Bihar Board Class 8 History Chapter 6 Solution Hindi: “देशी जनता” को सभ्य बनाना, राष्ट्र को शिक्षित करना
क्या आपने कभी सोचा है कि आज हम जिस स्कूल, क्लासरूम और किताबों को देख रहे हैं, वह अंग्रेज़ों के आने से पहले कैसी थीं? अंग्रेज़ भारत में केवल जमीन जीतने या लगान वसूलने नहीं आए थे, बल्कि उनका एक ‘सांस्कृतिक मिशन’ भी था। वे मानते थे कि भारतीयों को सभ्य बनाना और उनके रीति-रिवाज़ों को बदलना उनकी जिम्मेदारी है।
इस अध्याय में हम विस्तार से समझेंगे कि कैसे ब्रिटिश शासन ने हमारी सदियों पुरानी शिक्षा प्रणाली को बदलकर यूरोपीय शिक्षा को लागू किया। यह लेख bihar board class 8 history chapter 6 solution hindi के लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका है, जो आपको परीक्षा में टॉप करने में मदद करेगी।
1. अंग्रेज़ शिक्षा को किस तरह देखते थे?
18वीं सदी के अंत में शिक्षा को लेकर दो विचारधाराएं थीं:
- प्राच्यवाद (Orientalism): विलियम जोन्स, हेनरी थॉमस कोलब्रुक और नथानिएल हैल्हेड जैसे लोग भारतीय प्राचीन ग्रंथों का सम्मान करते थे। उनका मानना था कि भारतीयों को उनकी अपनी भाषा (संस्कृत, फारसी) में ही शिक्षा दी जानी चाहिए।
- आंग्लवाद (Anglicism): जेम्स मिल और थॉमस बैबिंगटन मैकॉले इसके कट्टर समर्थक थे। मैकॉले का मानना था कि “पूर्वी ज्ञान का भंडार यूरोप की एक अच्छी लाइब्रेरी की केवल एक अलमारी के बराबर है।” उन्होंने अंग्रेज़ी शिक्षा पर जोर दिया।
2. वुड का डिस्पैच (1854) – भारतीय शिक्षा का आधार
1854 में ईस्ट इंडिया कंपनी के ‘कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स’ ने भारत में शिक्षा नीति का एक दस्तावेज भेजा, जिसे वुड का डिस्पैच (Wood’s Despatch) कहा जाता है। इसके मुख्य बिंदु थे:
- यूरोपीय शिक्षा से भारतीयों को व्यापार और वाणिज्य के लाभ समझ आएंगे।
- इससे भारतीयों के नैतिक चरित्र का उत्थान होगा और वे अंग्रेज़ों के प्रति वफादार बनेंगे।
- इसके बाद विश्वविद्यालय शिक्षा की रूपरेखा तैयार की गई और शिक्षा विभागों का गठन हुआ।
📜 स्थानीय पाठशालाओं का दृश्य (विलियम एडम की रिपोर्ट)
1830 के दशक में विलियम एडम ने बंगाल और बिहार की पाठशालाओं का दौरा किया। उन्होंने पाया कि यहाँ की शिक्षा व्यवस्था बहुत लचीली थी। न कोई निश्चित फीस थी, न किताबें, और न ही अलग इमारत। बच्चे बरगद के पेड़ के नीचे या गुरु के घर पर पढ़ते थे। सबसे खास बात यह थी कि कटाई के समय स्कूल बंद हो जाते थे ताकि किसान के बच्चे खेतों में काम कर सकें। लेकिन 1854 के बाद अंग्रेज़ों ने ‘नए नियम और नई दिनचर्या’ लागू कर दी, जिससे गरीब बच्चों के लिए स्कूल आना मुश्किल हो गया।
🚀 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Facts)
- एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल: 1784 में विलियम जोन्स द्वारा स्थापना।
- अंग्रेज़ी शिक्षा अधिनियम: मैकॉले के सुझाव पर 1835 में पारित।
- शांतिनिकेतन: रवींद्रनाथ टैगोर ने 1901 में इसकी स्थापना की।
- महात्मा गांधी का विचार: वे पश्चिमी शिक्षा को ‘औपनिवेशिक दासता’ का प्रतीक मानते थे।
- मदरसा: अरबी शब्द जिसका अर्थ है सीखने का स्थान (स्कूल/कॉलेज)।
📚 महत्वपूर्ण शब्दावली (Vocabulary)
- भाषाविद (Linguist): कई भाषाओं का जानकार और विद्यार्थी।
- प्राच्यवादी: एशिया की भाषा और संस्कृति का ज्ञान रखने वाले।
- मुंशी: वह व्यक्ति जो फारसी पढ़, लिख और सिखा सकता हो।
- वर्नाकुलर (Vernacular): स्थानीय भाषा या बोली जो मानक भाषा से अलग हो।
- सभ्य बनाना: आचार-विचार और ज्ञान के स्तर को ऊँचा उठाना।
- हस्तकला: हाथों से किया जाने वाला शिल्प कार्य।
- साक्षरता: केवल अक्षरों का ज्ञान होना।
- बुनियादी शिक्षा: गांधीजी द्वारा प्रस्तावित जीवनोपयोगी शिक्षा।
- पाठशाला: प्राचीन भारत की पारंपरिक शिक्षण संस्था।
- मैग्ना कार्टा: अधिकारों का ऐतिहासिक घोषणापत्र (वुड्स डिस्पैच को शिक्षा का मैग्ना कार्टा कहा गया)।
यहाँ bihar board class 8 history chapter 6 solution hindi के सभी अभ्यास प्रश्नों के सटीक उत्तर दिए गए हैं।
उत्तर:
- विलियम जोन्स — प्राचीन संस्कृतियों का सम्मान
- रवींद्रनाथ टैगोर — प्राकृतिक परिवेश में शिक्षा
- थॉमस मैकॉले — अंग्रेज़ी शिक्षा को प्रोत्साहन
- महात्मा गांधी — अंग्रेज़ी शिक्षा के विरुद्ध
- पाठशालाएँ — गुरु
(क) जेम्स मिल प्राच्यवादियों के घोर आलोचक थे।
[सही ✅]
(ख) 1854 के शिक्षा संबंधी डिस्पैच में इस बात पर जोर दिया गया था कि भारत में उच्च शिक्षा का माध्यम अंग्रेज़ी होना चाहिए।
[सही ✅]
(ग) महात्मा गांधी मानते थे कि साक्षरता बढ़ाना ही शिक्षा का सबसे महत्त्वपूर्ण उद्देश्य है।
[गलत ❌]
(घ) रवींद्रनाथ टैगोर को लगता था कि बच्चों पर सख्त अनुशासन होना चाहिए।
[गलत ❌]
प्रश्न 3. विलियम जोन्स को भारतीय इतिहास, दर्शन और कानून का अध्ययन क्यों ज़रूरी दिखाई देता था?
उत्तर: विलियम जोन्स को निम्नलिखित कारणों से भारतीय प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन ज़रूरी लगता था:
- सम्मान की भावना: वे प्राचीन भारतीय संस्कृति के प्रति गहरा सम्मान रखते थे।
- भारत की खोज: उनका मानना था कि इन ग्रंथों के बिना भारत के वास्तविक विचारों और कानूनों को नहीं समझा जा सकता।
- शासन में मदद: अंग्रेज़ों को भारत पर स्थायी शासन करने के लिए यहाँ की सामाजिक व्यवस्था को समझना अनिवार्य था।
- गौरव की वापसी: इससे भारतीयों को अपनी विरासत को फिर से समझने और आत्म-सम्मान जगाने में मदद मिलती।
प्रश्न 4. जेम्स मिल और थॉमस मैकॉले ऐसा क्यों सोचते थे कि भारत में यूरोपीय शिक्षा अनिवार्य है?
