📚 Subject: Science (विज्ञान)
📝 Chapter: 4
🔖 Topic: अम्ल, क्षारक और लवण (Acids, Bases and Salts)
अम्ल, क्षारक और लवण – Bihar Board Class 7 Science Chapter 4 Solutions
छात्रों, इस लेख में हम Bihar Board Class 7 Science Chapter 4 Solutions के अंतर्गत ‘अम्ल, क्षारक और लवण’ (Acids, Bases and Salts) अध्याय का विस्तार से अध्ययन करेंगे। अपने दैनिक जीवन में हम नींबू, इमली, नमक, शक्कर और सिरके जैसे अनेक पदार्थों का उपयोग करते हैं। क्या इन सबका स्वाद एक समान होता है? नहीं, इनमें से कुछ पदार्थों का स्वाद खट्टा, कुछ का कड़वा, कुछ का मीठा और कुछ का नमकीन होता है।
किसी भी अज्ञात वस्तु या रसायन को तब तक मत चखिए या स्पर्श न करें, जब तक कि ऐसा करने के लिए आपसे कहा न जाए। ये हमें हानि पहुँचा सकते हैं।
📘 4.1 अम्ल और क्षारक (Acids and Bases)
अम्ल (Acids) क्या हैं?
दही, नींबू का रस, संतरे का रस और सिरके का स्वाद खट्टा होता है। इन पदार्थों का स्वाद खट्टा इसलिए होता है, क्योंकि इनमें अम्ल (Acid) होते हैं। ऐसे पदार्थों की रासायनिक प्रकृति अम्लीय होती है। ‘एसिड’ शब्द की उत्पत्ति लैटिन शब्द ‘एसियर’ से हुई है, जिसका अर्थ है खट्टा। इन पदार्थों में पाए जाने वाले अम्ल प्राकृतिक अम्ल होते हैं।
क्षारक (Bases) क्या हैं?
खाने के सोडे (बेकिंग सोडा) का स्वाद खट्टा नहीं बल्कि कड़वा होता है। यदि आप इसके विलयन को अपनी अँगुलियों के बीच रगड़ें, तो यह साबुन जैसा चिकना लगता है। सामान्यतः ऐसे पदार्थ, जिनका स्वाद कड़वा होता है और जो स्पर्श करने पर साबुन जैसे लगते हैं, क्षारक (Bases) कहलाते हैं। इन पदार्थों की प्रकृति क्षारकीय कहलाती है।
सूचक (Indicators) किसे कहते हैं?
यदि हम किसी पदार्थ को चख नहीं सकते हैं, तो उसकी प्रकृति (अम्लीय है या क्षारकीय) ज्ञात करने के लिए विशेष प्रकार के पदार्थों का उपयोग किया जाता है, जिन्हें सूचक (Indicators) कहते हैं। जब सूचकों को अम्लीय अथवा क्षारकीय विलयन में मिलाया जाता है, तो उनका रंग बदल जाता है। हल्दी, लिटमस, गुड़हल की पंखुड़ियाँ आदि कुछ प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले सूचक हैं।
1. लिटमस (Litmus) – एक प्राकृतिक रंजक
सबसे सामान्य रूप से उपयोग किया जाने वाला प्राकृतिक सूचक लिटमस है। इसे लाइकेनों (शैक) से निष्कर्षित किया जाता है।
- आसुत जल में इसका रंग मॉव (नीलशोण / पर्पल) होता है।
- जब इसे अम्लीय विलयन में मिलाया जाता है, तो यह लाल हो जाता है।
- जब इसे क्षारीय विलयन में मिलाया जाता है, तो यह नीला हो जाता है।
यह विलयन के रूप में अथवा कागज़ की पट्टियों (लाल और नीले लिटमस पत्र) के रूप में उपलब्ध होता है।
2. हल्दी (Turmeric)
हल्दी एक अन्य प्राकृतिक सूचक है। हल्दी का रंग पीला होता है। जब साबुन जैसे क्षारकीय विलयन को हल्दी पर डाला जाता है, तो हल्दी का रंग लाल हो जाता है। (यही कारण है कि सफ़ेद कमीज़ पर पड़ा हल्दी का दाग साबुन से धोने पर लाल हो जाता है)।
3. गुड़हल का पुष्प (China Rose)
गुड़हल के पुष्प की पंखुड़ियों से बना सूचक भी अम्लीय और क्षारकीय पदार्थों की पहचान करता है।
- यह सूचक अम्लीय विलयनों को गहरा गुलाबी (मेजेन्टा) कर देता है।
- और क्षारकीय विलयनों को हरा कर देता है।
📘 4.3 उदासीनीकरण (Neutralization)
हमने पढ़ा है कि अम्ल नीले लिटमस को लाल कर देते हैं और क्षारक लाल लिटमस को नीला कर देते हैं। आइए, अब यह देखें कि जब किसी अम्ल को किसी क्षारक में मिलाया जाता है, तो क्या होता है?
