📚 Subject: Science (विज्ञान)
📝 Chapter: 10
🏷️ Chapter Title: विद्युत धारा और इसके प्रभाव (Electric Current and its Effects)
Bihar Board Class 7 Science Chapter 10 Solutions: विद्युत धारा और इसके प्रभाव
प्रिय छात्रों और शिक्षकों, BSEBHub पर आपका स्वागत है! इस लेख में हम Bihar Board Class 7 Science Chapter 10 Solutions के तहत “विद्युत धारा और इसके प्रभाव” (Electric Current and its Effects) का विस्तार से अध्ययन करेंगे। यह लेख विशेष रूप से NCERT और बिहार बोर्ड के नवीनतम पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
इस अध्याय में हम जानेंगे कि विद्युत परिपथ कैसे काम करता है, विभिन्न विद्युत अवयवों के प्रतीक क्या हैं, और विद्युत धारा के तापीय (Heating) तथा चुंबकीय (Magnetic) प्रभाव हमारे दैनिक जीवन में कैसे उपयोग किए जाते हैं।
📘 10.1 विद्युत अवयवों के प्रतीक (Symbols of Electric Components)
विद्युत परिपथ (Electric Circuit) के चित्र को बार-बार बनाना कठिन होता है, इसलिए विज्ञान में कुछ सामान्य विद्युत अवयवों को प्रतीकों (Symbols) द्वारा निरूपित किया जाता है।
- विद्युत सेल (Electric Cell): विद्युत सेल के प्रतीक में एक लंबी रेखा तथा दूसरी छोटी, परंतु मोटी समांतर रेखा होती है। लंबी रेखा ‘धन टर्मिनल’ (Positive) को तथा छोटी व मोटी रेखा ‘ऋण टर्मिनल’ (Negative) को निरूपित करती है।
- बैटरी (Battery): कुछ क्रियाकलापों के लिए हमें एक से अधिक सेलों की आवश्यकता होती है। दो या अधिक सेलों के संयोजन को बैटरी कहते हैं। इसमें एक सेल का धन टर्मिनल दूसरे सेल के ऋण टर्मिनल से जोड़ा जाता है।
- स्विच (Switch): स्विच के लिए ‘ऑन’ (ON) स्थिति तथा ‘ऑफ’ (OFF) स्थिति को अलग-अलग प्रतीकों द्वारा दर्शाया जाता है।
- संयोजी तार (Connecting Wires): परिपथ के विविध अवयवों को संयोजित करने वाले तार, सीधी रेखाओं द्वारा निरूपित किए जाते हैं।
टॉर्च, ट्रांजिस्टर, रेडियो, खिलौने, और टीवी रिमोट कंट्रोल जैसी कई युक्तियों में बैटरी उपयोग की जाती है। बैटरी के खानों में सेलों को सही ढंग से रखने के लिए प्रायः इन पर ‘+’ तथा ‘-‘ चिह्न अंकित होते हैं।
चित्र 10.4 : सेल होल्डर
📘 विद्युत परिपथ आरेख (Electric Circuit Diagram)
विद्युत अवयवों के प्रतीकों का उपयोग करके विद्युत परिपथ आरेख खींचना काफ़ी आसान होता है। इसलिए, सामान्यतः हम विद्युत परिपथों को परिपथ आरेखों से ही निरूपित करते हैं।
- बंद परिपथ (Closed Circuit): जब स्विच ‘ऑन’ की स्थिति में होता है, तो बैटरी के धन टर्मिनल से ऋण टर्मिनल तक परिपथ पूरा होता है। सारे परिपथ में तुरंत विद्युत धारा प्रवाहित होने लगती है और बल्ब दीप्त (रोशन) हो जाता है।
- खुला परिपथ (Open Circuit): जब स्विच ‘ऑफ’ की स्थिति में होता है, तो परिपथ अधूरा होता है। इस स्थिति में परिपथ के किसी भी भाग में कोई विद्युत धारा प्रवाहित नहीं होती है और बल्ब नहीं जलता।
📘 10.2 विद्युत धारा का तापीय प्रभाव (Heating Effect of Electric Current)
जब किसी तार से कोई विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो वह तप्त (गर्म) हो जाता है। इसे विद्युत धारा का तापीय प्रभाव कहते हैं। हमारे घरों में उपयोग होने वाले कई उपकरणों में इसी प्रभाव का इस्तेमाल होता है।
