Bihar Board Class 8 History Chapter 4 Question Answer: आदिवासी, दीकु और एक स्वर्ण युग की कल्पना
क्या आपने कभी सोचा है कि जंगलों में रहने वाले लोग ‘अंग्रेजी शासन’ से इतने नाराज क्यों थे? 1895 में झारखंड के जंगलों में एक ऐसे व्यक्ति का उदय हुआ जिसे लोग ‘भगवान’ मानते थे। उसका नाम था बिरसा मुंडा। उसने भविष्यवाणी की थी कि ‘दीकुओं’ (बाहरी लोगों) का राज खत्म होगा और एक ‘स्वर्ण युग’ (Satyug) वापस आएगा।
इस अध्याय में हम जानेंगे कि कैसे औपनिवेशिक शासन ने आदिवासियों की जिंदगी बदल दी और बिरसा मुंडा ने इसके खिलाफ कैसे आवाज उठाई। यह लेख bihar board class 8 history chapter 4 question answer और परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण नोट्स प्रदान करता है।
1. आदिवासियों का जीवन कैसा था?
उन्नीसवीं सदी तक भारत के विभिन्न भागों में आदिवासी चार मुख्य तरीकों से अपना जीवन जीते थे:
- झूम खेती (Jhum Cultivation): यह घुमंतू खेती थी। इसमें जंगलों के छोटे हिस्सों को काटकर और जलाकर खेती की जाती थी। राख में मौजूद ‘पोटाश’ मिट्टी को उपजाऊ बनाती थी। फसल कटने के बाद वे उस जमीन को परती (Fallow) छोड़ देते थे।
- शिकारी और संग्राहक: उड़ीसा के खोंड समुदाय जैसे लोग टोलियों में शिकार करते थे और साल/महुआ के बीज और जड़ी-बूटियां इकट्ठा करते थे।
- जानवर पालना: पंजाब के ‘वन गुज्जर’, आंध्र प्रदेश के ‘लबाड़िया’ और कश्मीर के ‘बकरवाल’ समुदाय मौसम के हिसाब से मवेशी और भेड़-बकरियां पालते थे।
- एक जगह खेती: छोटानागपुर के मुंडा, गोंड और संथाल जैसे कबीले एक जगह टिककर हलों का प्रयोग कर खेती करते थे।
2. औपनिवेशिक शासन (अंग्रेजों) का प्रभाव
अंग्रेजों ने आदिवासियों के जीवन को पूरी तरह बदल दिया:
- मुखियाओं की शक्ति समाप्त: आदिवासी मुखियाओं के प्रशासनिक अधिकार छीन लिए गए और उन्हें अंग्रेजों को नजराना देने के लिए मजबूर किया गया।
- वन कानून (Forest Laws): अंग्रेजों ने जंगलों को ‘आरक्षित’ घोषित कर दिया। इससे आदिवासियों को शिकार करने और फल इकट्ठा करने से रोक दिया गया, जिससे उनका जीवन संकट में पड़ गया।
- व्यापार और कर्ज: व्यापारी और महाजन (जिन्हें आदिवासी ‘दीकु’ कहते थे) उन्हें महंगे दामों पर चीजें बेचते और भारी ब्याज पर कर्ज देते, जिससे आदिवासी कर्ज और गरीबी के जाल में फंस गए।
📜 बिरसा मुंडा की कहानी और स्वर्ण युग
बिरसा का जन्म 1870 के दशक में हुआ। उन्होंने देखा कि ‘दीकु’ (मिशनरी, महाजन, हिंदू जमींदार और अंग्रेज) मुंडाओं का शोषण कर रहे हैं। बिरसा ने आह्वान किया कि मुंडा अपने “गौरवपूर्ण अतीत” को फिर से जीवित करें। उन्होंने एक ऐसे स्वर्ण युग (सतयुग) की कल्पना की जहाँ मुंडा लोग अच्छी जिंदगी जिएंगे, तटबंध बनाएंगे, पेड़ लगाएंगे और किसी का खून नहीं बहाएंगे। 1900 में बिरसा की मृत्यु हैजे से हुई, लेकिन उनका आंदोलन सफल रहा क्योंकि इसने अंग्रेजों को कानून बदलने पर मजबूर कर दिया।
🚀 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Facts)
- झूम खेती: इसे ‘घुमंतू खेती’ या ‘Slash and Burn’ भी कहते हैं।
- संथाल विद्रोह: 1855 में हुआ था।
- बस्तर विद्रोह: 1910 में मध्य भारत में हुआ।
- वर्ली विद्रोह: 1940 में महाराष्ट्र में हुआ।