इस प्रक्रिया को समझने के लिए हम फ़िनॉल्फथेलिन (Phenolphthalein) नामक सूचक का उपयोग करते हैं। जब विलयन क्षारकीय होता है, तो फ़िनॉल्फथेलिन गुलाबी रंग देता है। इसके विपरीत, जब विलयन अम्लीय होता है, तो यह रंगहीन रहता है।
चित्र: उदासीनीकरण का प्रक्रम – अम्ल और क्षारक की अभिक्रिया।
उदासीनीकरण की परिभाषा
जब किसी अम्लीय विलयन में क्षारकीय विलयन मिलाया जाता है तो दोनों विलयन एक-दूसरे के प्रभाव को उदासीन कर देते हैं। किसी अम्ल और किसी क्षारक के बीच होने वाली यह अभिक्रिया उदासीनीकरण (Neutralization) कहलाती है।
इस प्रक्रम में ऊष्मा के निर्मुक्त (निकलने) के साथ-साथ एक नया पदार्थ निर्मित होता है, जिसे लवण (Salt) कहते हैं। लवण अम्लीय, क्षारकीय अथवा उदासीन प्रकृति का हो सकता है।
अम्ल + क्षारक → लवण + जल (ऊष्मा निर्मुक्त होती है)
उदाहरण: हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) + सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) → सोडियम क्लोराइड (NaCl) + जल (H₂O) + ऊष्मा
अम्ल वर्षा (Acid Rain) क्या है?
जब वर्षा जल में अम्ल की मात्रा अत्यधिक होती है, तो वह अम्ल वर्षा कहलाती है। वायु में प्रदूषकों के रूप में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड गैसें वर्षा जल में घुलकर क्रमशः कार्बोनिक अम्ल, सल्फ्यूरिक अम्ल और नाइट्रिक अम्ल बनाती हैं। अम्ल वर्षा भवनों, ऐतिहासिक इमारतों (जैसे ताजमहल), पौधों और जंतुओं को भारी क्षति पहुँचा सकती है।
Bihar Board Class 7 Science Chapter 4 Solutions के इस भाग में हम देखेंगे कि उदासीनीकरण की प्रक्रिया हमारे दैनिक जीवन में कितनी महत्वपूर्ण है:
1. अपाचन (Indigestion) में
हमारे आमाशय (Stomach) में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल पाया जाता है, जो भोजन के पाचन में सहायता करता है। लेकिन आमाशय में अम्ल की मात्रा आवश्यकता से अधिक हो जाने पर अपाचन (Indigestion) हो जाता है। इससे मुक्ति पाने के लिए हम प्रतिअम्ल (Antacid) लेते हैं, जैसे- दूधिया मैग्नीशियम (मिल्क ऑफ मैग्नीशिया), जिसमें मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (क्षारक) होता है। यह अत्यधिक अम्ल के प्रभाव को उदासीन कर देता है।
2. चींटी का डंक (Ant Sting)
जब चींटी काटती है तो यह त्वचा में अम्लीय द्रव (फ़ॉर्मिक अम्ल) डाल देती है, जिससे जलन होती है। डंक के प्रभाव को नमीयुक्त खाने का सोडा (सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट) अथवा कैलेमाइन विलयन (जिसमें जिंक कार्बोनेट होता है) मलकर उदासीन किया जा सकता है, क्योंकि ये क्षारकीय प्रकृति के होते हैं।
चित्र: चींटी के डंक का क्षारक द्वारा उदासीनीकरण।
3. मृदा उपचार (Soil Treatment)
रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग मृदा (मिट्टी) को अम्लीय बना देता है। यदि मृदा अत्यधिक अम्लीय अथवा अत्यधिक क्षारकीय हो, तो पौधों की वृद्धि अच्छी नहीं होती।
