Bihar Board Class 8 Science Chapter 1 Notes & Question Answer (Complete Free FDF)

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🎓 Class: 8
📚 Subject: Science (विज्ञान)
📝 Chapter: 1 – फसल उत्पादन एवं प्रबंध

NCERT Class 8 Science Chapter 1 Solutions

प्रिय छात्रों और शिक्षकों, BSEBHub.in पर आपका स्वागत है! आज हम कक्षा 8 विज्ञान के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक, NCERT Class 8 Science Chapter 1 Solutions (फसल उत्पादन एवं प्रबंध) का विस्तार से अध्ययन करेंगे। चूँकि हम सभी को जीवित रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है, इसलिए इतने बड़े देश की जनसंख्या को भोजन उपलब्ध कराने के लिए इसका नियमित उत्पादन, उचित प्रबंधन और वितरण बहुत जरूरी है।

इस लेख में हम बिहार बोर्ड और NCERT के पाठ्यक्रम पर आधारित थ्योरी, नोट्स और अंत में Bihar Board Class 8 Science Chapter 1 के सभी अभ्यास प्रश्नों के सटीक उत्तर सरल हिंदी में जानेंगे। तो चलिए, एक किसान की तरह इस ज्ञान के खेत में बीज बोने की शुरुआत करते हैं!

📘 1.1 कृषि पद्धतियाँ (Bihar Board Class 8 Science Chapter 1)

लगभग 10,000 ईसा पूर्व तक मनुष्य घुमंतू थे। वे एक स्थान से दूसरे स्थान तक भोजन और आवास की खोज में समूह में घूमते रहते थे। वे कच्चे फल और सब्जियाँ खाते थे और भोजन के लिए जंतुओं का शिकार करते थे। बाद में उन्होंने खेती करना सीखा और चावल, गेहूँ एवं अन्य खाद्य फसलों का उत्पादन शुरू किया। इस प्रकार कृषि का प्रारम्भ हुआ।

💡 फसल किसे कहते हैं?
जब एक ही किस्म के पौधे किसी स्थान पर बड़े पैमाने पर उगाए जाते हैं, तो इसे फसल कहते हैं। उदाहरण के लिए, गेहूँ की फसल का अर्थ है कि खेत में उगाए जाने वाले सभी पौधे गेहूँ के हैं।

भारत एक विशाल देश है जहाँ ताप, आर्द्रता और वर्षा जैसी जलवायु परिस्थितियाँ अलग-अलग हैं। इसी विविधता के आधार पर मुख्य रूप से फसलों को दो वर्गों में बाँटा गया है:

  • खरीफ़ फ़सल: वह फसल जिन्हें वर्षा ऋतु में बोया जाता है, खरीफ़ फ़सल कहलाती है। भारत में वर्षा ऋतु सामान्यतः जून से सितम्बर तक होती है। उदाहरण: धान, मक्का, सोयाबीन, मूँगफली, कपास आदि।
  • रबी फसल: शीत ऋतु (अक्टूबर से मार्च तक) में उगाई जाने वाली फ़सलें रबी फसलें कहलाती हैं। उदाहरण: गेहूँ, चना, मटर, सरसों तथा अलसी।

इनके अलावा कई स्थानों पर ग्रीष्म ऋतु में दालें और सब्जियाँ भी उगाई जाती हैं।

📘 1.2 आधारिक फसल पद्धतियाँ

फसल उगाने के लिए एक किसान को एक निश्चित समय अवधि में कई सारे कार्य करने पड़ते हैं। इन क्रियाकलापों को ही कृषि पद्धतियाँ कहा जाता है। एक अच्छी फसल प्राप्त करने के लिए मुख्य रूप से ये 7 चरण अपनाए जाते हैं:

  1. मिट्टी तैयार करना
  2. बुआई
  3. खाद एवं उवर्रक देना
  4. सिंचाई
  5. खरपतवार से सुरक्षा
  6. कटाई
  7. भण्डारण