- कुसुम और पलाश: इन फूलों का उपयोग रंग बनाने के लिए किया जाता था।
📚 शब्दकोश (Vocabulary)
- परती (Fallow): जमीन को कुछ समय के लिए खाली छोड़ देना ताकि वह दोबारा उपजाऊ हो जाए।
- साल (Sal): एक प्रकार का वृक्ष।
- महुआ (Mahua): एक फूल जिसे खाया जाता है या शराब बनाने में इस्तेमाल होता है।
- स्लीपर (Sleeper): लकड़ी के तख्ते जिन पर रेल की पटरियां बिछाई जाती हैं।
- दीकु (Diku): आदिवासियों द्वारा बाहरी लोगों (जैसे व्यापारी, महाजन, अंग्रेज) के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द।
- वैष्णव: भगवान विष्णु की पूजा करने वाले लोग।
यहाँ bihar board class 8 history chapter 4 question answer का हल दिया गया है। इसे अपनी कॉपी में नोट करें।
उत्तर:
- (क) अंग्रेजों ने आदिवासियों को जंगली और बर्बर के रूप में वर्णित किया।
- (ख) झूम खेती में बीज बोने के तरीके को बिखरना (Broadcasting) कहा जाता है।
- (ग) मध्य भारत में ब्रिटिश भूमि बंदोबस्त के अंतर्गत आदिवासी मुखियाओं को भूमि का स्वामित्व (Land Ownership) मिल गया।
- (घ) असम के चाय बागानों और बिहार की कोयला खदानों में काम करने के लिए आदिवासी जाने लगे।
(क) झूम काश्तकार जमीन की जुताई करते हैं और बीज रोपते हैं।
[गलत ❌]
(ख) व्यापारी संथालों से कृमिकोष (Cocoons) खरीदकर उसे पांच गुना ज्यादा कीमत पर बेचते थे।
[सही ✅]
(ग) बिरसा ने अपने अनुयायियों का आह्वान किया कि वे अपना शुद्धिकरण करें, शराब पीना छोड़ दें और डायन व जादू-टोने जैसी प्रथाओं में यकीन न करें।
[सही ✅]
(घ) अंग्रेज आदिवासियों की जीवन पद्धति को बचाए रखना चाहते थे।
[गलत ❌]
प्रश्न 3. ब्रिटिश शासन में घुमंतू काश्तकारों के सामने कौन-सी समस्याएं थीं?
उत्तर: ब्रिटिश शासन के दौरान घुमंतू काश्तकारों (झूम खेती करने वाले) को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ा:
- स्थायी निवास का दबाव: अंग्रेज चाहते थे कि आदिवासी एक जगह टिक कर रहें और खेती करें ताकि राज्य को नियमित राजस्व मिले। घुमंतू लोगों पर नियंत्रण रखना कठिन था।
- भूमि की पैमाइश: अंग्रेजों ने जमीन मापकर हर व्यक्ति का हिस्सा तय कर दिया, जो घुमंतू जीवनशैली के खिलाफ था।
- कम उत्पादन: जहाँ पानी कम था और मिट्टी सूखी थी, वहाँ हलों से खेती करना मुश्किल था। अक्सर उनकी फसलें खराब हो जाती थीं।
- वन कानून: वनों को आरक्षित घोषित करने से वे अपनी पारंपरिक खेती के लिए जंगलों का इस्तेमाल नहीं कर सकते थे, जिससे उन्हें पलायन करना पड़ा।
प्रश्न 4. औपनिवेशिक शासन के तहत आदिवासी मुखियाओं की ताकत में क्या बदलाव आए?
उत्तर: अंग्रेजों के आने से पहले मुखियाओं के पास बहुत ताकत थी, लेकिन औपनिवेशिक शासन में सब बदल गया:
- प्रशासनिक अधिकार खत्म: उनकी अपनी पुलिस रखने और स्थानीय नियम बनाने की शक्ति छीन ली गई।
- नियमों की बाध्यता: उन्हें ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा बनाए गए नियमों को मानने के लिए मजबूर किया गया।
- नजराना और लगान: उन्हें अंग्रेजों को नजराना देना पड़ता था और अपने समूह को अनुशासन में रखना होता था।
- शक्ति का ह्रास: उनके पास जो परंपरागत अधिकार थे, वे नहीं रहे। अब वे केवल अंग्रेजों के प्रतिनिधि (Agents) बनकर रह गए थे।
प्रश्न 5. दीकुओं से आदिवासियों के गुस्से के क्या कारण थे?