विद्युत हीटर, विद्युत इस्त्री (Iron), गीज़र, हेयर ड्रायर और हॉट प्लेट जैसे साधित्रों में तारों की एक विशेष कुंडली (Coil) होती है। तार की इस कुंडली को विद्युत तापन अवयव (Element) कहते हैं। जब इन साधित्रों को विद्युत मेंस से जोड़कर स्विच ‘ऑन’ किया जाता है, तो इनके अवयव ‘रक्त तप्त’ (Red hot) होकर ऊष्मा देने लगते हैं।
किसी तार में उत्पन्न ऊष्मा का परिमाण उस तार के पदार्थ (वह किस धातु का बना है), लंबाई तथा मोटाई पर निर्भर करता है।
📘 विद्युत फ़्यूज़ और MCB (Electric Fuse & MCB)
कुछ विशेष पदार्थों के बने तारों से जब अधिक विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तब वे शीघ्र ही पिघलकर टूट जाते हैं। इन तारों का उपयोग विद्युत फ़्यूज़ (Fuse) बनाने में किया जाता है। सभी भवनों में प्रत्येक विद्युत परिपथ में फ़्यूज़ लगाए जाते हैं।
फ़्यूज़ एक सुरक्षा युक्ति है, जो विद्युत परिपथ की क्षति तथा संभावित आग के प्रति सुरक्षा प्रदान करता है।
- लघुपथन (Short Circuit): जब टूट-फूट अथवा विद्युत रोधन के हटने के कारण तारों में परस्पर सीधा संपर्क हो जाता है, तो बहुत अधिक धारा बहने लगती है।
- अतिभारण (Overloading): एक ही सॉकेट से कई युक्तियों (devices) को संयोजित करने (जोड़ने) पर परिपथ पर अत्यधिक भार आ जाता है, जिसे अतिभारण कहते हैं।
MCB (लघु परिपथ विच्छेदक): आजकल फ़्यूज़ के स्थान पर MCBs (Miniature Circuit Breakers) का उपयोग निरंतर बढ़ रहा है। जब विद्युत धारा सुरक्षा सीमा से अधिक हो जाती है, तो ये ऐसे स्विच होते हैं जो स्वतः (अपने आप) ही ‘ऑफ’ हो जाते हैं। इन्हें फिर से ‘ऑन’ कर दें, तो परिपथ पुनः पूरा हो जाता है।
📘 10.3 विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव (Magnetic Effect of Electric Current)
जब किसी तार से विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उसके पास रखी चुंबकीय सुई (Compass needle) विक्षेपित (Deflect) हो जाती है। अर्थात्, जब किसी तार से विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो वह चुंबक की भाँति व्यवहार करता है। इसे विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव कहते हैं। वास्तव में, विद्युत धारा का उपयोग चुंबकों के निर्माण में किया जाता है।
लोहे की कील (या टुकड़े) पर विद्युतरोधी तार की कुंडली (Coil) लपेटकर उसमें विद्युत धारा प्रवाहित करने पर वह चुंबक की तरह काम करने लगती है। जब विद्युत धारा का प्रवाह समाप्त हो जाता है, तो कुंडली का चुंबकत्व सामान्यतः नष्ट हो जाता है। इस प्रकार की कुंडली को विद्युत चुंबक कहते हैं।
उपयोग: विद्युत चुंबकों को अति प्रबल (Strong) बनाया जा सकता है। इनका उपयोग भारी बोझ उठाने वाली क्रेनों में, कबाड़ से चुंबकीय पदार्थों (लोहे) को अलग करने में, डॉक्टरों द्वारा आँख में गिरे लोहे के नन्हे कणों को निकालने में और कई खिलौनों के भीतर किया जाता है। Bihar Board Class 7 Science Chapter 10 Solutions में यह टॉपिक प्रायोगिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।
📘 10.5 विद्युत घंटी (Electric Bell)
विद्युत घंटी में भी एक विद्युत चुंबक होता है। इसमें लोहे के टुकड़े पर ताँबे के तार की कुंडली लिपटी होती है। विद्युत चुंबक के निकट लोहे की एक पत्ती लगी होती है, जिसके एक सिरे से हथौड़ा (Hammer) जुड़ा होता है और समीप में एक संपर्क पेंच होता है।
