bihar board class 8 history chapter 5 solution hindi: 1857 की क्रांति का संपूर्ण विश्लेषण
क्या आप जानते हैं कि 1857 का विद्रोह केवल एक सैनिक विद्रोह नहीं था, बल्कि यह ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ सदियों से दबे हुए गुस्से का ज्वालामुखी था? bihar board class 8 history chapter 5 solution hindi के इस विस्तृत लेख में हम जानेंगे कि कैसे कारतूस की एक अफवाह ने पूरे भारत में आजादी की अलख जगा दी। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई से लेकर बिहार के वीर कुँवर सिंह तक, इस क्रांति ने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी। आइए, इस ऐतिहासिक संघर्ष की गहराई में उतरते हैं।
bihar board class 8 history chapter 5 solution hindi: विद्रोह के मुख्य कारण
अठारहवीं सदी के मध्य से ही भारतीय राजाओं की ताकत कम होने लगी थी। अंग्रेजों ने भारतीय दरबारों में रेज़िडेंट तैनात कर दिए थे, जो शासकों की स्वतंत्रता को छीन रहे थे। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई चाहती थीं कि उनके दत्तक पुत्र को राजा माना जाए, लेकिन अंग्रेजों ने इसे ठुकरा दिया। इसी तरह पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहेब की पेंशन भी बंद कर दी गई।
अंग्रेजों ने 1856 में अवध को यह कहकर कब्जे में ले लिया कि वहाँ का शासन ठीक से नहीं चल रहा है। यहाँ तक कि मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र के परिवार को लाल किले से निकालने की घोषणा कर दी गई और सिक्कों से उनका नाम हटा दिया गया।
गाँवों में किसान भारी लगान और महाजनों के कर्ज से परेशान थे। दूसरी ओर, भारतीय सिपाहियों में अपने वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों को लेकर गुस्सा था। 1824 में जब सिपाहियों को समुद्र के रास्ते बर्मा जाने का आदेश मिला, तो उन्होंने मना कर दिया क्योंकि उन्हें लगा कि इससे उनका धर्म भ्रष्ट हो जाएगा। अंततः 1856 में कानून बना कि जरूरत पड़ने पर सिपाहियों को समुद्र पार जाना ही होगा।
अंग्रेजों ने सती प्रथा को रोकने और विधवा विवाह को बढ़ावा देने के लिए कानून बनाए। 1850 में एक नया कानून आया जिससे ईसाई धर्म अपनाना आसान हो गया। भारतीयों को लगने लगा कि अंग्रेज उनकी परंपरागत जीवनशैली और धर्म को नष्ट कर रहे हैं।
खुर्दा संग्राम – एक महत्वपूर्ण केस स्टडी (1817)
1857 की क्रांति से काफी पहले 1817 में ओडिशा के खुर्दा में एक जबरदस्त विद्रोह हुआ था। यहाँ के पूर्व सैनिकों को ‘पाइक’ कहा जाता था। अंग्रेजों की राजस्व नीतियों के कारण उनकी जमीनें छिन गई थीं।
उनके नेता बक्सी जगबंधु ने पाइकों और कंध जनजाति के योद्धाओं के साथ मिलकर ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी। उन्होंने सरकारी खजाने लूटे और पुलिस चौकियों पर हमले किए। यद्यपि 1825 तक इसे दबा दिया गया, लेकिन इसने यह साबित कर दिया कि भारतीय जनता विदेशी शासन को स्वीकार करने को तैयार नहीं थी। अंग्रेजों को अंततः नमक की कीमतें कम करनी पड़ीं और कुछ जमींदारों को उनकी जमीनें लौटानी पड़ीं। निष्कर्ष यह है कि खुर्दा संग्राम 1857 की क्रांति की पूर्वपीठिका थी।
- मंगल पांडे: 8 अप्रैल 1857 को मंगल पांडे को बैरकपुर में फांसी दी गई।
- कारतूस विवाद: एनफील्ड राइफल के कारतूसों पर गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह थी।
- वीर कुँवर सिंह: बिहार के आरा (जगदीशपुर) के 80 वर्षीय जमींदार जिन्होंने अंग्रेजों से डटकर लोहा लिया।
- बेगम हज़रत महल: इन्होंने लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व किया।
- ताँत्या टोपे: मध्य भारत के जंगलों में रहकर छापामार युद्ध लड़ा।
- फ़िरंगी: यह अंग्रेजों के लिए इस्तेमाल होने वाला अपमानजनक शब्द था।
- बहादुर शाह ज़फ़र: भारत के अंतिम मुग़ल सम्राट जिन्हें रंगून जेल भेज दिया गया।
- नया कानून: 1858 के कानून के बाद भारत का शासन ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ से ‘ब्रिटिश क्राउन’ के पास चला गया।
- वायसराय: गवर्नर-जनरल का पद बदलकर ‘वायसराय’ कर दिया गया।
- इंडिया काउंसिल: भारत के शासन की सलाह के लिए लंदन में इस परिषद का गठन हुआ।