📘 1.3 मिट्टी तैयार करना

फ़सल उगाने का यह सबसे पहला और महत्वपूर्ण चरण है। इसमें मिट्टी को पलटना और पोला (भुरभुरा) बनाना शामिल है। ऐसा करने से पौधों की जड़ें भूमि में गहराई तक जा सकती हैं और गहराई में धँसी जड़ें भी सरलता से श्वसन कर सकती हैं।

🐛 किसान का मित्र: केंचुआ
पोली मिट्टी, मिट्टी में रहने वाले केंचुओं और सूक्ष्मजीवों की वृद्धि करने में सहायता करती है। ये जीव किसानों के मित्र कहलाते हैं क्योंकि ये मिट्टी को और पलटकर पोला करते हैं तथा ह्यूमस बनाते हैं, जिससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है।

जुताई (Tilling / Ploughing)

मिट्टी को उलटने-पलटने एवं पोला करने की प्रक्रिया को जुताई कहते हैं। यह काम हल चला कर किया जाता है। जुताई के बाद खेत को समतल करने के लिए पाटल (Leveller) का उपयोग किया जाता है।

प्रमुख कृषि औज़ार

  • हल (Plough): प्राचीन काल से ही जुताई, खाद मिलाने और खरपतवार निकालने के लिए हल का उपयोग होता है। इसमें लोहे की मजबूत तिकोनी पत्ती होती है जिसे फाल कहते हैं, और लंबी लकड़ी वाले मुख्य भाग को हल-शैफ्ट कहते हैं।
  • कुदाली (Hoe): यह एक सरल औज़ार है जिसका उपयोग खरपतवार निकालने और मिट्टी को पोला करने के लिए किया जाता है।
  • कल्टीवेटर (Cultivator): आजकल जुताई ट्रैक्टर द्वारा संचालित कल्टीवेटर से की जाती है। इससे श्रम (मेहनत) और समय दोनों की भारी बचत होती है।

📘 1.4 बुआई (Sowing)

बुआई Fasal utpadan evam prabandh class 8 का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। बीज बोने से पहले अच्छी गुणवत्ता वाले, साफ़ और स्वस्थ बीजों का चयन किया जाता है ताकि अच्छी पैदावार मिल सके।

🧪 स्वस्थ बीजों की पहचान कैसे करें?
बीजों को एक बर्तन में पानी डालकर छोड़ दें। जो बीज खोखले और क्षतिग्रस्त (खराब) होते हैं, वे हलके होकर पानी के ऊपर तैरने लगते हैं। जो स्वस्थ और अच्छे बीज होते हैं, वे भारी होने के कारण पानी की तली में बैठ जाते हैं।

बुआई के औज़ार

  • परम्परागत औज़ार: पारंपरिक रूप से बीजों की बुआई में इस्तेमाल किया जाने वाला औज़ार कीप (Funnel) के आकार का होता है। बीजों को कीप के अंदर डालने पर यह नुकीले सिरे वाले पाइपों से गुजरकर मिट्टी में स्थापित हो जाते हैं।
  • सीड-ड्रिल (Seed Drill): आजकल बुआई के लिए ट्रैक्टर द्वारा संचालित सीड-ड्रिल का उपयोग होता है। इसके द्वारा बीजों में समान दूरी और गहराई बनी रहती है, और बीज मिट्टी से ढक जाते हैं जिससे पक्षी उन्हें खा नहीं पाते।

कुछ पौधे (जैसे धान) के बीजों को सीधे खेत में नहीं बोया जाता। पहले इन्हें पौधशाला (Nursery) में उगाया जाता है और फिर तैयार पौधों को हाथों से खेत में रोपा जाता है।

📘 1.5 खाद एवं उर्वरक मिलाना

वे पदार्थ जिन्हें मिट्टी में पोषक स्तर बनाए रखने के लिए मिलाया जाता है, उन्हें खाद एवं उर्वरक कहते हैं। लगातार फ़सलों के उगाने से मिट्टी में कुछ पोषकों की कमी हो जाती है। इस क्षति को पूरा करने के लिए किसान खेतों में खाद देते हैं। अपर्याप्त खाद देने से पौधे कमज़ोर हो जाते हैं।

