📚 Subject: Science (विज्ञान)
📝 Chapter: 8
🏷️ Chapter Title: पादप में जनन (Reproduction in Plants)
Bihar Board Class 7 Science Chapter 8 Solutions: पादप में जनन
प्रिय छात्रों और शिक्षकों, BSEBHub पर आपका स्वागत है! इस लेख में हम Bihar Board Class 7 Science Chapter 8 Solutions के तहत “पादप में जनन” (Reproduction in Plants) का विस्तार से अध्ययन करेंगे। यह लेख विशेष रूप से NCERT और बिहार बोर्ड के नवीनतम पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
इस अध्याय में हम जानेंगे कि पौधे अपने समान नए पौधे कैसे उत्पन्न करते हैं। हम जनन की विभिन्न विधियों जैसे अलैंगिक और लैंगिक जनन, बीजों का प्रकीर्णन और फलों के विकास को बहुत ही सरल हिंदी में समझेंगे।
📘 जनन क्या है? (What is Reproduction?)
अपने वंश अथवा प्रजाति (Species) को बनाए रखने के लिए पादपों (Plants) और जंतुओं के लिए जनन अत्यंत आवश्यक है। माता-पिता (जनक) से संतति का जन्म जनन कहलाता है। पौधों में भी वृद्धि की एक निश्चित अवधि के बाद पुष्प (फूल) निकलते हैं, जो आगे चलकर फल और बीज का निर्माण करते हैं, और इन्हीं बीजों से नए पौधे जन्म लेते हैं।
Class 7 Science Chapter 8 Hindi Medium – जनन की विधियाँ
पादप अनेक विधियों द्वारा अपनी संतति उत्पन्न करते हैं। मुख्य रूप से पौधों में जनन दो प्रकार से होता है:
- अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction): इसमें पादप बिना बीजों के ही नए पादप को उत्पन्न कर सकते हैं।
- लैंगिक जनन (Sexual Reproduction): इसमें नए पादप हमेशा बीजों से प्राप्त होते हैं।
📘 अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
अलैंगिक जनन में नए पादप बीजों अथवा बीजाणुओं के उपयोग के बिना ही उगाए जाते हैं। इसके कई प्रकार होते हैं जिन्हें हम नीचे विस्तार से समझेंगे:
यह एक प्रकार का अलैंगिक जनन है, जिसमें पादप के मूल (जड़), तने, पत्ती, अथवा कली (मुकुल) जैसे किसी कायिक अंग द्वारा नया पादप प्राप्त किया जाता है। चूँकि जनन पादप के कायिक भागों से होता है, अतः इसे कायिक प्रवर्धन कहते हैं।
- तने द्वारा: गुलाब या चंपा के पौधे की एक शाखा को उसकी पर्वसंधि (जहाँ से पत्ती निकलती है) से काटकर मिट्टी में लगाने पर नया पौधा उग जाता है। इस टुकड़े को कलम कहते हैं। आलू और अदरक भी तने के रूपांतरण हैं।
- आँख (Eye) द्वारा: आलू पर पड़े क्षत चिह्नों को ‘आँख’ कहते हैं। आलू के जिस टुकड़े में एक आँख होती है, उसे मिट्टी में दबाने से नया पौधा निकल आता है।
- पत्तियों द्वारा: ब्रायोफिलम (पत्थरचट्टा) की पत्ती के किनारे के गर्त में कलिकाएँ होती हैं। यदि यह पत्ती आर्द्र (नमी वाली) मिट्टी पर गिर जाए, तो प्रत्येक कलिका नए पादप को जन्म दे सकती है।
- जड़ों द्वारा: शकरकंद और डालिया (डहेलिया) की जड़ें भी नए पादपों को जन्म दे सकती हैं।
मुकुलन की प्रक्रिया मुख्य रूप से यीस्ट (Yeast) में देखी जाती है। यीस्ट कोशिका से बाहर निकलने वाला छोटा बल्ब जैसा प्रवर्ध मुकुल या कली (Bud) कहलाता है। यह मुकुल धीरे-धीरे वृद्धि करता है और अपने जनक कोशिका से अलग होकर एक नई यीस्ट कोशिका बना लेता है। अनुकूल परिस्थितियों में मुकुलन इतनी तेजी से होता है कि मुकुलों की एक लंबी श्रृंखला बन जाती है।
