📚 Subject: Science (विज्ञान)
📝 Chapter: 11 – विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव
Bihar Board Class 8 Science Chapter 11 Question Answer: विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव
प्रिय छात्रों और शिक्षकों, BSEBHub.in पर आपका स्वागत है! आज हम Bihar Board Class 8 Science Chapter 11 Question Answer का विस्तार से अध्ययन करेंगे। इस चैप्टर का नाम “विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव” (Chemical Effects of Electric Current) है। इस लेख में हम चैप्टर की थ्योरी, महत्वपूर्ण प्रयोगों और NCERT तथा बिहार बोर्ड के अभ्यास प्रश्नों को बहुत ही सरल हिंदी में समझेंगे।
📘 परिचय: क्या गीले हाथों से बिजली के उपकरण छूने चाहिए?
आपने अक्सर अपने माता-पिता को कहते सुना होगा कि गीले हाथों से किसी भी वैद्युत साधित्र (electrical appliance) को न छुएँ। लेकिन ऐसा क्यों? हम पिछली कक्षाओं में पढ़ चुके हैं कि जो पदार्थ अपने से होकर विद्युत धारा को प्रवाहित होने देते हैं, वे विद्युत के सुचालक (Good Conductors) होते हैं (जैसे: ताँबा, ऐलुमिनियम)। इसके विपरीत, जो पदार्थ विद्युत धारा को आसानी से प्रवाहित नहीं होने देते, वे विद्युत के हीन चालक (Poor Conductors) होते हैं (जैसे: रबड़, प्लास्टिक, लकड़ी)।
📘 11.1 क्या द्रव विद्युत चालन करते हैं?
ठोस पदार्थों की तरह, क्या द्रव (Liquids) भी विद्युत का चालन करते हैं? इसे जाँचने के लिए हम एक संपरीक्षित्र (Tester) का उपयोग करते हैं।
नींबू के रस या सिरके का परीक्षण:
प्लास्टिक के एक ढक्कन में थोड़ा सा नींबू का रस या सिरका लें। अपने संपरीक्षित्र के दोनों सिरों को इसमें डुबोएँ (ध्यान रहे, दोनों सिरे एक-दूसरे को स्पर्श न करें)। आप देखेंगे कि परिपथ पूरा हो जाता है और बल्ब दीप्त (जलने लगता) हो जाता है। इसका मतलब है कि नींबू का रस और सिरका विद्युत के सुचालक हैं।
चित्र 11.2 : नींबू के रस अथवा सिरके में विद्युत चालन का परीक्षण
कभी-कभी द्रव सुचालक तो होता है, लेकिन विद्युत धारा इतनी दुर्बल (कमज़ोर) होती है कि संपरीक्षित्र का बल्ब गर्म होकर नहीं जल पाता। ऐसी स्थिति में हम निम्नलिखित का उपयोग करते हैं:
- LED (प्रकाश उत्सर्जक डायोड): यह दुर्बल विद्युत धारा प्रवाहित होने पर भी दीप्त हो जाता है। LED के लंबे तार को बैटरी के धन (+) टर्मिनल से और छोटे तार को ऋण (-) टर्मिनल से जोड़ा जाता है।
- चुंबकीय सुई (Magnetic Compass): विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव होता है। धारा बहुत दुर्बल होने पर भी चुंबकीय सुई में विक्षेप (Deflection) देखा जा सकता है, जिससे पता चलता है कि परिपथ में करंट है।
📘 विभिन्न द्रवों की चालकता (सारणी 11.1)
आइए देखते हैं कि हमारे आस-पास के आम द्रव सुचालक हैं या हीन चालक:
| क्रम संख्या | पदार्थ | चुंबकीय सुई विक्षेप दर्शाती है (हाँ/नहीं) | सुचालक / हीन चालक |
|---|---|---|---|
| 1. | नींबू का रस | हाँ | सुचालक (अच्छा चालक) |