खाद (Manure): खाद एक कार्बनिक (जैविक) पदार्थ है जो पौधों या जंतु अपशिष्ट (जैसे गोबर) के अपघटन से प्राप्त होती है। अपघटन कुछ सूक्ष्म जीवों द्वारा होता है।

उर्वरक (Fertiliser): उर्वरक रासायनिक पदार्थ हैं जो विशेष पोषकों (जैसे नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम) से समृद्ध होते हैं। इनका उत्पादन फैक्ट्रियों में होता है। उदाहरण: यूरिया, अमोनियम सल्फेट, सुपर फॉस्फेट, पोटाश, NPK।

सारणी 1.1: उर्वरक एवं खाद में अंतर

क्र. सं. उर्वरक खाद
1. उर्वरक एक मानव निर्मित लवण है। खाद एक प्राकृतिक पदार्थ है जो गोबर एवं पौधों के अवशेष के विघटन से प्राप्त होता है।
2. उर्वरक का उत्पादन फैक्ट्रियों में होता है। खाद खेतों में बनाई जा सकती है।
3. उर्वरक से मिट्टी को ह्यूमस प्राप्त नहीं होती। खाद से मिट्टी को ह्यूमस प्रचुर मात्रा में प्राप्त होती है।
4. उर्वरक में पादप पोषक, जैसे कि नाइट्रोजन, फास्फोरस तथा पोटैशियम प्रचुरता में होते हैं। खाद में पादप पोषक तुलनात्मक रूप से कम होते हैं।
💡 जैविक खाद के लाभ:
जैविक खाद उर्वरक की अपेक्षा अधिक अच्छी मानी जाती है क्योंकि:
• इससे मिट्टी की जलधारण क्षमता में वृद्धि होती है।
• इससे मिट्टी भुरभुरी एवं सरंध्र हो जाती है जिससे गैस विनिमय सरलता से होता है।
• इससे मित्र जीवाणुओं की संख्या में वृद्धि हो जाती है।
• इस जैविक खाद से मिट्टी का गठन सुधर जाता है।

📘 1.6 सिंचाई (Irrigation)

जीवित रहने के लिए प्रत्येक जीव को जल की आवश्यकता होती है। पौधों में लगभग 90% जल होता है। जल आवश्यक है क्योंकि बीजों का अंकुरण शुष्क स्थिति में नहीं हो सकता। निश्चित अंतराल पर खेत में जल देना सिंचाई कहलाता है। सिंचाई का समय एवं बारम्बारता फसलों, मिट्टी एवं ऋतु में भिन्न होता है।

सिंचाई के स्रोत

कुएँ, जलकूप, तालाब/झील, नदियाँ, बाँध एवं नहर इत्यादि सिंचाई के प्रमुख स्रोत हैं।

सिंचाई के पारंपरिक तरीके

मवेशी अथवा मजदूर इन विधियों में इस्तेमाल किए जाते हैं। अतः यह सस्ते हैं, परन्तु यह कम दक्ष हैं। मुख्य तरीके निम्न हैं:

  • (i) मोट (घिरनी)
  • (ii) चेन पम्प
  • (iii) ढेकली
  • (iv) रहट (उत्तोलक तंत्र)

सिंचाई की आधुनिक विधियाँ

आधुनिक विधियों द्वारा हम जल का उपयोग मितव्ययता से कर सकते हैं। Class 8 Science Chapter 1 Notes in Hindi के अनुसार इसकी दो मुख्य विधियाँ हैं:

