📚 Subject: Science (विज्ञान)
📝 Chapter: 1
🔖 Topic: पादपों में पोषण (Nutrition in Plants)
पादपों में पोषण – Bihar Board Class 7 Science Chapter 1 Solutions
छात्रों, इस लेख में हम Bihar Board Class 7 Science Chapter 1 Solutions के अंतर्गत ‘पादपों में पोषण’ अध्याय का विस्तार से अध्ययन करेंगे। सभी जीवों के लिए भोजन अत्यंत आवश्यक है। कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन एवं खनिज भोजन के मुख्य घटक हैं, जिन्हें पोषक (Nutrients) कहते हैं । पादप (पौधे) अपना भोजन स्वयं बना सकते हैं, परंतु मानव सहित अन्य कोई प्राणी अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकता ।
📘 1.1 पादपों में पोषण विधि
केवल पादप ही ऐसे जीव हैं, जो जल, कार्बन डाइऑक्साइड एवं खनिज की सहायता से अपना भोजन स्वयं बना सकते हैं। ये सभी कच्चे पदार्थ उनके परिवेश में उपलब्ध होते हैं।
पोषक पदार्थ सजीवों की शारीरिक संरचना, वृद्धि तथा क्षतिग्रस्त भागों के रखरखाव के लिए उन्हें समर्थ बनाते हैं तथा विभिन्न जैव प्रक्रमों के लिए आवश्यक ऊर्जा भी प्रदान करते हैं।
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ:
- पोषण (Nutrition): सजीवों द्वारा भोजन ग्रहण करने एवं इसके उपयोग की विधि को पोषण कहते हैं।
- स्वपोषण (Autotrophic): पोषण की वह विधि, जिसमें जीव अपना भोजन स्वयं संश्लेषित करते हैं, स्वपोषण कहलाती है। ऐसे पादपों को स्वपोषी कहते हैं।
- विषमपोषी (Heterotrophs): जंतु एवं अधिकतर अन्य जीव पादपों द्वारा संश्लेषित भोजन ग्रहण करते हैं, उन्हें विषमपोषी कहते हैं।
📘 कोशिकाएँ (Cells) क्या हैं?
जैसे इमारतें ईंटों से बनती हैं, उसी प्रकार सजीवों का शरीर सूक्ष्म इकाइयों से बनता है, जो कोशिका (Cell) कहलाती हैं ।
- कोशिका झिल्ली: कोशिका एक पतली बाह्य संरचना द्वारा घिरी होती है, जिसे कोशिका झिल्ली कहते हैं।
- केंद्रक (Nucleus): इसमें केंद्र में स्थित एक सुस्पष्ट संरचना होती है, जो केंद्रक कहलाती है।
- कोशिका द्रव्य (Cytoplasm): केंद्रक के चारों ओर जेली के समान एक पदार्थ होता है, जिसे कोशिका द्रव्य कहते हैं।
पत्तियाँ पादप की “खाद्य फैक्ट्रियाँ” (Food Factories) हैं। मृदा में उपस्थित जल एवं खनिज जड़ों द्वारा अवशोषित किए जाते हैं तथा तने के माध्यम से पत्तियों तक पहुँचाए जाते हैं।
पत्ती की सतह पर उपस्थित सूक्ष्म रंध्रों (Stomata) द्वारा वायु में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड प्रवेश करती है। ये रंध्र ‘द्वार कोशिकाओं’ द्वारा घिरे होते हैं।
क्लोरोफ़िल का महत्व
पत्तियों में एक हरा वर्णक होता है, जिसे क्लोरोफ़िल (Chlorophyll) कहते हैं। यह सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा का संग्रहण करने में पत्ती की सहायता करता है। इसी ऊर्जा का उपयोग जल एवं कार्बन डाइऑक्साइड से खाद्य संश्लेषण में होता है।
प्रकाश संश्लेषण का समीकरण
प्रकाश संश्लेषण के दौरान पत्ती की क्लोरोफ़िलयुक्त कोशिकाएँ सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल से कार्बोहाइड्रेट का संश्लेषण करती हैं। :
कार्बन डाइऑक्साइड + जल → (सूर्य का प्रकाश / क्लोरोफ़िल) → कार्बोहाइड्रेट + ऑक्सीजन
इस प्रक्रम में अंततः ऑक्सीजन निर्मुक्त होती है और कार्बोहाइड्रेट पत्तियों में मंड (स्टार्च) के रूप में संचित हो जाते हैं। पत्ती में स्टार्च की उपस्थिति यह दर्शाती है कि प्रकाश संश्लेषण संपन्न हुआ है।
📘 अन्य रंग की पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण और शैवाल
क्या आपने गहरी लाल, बैंगनी अथवा भूरे रंग की पत्तियाँ देखी हैं? हरी पत्तियों के अतिरिक्त अन्य वर्ण (रंग) की पत्तियों में भी क्लोरोफ़िल होता है। परंतु इन पत्तियों में उपस्थित लाल, भूरे अथवा अन्य वर्णक (Pigments) क्लोरोफ़िल के हरे रंग का प्रच्छादन कर देते हैं अर्थात् उसे ढक लेते हैं। अतः इन पत्तियों में भी प्रकाश संश्लेषण होता है।
शैवाल (Algae) क्या हैं?