आपने तालाबों अथवा ठहरे हुए पानी के जलाशयों में हरे रंग के फिसलनदार गुच्छे तैरते हुए देखे होंगे। ये शैवाल (Algae) हैं। जब जल और पोषक तत्त्व उपलब्ध होते हैं, तो शैवाल वृद्धि करते हैं और तेज़ी से खंडन द्वारा अपना गुणन करते हैं।
स्पाइरोगाइरा (Spirogyra) जैसे शैवाल दो या अधिक खंडों (टुकड़ों) में विखंडित हो जाते हैं और ये टुकड़े नए जीवों में वृद्धि कर जाते हैं। यह प्रक्रम निरंतर चलता रहता है।
चित्र 8.6: स्पाइरोगाइरा (एक शैवाल) में खंडन
हवा में उपस्थित बीजाणुओं से डबलरोटी पर कवक (Fungi) उग जाते हैं। जब बीजाणु निर्मुक्त होते हैं, तो वे वायु में तैरते रहते हैं। चूँकि ये बहुत हल्के होते हैं, इसलिए ये लंबी दूरी तक जा सकते हैं।
बीजाणु अलैंगिक जनन ही करते हैं। प्रत्येक बीजाणु उच्च ताप और निम्न आर्द्रता जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों को झेलने के लिए एक कठोर सुरक्षात्मक आवरण से ढका रहता है। अनुकूल परिस्थितियों में बीजाणु अंकुरित हो जाते हैं। मॉस (Moss) और फर्न (Fern) जैसे पादपों में भी जनन बीजाणुओं द्वारा होता है।
📘 8.2 लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)
पुष्प (फूल) पादप के जनन अंग होते हैं। पुंकेसर (Stamen) नर जनन अंग और स्त्रीकेसर (Pistil) मादा जनन अंग हैं।
- एकलिंगी पुष्प (Unisexual Flowers): ऐसे पुष्प, जिनमें या तो केवल पुंकेसर अथवा केवल स्त्रीकेसर उपस्थित होते हैं। उदाहरण: मक्का, पपीता, ककड़ी।
- द्विलिंगी पुष्प (Bisexual Flowers): जिन पुष्पों में पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों ही होते हैं। उदाहरण: सरसों, गुलाब, पिटूनिया।
पुंकेसर में परागकोश (Anther) और पुतंतु (Filament) होते हैं। परागकोश में परागकण होते हैं, जो नर युग्मकों को बनाते हैं।
स्त्रीकेसर में वर्तिकाग्र (Stigma), वर्तिका (Style) और अंडाशय (Ovary) होते हैं। अंडाशय में एक या अधिक बीजांड (Ovules) होते हैं। मादा युग्मक (अंड) का निर्माण बीजांड में होता है। लैंगिक जनन में नर और मादा युग्मकों के युग्मन से युग्मनज़ (Zygote) बनता है।
📘 परागण और निषेचन (Pollination & Fertilization)
परागकण हल्के होते हैं, अतः वे वायु अथवा जल द्वारा बहाकर ले जाए जा सकते हैं। कीटों के शरीर पर चिपक कर भी ये एक पुष्प से दूसरे पुष्प तक पहुँचते हैं।
परागण की परिभाषा: परागकणों का परागकोश से पुष्प के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण परागण कहलाता है।
- स्व-परागण (Self-Pollination): यदि परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं।
- पर-परागण (Cross-Pollination): जब एक पुष्प के परागकण उसी पादप के किसी अन्य पुष्प या उसी प्रकार के दूसरे पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं।