- जब मृदा अत्यधिक अम्लीय होती है, तो उसे बिना बुझा हुआ चूना (कैल्सियम ऑक्साइड) अथवा बुझा हुआ चूना (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड) जैसे क्षारकों से उपचारित किया जाता है।
- यदि मृदा क्षारकीय हो, तो इसमें जैव पदार्थ (कम्पोस्ट खाद) मिलाए जाते हैं। जैव पदार्थ मृदा में अम्ल निर्मुक्त करते हैं, जो उसकी क्षारकीय प्रकृति को उदासीन कर देते हैं।
4. कारखानों का अपशिष्ट (Factory Wastes)
अनेक कारखानों के कचरे में अम्लीय पदार्थ मिश्रित होते हैं। यदि ऐसे अपशिष्ट पदार्थों को सीधे ही नदियों में बहने दिया जाए, तो जलीय जीवों (मछलियों आदि) को अम्ल नष्ट कर सकते हैं। अतः कारखाने के अपशिष्ट को जलाशयों में विसर्जित करने से पहले क्षारकीय पदार्थ मिलाकर उदासीन किया जाता है, ताकि पर्यावरण सुरक्षित रहे।
📘 अभ्यास प्रश्न – Bihar Board Class 7 Science Chapter 4 Solutions
उत्तर: अम्लों और क्षारकों के बीच मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
| अम्ल (Acids) | क्षारक (Bases) |
|---|---|
| इनका स्वाद खट्टा होता है। | इनका स्वाद कड़वा होता है और ये स्पर्श करने पर साबुन जैसे चिकने लगते हैं। |
| ये नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं। | ये लाल लिटमस पत्र को नीला कर देते हैं। |
| हल्दी के सूचक पर इनका कोई रंग परिवर्तन नहीं होता (पीला ही रहता है)। | ये हल्दी के सूचक को लाल कर देते हैं। |
| उदाहरण: नींबू का रस, सिरका, दही। | उदाहरण: खाने का सोडा, साबुन, चूने का पानी। |
उत्तर: अमोनिया लाल लिटमस पत्र को नीला कर देता है। चूँकि जो पदार्थ लाल लिटमस को नीला कर देते हैं, वे क्षारकीय (Basic) प्रकृति के होते हैं। अतः अमोनिया की प्रकृति क्षारकीय है।
उत्तर: लिटमस विलयन को लाइकेनों (शैक) नामक पौधे से प्राप्त (निष्कर्षित) किया जाता है।
उपयोग: इसका उपयोग एक प्राकृतिक सूचक (Indicator) के रूप में किया जाता है, जिससे यह पता लगाया जाता है कि कोई दिया गया विलयन अम्लीय है या क्षारकीय।
उत्तर: आसुत जल उदासीन (Neutral) होता है।
पुष्टि: इसकी पुष्टि हम लाल और नीले लिटमस पत्र का उपयोग करके कर सकते हैं। यदि हम आसुत जल की कुछ बूँदें लाल और नीले लिटमस पत्र पर डालें, तो दोनों में से किसी भी लिटमस पत्र का रंग परिवर्तित नहीं होता है। इससे यह सिद्ध होता है कि आसुत जल न तो अम्लीय है और न ही क्षारकीय, बल्कि यह उदासीन है।
उत्तर: किसी अम्ल और किसी क्षारक के बीच होने वाली रासायनिक अभिक्रिया को उदासीनीकरण (Neutralization) कहते हैं। इस प्रक्रम में दोनों एक-दूसरे के प्रभाव को नष्ट (उदासीन) कर देते हैं तथा इसके फलस्वरूप ऊष्मा निर्मुक्त होती है और ‘लवण’ तथा ‘जल’ का निर्माण होता है।