आपने गीली दीवारों पर, तालाब अथवा ठहरे हुए जलाशय में हरे अवपंकी (काई जैसे पादप) देखे होंगे। ये सामान्यतः कुछ जीवों की वृद्धि के कारण बनते हैं, जिन्हें शैवाल (Algae) कहते हैं। शैवालों का रंग भी हरा होता है क्योंकि इनमें क्लोरोफ़िल पाया जाता है। शैवाल भी प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं ।
📘 पादपों में कार्बोहाइड्रेट के अतिरिक्त अन्य खाद्यों का संश्लेषण
प्रकाश संश्लेषण प्रक्रम द्वारा पादप (पौधे) कार्बोहाइड्रेट का संश्लेषण करते हैं, जो कार्बन, हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन से बनते हैं। इनका उपयोग खाद्य के अन्य घटकों के संश्लेषण में होता है।
परन्तु प्रोटीन नाइट्रोजनी पदार्थ हैं, जिनमें कार्बन, ऑक्सीजन एवं हाइड्रोजन के अतिरिक्त नाइट्रोजन भी होती है। वायु में नाइट्रोजन गैसीय अवस्था में प्रचुर मात्रा में पाई जाती है, परन्तु पादप इसका अवशोषण इसी रूप में नहीं कर सकते। मिट्टी में कुछ विशेष जीवाणु होते हैं, जो गैसीय नाइट्रोजन को उपयोगी यौगिकों में परिवर्तित कर मृदा में निर्मुक्त करते हैं। जल के साथ ये विलेय पदार्थ पादपों द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं। इस प्रकार पादप प्रोटीन एवं वसा का संश्लेषण करते हैं।
कुछ पादप (पौधे) ऐसे भी हैं, जिनमें क्लोरोफ़िल नहीं पाया जाता। वे अपना भोजन स्वयं संश्लेषित नहीं कर सकते। मनुष्य एवं अन्य प्राणियों की तरह ये पादप भी अपने पोषण के लिए अन्य पादपों द्वारा निर्मित खाद्य पर निर्भर होते हैं, जिसे विषमपोषी प्रणाली (Heterotrophic mode) कहते हैं।
परजीवी (Parasite) और परपोषी (Host):
- अमरबेल (Cuscuta): यह एक पीले रंग की रस्सीनुमा संरचना वाला पादप है जो वृक्षों के तनों से लिपटा रहता है। इसमें क्लोरोफ़िल नहीं होता।
- परपोषी (Host): अमरबेल अपना भोजन उस पादप से प्राप्त करता है जिस पर वह आरोहित होता है। उस आश्रयदाता पादप को परपोषी कहते हैं।
- परजीवी (Parasite): क्योंकि अमरबेल जैसे पादप परपोषी को अमूल्य पोषकों से वंचित करते हैं, अतः इन्हें परजीवी कहते हैं।