- रेज़िडेंट: ब्रिटिश सरकार का प्रतिनिधि जो भारतीय दरबार में रहता था।
- दत्तक: गोद लिया हुआ।
- लगान: खेती पर लिया जाने वाला टैक्स।
- छापामार युद्ध: छिपकर हमला करने की तकनीक।
- सशस्त्र संघर्ष: हथियारों के साथ की गई लड़ाई।
- अधिपति: सर्वोच्च शासक या मालिक।
- भूसंपत्ति: जमीन-जायदाद।
- दशमांश: दसवां हिस्सा।
- संस्मरण: यादों के आधार पर लिखा गया विवरण।
- मज़हब: धर्म या विश्वास।
आओ विचार करें: गतिविधियों के उत्तर
उत्तर: सीताराम और विष्णुभट्ट के संस्मरणों के अनुसार, लोगों के मन में सबसे बड़ी चिंता धर्म का विनाश थी। उन्हें डर था कि अंग्रेज उन्हें बलपूर्वक ईसाई बनाना चाहते हैं और कारतूसों पर लगी चर्बी हिंदू-मुस्लिम एकता को तोड़ने की साजिश है।
उत्तर: शुरुआत में बहादुर शाह ज़फ़र हिचकिचा रहे थे, लेकिन जब विद्रोही सिपाही जबरन लाल किले में घुस गए और उन्हें अपना नेता घोषित किया, तो जनता के भारी समर्थन और सैनिकों के दबाव को देखते हुए वे तैयार हो गए।
उत्तर: मुख्य केंद्रों की सूची इस प्रकार है:
- मेरठ
- दिल्ली
- कानपुर
- लखनऊ
- झाँसी
- बरेली
- आरा (बिहार)
उत्तर: मैं उसे बताऊँगा कि यहाँ भारतीयों के साथ भेदभाव होता है, वेतन बहुत कम है और हमें ऐसे काम करने को मजबूर किया जाता है जिससे हमारा धर्म खतरे में पड़ सकता है, जैसे चर्बी वाले कारतूस और समुद्र पार की यात्रा।
उत्तर: मुग़ल सम्राट के समर्थन से विद्रोह को नैतिक वैधता मिल गई। छोटे शासकों और रजवाड़ों को लगा कि यदि मुग़ल शासन दोबारा लौटता है, तो वे बेफ़िक्र होकर अपना शासन चला सकेंगे। इससे लोगों का साहस और आत्मविश्वास कई गुना बढ़ गया।
फिर से याद करें: NCERT प्रश्न-उत्तर
उत्तर: रानी लक्ष्मीबाई की माँग थी कि उनके पति की मृत्यु के बाद उनके गोद लिए हुए बेटे (दत्तक पुत्र) को राज्य का वैध उत्तराधिकारी और राजा मान लिया जाए। अंग्रेजों ने ‘विलय की नीति’ के तहत इसे ठुकरा दिया।
उत्तर: अंग्रेजों ने 1850 में एक नया कानून बनाया जिसके तहत यदि कोई भारतीय ईसाई धर्म अपनाता है, तो भी वह अपने पुरखों की संपत्ति पर अधिकार पहले जैसा ही रख सकेगा।
उत्तर: सिपाहियों को लगा कि नए कारतूसों पर गाय और सुअर की चर्बी का लेप है। राइफल में भरने से पहले इन कारतूसों को मुँह से खोलना पड़ता था, जिससे हिंदू और मुस्लिम दोनों का धर्म भ्रष्ट होने का खतरा था।
उत्तर: बहादुर शाह ज़फ़र को आजीवन कारावास की सजा दी गई। उनके बेटों को उनकी आँखों के सामने मार दिया गया। उन्हें और उनकी पत्नी बेगम ज़ीनत महल को म्यांमार की रंगून जेल भेज दिया गया, जहाँ 1862 में उनकी मृत्यु हुई।
आइए विचार करें: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
उत्तर: विद्रोह के बाद अंग्रेजों ने मुख्य रूप से छह बड़े बदलाव किए:
- सत्ता का हस्तांतरण: ईस्ट इंडिया कंपनी से शासन छीनकर ब्रिटिश सम्राट को दे दिया गया।
- शासकों को आश्वासन: राजाओं को उनके भूक्षेत्र की सुरक्षा का वादा किया गया और दत्तक पुत्रों को मान्यता दी गई।
- सेना में बदलाव: भारतीय सिपाहियों की संख्या कम की गई और यूरोपीय सिपाहियों को बढ़ाया गया।
- गोरखा और सिख भर्ती: अवध और बिहार के बजाय अब सिख, पठान और गोरखा सैनिकों पर भरोसा किया गया।
- धार्मिक हस्तक्षेप पर रोक: भारतीयों के सामाजिक और धार्मिक रीति-रिवाजों का सम्मान करने का फैसला लिया गया।
- जमींदारों की सुरक्षा: भूस्वामियों के अधिकारों को स्थायित्व देने के लिए नई नीतियाँ बनाई गईं।
उत्तर: अंग्रेजों ने घोषणा की कि जो भूस्वामी वफ़ादार रहेंगे, उन्हें उनकी जमीन पर परंपरागत अधिकार दिए जाएंगे। बागियों से कहा गया कि यदि उन्होंने किसी अंग्रेज की हत्या नहीं की है, तो समर्पण करने पर उन्हें सुरक्षित रखा जाएगा।
छात्रों, अपने दादा-दादी से पूछें कि क्या उन्हें 1857 की क्रांति से जुड़ा कोई गीत जैसे “बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी” याद है? इसे अपनी कॉपी में लिखें और झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के अदम्य साहस पर एक निबंध तैयार करें।
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Suraj Kumar Mishra