोटा प्रतिबिंब बनाता है।
(i) अवतल लेंस द्वारा
✅ (ii) अवतल दर्पण द्वारा
(iii) उत्तल दर्पण द्वारा
(iv) समतल दर्पण द्वारा
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: जब किसी वस्तु (बिंब) को अवतल दर्पण के फोकस और दर्पण के अत्यंत निकट रखा जाता है, तो दर्पण के पीछे एक बड़ा (आवर्धित), सीधा और आभासी प्रतिबिंब बनता है। उत्तल दर्पण और अवतल लेंस हमेशा छोटा आभासी प्रतिबिंब बनाते हैं।
(i) 3 m
(ii) 5 m
✅ (iii) 6 m
(iv) 8 m
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: शुरू में डेविड और दर्पण के बीच की दूरी 4 मीटर है। जब वह दर्पण की ओर 1 मीटर चलता है, तो अब उसकी दर्पण से दूरी 3 मीटर (4 – 1) रह जाती है। समतल दर्पण के नियमानुसार, प्रतिबिंब भी दर्पण के पीछे 3 मीटर की दूरी पर बनेगा। अतः डेविड और उसके प्रतिबिंब के बीच की कुल दूरी = 3 मीटर + 3 मीटर = 6 मीटर होगी।
(i) 1 m/s
(ii) 2 m/s
✅ (iii) 4 m/s
(iv) 8 m/s
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: जब कार 2 m/s की चाल से ट्रक की ओर बैक होती है, तो कार (दर्पण) और ट्रक के बीच की दूरी 2 m/s की दर से कम होती है। दर्पण के नियम के अनुसार, प्रतिबिंब भी दर्पण की ओर 2 m/s की दर से आता है। इसलिए, ड्राइवर (जो कार में है) के सापेक्ष प्रतिबिंब की कुल (सापेक्षिक) चाल = 2 m/s (कार की चाल) + 2 m/s (प्रतिबिंब की चाल) = 4 m/s प्रतीत होगी।
शिक्षकों से अनुरोध है कि वे छात्रों को Bihar Board Class 7 Science Chapter 11 Solutions के इन प्रायोगिक कांसेप्ट्स को कक्षा में स्वयं करके दिखाएं। बच्चों को समतल दर्पण के सामने खड़े करके ‘वाम-दक्षिण’ (Lateral Inversion) का अभ्यास कराएँ और एक ‘न्यूटन की डिस्क’ बनाकर घुमाएँ। यह अध्याय बच्चों के लिए बहुत ही रोचक बन जाएगा!
निष्कर्ष
हमें उम्मीद है कि Bihar Board Class 7 Science Chapter 11 Solutions का यह विस्तृत लेख आपके लिए मददगार साबित हुआ होगा। इस अध्याय (प्रकाश) में हमने दर्पणों और लेंसों के विभिन्न प्रकारों और उनके दैनिक जीवन में उपयोग को गहराई से समझा है। यदि आपको Bihar Board Class 7 Science Chapter 11 Solutions के किसी भी प्रश्न या थ्योरी में कोई डाउट है, तो नीचे कमेंट करके जरूर पूछें। हम आपकी सहायता करने के लिए हमेशा तत्पर हैं!
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छात्रों, इस अध्याय (प्रकाश) के हस्तलिखित नोट्स (Handwritten Notes) और पीडीएफ डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:
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Suraj Kumar Mishra