Bihar Board Class 8 Civics Chapter 7 Solution Hindi: जनसुविधाएँ (Public Facilities)
क्या आपने कभी सोचा है कि सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हम जिन सुविधाओं का उपयोग करते हैं—जैसे पानी, बिजली, स्कूल और बसें—वे हम तक कैसे पहुँचती हैं? bihar board class 8 civics chapter 7 solution hindi के इस लेख में हम गहराई से समझेंगे कि क्यों कुछ इलाकों में भरपूर पानी आता है जबकि कुछ लोग एक-एक बाल्टी के लिए तरसते हैं। यह अध्याय हमें नागरिक होने के नाते हमारे अधिकारों और सरकार की जिम्मेदारियों का बोध कराता है।
जनसुविधाएँ क्या हैं और ये क्यों महत्वपूर्ण हैं?
मानव जीवन को गरिमापूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए कुछ बुनियादी जरूरतों का पूरा होना अनिवार्य है। इन्हें ही जनसुविधाएँ (Public Facilities) कहा जाता है। इसमें मुख्य रूप से शुद्ध पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएँ, स्वच्छता (Sanitation), बिजली, सार्वजनिक परिवहन (बस/रेल) और शिक्षण संस्थान शामिल हैं।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21) के तहत ‘जीवन के अधिकार’ को एक मौलिक अधिकार माना गया है। न्यायपालिका ने कई बार स्पष्ट किया है कि ‘जीवन के अधिकार’ का अर्थ केवल जीवित रहना नहीं है, बल्कि गरिमा के साथ जीना है, जिसमें ‘पानी का अधिकार’ (Right to Water) भी शामिल है। इसका अर्थ है कि हर व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में और सस्ती कीमत पर सुरक्षित पानी मिलना चाहिए।
जनसुविधाएँ मुहैया कराने में सरकार की भूमिका
चूँकि ये सुविधाएँ लाभ कमाने के लिए नहीं बल्कि कल्याण के लिए होती हैं, इसलिए इनकी मुख्य जिम्मेदारी सरकार की होती है। निजी कंपनियाँ केवल वहीं निवेश करती हैं जहाँ उन्हें मुनाफा दिखे (जैसे बोतलबंद पानी या प्राइवेट स्कूल), लेकिन दूर-दराज के गाँवों या गरीब बस्तियों में सेवाएँ देना उनके लिए लाभदायक नहीं होता।
सरकार को पैसा कहाँ से मिलता है? सरकार हर साल बजट पेश करती है जिसमें जनसुविधाओं पर होने वाले खर्च का विवरण होता है। इस खर्च की भरपाई जनता से वसूले गए टैक्स (कर) और सुविधाओं के बदले ली जाने वाली मामूली फीस से की जाती है।
- भारत में स्वच्छता (Sanitation) की स्थिति पेयजल से भी अधिक चुनौतीपूर्ण है; करोड़ों लोगों के पास आज भी शौचालय की सुविधा नहीं है।
- सुलभ इंटरनेशनल जैसे गैर-सरकारी संगठन पिछले कई दशकों से भारत में कम कीमत पर स्वच्छता सुविधाएँ उपलब्ध करा रहे हैं।
- मुंबई की उपनगरीय रेलवे (Local Trains) दुनिया के सबसे व्यस्त सार्वजनिक परिवहन तंत्रों में से एक है।
- पोर्टो एलेग्रे (ब्राजील) एक ऐसा शहर है जहाँ जल विभाग सरकार के अधीन है और वहाँ शिशु मृत्यु दर बहुत कम है क्योंकि पानी सबको सुलभ है।
- जनगणना के दौरान केवल जनसंख्या ही नहीं, बल्कि घरों में उपलब्ध जनसुविधाओं (बिजली, पानी, शौचालय) के आँकड़े भी जुटाए जाते हैं।
- जनसुविधाएँ: वे बुनियादी सेवाएँ जो समुदाय के सभी लोगों के लिए आवश्यक होती हैं।
- स्वच्छता: मानव मल-मूत्र के सुरक्षित निपटान और साफ-सफाई की व्यवस्था।
- सार्वभौमिक पहुँच: जब कोई सुविधा हर व्यक्ति की पहुँच और सामर्थ्य में हो।
- अनुच्छेद 21: भारतीय संविधान का वह भाग जो जीवन की सुरक्षा का अधिकार देता है।
- टैक्स (कर): जनता द्वारा सरकार को दिया जाने वाला अनिवार्य भुगतान।
- निजीकरण: जब सरकारी सेवाओं का संचालन निजी कंपनियों को सौंप दिया जाता है।
- बजट: सरकार की आगामी वर्ष की आय और व्यय का वार्षिक लेखा-जोखा।
- पेयजल: वह जल जो पीने के लिए सुरक्षित और शुद्ध हो।