उदाहरण: जब हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCI) में सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH – क्षारक) मिलाया जाता है, तो उदासीनीकरण अभिक्रिया होती है, जिससे सोडियम क्लोराइड (नमक/लवण) और जल बनते हैं।
हाइड्रोक्लोरिक अम्ल + सोडियम हाइड्रॉक्साइड → सोडियम क्लोराइड + जल + ऊष्मा
(क) नाइट्रिक अम्ल लाल लिटमस को नीला कर देता है।
उत्तर: (F) असत्य
व्याख्या: नाइट्रिक एक अम्ल है, और अम्ल नीले लिटमस को लाल करते हैं, न कि लाल को नीला।
(ख) सोडियम हाइड्रॉक्साइड नीले लिटमस को लाल कर देता है।
उत्तर: (F) असत्य
व्याख्या: सोडियम हाइड्रॉक्साइड एक क्षारक है, जो लाल लिटमस को नीला करता है।
(ग) सोडियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एक-दूसरे को उदासीन करके लवण और जल बनाते हैं।
उत्तर: (T) सत्य
व्याख्या: यह एक आदर्श उदासीनीकरण (Neutralization) अभिक्रिया है, जिसमें क्षारक और अम्ल मिलकर लवण व जल बनाते हैं।
(घ) सूचक वह पदार्थ है, जो अम्लीय और क्षारकीय विलयनों में भिन्न रंग दिखाता है।
उत्तर: (T) सत्य
व्याख्या: सूचक (Indicators) का मुख्य कार्य ही रंग परिवर्तन द्वारा विलयन की प्रकृति बताना है।
(च) दंत क्षय, क्षार की उपस्थिति के कारण होता है।
उत्तर: (F) असत्य
व्याख्या: जीवाणु मुँह में बचे भोजन (शर्करा) का विघटन करके ‘अम्ल’ बनाते हैं, और यही अम्ल दंत क्षय का कारण बनता है।
उत्तर: दोरजी लिटमस पत्र (सूचक) का उपयोग करके यह आसानी से तय कर सकता है:
1. वह प्रत्येक बोतल से पेय की कुछ बूँदें नीले लिटमस पत्र पर डालेगा। जो पेय नीले लिटमस पत्र को लाल कर देगा, वह अम्लीय होगा।
2. फिर वह बचे हुए पेयों की कुछ बूँदें लाल लिटमस पत्र पर डालेगा। जो पेय लाल लिटमस पत्र को नीला कर देगा, वह क्षारकीय होगा।
3. जिस पेय का लाल या नीले किसी भी लिटमस पत्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, वह उदासीन पेय होगा।
(क) जब आप अतिअम्लता से पीड़ित होते हैं, तो प्रतिअम्ल की गोली लेते हैं।
उत्तर: आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की मात्रा अधिक हो जाने से अतिअम्लता (अपाचन) हो जाती है। प्रतिअम्ल (जैसे- दूधिया मैग्नीशियम) की गोली एक क्षारक होती है। यह क्षारक आमाशय में मौजूद अत्यधिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके उसे उदासीन कर देता है, जिससे हमें दर्द और जलन से राहत मिलती है।
(ख) जब चींटी काटती है, तो त्वचा पर कैलेमाइन का विलयन लगाया जाता है।
उत्तर: चींटी के डंक में फ़ॉर्मिक अम्ल होता है, जिसे वह काटते समय हमारी त्वचा में छोड़ देती है, जिससे जलन होती है। कैलेमाइन विलयन में जिंक कार्बोनेट होता है, जिसकी प्रकृति क्षारकीय होती है। यह क्षारकीय विलयन त्वचा पर मलने से अम्ल के प्रभाव को उदासीन कर देता है और हमें आराम मिलता है।
(ग) कारखाने के अपशिष्ट को जलाशयों में बहाने से पहले उसे उदासीन किया जाता है।