उत्तर: उनकी सोच के पीछे मुख्य तर्क ये थे:
- व्यावहारिक लाभ: वे मानते थे कि पूर्वी ज्ञान केवल साहित्य और काव्य तक सीमित है, जबकि यूरोपीय शिक्षा विज्ञान और तकनीक पर आधारित है।
- व्यापार: अंग्रेज़ी शिक्षा से भारतीय लोग यूरोपीय जीवनशैली अपनाएंगे, जिससे ब्रिटिश वस्तुओं की मांग बढ़ेगी।
- सभ्य समाज: मैकॉले का मानना था कि अंग्रेज़ी बोलने वाला व्यक्ति अधिक ‘सभ्य’ होता है और वह शासन चलाने में अंग्रेज़ों की मदद कर सकता है।
प्रश्न 5. महात्मा गांधी बच्चों को हस्तकलाएँ क्यों सिखाना चाहते थे?
उत्तर: गांधीजी के हस्तकला (Handicrafts) सिखाने के मुख्य कारण थे:
- आत्मनिर्भरता: बच्चे अपनी पढ़ाई का खर्च खुद निकाल सकें और स्वावलंबी बनें।
- सर्वांगीण विकास: इससे बच्चों का केवल मस्तिष्क ही नहीं, बल्कि हाथ और आंखें भी प्रशिक्षित होती हैं।
- व्यावहारिक ज्ञान: वे चाहते थे कि बच्चे यह सीखें कि चीज़ें कैसे बनती हैं, न कि केवल किताबों को रटें।
- शारीरिक श्रम: वे शिक्षा को शारीरिक श्रम से जोड़ना चाहते थे ताकि काम के प्रति सम्मान पैदा हो।
प्रश्न 6. महात्मा गांधी ऐसा क्यों सोचते थे कि अंग्रेज़ी शिक्षा ने भारतीयों को गुलाम बना दिया है?
उत्तर: गांधीजी का मानना था कि अंग्रेज़ी शिक्षा ने भारतीयों के मन में हीनता की भावना पैदा कर दी है। इसके कारण:
- भारतीय लोग अपनी ही संस्कृति को नीचा और पश्चिमी संस्कृति को श्रेष्ठ समझने लगे।
- इस शिक्षा ने भारतीयों को उनकी जड़ों से काट दिया और उन्हें अपने ही देश में अजनबी बना दिया।
- इसने भारतीयों के आत्म-सम्मान को नष्ट कर दिया, जिससे वे अंग्रेज़ों के मानसिक गुलाम बन गए।
- निष्कर्ष: गांधीजी इसे एक ‘विष’ (Poison) मानते थे जिसने भारतीयों की गरिमा को खत्म कर दिया।
प्रश्न: कल्पना कीजिए कि महात्मा गांधी और मैकॉले के बीच शिक्षा पर चर्चा हो रही है।
गांधीजी: “मैकॉले साहब, आपकी शिक्षा भारतीयों को केवल क्लर्क बना रही है। उन्हें ऐसी शिक्षा चाहिए जो उनके चरित्र का निर्माण करे और उन्हें अपनी भाषा व मिट्टी से जोड़े रखे। असली सभ्यता दिलों को जोड़ने में है, न कि विदेशी भाषा थोपने में।”
सीख: इस चर्चा से पता चलता है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि एक पूर्ण मानव बनना होना चाहिए।
प्रिय छात्रों, परीक्षा में अक्सर मैकॉले का मिनट्स और शांतिनिकेतन के बारे में पूछा जाता है। ध्यान रखें कि रवींद्रनाथ टैगोर और गांधीजी दोनों पश्चिमी शिक्षा के आलोचक थे, लेकिन टैगोर आधुनिक विज्ञान को भारतीय कला के साथ जोड़ना चाहते थे, जबकि गांधीजी पूरी तरह से मशीनी सभ्यता के खिलाफ थे। इन बारीकियों को उत्तर में लिखने से अधिक अंक मिलते हैं।
आशा है कि आपको Bihar Board Class 8 History Chapter 6 Solution का यह लेख पसंद आया होगा।
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Suraj Kumar Mishra