नर तथा मादा युग्मकों के युग्मन (संयोग) द्वारा बनी कोशिका युग्मनज़ (Zygote) कहलाती है। युग्मनज़ बनाने के लिए नर और मादा युग्मकों के युग्मन का प्रक्रम निषेचन कहलाता है। निषेचन के बाद युग्मनज़ भ्रूण (Embryo) में विकसित होता है।
चित्र 8.11: पुष्पों में निषेचन (युग्मनज़ निर्माण) की प्रक्रिया
📘 8.3 फल और बीज का विकास
निषेचन के पश्चात् अंडाशय (Ovary), फल में विकसित हो जाता है, जबकि पुष्प के अन्य भाग मुरझाकर गिर जाते हैं। परिपक्व हो जाने पर अंडाशय ही फल कहलाता है।
दूसरी ओर, बीजांड (Ovules) से बीज विकसित होते हैं। बीज में एक भ्रूण होता है, जो सुरक्षात्मक बीजावरण के अंदर सुरक्षित रहता है। कुछ फल गूदेदार और रसीले होते हैं (जैसे- आम, सेब, संतरा), जबकि कुछ फल कठोर होते हैं (जैसे- बादाम, अखरोट)।
📘 8.4 बीज प्रकीर्णन (Seed Dispersal)
प्रकृति में एक ही प्रकार के पादप विभिन्न स्थानों पर उगे हुए पाए जाते हैं। ऐसा बीजों के प्रकीर्णन (बिखराव) के कारण होता है। यदि किसी पादप के सभी बीज एक ही स्थान पर गिर जाएँ, तो नए पौधों के बीच धूप, जल, खनिजों और स्थान के लिए गंभीर स्पर्धा (Competition) होगी और वे स्वस्थ रूप से विकसित नहीं हो पाएंगे।
- पवन (हवा) द्वारा: पंखयुक्त बीज (सहजन/ड्रमस्टिक, द्विफल/मैपिल), हल्के बीज (घास), रोमयुक्त बीज (आक/मदार, सूरजमुखी) हवा के साथ उड़कर दूर चले जाते हैं।
- जल द्वारा: ऐसे बीजों या फलों के आवरण स्पंजी अथवा तंतुमय होते हैं, ताकि वे पानी में तैर सकें। (उदाहरण: नारियल)।
- जंतुओं द्वारा: काँटेदार (कंटकी) बीज जिनमें हुक जैसी संरचनाएँ होती हैं, वे जानवरों के शरीर से चिपक जाते हैं। (उदाहरण: यूरेना, जैन्थियम)।
- फटने द्वारा: कुछ पौधों के फल झटके के साथ फट जाते हैं, जिससे बीज दूर छिटक जाते हैं। (उदाहरण: एरंड, बाल्सम)।
छात्रों, पादप में जनन से जुड़ी यह थ्योरी यहाँ समाप्त होती है। अब हम Bihar Board Class 7 Science Chapter 8 Solutions के अभ्यास प्रश्नों को हल करेंगे।
📘 अभ्यास प्रश्न – Bihar Board Class 7 Science Chapter 8 Solutions
छात्रों, नीचे कक्षा 7 विज्ञान अध्याय 8 “पादप में जनन” (Reproduction in Plants) के सभी NCERT / Bihar Board अभ्यास प्रश्नों के सटीक उत्तर दिए गए हैं।
उत्तर:
- (क) जनक पादप के कायिक भागों से नए पादप के उत्पादन का प्रक्रम कायिक प्रवर्धन कहलाता है।
- (ख) ऐसे पुष्पों को जिनमें केवल नर अथवा मादा जनन अंग होता है एकलिंगी पुष्प कहते हैं।
- (ग) परागकणों का उसी अथवा उसी प्रकार के अन्य पुष्प के परागकोश से वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण का प्रक्रम परागण कहलाता है।
- (घ) नर और मादा युग्मकों का युग्मन निषेचन कहलाता है।
- (च) बीज प्रकीर्णन पवन, जल और जंतुओं के द्वारा होता है।
उत्तर: अलैंगिक जनन में पादप बिना बीजों के ही नए पादप को जन्म देते हैं। इसकी विभिन्न विधियाँ निम्नलिखित हैं:
- कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation): इसमें पादप के मूल (जड़), तने, या पत्ती जैसे कायिक भागों से नया पौधा बनता है। उदाहरण: गुलाब के तने की कलम, आलू की आँख।