- सार्वजनिक परिवहन: बस, रेल या मेट्रो जैसी सेवाएँ जो आम जनता के लिए उपलब्ध हैं।
- आधारभूत ढांचा: किसी देश या क्षेत्र की प्रगति के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा (सड़क, बिजली)।
NCERT अभ्यास: प्रश्न एवं उत्तर
उत्तर: दुनिया भर में जनसुविधाओं की जिम्मेदारी सरकार पर होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. लोक कल्याण: जनसुविधाओं का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना नहीं बल्कि लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना है।
2. निजी क्षेत्र की सीमाएँ: निजी कंपनियाँ केवल उन क्षेत्रों में काम करती हैं जहाँ उन्हें मुनाफा हो। वे गरीबों को सस्ती सेवा देने में सक्षम या इच्छुक नहीं होतीं।
3. समानता: केवल सरकार ही यह सुनिश्चित कर सकती है कि समाज के हर वर्ग को समान रूप से सुविधाएँ मिलें।
उत्तर: कुछ हद तक यह सही हो सकता है क्योंकि निजी कंपनियों के पास आधुनिक तकनीक और प्रबंधन की क्षमता होती है। लेकिन इसमें सरकार की कड़ी निगरानी जरूरी है ताकि वे जनता से अधिक शुल्क (जैसे अत्यधिक टोल टैक्स) न वसूलें। बुनियादी जरूरतें जैसे पानी और स्वास्थ्य पूरी तरह निजी हाथों में नहीं होनी चाहिए।
उत्तर: (छात्र इसे अपने विवेक से लिखें, यहाँ एक आदर्श उत्तर दिया गया है): हमारे इलाके में पानी की आपूर्ति नगर निगम द्वारा की जाती है। पानी दिन में दो बार, सुबह और शाम आता है। हालांकि, गर्मियों के दिनों में पानी का दबाव कम हो जाता है और कई बार टैंकर मंगवाने पड़ते हैं। गरीब बस्तियों में स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण है जहाँ लोगों को सार्वजनिक नलों पर लंबी कतारों में लगना पड़ता है।
उत्तर: नहीं, पानी का वितरण समान नहीं है। इसके मुख्य कारण हैं:
- आर्थिक स्थिति: अमीर लोग निजी बोरवेल और वाटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करते हैं।
- भौगोलिक स्थिति: ऊँचाई पर स्थित घरों में पानी कम दबाव से पहुँचता है।
- बुनियादी ढांचा: पुरानी बस्तियों में पाइपलाइन जर्जर होने के कारण आपूर्ति बाधित रहती है।
उत्तर: हाँ, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाओं में भी भारी अंतर है।
- बिजली: औद्योगिक क्षेत्रों और पॉश इलाकों में बिजली कटौती कम होती है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक।
- शिक्षा: निजी स्कूलों में बेहतर सुविधाएँ हैं, जबकि कई सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढाँचे की कमी है।
उत्तर: पूरी तरह से निजीकरण समाधान नहीं है। तर्क:
- निजी कंपनियाँ केवल मुनाफे के लिए काम करती हैं, जिससे गरीब लोग इन सुविधाओं से वंचित हो सकते हैं।
- दुनिया भर के अनुभव (जैसे बोलीविया का जल युद्ध) बताते हैं कि पानी जैसी सेवाओं का निजीकरण जनता के लिए कष्टकारी रहा है।
उत्तर: सरकार को मुख्य रूप से दो स्रोतों से धन मिलता है:
- जनता से प्राप्त टैक्स (कर): आयकर, जीएसटी और अन्य कर।
- सेवा शुल्क: बिजली के बिल, पानी का बिल और बसों का किराया।
उत्तर: यह इसलिए जरूरी है ताकि सरकार को पता चल सके कि:
- किन क्षेत्रों में सुविधाओं का अभाव है।
- नई योजनाएँ कहाँ शुरू करने की आवश्यकता है।
- विकास की प्रगति को मापने के लिए डेटा उपलब्ध हो सके।
उत्तर: इसका समाज पर गहरा असर हो सकता है:
- समाज दो वर्गों में बँट सकता है—एक वह जिसके पास महँगी और अच्छी शिक्षा है, और दूसरा वह जो पिछड़ रहा है।
- समान अवसर के सिद्धांत का हनन होता है।
- सामाजिक और आर्थिक खाई और अधिक चौड़ी हो सकती है।
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Suraj Kumar Mishra