Bihar Board Class 8 History Chapter 8 Solution

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🎓 Class: 8 | 📚 Subject: इतिहास (हमारे अतीत-III) | 📝 Chapter: 8 – राष्ट्रीय आंदोलन का संघटन: 1870 के दशक से 1947 तक

Bihar Board Class 8 History Chapter 8 Solution Hindi: राष्ट्रीय आंदोलन का संघटन (1870-1947)

क्या आप जानते हैं कि भारत की आज़ादी की नींव केवल युद्धों से नहीं, बल्कि वैचारिक क्रांति और जन-आंदोलनों से रखी गई थी? bihar board class 8 history chapter 8 solution hindi के इस विशेष लेख में, हम 1870 से लेकर 1947 तक के उस रोमांचक सफर को समझेंगे जिसने मुट्ठी भर प्रदर्शनकारियों को एक विशाल राष्ट्रीय शक्ति में बदल दिया। यदि आप कक्षा 8 के छात्र हैं या शिक्षक, तो यह लेख आपके लिए इतिहास को रटने के बजाय उसे जीने का माध्यम बनेगा।

राष्ट्रवाद का उदय और प्रारंभिक संगठन

📖 राष्ट्रवाद की पृष्ठभूमि

1870 के दशक तक आते-आते भारतीयों के मन में यह सवाल उठने लगा था कि “यह देश किसके लिए है?” इसका उत्तर मिला – भारत यहाँ रहने वाले तमाम लोगों का घर है। लेकिन ब्रिटिश शासन भारत के संसाधनों और लोगों के जीवन पर नियंत्रण कर रहा था। इस चेतना ने राजनीतिक संगठनों को जन्म दिया।

1870 और 1880 के दशक में कई संगठनों की स्थापना हुई, जैसे पूना सार्वजनिक सभा, इंडियन एसोसिएशन, और मद्रास महाजन सभा। इन संगठनों का मुख्य लक्ष्य भारतीयों को सशक्त बनाना और उन्हें अपने देश के मामलों में निर्णय लेने का अधिकार दिलाना था। 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना ने इस आंदोलन को एक राष्ट्रीय स्वरूप दिया।

📖 नरमपंथी और गरमपंथी विचार

कांग्रेस के शुरुआती 20 वर्षों (1885-1905) को ‘नरमपंथी’ चरण कहा जाता है। इनका मानना था कि अंग्रेज न्यायप्रिय हैं और वे बातचीत के माध्यम से सुधार लाएंगे। वे “प्रार्थना और याचिका” की राजनीति में विश्वास करते थे।

इसके विपरीत, लाल-बाल-पाल (लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और विपिन चंद्र पाल) जैसे नेताओं ने अधिक आमूल परिवर्तनवादी (Radical) रास्ता अपनाया। तिलक ने नारा दिया – “स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँँगा!” उन्होंने आत्मनिर्भरता और रचनात्मक कार्य पर जोर दिया।