| 2. | सिरका | हाँ | सुचालक |
| 3. | टोंटी का पानी (Tap Water) | हाँ | सुचालक |
| 4. | वनस्पति तेल | नहीं | हीन चालक |
| 5. | दूध | हाँ | सुचालक |
| 6. | शहद | नहीं | हीन चालक |
📘 आसुत जल (Distilled Water) बनाम टोंटी का पानी
नल, कुएँ या तालाब से मिलने वाले पानी में प्राकृतिक रूप से कई खनिज लवण (Mineral Salts) घुले होते हैं। इसी कारण टोंटी का पानी विद्युत का सुचालक होता है और यही वजह है कि गीले हाथों से बिजली का काम नहीं करना चाहिए।
दूसरी ओर, आसुत जल (Distilled Water) पूरी तरह लवणों से मुक्त होता है, इसलिए यह विद्युत का हीन चालक होता है। लेकिन अगर हम आसुत जल में थोड़ा सा साधारण नमक, अम्ल (Acid) या क्षारक (Base) मिला दें, तो वह भी विद्युत का सुचालक बन जाता है।
📘 11.2 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव
जब विद्युत धारा किसी चालक-विलयन से प्रवाहित होती है, तो वह उस विलयन में रासायनिक प्रभाव उत्पन्न करती है। इसे समझने के लिए हम एक प्रयोग करते हैं।
दो बेकार सेलों से सावधानीपूर्वक कार्बन की छड़ें निकालिए (इन्हें इलेक्ट्रोड कहते हैं)। उनकी धातु की टोपियों को साफ़ करके उन पर ताँबें का तार लपेटिए और बैटरी से जोड़ दीजिए। जब इन इलेक्ट्रोडों को नमक मिले हुए जल या नींबू के रस वाले जल में डुबोकर विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो इलेक्ट्रोडों के पास गैस के बुलबुले दिखाई देते हैं । यह जल में हो रहे रासायनिक परिवर्तन को दर्शाता है ।
किसी चालक विलयन से विद्युत धारा प्रवाहित होने पर निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रियाएँ हो सकती हैं:
- इलेक्ट्रोडों पर गैस के बुलबुले बन सकते हैं।
- इलेक्ट्रोडों पर धातु के निक्षेप (Metal deposits) देखे जा सकते हैं।
- विलयनों के रंग में परिवर्तन हो सकता है।
📘 11.3 विद्युतलेपन (Electroplating)
आपने नई साइकिल का चमकदार हैंडल या महिलाओं के ऐसे आभूषण देखे होंगे जो सोने जैसे दिखते हैं, लेकिन वास्तव में उन पर केवल सोने की परत चढ़ी होती है। लगातार उपयोग या खरोंच लगने पर उनके नीचे की असली धातु दिखने लगती है। एक धातु की सतह पर दूसरी धातु की परत चढ़ाने की इसी प्रक्रिया को हम विद्युतलेपन कहते हैं।
एक बीकर में कॉपर सल्फेट (CuSO₄) का विलयन लें और उसमें ताँबे की दो प्लेटों (इलेक्ट्रोड) को डुबोकर बैटरी से जोड़ दें । जब इस विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो कॉपर सल्फेट, कॉपर (ताँबा) और सल्फेट में वियोजित (टूट) हो जाता है।
चित्र 11.7 : विद्युतलेपन दर्शाता सरल परिपथ
- स्वतंत्र कॉपर बैटरी के ऋण (-) टर्मिनल से जुड़े इलेक्ट्रोड की ओर आकर्षित होता है और उस पर जमा (निक्षेपित) हो जाता है।
- विलयन में कॉपर की कमी को पूरा करने के लिए, धन (+) टर्मिनल वाले ताँबे के प्लेट से समान मात्रा में कॉपर विलयन में घुल जाता है।
इस प्रकार एक इलेक्ट्रोड से कॉपर दूसरे इलेक्ट्रोड पर स्थानांतरित होता रहता है।
📘 विद्युतलेपन के महत्वपूर्ण उपयोग