  1. छिड़काव तंत्र (Sprinkler System): इस विधि का उपयोग असमतल भूमि के लिए किया जाता है जहाँ पर जल कम मात्रा में उपलब्ध है। ऊर्ध्व पाइपों के ऊपरी सिरों पर घूमने वाले नोजल लगे होते हैं। इसका छिड़काव पौधों पर इस प्रकार होता है जैसे वर्षा हो रही हो।
  2. ड्रिप तंत्र (Drip System): इस विधि में जल बूंद-बूंद करके सीधे पौधों की जड़ों में गिरता है। फलदार पौधों, बगीचों एवं वृक्षों को पानी देने का यह सर्वोत्तम तरीका है। इसमें जल बिलकुल व्यर्थ नहीं होता।
Bihar Board Class 8 Science Chapter 1 Solutions - Drip System Diagram

चित्र 1.5 (b): ड्रिप तंत्र (Drip System) – जल संरक्षण की सर्वोत्तम विधि

📘 1.7 खरपतवार से सुरक्षा

खेत में कई अन्य अवांछित पौधे प्राकृतिक रूप से फसल के साथ उग जाते हैं। इन अवांछित पौधों को खरपतवार (Weeds) कहते हैं। खरपतवार हटाने की प्रक्रिया को निराई कहते हैं।

निराई आवश्यक है क्योंकि खरपतवार जल, पोषक, जगह और प्रकाश की स्पर्धा कर फसल की वृद्धि पर प्रभाव डालते हैं। खरपतवार को हटाने के लिए किसान खुरपी या हैरो की सहायता लेते हैं।

⚠️ खरपतवारनाशी (Weedicides) का उपयोग:
रसायनों के उपयोग से भी खरपतवार नियंत्रण किया जाता है, जिन्हें खरपतवारनाशी कहते हैं (जैसे- 2, 4-D)। किसान इनका छिड़काव करते समय अपना मुँह एवं नाक कपड़े से ढक लेते हैं क्योंकि खरपतवारनाशी के छिड़काव से किसान के स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

📘 1.8 कटाई (Harvesting)

फसल पक जाने के बाद उसे काटना कटाई कहलाता है। एक अनाज फसल को पकने में लगभग 3 से 4 महीने का समय लगता है। हमारे देश में दराँती (Sickle) की सहायता से हाथ द्वारा कटाई की जाती है, अथवा एक मशीन का उपयोग किया जाता है जिसे हार्वेस्टर (Harvester) कहते हैं।

काटी गई फसल से बीजों/दानों को भूसे से अलग करना थ्रेशिंग (Threshing) कहलाता है। यह कार्य कॉम्बाइन मशीन (Combine) द्वारा किया जाता है जो हार्वेस्टर और थ्रेशर का संयुक्त रूप है। छोटे खेत वाले किसान अनाज के दानों को फटक कर (Winnowing) अलग करते हैं।

🎉 कटाई पर्व (Harvest Festivals)
तीन-चार महीनों के कठोर परिश्रम के बाद कटाई का समय आता है। यह समय थोड़ा आराम करने एवं खुशी मनाने का है क्योंकि पिछली ऋतु के प्रयत्न का फल मिलता है। कटाई ऋतु के साथ कुछ विशेष पर्व जुड़े हैं जैसे- पोंगल, बैसाखी, होली, दीवाली, नबान्या एवं बिहू।

📘 1.9 भण्डारण (Storage)

उत्पाद का भण्डारण एक महत्वपूर्ण कार्य है। यदि फसल के दानों को अधिक समय तक रखना हो, तो उन्हें नमी, कीट, चूहों एवं सूक्ष्मजीवों से सुरक्षित रखना होगा। ताज़ा फसल में नमी की मात्रा अधिक होती है। अतः भण्डारण से पहले दानों (बीजों) को धूप में सुखाना आवश्यक है।

किसान अपनी फसल उत्पाद का भण्डारण जूट के बोरों या धातु के बड़े पात्र (bins) में करते हैं। बड़े पैमाने पर बीजों का भण्डारण साइलो (Silos) और भण्डार गृहों (Granaries) में किया जाता है। घरों में अनाज को सुरक्षित रखने के लिए नीम की सूखी पत्तियों का उपयोग किया जाता है।