अध्याय की कहानी: आज़ादी की गूँज
यह कहानी एक ऐसे देश की है जो बेड़ियों में जकड़ा हुआ था, लेकिन उसकी आत्मा स्वतंत्र होने के लिए तड़प रही थी। 1905 में बंगाल का विभाजन हुआ, जिसने पूरे भारत में गुस्से की लहर पैदा कर दी। यहाँ से ‘स्वदेशी आंदोलन’ की शुरुआत हुई। लोग विदेशी कपड़ों की होली जलाने लगे और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने लगे। फिर 1915 में दक्षिण अफ्रीका से एक दुबला-पतला इंसान लौटा – महात्मा गांधी। उन्होंने चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद के आंदोलनों से दिखाया कि बिना हथियार उठाए भी बड़ी से बड़ी सत्ता को झुकाया जा सकता है। देखते ही देखते, पूरा भारत सड़कों पर उतर आया। असहयोग, सविनय अवज्ञा और अंत में ‘भारत छोड़ो’ के नारों ने अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया। यह केवल राजनीति नहीं, करोड़ों भारतीयों के स्वाभिमान की जीत थी।
रोचक और महत्वपूर्ण तथ्य
  • 1. 1885 में कांग्रेस के पहले अधिवेशन में केवल 72 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था।
  • 2. बाल गंगाधर तिलक ने लोगों में राष्ट्रवाद जगाने के लिए ‘केसरी’ नामक अखबार निकाला।
  • 3. गांधीजी ने साबरमती से दांडी तक 240 मील की यात्रा कर नमक कानून तोड़ा था।
  • 4. 1930 में पहली बार ‘पूर्ण स्वराज्य’ के लिए स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था।
  • 5. सुभाष चंद्र बोस ने ‘आज़ाद हिंद फ़ौज’ का पुनर्गठन कर ‘दिल्ली चलो’ का नारा दिया।
शब्दावली: कठिन शब्दों के अर्थ
  1. संप्रभु: बाहरी हस्तक्षेप के बिना स्वतंत्र रूप से कदम उठाने की क्षमता।
  2. सार्वजनिक: जो सब लोगों का हो या सबके लिए हो।
  3. निरस्त करना: किसी कानून को आधिकारिक रूप से समाप्त करना।
  4. क्रांतिकारी हिंसा: समाज में बदलाव के लिए ताकत का प्रयोग।
  5. परिषद: सलाह देने या नियम बनाने वाली निर्वाचित संस्था।
  6. सत्याग्रह: सत्य और अहिंसा पर आधारित शांतिपूर्ण विरोध।
  7. स्वदेशी: अपने देश में निर्मित वस्तुओं का उपयोग।
  8. पृथक निर्वाचन: धर्म या जाति के आधार पर अलग चुनाव क्षेत्र।
  9. असहयोग: शासन व्यवस्था के साथ सहयोग न करना।
  10. पूर्ण स्वराज्य: पूरी तरह से स्वतंत्रता या अपना राज।
अध्याय का सारांश (Summary)
यह अध्याय हमें बताता है कि कैसे राष्ट्रवाद की भावना ने बिखरे हुए भारत को एक सूत्र में पिरोया। 1885 में कांग्रेस के गठन से लेकर 1947 में विभाजन और आज़ादी तक की यात्रा को इसमें समेटा गया है। मुख्य पड़ावों में रोलेट एक्ट (1919), जलियाँवाला बाग हत्याकांड, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन शामिल हैं। गांधीजी के अहिंसक नेतृत्व और सुभाष चंद्र बोस जैसे क्रांतिकारियों के बलिदान ने मिलकर ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी, जिसका परिणाम 15 अगस्त 1947 की स्वतंत्रता के रूप में सामने आया।

पाठ के बीच की गतिविधियाँ (Gatiwidhi Solution)

गतिविधि 1: (पेज 100) – स्रोत 1 पढ़ें। मीरा बेन के अनुसार, ‘आज़ादी’ का असली मतलब क्या था?

उत्तर: मीरा बेन के अनुसार, आज़ादी का मतलब केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं थी, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलन बिठाकर जीना था। उनका मानना था कि यदि भारत पश्चिम की अंधी नकल करते हुए केवल औद्योगीकरण पर ध्यान देगा, तो वह जल्द ही विनाश की ओर बढ़ जाएगा। असली आज़ादी नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा में थी।


गतिविधि 2: बंगाल विभाजन के समय स्वदेशी आंदोलन ने लोगों को कैसे प्रभावित किया?

उत्तर: स्वदेशी आंदोलन ने लोगों में आत्मनिर्भरता की भावना जगाई। लोगों ने विदेशी सामानों का बहिष्कार किया, सरकारी शिक्षण संस्थानों को छोड़ दिया और भारतीय उद्योगों व राष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा दिया। इसने ‘वंदे मातरम’ के नारे के साथ पूरे देश में एकता का संचार किया।


अभ्यास के प्रश्न-उत्तर (NCERT Solutions)

🖋️ 1. फिर से याद करें
प्रश्न 1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस किन लोगों के पक्ष में बोल रही थी?