उद्योगों में धातु की वस्तुओं पर दूसरी धातु की पतली परत चढ़ाने के लिए इसका व्यापक रूप में उपयोग होता है :
- क्रोमियम का लेपन: कार के कुछ भागों, स्नान गृह की टोंटी, गैस बर्नर और साइकिल के रिम पर क्रोमियम का लेपन किया जाता है। क्रोमियम चमकदार होता है, यह संक्षारित (corrode) नहीं होता और खरोंचों का प्रतिरोध करता है। चूँकि यह मँहगा है, इसलिए पूरी वस्तु क्रोमियम की नहीं बनाई जाती।
- आभूषणों पर लेपन: आभूषण बनाने वाले सस्ती धातुओं पर चाँदी या सोने का विद्युतलेपन करते हैं ताकि वे सस्ते रहें लेकिन देखने में चाँदी या सोने के प्रतीत हों।
- टिन के डिब्बे: खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने वाले लोहे के डिब्बों पर टिन का लेपन किया जाता है क्योंकि टिन लोहे से कम क्रियाशील होता है, जिससे खाना लोहे के संपर्क में आकर खराब नहीं होता।
- पुलों और वाहनों की सुरक्षा: लोहे को संक्षारण और जंग लगने से बचाने के लिए उस पर जिंक (Zinc) की परत निक्षेपित कर दी जाती है।
नोट: कारखानों में उपयोग किए जा चुके विद्युतलेपन विलयनों का निपटारा करना एक मुख्य पर्यावरण समस्या है, क्योंकि यह एक प्रदूषणकारी अपशिष्ट है。
📘 अध्याय का सारांश (आपने क्या सीखा)
- कुछ द्रव विद्युत के सुचालक हैं तथा कुछ हीन चालक हैं।
- विद्युत चालन करने वाले अधिकांश द्रव अम्लों, क्षारकों तथा लवणों के विलयन होते हैं।
- किसी चालक द्रव में विद्युत धारा प्रवाहित होने पर रासायनिक अभिक्रियाएँ होती हैं। इसे विद्युत धारा का रासायनिक प्रभाव कहते हैं।
- विद्युत धारा द्वारा किसी पदार्थ पर वांछित धातु की परत निक्षेपित करने की प्रक्रिया को विद्युतलेपन कहते हैं।
📘 NCERT अभ्यास (प्रश्न-उत्तर)
यहाँ कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 11 के सभी अभ्यास प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं। ये उत्तर आपकी परीक्षा की तैयारी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
उत्तर:
- विद्युत चालन करने वाले अधिकांश द्रव अम्लों, क्षारकों तथा लवणों के विलयन होते हैं।
- किसी विलयन से विद्युत धारा प्रवाहित होने पर रासायनिक प्रभाव उत्पन्न होता है।
- यदि कॉपर सल्फेट विलयन से विद्युत धारा प्रवाहित की जाए तो कॉपर बैटरी के ऋण (-) टर्मिनल से संयोजित प्लेट पर निक्षेपित होता है।
- विद्युत धारा द्वारा किसी पदार्थ पर वांछित धातु की परत निक्षेपित करने की प्रक्रिया को विद्युतलेपन कहते हैं।
उत्तर: हाँ, जब संपरीक्षित्र के सिरों को विलयन में डुबोया जाता है और विलयन विद्युत का सुचालक होता है, तो परिपथ पूरा हो जाता है। परिपथ पूरा होने से विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित होने लगती है। हम जानते हैं कि विद्युत धारा ‘चुंबकीय प्रभाव’ उत्पन्न करती है। इसी चुंबकीय प्रभाव के कारण संपरीक्षित्र के पास रखी चुंबकीय सुई विक्षेपित होने लगती है।
उत्तर: ऐसे तीन द्रव जो विद्युत के सुचालक हैं और चुंबकीय सुई को विक्षेपित कर सकते हैं, वे हैं: 1. नींबू का रस 2. सिरका (Vinegar) 3. टोंटी का पानी (Tap Water) या नमक का घोल।