उत्तर: कारखानों के अपशिष्ट (कचरे) में प्रायः हानिकारक अम्लीय पदार्थ मिले होते हैं। यदि इन्हें सीधे नदियों या जलाशयों में बहा दिया जाए, तो यह अम्ल मछलियों और अन्य जलीय जीवों को नष्ट कर सकता है। इसलिए, इसे बहाने से पहले इसमें क्षारकीय पदार्थ मिलाकर इसे उदासीन किया जाता है ताकि पर्यावरण सुरक्षित रहे।
उत्तर: हल्दी एक प्राकृतिक सूचक है जो क्षारकीय विलयन में लाल हो जाती है, जबकि अम्लीय और उदासीन विलयन में पीली ही रहती है। हम इनकी पहचान निम्न प्रकार करेंगे:
- तीनों द्रवों की एक-एक बूँद हल्दी पत्र पर डालेंगे। जो द्रव हल्दी को लाल कर देगा, वह सोडियम हाइड्रॉक्साइड (क्षारक) है।
- अब इस लाल हो चुके हल्दी पत्र (या क्षार मिले हल्दी मिश्रण) पर बाकी बचे दोनों द्रवों की बूँदें अलग-अलग डालेंगे।
- जो द्रव इस लाल रंग को वापस पीला कर देगा, वह अम्ल है (क्योंकि यह क्षारक को उदासीन कर देगा)। अतः वह हाइड्रोक्लोरिक अम्ल है।
- जिस द्रव का लाल रंग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, वह शक्कर का विलयन (उदासीन) है।
उत्तर: यदि नीला लिटमस पत्र विलयन में डुबोने पर नीला ही रहता है, तो विलयन की प्रकृति क्षारकीय अथवा उदासीन हो सकती है।
व्याख्या: क्षारकीय विलयन लाल लिटमस को नीला करते हैं, अतः वे नीले लिटमस पर कोई प्रभाव नहीं डालेंगे और वह नीला ही रहेगा। इसके अतिरिक्त, उदासीन विलयन (जैसे पानी या चीनी का घोल) किसी भी लिटमस पत्र का रंग नहीं बदलते हैं, अतः उनमें भी नीला लिटमस पत्र नीला ही रहेगा।
(क) अम्ल और क्षारक दोनों सभी सूचकों के रंगों को परिवर्तित कर देते हैं।
(ख) यदि कोई सूचक अम्ल के साथ रंग परिवर्तित कर देता है, तो वह क्षारक के साथ रंग परिवर्तन नहीं करता。
(ग) यदि कोई सूचक क्षारक के साथ रंग परिवर्तित करता है, तो वह अम्ल के साथ रंग परिवर्तन नहीं करता。
(घ) अम्ल और क्षारक में रंग परिवर्तन सूचक के प्रकार पर निर्भर करता है।
ऊपर लिखे वक्तव्यों में से कौन-से वक्तव्य सही हैं?
- (i) सभी चार
- (ii) (क) और (घ)
- (iii) (ख), (ग) और (घ)
- ✅ (iv) केवल (घ)
उत्तर की विस्तृत व्याख्या: भिन्न-भिन्न सूचक (जैसे- लिटमस, हल्दी, गुड़हल, फ़िनॉल्फथेलिन) अम्ल और क्षारक के साथ अलग-अलग रंग परिवर्तन दर्शाते हैं। कुछ सूचक अम्ल और क्षारक दोनों में रंग बदलते हैं, जबकि कुछ केवल किसी एक में। अतः केवल वक्तव्य (घ) सही है कि रंग परिवर्तन पूरी तरह से सूचक के प्रकार पर निर्भर करता है।
शिक्षकों के लिए सुझाव: छात्रों को उदासीनीकरण (Neutralization) की प्रक्रिया स्पष्ट रूप से समझाएँ। इसके लिए आप कक्षा में प्रयोग (क्रियाकलाप 4.5) कर सकते हैं, जिसमें तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ फ़िनॉल्फथेलिन सूचक का उपयोग किया गया हो। छात्रों को यह भी समझाएँ कि किस प्रकार इस अभिक्रिया में ऊष्मा निर्मुक्त होती है, जिसके कारण परखनली गर्म हो जाती है।
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Suraj Kumar Mishra