उत्तर: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारत के तमाम लोगों के पक्ष में बोल रही थी, चाहे वे किसी भी वर्ग, रंग, जाति, भाषा या लिंग के हों। उनका मानना था कि भारत यहाँ रहने वाले सभी लोगों का घर है और अंग्रेज यहाँ के संसाधनों पर अवैध कब्जा जमाए हुए हैं।


प्रश्न 2. पहले विश्व युद्ध से भारत पर कौन-से आर्थिक प्रभाव पड़े?

उत्तर: पहले विश्व युद्ध ने भारत की आर्थिक स्थिति बदल दी:

  • ब्रिटिश भारत सरकार के रक्षा व्यय में भारी इजाफा हुआ।
  • खर्चों की भरपाई के लिए सरकार ने व्यक्तिगत आय और व्यावसायिक लाभ पर कर (Tax) बढ़ा दिया।
  • युद्ध की जरूरतों के कारण कीमतों में भारी उछाल आया, जिससे आम जनता की परेशानियाँ बढ़ गईं।
  • दूसरी ओर, युद्ध सामग्री की आपूर्ति के कारण भारतीय उद्योगों को विस्तार का मौका मिला।


प्रश्न 3. 1940 के मुस्लिम लीग के प्रस्ताव में क्या माँग की गई थी?

उत्तर: 1940 में मुस्लिम लीग ने देश के उत्तर-पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों में मुसलमानों के लिए “स्वतंत्र राज्यों” (Independent States) की माँग का एक प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव में ‘विभाजन’ या ‘पाकिस्तान’ शब्द का ज़िक्र नहीं था, लेकिन इसने भविष्य के पृथक राष्ट्र की नींव रख दी थी।


🤔 2. आइए विचार करें
प्रश्न 4. मध्यमार्गी कौन थे? वे ब्रिटिश शासन के खिलाफ़ किस तरह का संघर्ष करना चाहते थे?

उत्तर: कांग्रेस के शुरुआती नेता जैसे दादाभाई नौरोजी और सुरेन्द्रनाथ बनर्जी मध्यमार्गी (Moderates) कहलाते थे। वे ब्रिटिश शासन के खिलाफ शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीका अपनाना चाहते थे:

  • वे अखबारों के माध्यम से ब्रिटिश सरकार को भारतीय समस्याओं से अवगत कराते थे।
  • वे न्याय और स्वतंत्रता के ब्रिटिश सिद्धांतों में विश्वास करते थे।
  • वे भाषणों और लेखों द्वारा जनमत तैयार करना चाहते थे ताकि अंग्रेज उनकी मांगों पर विचार करें।


प्रश्न 5. कांग्रेस में आमूल परिवर्तनवादी (Radicals) की राजनीति मध्यमार्गी से किस तरह भिन्न थी?

उत्तर: आमूल परिवर्तनवादियों (जैसे तिलक, लाजपत राय) की राजनीति मध्यमार्गियों से काफी अलग थी:

  • मध्यमार्गी “प्रार्थना” में विश्वास करते थे, जबकि रेडिकल्स “आत्मनिर्भरता और रचनात्मक कार्य” पर जोर देते थे।
  • रेडिकल्स का मानना था कि लोगों को सरकार के “नेक इरादों” पर भरोसा करने के बजाय अपनी ताकत पर भरोसा करना चाहिए।
  • रेडिकल्स “स्वराज्य” को अपना अधिकार मानते थे, जबकि मध्यमार्गी केवल सुधार चाहते थे।


प्रश्न 6. चर्चा करें कि भारत के विभिन्न भागों में असहयोग आंदोलन ने किस-किस तरह के रूप ग्रहण किए? लोग गांधीजी के बारे में क्या समझते थे?