📘 कीटभक्षी पादप (Insectivorous Plants)
कुछ ऐसे पादप भी हैं, जो कीटों को पकड़ते हैं तथा उन्हें पचा जाते हैं। ऐसे पादप हरे या अन्य किसी रंग के हो सकते हैं। इसका सबसे प्रमुख उदाहरण घटपर्णी (Pitcher plant) है।
चित्र 1.6 : घटपर्णी (पिचर पादप) में घड़े एवं ढक्कन जैसी संरचना होती है।
इसकी पत्ती का शीर्ष भाग घड़े का ढक्कन बनाता है। घड़े के अंदर अनेक रोम होते हैं जो नीचे की ओर ढलके रहते हैं (अधोमुखी)। जब कोई कीट घड़े में प्रवेश करता है, तो वह रोमों के बीच फँस जाता है और पाचक रसों द्वारा उसका पाचन हो जाता है। कीटों का भक्षण करने वाले ऐसे पादप कीटभक्षी पादप (Insectivorous plants) कहलाते हैं।
अन्य उदाहरण: वीनस फ्लाइ ट्रैप (Venus flytrap) तथा सनड्यू (Sundew)।
वर्षा के दिनों में वृक्षों की सड़ी-गली टूटी टहनियों अथवा तनों पर आपने छाते के समान संरचनाओं के गुच्छे (मशरूम/छत्रक) देखे होंगे। इसी प्रकार, नम ब्रेड (डबल रोटी) को कुछ दिन छोड़ने पर उस पर रुई के धागों के समान कवक (फंजाई) उग आते हैं।
ये जीव कवक या फंजाई (Fungi) कहलाते हैं। ये मृत एवं विघटनकारी (सड़नेवाली) वस्तुओं की सतह पर कुछ पाचक रसों का स्राव करते हैं, तथा उसे साधारण व विलेय रूप में परिवर्तित कर देते हैं। तत्पश्चात् वे इस विलयन का भोजन के रूप में अवशोषण करते हैं।
मृतजीवी पोषण क्या है?
पोषण की वह प्रणाली जिसमें जीव किसी मृत एवं विघटित जैविक पदार्थों से पोषक तत्त्व प्राप्त करते हैं, मृतजीवी पोषण (Saprotrophic nutrition) कहलाती है। इसका उपयोग करने वाले जीव मृतजीवी (Saprotrophs) कहलाते हैं।
सहजीवी संबंध (Symbiotic Relationship)
कुछ जीव एक-दूसरे के साथ रहते हैं तथा अपना आवास एवं पोषक तत्त्व एक-दूसरे के साथ बाँटते हैं। इसे सहजीवी संबंध कहते हैं।
उदाहरण (लाइकेन – Lichens): लाइकेन में दो भागीदार होते हैं – एक शैवाल और दूसरा कवक। कवक शैवाल को रहने का स्थान (आवास), जल एवं पोषक तत्त्व उपलब्ध कराता है तथा बदले में शैवाल प्रकाश संश्लेषण द्वारा संश्लेषित खाद्य कवक को देता है।
📘 1.5 मृदा में पोषकों की पुनः पूर्ति किस प्रकार होती है?