चित्र 10.20 : विद्युत घंटी का मॉडल और उसका परिपथ
कार्यविधि (Working): जब लोहे की पत्ती पेंच के संपर्क में आती है, तो परिपथ पूरा हो जाता है और कुंडली से विद्युत धारा बहने लगती है। इससे वह विद्युत चुंबक बन जाती है और लोहे की पत्ती को अपनी ओर खींचती है। इस प्रक्रिया में हथौड़ा घंटी से टकराता है और ध्वनि (आवाज़) उत्पन्न होती है। पत्ती के खिंचने से संपर्क पेंच से उसका संपर्क टूट जाता है और परिपथ अधूरा हो जाता है। इससे चुंबकत्व खत्म हो जाता है और पत्ती वापस अपनी मूल स्थिति में आ जाती है। यह प्रक्रिया अति शीघ्रता से दोहराई जाती है और इसी प्रकार घंटी लगातार बजती है।
छात्रों, थ्योरी का भाग यहाँ समाप्त होता है। अगले भाग में हम इस अध्याय के सभी अभ्यास प्रश्नों (NCERT / Bihar Board Solutions) को हल करेंगे।
📘 अभ्यास प्रश्न – Bihar Board Class 7 Science Chapter 10 Solutions
छात्रों, नीचे कक्षा 7 विज्ञान अध्याय 10 “विद्युत धारा और इसके प्रभाव” (Electric Current and its Effects) के सभी NCERT / Bihar Board अभ्यास प्रश्नों के सटीक और सरल उत्तर दिए गए हैं।
उत्तर: छात्रों, इन अवयवों के प्रतीक (Symbols) इस प्रकार हैं (इन्हें अपनी पाठ्यपुस्तक की सारणी 10.1 से देखकर बनाएँ):
- संयोजक तार: एक सीधी सरल रेखा (—) खींचें।
- स्विच ‘ऑफ’ की स्थिति में: दो बिंदुओं के बीच एक तिरछी रेखा खींचें जो दोनों को मिला नहीं रही हो।
- विद्युत बल्ब: एक गोल घेरे के अंदर ‘M’ या उल्टे ‘W’ (तंतु) जैसा आकार बनाएँ।
- विद्युत सेल: एक लंबी और पतली खड़ी रेखा (धन टर्मिनल) तथा उसके समांतर एक छोटी और मोटी खड़ी रेखा (ऋण टर्मिनल) बनाएँ।
- स्विच ‘ऑन’ की स्थिति में: दो बिंदुओं को एक सीधी क्षैतिज रेखा से मिला दें।
- बैटरी: दो या दो से अधिक सेलों के प्रतीकों को एक साथ जोड़कर बनाएँ (एक की छोटी रेखा को दूसरे की लंबी रेखा से जोड़ें)।
चित्र 10.21 : प्रश्न 2 का विद्युत परिपथ
उत्तर: चित्र 10.21 में एक विद्युत सेल, एक दीप्त (जलता हुआ) बल्ब और ‘ऑन’ स्थिति में एक सेफ्टी पिन (स्विच) दिखाया गया है। इसका परिपथ आरेख (Circuit Diagram) बनाने के लिए एक आयताकार या वर्गाकार लूप बनाएँ। उसमें एक सेल का प्रतीक (एक लंबी और एक छोटी मोटी रेखा), ‘ऑन’ स्विच का प्रतीक (जुड़े हुए दो बिंदु) और दीप्त बल्ब का प्रतीक बनाएँ। इन सभी को सीधी रेखाओं (संयोजक तारों) से जोड़ दें।
चित्र 10.22 : चार सेलों का संयोजन
उत्तर: बैटरी बनाने के लिए हमेशा एक सेल के धन (+) टर्मिनल को दूसरे सेल के ऋण (-) टर्मिनल से जोड़ा जाता है।
चार सेलों की बैटरी बनाने के लिए: पहले सेल के ऋण (-) टर्मिनल को दूसरे सेल के धन (+) टर्मिनल से मिलाएँ। फिर दूसरे के ऋण (-) को तीसरे के धन (+) से, और तीसरे के ऋण (-) को चौथे के धन (+) टर्मिनल से तारों (रेखाओं) द्वारा जोड़ दें। इस प्रकार चार सेलों की बैटरी बन जाएगी।
चित्र 10.23 : त्रुटिपूर्ण विद्युत परिपथ जिसमें बल्ब दीप्त नहीं हो रहा
उत्तर: हाँ, इस परिपथ में बल्ब के दीप्त न होने का कारण यह है कि दोनों सेलों के धन (+) टर्मिनल एक साथ जुड़े हुए हैं (यानी ‘+’ को ‘+’ से जोड़ा गया है), जो कि गलत तरीका है।
आवश्यक परिवर्तन: बल्ब को प्रदीप्त (जलाने) करने के लिए परिपथ में एक सेल की दिशा पलटनी होगी, ताकि एक सेल का धन (+) टर्मिनल दूसरे सेल के ऋण (-) टर्मिनल से जुड़ जाए। तब परिपथ में विद्युत धारा बहने लगेगी और बल्ब जल जाएगा।