📘 1.10 जंतुओं से भोजन Bihar Board Class 8 Science Solutions

पौधों की तरह ही जंतु भी हमें विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ प्रदान करते हैं। समुद्र के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग मछली का मुख्य आहार के रूप में उपयोग करते हैं। मछली से कॉड लिवर तेल मिलता है जिसमें विटामिन-D अधिक मात्रा में पाया जाता है।

🐄 पशुपालन (Animal Husbandry):
घरों में अथवा फार्म पर पाले जाने वाले पालतू पशुओं को उचित भोजन, आवास एवं देखभाल की आवश्यकता होती है। जब यह बड़े पैमाने पर किया जाता है तो इसे पशुपालन कहते हैं।

📘 अभ्यास प्रश्न – NCERT Class 8 Science Chapter 1 Solutions

प्रिय विद्यार्थियों, यहाँ NCERT Class 8 Science Chapter 1 (फसल उत्पादन एवं प्रबंध) के अभ्यास के सभी प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं। इन्हें अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखें और परीक्षा की तैयारी करें।

1. उचित शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:

(तैरने, जल, फ़सल, पोषक, तैयारी)

(क) एक स्थान पर एक ही प्रकार के बड़ी मात्रा में उगाए गए पौधों को फ़सल कहते हैं।

(ख) फ़सल उगाने से पहले प्रथम चरण मिट्टी की तैयारी होती है।

(ग) क्षतिग्रस्त बीज जल की सतह पर तैरने लगेंगे।

(घ) फ़सल उगाने के लिए पर्याप्त सूर्य का प्रकाश एवं मिट्टी से जल तथा पोषक आवश्यक हैं।


2. ‘कॉलम A’ में दिए गए शब्दों का मिलान ‘कॉलम B’ से कीजिए:
कॉलम A कॉलम B (सही उत्तर)
(i) खरीफ़ फ़सल धान एवं मक्का
(ii) रबी फ़सल गेहूँ, चना, मटर
(iii) रासायनिक उर्वरक यूरिया एवं सुपर फॉस्फेट
(iv) कार्बनिक खाद पशु अपशिष्ट, गोबर, मूत्र एवं पादप अवशेष

3. निम्न के दो-दो उदाहरण दीजिए:

(क) खरीफ़ फ़सल: धान एवं मक्का

(ख) रबी फ़सल: गेहूँ एवं चना


4. निम्न पर अपने शब्दों में एक-एक पैराग्राफ लिखिए:

(क) मिट्टी तैयार करना: यह कृषि की प्रथम प्रक्रिया है। इसमें मिट्टी को उलट-पलट कर पोला बनाया जाता है जिससे पौधों की जड़ें गहराई तक जा सकें और श्वसन कर सकें। यह प्रक्रिया जुताई कहलाती है।

(ख) बुआई: खेत में बीज डालना बुआई कहलाता है। इसके लिए स्वस्थ और साफ बीजों का चयन किया जाता है। बुआई के लिए सीड-ड्रिल या पारंपरिक औजारों का उपयोग किया जाता है।

(ग) निराई: खेत में फसल के साथ उगे अवांछित पौधों (खरपतवार) को हटाने की प्रक्रिया निराई कहलाती है। यह फसल की अच्छी वृद्धि के लिए आवश्यक है क्योंकि खरपतवार जल और पोषक तत्वों के लिए मुख्य फसल से स्पर्धा करते हैं।

(घ) थ्रेशिंग: काटी गई फसल से बीजों या दानों को भूसे से अलग करने की प्रक्रिया थ्रेशिंग कहलाती है। आजकल यह कार्य ‘कॉम्बाइन’ मशीन द्वारा किया जाता है।


5. स्पष्ट कीजिए कि उर्वरक खाद से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर: उर्वरक एक अकार्बनिक लवण है जिसका उत्पादन फैक्ट्रियों में होता है, जबकि खाद एक प्राकृतिक जैविक पदार्थ है जो गोबर और पौधों के अवशेषों के विघटन से प्राप्त होता है। उर्वरक से मिट्टी को ह्यूमस नहीं मिलती, लेकिन खाद से प्रचुर मात्रा में ह्यूमस प्राप्त होती है।


