भारत एक विशाल लोकतांत्रिक देश है जहाँ जनता ही सर्वोपरि है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि 140 करोड़ से अधिक की आबादी वाले इस देश में नियम-कानून कैसे बनते हैं? आम जनता की आवाज दिल्ली के गलियारों तक कैसे पहुँचती है? bihar board class 8 civics chapter 3 solution hindi के इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि भारत में संसद की भूमिका क्या है, प्रतिनिधि कैसे चुने जाते हैं और क्यों ‘संसद’ को लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। यह अध्याय न केवल आपकी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी पहला कदम है।
संसद और लोकतंत्र: एक विस्तृत विश्लेषण
भारतीय संविधान के अनुसार, भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है। यहाँ शासन की शक्ति जनता के हाथों में निहित है। संसद वह मंच है जहाँ जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि बैठकर देश के भविष्य का फैसला करते हैं।
ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय जनता भय के साये में जीती थी। उन्हें सरकार के फैसलों पर असहमति जताने का अधिकार नहीं था। 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने के बाद, संविधान निर्माताओं ने यह सुनिश्चित किया कि स्वतंत्र भारत में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात कहने और शासन में भागीदारी करने का अधिकार मिले। यही कारण है कि सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के सिद्धांत को अपनाया गया, जिसके तहत 18 वर्ष से ऊपर का हर नागरिक वोट दे सकता है।
लोकतंत्र का प्रस्थान बिंदु ‘सहमति’ का विचार है। लोग चुनाव के माध्यम से अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं। इन निर्वाचित प्रतिनिधियों का समूह ही ‘संसद’ कहलाता है। संसद ही सरकार को नियंत्रित करती है और उसका मार्गदर्शन करती है। इस प्रकार, प्रतिनिधित्व के माध्यम से जनता ही अप्रत्यक्ष रूप से सरकार चलाती है।
भारतीय संसद के तीन प्रमुख अंग हैं: राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा। संसद के मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:
- राष्ट्रीय सरकार का चुनाव करना: लोकसभा चुनाव के बाद बहुमत प्राप्त दल अपनी सरकार बनाता है।
- सरकार को नियंत्रित करना: प्रश्नकाल के माध्यम से सांसद सरकार की खामियों को उजागर करते हैं।
- कानून बनाना: देश के लिए नए कानून बनाना और पुराने कानूनों में संशोधन करना संसद का प्राथमिक कार्य है।
- भारत की नई संसद भवन का डिजाइन ‘त्रिकोणीय’ है जो आधुनिक भारत की प्रगति को दर्शाता है।
- लोकसभा को ‘निचला सदन’ और राज्यसभा को ‘ऊपरी सदन’ कहा जाता है, लेकिन लोकसभा अधिक शक्तिशाली होती है।
- संसद में ‘प्रश्नकाल’ वह समय होता है जब सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह ठहराया जाता है।
- राज्यसभा में 233 निर्वाचित सदस्य और 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं।
- भारतीय संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता हमेशा लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) करता है।
- गठबंधन: जब किसी एक दल को बहुमत नहीं मिलता, तो कई दल मिलकर सरकार बनाते हैं।
- निर्वाचन क्षेत्र: वह भौगोलिक क्षेत्र जहाँ से एक प्रतिनिधि चुना जाता है।
- बहुमत: कुल सीटों का आधे से अधिक हिस्सा प्राप्त करना।
- विपक्ष: वे दल जो सरकार का हिस्सा नहीं होते और सरकार की आलोचना करते हैं।
- सांसद (MP): संसद के सदस्य को सांसद कहा जाता है।
- कार्यपालिका: लोगों का वह समूह जो संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को लागू करता है।
- प्रश्नकाल: संसद सत्र का वह समय जब मंत्री सांसदों के सवालों का जवाब देते हैं।
- प्रस्ताव: संसद में किसी विषय पर चर्चा के लिए लाया गया औपचारिक पत्र।
- संविधान: वह सर्वोच्च कानून जिसके अनुसार देश चलता है।
- सत्ताधारी दल: वह राजनीतिक दल जिसकी सरकार होती है।
NCERT अभ्यास: प्रश्न-उत्तर
उत्तर: राष्ट्रवादी आंदोलन ने इस विचार का समर्थन इसलिए किया क्योंकि ब्रिटिश शासन के अधीन भारतीयों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई अधिकार नहीं था। स्वतंत्रता संग्राम ने यह स्पष्ट कर दिया था कि एक लोकतांत्रिक देश में प्रत्येक नागरिक को सरकार बनाने और उसे बदलने का समान अधिकार होना चाहिए। सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार समानता के सिद्धांत पर आधारित है, जो यह मानता है कि सभी वयस्क नागरिक समझदार हैं और अपनी सरकार चुनने के योग्य हैं।
उत्तर: (छात्रों के लिए उदाहरण स्वरूप – बिहार के संदर्भ में)
| विवरण | राज्य सरकार (बिहार) | केंद्र सरकार (भारत) |
|---|---|---|
| सत्ताधारी दल | JDU + BJP (गठबंधन) | BJP + NDA |
| निर्वाचित प्रतिनिधि | (अपने MLA का नाम लिखें) | (अपने MP का नाम लिखें) |
| विपक्ष में दल | RJD, Congress | INC, SP, TMC |
| पिछले चुनाव कब हुए | 2020 | 2024 |
| अगले चुनाव कब होंगे | 2025 | 2029 |
उत्तर: प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया में जनता की भूमिका निर्णायक होती है। जनता चुनाव के माध्यम से अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट देती है। जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट मिलते हैं, वह विजयी होता है। इस प्रकार, जनता की सहमति ही सरकार के अस्तित्व का आधार बनती है। यदि कोई सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरती, तो अगले चुनाव में जनता उसे बदलने की शक्ति रखती है।
उत्तर: लोकसभा और राज्यसभा के मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
- लोकसभा: इसे ‘निचला सदन’ कहा जाता है। इसके सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं। इसकी कुल सदस्य संख्या 543 है।
- राज्यसभा: इसे ‘ऊपरी सदन’ कहा जाता है। इसके सदस्य राज्य विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं। इसमें 233 निर्वाचित और 12 मनोनीत सदस्य होते हैं।
उत्तर: भारत विविधताओं का देश है। संसद में सभी वर्गों जैसे दलितों, आदिवासियों और महिलाओं की भागीदारी इसलिए आवश्यक है ताकि उनकी समस्याओं और हितों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जा सके। यदि शासन में समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व नहीं होगा, तो लोकतंत्र अधूरा माना जाएगा। इसीलिए संसद में कुछ सीटें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित की गई हैं।
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