पादप लगातार मृदा से खनिज और पोषक तत्त्व अवशोषित करते हैं, जिससे मृदा में नाइट्रोजन, पोटैशियम, फॉस्फोरस जैसे पोषकों की कमी हो जाती है। इसलिए किसान खेतों में खाद और उर्वरक (Fertilizers) मिलाते हैं।
पादपों को प्रोटीन बनाने के लिए सबसे अधिक नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है। फलीदार पादपों (चना, मटर, मूँग, सेम) की जड़ों में राइजोबियम (Rhizobium) नामक जीवाणु रहते हैं। ये वायुमंडलीय नाइट्रोजन को विलेय पदार्थों में परिवर्तित कर देते हैं और पादपों को नाइट्रोजन की आपूर्ति करते हैं। इसके बदले पादप राइजोबियम जीवाणु को आवास एवं खाद्य प्रदान करते हैं। यह किसानों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण सहजीवी संबंध है, जिससे उन्हें दालों की फसल के लिए नाइट्रोजनी उर्वरक देने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
📘 अभ्यास प्रश्न – Bihar Board Class 7 Science Chapter 1 Solutions
उत्तर: जीवों को खाद्य (भोजन) की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से होती है:
- शारीरिक वृद्धि और विकास के लिए।
- क्षतिग्रस्त शारीरिक भागों की मरम्मत और रखरखाव के लिए।
- विभिन्न जैविक प्रक्रियाओं (जैसे श्वसन, पाचन आदि) के संचालन हेतु आवश्यक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए।
- रोगों से लड़ने की क्षमता (प्रतिरोधक क्षमता) बनाए रखने के लिए।
उत्तर: परजीवी और मृतजीवी में मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
| परजीवी (Parasite) | मृतजीवी (Saprotrophs) |
|---|---|
| ये अपना भोजन अन्य जीवित प्राणियों (परपोषी) के शरीर से प्राप्त करते हैं। | ये अपना पोषण मृत एवं सड़े-गले जैविक पदार्थों से प्राप्त करते हैं। |
| ये सामान्यतः परपोषी को नुकसान पहुँचाते हैं। | ये पर्यावरण की सफाई में मदद करते हैं (अपघटन करके)। |
| उदाहरण: अमरबेल, जूँ, खटमल। | उदाहरण: कवक (मशरूम), यीस्ट। |
उत्तर: पत्ती में मंड (स्टार्च) की उपस्थिति का परीक्षण आयोडीन परीक्षण द्वारा किया जाता है। इसके लिए पत्ती पर आयोडीन विलयन की कुछ बूँदें डाली जाती हैं। यदि पत्ती का रंग नीला-काला हो जाता है, तो यह प्रमाणित करता है कि पत्ती में मंड (स्टार्च) उपस्थित है।
उत्तर: हरे पादपों में खाद्य संश्लेषण के प्रक्रम को प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) कहते हैं। इस प्रक्रिया में, पत्तियों में मौजूद हरा वर्णक ‘क्लोरोफ़िल’ सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को ग्रहण करता है। पादप मिट्टी से जड़ द्वारा ‘जल एवं खनिज’ तथा वायुमंडल से रंध्रों द्वारा ‘कार्बन डाइऑक्साइड’ प्राप्त करते हैं। सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में, इन कच्चे पदार्थों की सहायता से पत्तियाँ कार्बोहाइड्रेट (भोजन) का संश्लेषण करती हैं और ऑक्सीजन गैस वायुमंडल में मुक्त करती हैं।
उत्तर:
सूर्य की ऊर्जा ➔ हरे पादप (उत्पादक) ➔ शाकाहारी जंतु (प्राथमिक उपभोक्ता, उदा: हिरण) ➔ मांसाहारी जंतु (द्वितीयक उपभोक्ता, उदा: शेर)।
यह प्रवाह चित्र स्पष्ट करता है कि ऊर्जा का मूल स्रोत सूर्य है जिसे पादप भोजन में बदलते हैं, और बाकी सभी जंतु प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पादपों पर ही निर्भर हैं।
- (क) क्योंकि हरे पादप अपना खाद्य स्वयं बनाते हैं, इसलिए उन्हें स्वपोषी कहते हैं।
- (ख) पादपों द्वारा संश्लेषित खाद्य का भंडारण मंड (स्टार्च) के रूप में किया जाता है।
- (ग) प्रकाश संश्लेषण के प्रक्रम में जिस वर्णक द्वारा सौर ऊर्जा संग्रहित की जाती है, उसे क्लोरोफ़िल कहते हैं।
- (घ) प्रकाश संश्लेषण में पादप वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं तथा ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं।