- मुकुलन (Budding): जनक कोशिका से एक छोटा बल्ब जैसा प्रवर्ध (मुकुल) निकलता है जो अलग होकर नया जीव बनता है। उदाहरण: यीस्ट।
- खंडन (Fragmentation): जीव का शरीर दो या अधिक खंडों में टूट जाता है और प्रत्येक खंड नए जीव में वृद्धि करता है। उदाहरण: स्पाइरोगाइरा (शैवाल)।
- बीजाणु निर्माण (Spore Formation): पादप बीजाणु उत्पन्न करते हैं जो अनुकूल परिस्थितियों में अंकुरित होकर नए पादप बनाते हैं। उदाहरण: कवक (डबलरोटी की फफूँद), फर्न।
उत्तर: पादपों में पुष्प जनन अंग होते हैं। लैंगिक जनन के प्रक्रम में नर युग्मक (जो परागकणों में होते हैं) और मादा युग्मक (जो बीजांड में होते हैं) का संलयन (मिलना) होता है। परागण की प्रक्रिया द्वारा परागकण पुष्प के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं। वहाँ से परागनलिका द्वारा वे बीजांड में जाकर मादा अंडकोशिका से मिलते हैं। इस प्रक्रिया को निषेचन कहते हैं, जिसके परिणामस्वरूप युग्मनज़ (Zygote) का निर्माण होता है। यही युग्मनज़ बाद में बीज के भ्रूण में विकसित होता है और बीज से नया पौधा बनता है।
उत्तर:
| अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction) | लैंगिक जनन (Sexual Reproduction) |
|---|---|
| इसमें नए पादप बिना बीजों के उत्पन्न किए जाते हैं। | इसमें नए पादप बीजों से प्राप्त होते हैं। |
| इसमें केवल एक ही जनक (Parent) की आवश्यकता होती है। | इसमें नर और मादा, दोनों जनकों की आवश्यकता होती है। |
| उत्पन्न संतति पूरी तरह से अपने जनक के समान (यथार्थ प्रतिलिपि) होती है। | उत्पन्न संतति में माता-पिता दोनों के गुण (लक्षण) मौजूद होते हैं। |
उत्तर:
चित्र: पुष्प के जनन अंग। (छात्र अपनी पाठ्यपुस्तक के चित्र 8.9 के अनुसार पुंकेसर और स्त्रीकेसर का चित्र बनाएँ, जिसमें परागकोश, पुतंतु, वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय स्पष्ट रूप से नामांकित हों।)
उत्तर:
| स्व-परागण (Self-Pollination) | पर-परागण (Cross-Pollination) |
|---|---|
| परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं। | एक पुष्प के परागकण उसी पादप के किसी अन्य पुष्प या उसी प्रकार के दूसरे पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं। |
| इसके लिए किसी बाहरी माध्यम (जैसे हवा, कीट) की विशेष आवश्यकता नहीं होती है। | परागकणों को दूसरे फूल तक ले जाने के लिए बाहरी कारकों (हवा, जल, कीट) की आवश्यकता होती है। |
उत्तर: परागण के बाद परागकण स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र पर अंकुरित होते हैं और एक लंबी परागनलिका (Pollen tube) बनाते हैं। यह नली वर्तिका से होते हुए अंडाशय में स्थित बीजांड तक पहुँचती है। यहाँ परागनलिका अपना नर युग्मक छोड़ देती है। नर युग्मक बीजांड में उपस्थित मादा युग्मक (अंडकोशिका) से मिल जाता है। नर और मादा युग्मकों के इस संयोजन को ही निषेचन कहते हैं, जिससे युग्मनज़ का निर्माण होता है।
उत्तर: बीजों के प्रकीर्णन (फैलाव) की मुख्य विधियाँ निम्नलिखित हैं:
- पवन द्वारा प्रकीर्णन: हल्के, पंखयुक्त और रोमयुक्त बीज हवा के साथ उड़कर दूर-दूर तक पहुँच जाते हैं। उदाहरण: सहजन (ड्रमस्टिक), सूरजमुखी, घास के बीज।