उत्तर: असहयोग आंदोलन ने देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय रूप लिए:

  • खेड़ा (गुजरात): पाटीदार किसानों ने अंग्रेजों की भारी लगान माँग के खिलाफ अहिंसक अभियान चलाया।
  • तटीय आंध्र और तमिलनाडु: शराब की दुकानों की पिकेटिंग की गई और वन सत्याग्रह हुए।
  • सिंध (अब पाकिस्तान): मुस्लिम व्यापारियों और किसानों ने खिलाफत के आह्वान का समर्थन किया।
  • पंजाब: सिखों के अकाली आंदोलन ने भ्रष्ट महंतों को हटाने के लिए प्रदर्शन किया।
लोग गांधीजी को एक “मसीहा” या “चमत्कारी बाबा” समझते थे जो उनकी गरीबी दूर कर सकते थे और उन्हें ज़मींदारों व अंग्रेजों के जुल्म से बचा सकते थे।


प्रश्न 7. गांधीजी ने नमक कानून तोड़ने का फैसला क्यों लिया?

उत्तर: गांधीजी ने नमक कानून तोड़ने का फैसला इसलिए लिया क्योंकि नमक जीवन की बुनियादी ज़रूरत थी। उस समय नमक बनाने पर सरकार का एकाधिकार था और उस पर टैक्स लगाया जाता था। गांधीजी का मानना था कि भोजन की इस आवश्यक वस्तु पर टैक्स लगाना सरासर पाप है। दांडी यात्रा के माध्यम से उन्होंने इस कानून को चुनौती दी और देश के सभी वर्गों को एकजुट किया।


प्रश्न 8. 1937-1947 की उन घटनाओं पर चर्चा करें जिनके फलस्वरूप पाकिस्तान का जन्म हुआ?

उत्तर: पाकिस्तान के जन्म की मुख्य घटनाएँ निम्नलिखित थीं:

  • 1937 के चुनाव: मुस्लिम लीग को लगा कि वह एक अल्पसंख्यक है और उसे हिंदू बहुल देश में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा।
  • कांग्रेस का रुख: कांग्रेस द्वारा लीग के साथ मिलकर सरकार बनाने से इनकार करने ने दूरी बढ़ा दी।
  • 1940 का प्रस्ताव: लीग ने मुसलमानों के लिए स्वतंत्र राज्यों की माँग रखी।
  • कैबिनेट मिशन (1946): मिशन की विफलता के बाद लीग ने ‘प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस’ मनाया जिससे दंगे भड़क गए।
  • विभाजन: अंततः लॉर्ड माउंटबेटन की योजना के तहत भारत का विभाजन तय हुआ।


🛠️ 3. आइए करके देखें
प्रश्न 9. पता लगाएँ कि आपके इलाके में राष्ट्रीय आंदोलन किस तरह आयोजित किया गया?

उत्तर (बिहार के संदर्भ में): बिहार में राष्ट्रीय आंदोलन अत्यंत उग्र और संगठित था। चंपारण सत्याग्रह से गांधीजी ने यहीं से भारत में अपनी पहली बड़ी जीत दर्ज की थी। असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान पटना, मुजफ्फरपुर और गया जैसे शहरों में भारी प्रदर्शन हुए। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बिहार में रेल पटरियां उखाड़ दी गईं और समानांतर सरकारें तक बनाई गईं।


Teacher Tip
विद्यार्थियों, इस अध्याय को याद करने के लिए एक Timeline (समय-रेखा) बनाएँ। उदाहरण के लिए: 1919 (जलियाँवाला बाग), 1920 (असहयोग), 1930 (दांडी यात्रा), 1942 (भारत छोड़ो)। तारीखों को घटनाओं के साथ जोड़कर पढ़ने से इतिहास बोझ नहीं, बल्कि एक फिल्म की तरह रोचक लगेगा। परीक्षा में मैप वर्क (जैसे दांडी या चंपारण की लोकेशन) पर विशेष ध्यान दें।
BSEBHub: Bihar Board & NCERT Solutions| Author: Suraj Mishra
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