- (क) पीत दुर्बल तने वाला परजीवी पादप – उत्तर: अमरबेल
- (ख) एक पादप जिसमें स्वपोषण एवं विषमपोषण दोनों ही प्रणाली पाई जाती है – उत्तर: घटपर्णी (पिचर पादप)
- (ग) वे रंध्र, जिनके द्वारा पत्तियों में गैसों का आदान-प्रदान (विनिमय) होता है – उत्तर: रंध्र (स्टोमेटा)
(क) अमरबेल उदाहरण है किसी –
- (i) स्वपोषी का।
- ✅ (ii) परजीवी का।
- (iii) मृतजीवी का।
- (iv) परपोषी का।
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: अमरबेल में क्लोरोफ़िल नहीं होता है, यह अपना भोजन उस वृक्ष (परपोषी) से प्राप्त करता है जिस पर यह लिपटा होता है। इसलिए यह एक परजीवी है।
(ख) कीटों को पकड़कर अपना आहार बनाने वाले पादप का नाम है-
- (i) अमरबेल
- (ii) गुड़हल
- ✅ (iii) घटपर्णी (पिचर पादप)
- (iv) गुलाब
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: घटपर्णी (पिचर पादप) की पत्तियाँ घड़े के आकार में रूपांतरित हो जाती हैं, जिसमें फँसकर कीटों का पाचन हो जाता है। अतः यह कीटभक्षी पादप है।
उत्तर:
| कॉलम A | कॉलम B (सही मिलान) |
|---|---|
| (क) क्लोरोफ़िल | (iv) पत्ती |
| (ख) नाइट्रोजन | (i) जीवाणु (राइजोबियम) |
| (ग) अमरबेल | (v) परजीवी |
| (घ) जंतु | (ii) परपोषित (विषमपोषी) |
| (च) कीटभक्षी | (iii) घटपर्णी (पिचर पादप) |
(क) प्रकाश संश्लेषण में कार्बन डाइऑक्साइड मुक्त होती है।
उत्तर: (F) असत्य
व्याख्या: प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में पौधे कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करते हैं और ऑक्सीजन गैस मुक्त करते हैं।
(ख) ऐसे पादप, जो अपना भोजन स्वयं संश्लेषित करते हैं, मृतजीवी कहलाते हैं।
उत्तर: (F) असत्य
व्याख्या: जो पादप अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, उन्हें स्वपोषी (Autotrophs) कहते हैं। मृतजीवी सड़े-गले पदार्थों से पोषण लेते हैं।
(ग) प्रकाश संश्लेषण का उत्पाद प्रोटीन नहीं है।
उत्तर: (T) सत्य
व्याख्या: प्रकाश संश्लेषण का प्राथमिक उत्पाद कार्बोहाइड्रेट (स्टार्च) होता है। पादप प्रोटीन का निर्माण नाइट्रोजन की सहायता से अलग से करते हैं।
(घ) प्रकाश संश्लेषण में सौर ऊर्जा का रासायनिक ऊर्जा में रूपांतरण हो जाता है।
उत्तर: (T) सत्य
व्याख्या: पत्तियाँ सौर ऊर्जा (सूर्य के प्रकाश) को ग्रहण करके उसे भोजन (रासायनिक ऊर्जा) के रूप में संचित कर लेती हैं।
प्रश्न 11. पादप के किस भाग द्वारा प्रकाश संश्लेषण हेतु वायु से कार्बन डाइऑक्साइड ली जाती है?
- (क) मूल रोम
- ✅ (ख) रंध्र
- (ग) पर्णशिराएँ
- (घ) बाह्यदल
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: पत्तियों की सतह पर छोटे-छोटे छिद्र होते हैं जिन्हें रंध्र (Stomata) कहा जाता है। इन्हीं रंध्रों के माध्यम से कार्बन डाइऑक्साइड पत्ती के अंदर प्रवेश करती है।
- (क) जड़
- (ख) तना
- (ग) पुष्प
- ✅ (घ) पत्तियाँ
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: पादप वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड मुख्य रूप से अपनी पत्तियों में उपस्थित रंध्रों (स्टोमेटा) के द्वारा प्राप्त करते हैं, क्योंकि पत्तियाँ ही पादप की खाद्य फैक्ट्रियाँ हैं।
शिक्षकों के लिए सुझाव: छात्रों को प्रयोग 1.1 (अंधेरे और धूप में रखे पौधे का परीक्षण) को कक्षा में स्वयं करने के लिए प्रेरित करें। उन्हें यह भी समझाएं कि हरे रंग के अलावा अन्य रंगों की पत्तियों में भी क्लोरोफ़िल होता है, केवल उसका रंग अन्य वर्णकों के कारण छिप जाता है। आप चाहें तो कक्षा में ब्रेड मोल्ड (कवक) का क्रियाकलाप भी सुरक्षित रूप से दिखा सकते हैं।
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Suraj Kumar Mishra