उत्तर: विद्युत धारा के दो प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं:
- विद्युत धारा का तापीय प्रभाव (Heating Effect): जब किसी तार से विद्युत धारा बहती है, तो वह तार गर्म हो जाता है। (उदाहरण: हीटर, विद्युत इस्त्री)
- विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव (Magnetic Effect): जब किसी तार से विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो वह चुंबक की तरह व्यवहार करता है। (उदाहरण: विद्युत घंटी, क्रेन का चुंबक)
उत्तर: हम जानते हैं कि चुंबकीय सुई (Compass) एक छोटा चुंबक होती है जो हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरती है। जब तार में विद्युत धारा प्रवाहित करने के लिए स्विच ‘ऑन’ किया जाता है, तो “विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव” के कारण वह तार एक चुंबक की भाँति व्यवहार करने लगता है। तार के चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र बन जाता है, जो चुंबकीय सुई के चुंबकीय क्षेत्र पर बल लगाता है। इसी कारण सुई अपनी उत्तर-दक्षिण स्थिति से विक्षेपित (Deflect) हो जाती है।
चित्र 10.24 : चुंबकीय सुई के साथ विद्युत परिपथ
उत्तर: नहीं, चुंबकीय सुई कोई विक्षेप नहीं दर्शाएगी।
कारण: जब स्विच ‘ऑफ’ होता है, तो परिपथ खुला (अधूरा) हो जाता है और तार में कोई विद्युत धारा प्रवाहित नहीं होती है। चूँकि विद्युत धारा नहीं बह रही है, इसलिए तार कोई चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न नहीं करेगा, और चुंबकीय सुई में कोई विक्षेप नहीं होगा। इसके अलावा परिपथ में कोई विद्युत सेल या बैटरी भी नहीं जुड़ी है जिससे धारा प्रवाहित हो सके।
उत्तर:
- (क) विद्युत सेल के प्रतीक में लंबी रेखा, उसके धन (Positive) टर्मिनल को निरूपित करती है।
- (ख) दो या अधिक विद्युत सेलों के संयोजन को बैटरी कहते हैं।
- (ग) जब किसी विद्युत हीटर के स्विच को ‘ऑन’ करते हैं, तो इसका तापन अवयव (Element) रक्त तप्त (लाल) हो जाता है।
- (घ) विद्युत धारा के तापीय प्रभाव पर आधारित सुरक्षा युक्ति को विद्युत फ़्यूज़ कहते हैं।
उत्तर:
(क) दो सेलों की बैटरी बनाने के लिए एक सेल के ऋण टर्मिनल को दूसरे सेल के ऋण टर्मिनल से संयोजित करते हैं। — (असत्य – False)
व्याख्या: बैटरी बनाने के लिए हमेशा एक सेल के ऋण (-) टर्मिनल को दूसरे सेल के धन (+) टर्मिनल से जोड़ा जाता है।
(ख) जब किसी फ़्यूज़ में से किसी निश्चित सीमा से अधिक विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो वह पिघलकर टूट जाता है। — (सत्य – True)
व्याख्या: यह कथन बिल्कुल सही है। फ़्यूज़ इसी सिद्धांत (तापीय प्रभाव) पर काम करता है ताकि उपकरणों को जलने से बचाया जा सके।
(ग) विद्युत चुंबक, चुंबकीय पदार्थों को आकर्षित नहीं करता। — (असत्य – False)
व्याख्या: विद्युत चुंबक एक शक्तिशाली चुंबक होता है और यह लोहे जैसे चुंबकीय पदार्थों को बहुत मजबूती से आकर्षित करता है।
(घ) विद्युत घंटी में विद्युत चुंबक होता है। — (सत्य – True)
व्याख्या: यह कथन सत्य है। विद्युत घंटी की कार्यप्रणाली विद्युत चुंबक पर ही आधारित होती है।
उत्तर: नहीं, विद्युत चुंबक का उपयोग कचरे के ढेर से प्लास्टिक को पृथक् (अलग) करने के लिए नहीं किया जा सकता है।