उत्तर: आदिवासी बाहरी लोगों (व्यापारी, महाजन, मिशनरी, अंग्रेज) को ‘दीकु’ कहते थे। उनके गुस्से के मुख्य कारण ये थे:
- आर्थिक शोषण: महाजन और व्यापारी आदिवासियों को भारी ब्याज पर कर्ज देते थे और उनकी उपज को बहुत सस्ती दरों पर खरीदते थे। इससे आदिवासी कर्ज के जाल में फंस गए।
- भूमि से बेदखली: अंग्रेजों की भूमि नीतियों और जमींदारों के कारण आदिवासियों की पुश्तैनी जमीनें छीनी जा रही थीं।
- संस्कृति पर हमला: मिशनरी उनकी पारंपरिक संस्कृति और धर्म की आलोचना करते थे।
- गरीबी का कारण: आदिवासी मानते थे कि उनकी सारी मुसीबतों और गरीबी की जड़ ये ‘दीकु’ ही हैं।
प्रश्न 6. बिरसा की कल्पना में स्वर्ण युग किस तरह का था? आपकी राय में यह कल्पना लोगों को इतनी आकर्षक क्यों लग रही थी?
उत्तर:
(क) बिरसा का स्वर्ण युग (सतयुग): बिरसा मुंडा एक ऐसे समय की बात करते थे जब:
- मुंडा लोग अच्छा और ईमानदार जीवन जीते थे।
- वे तटबंध बनाते थे और कुदरती झरनों को नियंत्रित करते थे।
- पेड़ और बाग लगाते थे और अपनी आजीविका के लिए खेती करते थे।
- वे अपनी बिरादरी और रिश्तेदारों का खून नहीं बहाते थे।
(ख) आकर्षण का कारण: यह कल्पना लोगों को इसलिए आकर्षक लगी क्योंकि:
- लोग अंग्रेजों, महाजनों और जमींदारों के अत्याचारों से तंग आ चुके थे।
- वे अपनी खोई हुई स्वतंत्रता और जमीन पर अधिकार वापस चाहते थे।
- बिरसा का संदेश उन्हें अपने गौरवपूर्ण अतीत और स्वाभिमान की याद दिलाता था, जहाँ कोई ‘दीकु’ उन पर राज नहीं करता था।
प्रश्न 7. माता-पिता या शिक्षकों से बात करके 20वीं सदी के अन्य आदिवासी विद्रोहों के नायकों के नाम पता करें।
उत्तर: (छात्र इसे अपने बड़ों से पूछकर लिख सकते हैं, यहाँ कुछ उदाहरण दिए गए हैं):
- अल्लूरी सीताराम राजू: आंध्र प्रदेश (रम्पा विद्रोह, 1922-24)। वे आदिवासियों के अधिकारों के लिए अंग्रेजों से लड़े।
- जतरा उराँव: छोटानागपुर क्षेत्र में ताना भगत आंदोलन का नेतृत्व किया।
- रानी गाइदिनल्यू: नागालैंड की स्वतंत्रता सेनानी जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह किया।
- सिद्धू और कान्हू: संथाल विद्रोह (1855) के महानायक।
प्रश्न 8. भारत में रहने वाले किसी आदिवासी समूह को चुनें और पिछले 50 साल में आए बदलावों को देखें।
उत्तर: (उदाहरण के लिए – गोंड जनजाति):
- पहले: गोंड लोग मुख्य रूप से खेती, शिकार और वन उत्पादों पर निर्भर थे। उनका जीवन जंगल के इर्द-गिर्द घूमता था।
- अब (बदलाव):
- वनों की कटाई और कानूनों के कारण वे अब मुख्यधारा के समाज में घुल-मिल रहे हैं।
- कई लोग अब शहरों में मजदूरी या सरकारी नौकरियों में हैं।
- शिक्षा का प्रसार बढ़ा है, लेकिन पारंपरिक भाषा और संस्कृति धीरे-धीरे कम हो रही है।
- अब वे पक्के मकानों में रहते हैं और आधुनिक सुविधाओं (बिजली, मोबाइल) का उपयोग करते हैं।
प्रिय छात्रों, परीक्षा में बिरसा मुंडा और झूम खेती पर प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं। विशेष रूप से याद रखें कि ‘दीकु’ कौन थे और अंग्रेजों के वन कानूनों ने आदिवासियों को कैसे प्रभावित किया। मानचित्र (Map) पर संथाल और मुंडा क्षेत्रों को चिन्हित करने का अभ्यास भी करें।
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Suraj Kumar Mishra