- जल द्वारा प्रकीर्णन: पानी के किनारे उगने वाले पौधों के बीज या फल स्पंजी और तंतुमय होते हैं, जिससे वे जल में तैरते हुए दूर तक चले जाते हैं। उदाहरण: नारियल।
- जंतुओं द्वारा प्रकीर्णन: कुछ बीजों में काँटे या हुक जैसी संरचनाएँ होती हैं, जो जंतुओं के शरीर से चिपक जाती हैं और दूसरे स्थानों तक पहुँच जाती हैं। उदाहरण: यूरेना और जैन्थियम।
- फलों के फटने से प्रकीर्णन: कुछ पौधों के फल सूखने के बाद झटके से फट जाते हैं, जिससे उनके अंदर के बीज दूर तक छिटक जाते हैं। उदाहरण: एरंड और बाल्सम।
उत्तर:
| कॉलम A | कॉलम B (सही मिलान) |
|---|---|
| (क) कली/मुकुल | (iii) यीस्ट |
| (ख) आँख | (v) आलू |
| (ग) खंडन | (ii) स्पाइरोगाइरा |
| (घ) पंख | (i) मैपिल |
| (च) बीजाणु | (iv) डबलरोटी की फफूँद |
(क) पादप का जनन भाग होता है, उसका-
(i) पत्ती अथवा पर्ण
(ii) तना
(iii) मूल
✅ (iv) पुष्प
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: फूल (पुष्प) पौधे का मुख्य जनन अंग होता है, क्योंकि इसी में नर जनन अंग (पुंकेसर) और मादा जनन अंग (स्त्रीकेसर) मौजूद होते हैं, जो बीज बनाने में सहायक होते हैं।
(ख) नर और मादा युग्मक के युग्मन का प्रक्रम कहलाता है-
✅ (i) निषेचन
(ii) परागण
(iii) जनन
(iv) बीज निर्माण
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: नर युग्मक (परागकण से) और मादा युग्मक (बीजांड से) के परस्पर मिलने (संलयन) की क्रिया को विज्ञान में निषेचन (Fertilization) कहा जाता है।
(ग) परिपक्व होने पर अंडाशय विकसित हो जाता है-
(i) बीज में
(ii) पुंकेसर में
(iii) स्त्रीकेसर में
✅ (iv) फल में
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: निषेचन के पश्चात् फूल के अन्य हिस्से गिर जाते हैं और अंडाशय आकार में बड़ा होकर फल (Fruit) का रूप ले लेता है, जबकि उसके अंदर के बीजांड बीज बन जाते हैं।
(घ) बीजाणु उत्पन्न करने वाला एक पादप जीव है-
(i) गुलाब
✅ (ii) डबलरोटी का फफूँद
(iii) आलू
(iv) अदरक
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: डबलरोटी की फफूँद (कवक) बीजाणु (Spores) का निर्माण करके अलैंगिक जनन करती है। ये बीजाणु हवा में तैरते रहते हैं और अनुकूल जगह मिलने पर वृद्धि करते हैं।
(च) ब्रायोफिलम अपने जिस भाग द्वारा जनन करता है, वह है-
(i) तना
✅ (ii) पत्ती
(iii) मूल
(iv) पुष्प
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: ब्रायोफिलम (पत्थरचट्टा) की पत्तियों के किनारों पर विशेष कलिकाएँ (Buds) होती हैं। पत्ती जब नमी वाली मिट्टी पर गिरती है, तो इन्ही कलिकाओं से नया पौधा उग आता है।
शिक्षकों और अभिभावकों से अनुरोध है कि वे बच्चों को अपने आस-पास के बगीचे या खेतों में ले जाकर बीजों के फैलाव (जैसे हवा में उड़ते आक के बीज या जंतुओं से चिपके हुए बीज) को वास्तविक रूप से (Practically) दिखाएँ। इससे बच्चे इस अध्याय को जीवनभर नहीं भूलेंगे।
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Suraj Kumar Mishra