6. सिंचाई किसे कहते हैं? जल संरक्षित करने वाली सिंचाई की दो विधियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: निश्चित अंतराल पर खेत में जल देना सिंचाई कहलाता है। जल संरक्षित करने वाली दो मुख्य विधियाँ निम्न हैं:

  • छिड़काव तंत्र: इसमें नोजल की सहायता से पानी का छिड़काव वर्षा की तरह किया जाता है। यह असमतल भूमि के लिए उत्तम है।
  • ड्रिप तंत्र: इसमें पानी बूंद-बूंद करके सीधे पौधों की जड़ों में गिरता है, जिससे जल व्यर्थ नहीं होता। यह फलदार पौधों और बगीचों के लिए सर्वोत्तम है।

7. यदि गेहूँ को खरीफ़ ऋतु में उगाया जाए तो क्या होगा? चर्चा कीजिए।

उत्तर: गेहूँ एक रबी फसल है जिसे कम तापमान और कम जल की आवश्यकता होती है। यदि इसे खरीफ़ ऋतु (वर्षा ऋतु) में उगाया जाए, तो अत्यधिक वर्षा और नमी के कारण गेहूँ के पौधे सड़ सकते हैं या उनमें बीमारियाँ लग सकती हैं, जिससे पैदावार बहुत कम या शून्य हो जाएगी।


8. खेत में लगातार फ़सल उगाने से मिट्टी पर क्या प्रभाव पड़ता है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: खेत में लगातार फसल उगाने से मिट्टी में पोषक तत्वों (जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस आदि) की कमी हो जाती है। इससे मिट्टी की उर्वरक शक्ति कम हो जाती है और अगली फसल की पैदावार अच्छी नहीं होती। इसकी पूर्ति के लिए मिट्टी को कुछ समय खाली छोड़ना या खाद डालना आवश्यक होता है।


9. खरपतवार क्या हैं? हम उनका नियंत्रण कैसे कर सकते हैं?

उत्तर: खेत में फसल के साथ प्राकृतिक रूप से उगने वाले अवांछित पौधों को खरपतवार कहते हैं। इनका नियंत्रण निम्न प्रकार से किया जा सकता है:

  • जुताई के समय उन्हें उखाड़कर।
  • खुरपी या हैरो की सहायता से समय-समय पर निराई करके।
  • खरपतवारनाशी रसायनों (जैसे 2, 4-D) का छिड़काव करके।

10. गन्ना उत्पादन का उचित क्रम (Flowchart):

उत्तर: गन्ना उत्पादन का सही क्रम नीचे दिया गया है:

1. मिट्टी तैयार करना → 2. खेत की जुताई करना → 3. बुआई → 4. खाद देना → 5. सिंचाई → 6. कटाई → 7. फसल को चीनी मिल में भेजना।


11. शब्द पहेली (संकेतों की सहायता से हल करें):

ऊपर से नीचे:
1. सिंचाई की एक विधि: ड्रिप
2. बड़े पैमाने पर पालतू पशुओं की देखभाल: पशुपालन
6. फसल जिसे वर्षा ऋतु में बोया जाता है: खरीफ

बाईं से दाईं ओर:
1. दानों को भूसे से अलग करना: थ्रेशिंग
4. शीत ऋतु में उगाई जाने वाली फसल: रबी
5. एक ही किस्म के पौधे: फसल

Teacher Tip
छात्रों, इस अध्याय को बेहतर ढंग से समझने के लिए अपने आस-पास के किसी खेत या नर्सरी का भ्रमण करें। वहाँ किसानों से पूछें कि वे बीजों का चयन कैसे करते हैं और सिंचाई के लिए कौन सा तंत्र अपनाते हैं। इससे आपको किताबी ज्ञान को वास्तविक दुनिया से जोड़ने में मदद मिलेगी।

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BSEBHub: Bihar Board & NCERT Solutions| Author: Suraj Mishra
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