स्पष्टीकरण: चुंबक केवल चुंबकीय पदार्थों (जैसे- लोहा, निकेल, कोबाल्ट) को ही अपनी ओर आकर्षित करता है। चूँकि प्लास्टिक एक अचुंबकीय पदार्थ (Non-magnetic material) है, इसलिए यह विद्युत चुंबक द्वारा आकर्षित नहीं होगा और उसे कचरे से अलग नहीं किया जा सकेगा।
उत्तर: नहीं, हम मिस्त्री से बिल्कुल सहमत नहीं होंगे। हम उसे फ़्यूज़ के रूप में ताँबे (Copper) के साधारण तार का उपयोग करने से रोकेंगे।
कारण: फ़्यूज़ एक सुरक्षा युक्ति है। फ़्यूज़ का तार ऐसे विशेष पदार्थ का बना होता है जिसका गलनांक (Melting point) बहुत कम होता है, ताकि अत्यधिक धारा आने पर वह तुरंत पिघलकर टूट जाए और उपकरणों को सुरक्षित रखे। इसके विपरीत, ताँबे के तार का गलनांक बहुत उच्च होता है। यदि परिपथ में अत्यधिक विद्युत धारा (अतिभारण या लघुपथन) आ जाए, तो ताँबे का तार आसानी से नहीं पिघलेगा। इससे परिपथ टूटेगा नहीं, जिससे घर के महंगे विद्युत उपकरण जल सकते हैं और भयंकर आग लगने का खतरा हो सकता है। फ़्यूज़ में हमेशा ISI मार्क वाले सही फ़्यूज़ तार का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
उत्तर: जुबैदा के परिपथ में बल्ब के दीप्त न होने के निम्नलिखित संभावित दोष (कारण) हो सकते हैं:
- गलत सेल संयोजन: हो सकता है जुबैदा ने सेल होल्डर में सेलों को सही ढंग से न रखा हो। यदि एक सेल का धन (+) टर्मिनल दूसरे के धन (+) से जुड़ा होगा, तो धारा नहीं बहेगी।
- ढीले तार: परिपथ में जुड़े हुए संयोजक तार कहीं से ढीले हो सकते हैं।
- फ़्यूज़ बल्ब: हो सकता है कि परिपथ में इस्तेमाल किया गया बल्ब अंदर से फ़्यूज़ (तंतु टूटा हुआ) हो।
- दुर्बल सेल: इस्तेमाल किए गए विद्युत सेल पुराने या दुर्बल (डिस्चार्ज) हो सकते हैं।
- स्विच में खराबी: स्विच ठीक से काम न कर रहा हो या उसमें जंग लग गया हो।
(क) जब स्विच ‘ऑफ’ की स्थिति में है, तो क्या कोई भी बल्ब दीप्त होगा?
(ख) जब स्विच को ‘ऑन’ की स्थिति में लाते हैं, तो बल्बों A, B तथा C के दीप्त होने का क्रम क्या होगा?
चित्र 10.25 : तीन बल्बों (A, B, C) वाला विद्युत परिपथ
उत्तर:
(क) नहीं। जब स्विच ‘ऑफ’ की स्थिति में होगा, तो परिपथ खुला (अधूरा) रहेगा। ऐसे में परिपथ के किसी भी भाग में विद्युत धारा प्रवाहित नहीं होगी, इसलिए कोई भी बल्ब दीप्त (रोशन) नहीं होगा।
(ख) जब स्विच को ‘ऑन’ की स्थिति में लाया जाएगा, तो परिपथ तुरंत पूरा हो जाएगा और विद्युत धारा पूरे परिपथ में एक साथ प्रवाहित होने लगेगी। इसलिए, बल्ब A, B तथा C तीनों एक साथ (एक ही समय पर) दीप्त होंगे। (उनका कोई विशेष क्रम नहीं होगा)।
शिक्षकों को चाहिए कि वे कक्षा में एक ‘विद्युत चुंबक’ (लोहे की कील पर तार लपेटकर) स्वयं बनाकर दिखाएँ और उससे आलपिन चिपका कर बच्चों को इसका चुंबकीय प्रभाव (Magnetic Effect) स्पष्ट करें। इससे छात्र Bihar Board Class 7 Science Chapter 10 Solutions के कॉन्सेप्ट्स को कभी नहीं भूलेंगे और विज्ञान के प्रति उनकी रुचि बढ़ेगी!
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छात्रों, इस अध्याय (विद्युत धारा और इसके प्रभाव) के हस्तलिखित नोट्स (Handwritten Notes) और पीडीएफ डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:
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Suraj Kumar Mishra