उत्तर: बल्ब न जलने के निम्नलिखित संभावित कारण हो सकते हैं: 1. बीकर में रखा गया द्रव विद्युत का हीन चालक (जैसे आसुत जल) हो सकता है, जिससे परिपथ पूरा नहीं हो पा रहा है। 2. बैटरी के सेल बहुत कमज़ोर (डिस्चार्ज) हो सकते हैं। 3. तारों के संयोजन (Connections) ढीले हो सकते हैं। 4. संपरीक्षित्र का बल्ब फ्यूज हो सकता है। 5. द्रव सुचालक हो सकता है, लेकिन प्रवाहित होने वाली धारा इतनी दुर्बल हो सकती है कि बल्ब का तंतु गर्म होकर दीप्त न हो सके।
उत्तर: (i) द्रव A, द्रव B से अच्छा चालक है।
उत्तर: नहीं, शुद्ध जल (आसुत जल) विद्युत का चालन नहीं करता है क्योंकि यह पूरी तरह से लवणों (Salts) से मुक्त होता है और एक हीन चालक है। इसे विद्युत का सुचालक बनाने के लिए हम इसमें थोड़ा सा साधारण नमक, नींबू का रस (अम्ल) या कास्टिक सोडा (क्षारक) मिला सकते हैं।
उत्तर: फ़ायरमैन जो पानी इस्तेमाल करते हैं, वह टोंटी या प्राकृतिक जल स्रोतों का होता है, जिसमें खनिज लवण घुले होते हैं। इस कारण वह जल विद्युत का सुचालक होता है। यदि पानी का छिड़काव करते समय पानी बिजली के नंगे तारों या उपकरणों पर गिर जाए, तो विद्युत धारा पानी के रास्ते फ़ायरमैन के शरीर तक पहुँच सकती है, जिससे उन्हें भयंकर झटका लग सकता है और जान जा सकती है। इसी सुरक्षा के कारण वे मुख्य विद्युत आपूर्ति बंद कर देते हैं।
उत्तर: पीने के पानी में बहुत कम मात्रा में प्राकृतिक लवण होते हैं, जबकि समुद्र के पानी में भारी मात्रा में नमक (खनिज लवण) घुला होता है। अधिक लवण होने के कारण समुद्र का पानी पीने के पानी की तुलना में विद्युत का बहुत अच्छा सुचालक होता है। इसी वजह से समुद्र के पानी में अधिक प्रबल विद्युत धारा प्रवाहित होती है और चुंबकीय सुई अधिक विक्षेप दर्शाती है।
उत्तर: नहीं, तेज़ वर्षा के समय लाइनमैन के लिए बाहरी विद्युत तारों की मरम्मत करना बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। वर्षा का जल हवा में मौजूद अशुद्धियों और गैसों के साथ मिलकर थोड़ा अम्लीय हो जाता है, जिससे यह विद्युत का सुचालक बन जाता है। तारों की मरम्मत करते समय लाइनमैन को करंट लग सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
उत्तर: यद्यपि वाष्पीकरण से बना वर्षा का जल प्रारंभ में शुद्ध होता है, परंतु जब यह वायुमंडल से नीचे गिरता है, तो हवा में मौजूद प्रदूषणकारी गैसें (जैसे सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड) तथा धूल के कण इसमें घुल जाते हैं। ये अशुद्धियाँ जल को अम्लीय बना देती हैं। इसी कारण वर्षा का जल विद्युत का सुचालक बन जाता है और संपरीक्षित्र की चुंबकीय सुई विक्षेप दर्शाने लगती है।
उत्तर: हमारे आस-पास उपलब्ध कुछ विद्युतलेपित वस्तुएँ निम्नलिखित हैं: 1. साइकिल का चमकदार हैंडल और पहिए के रिम (क्रोमियम लेपन) 2. स्नान गृह (Bathroom) की टोंटियाँ 3. गैस के बर्नर 4. कृत्रिम (नकली) आभूषण (चाँदी या सोने का लेपन) 5. भोजन रखने वाले टिन के डिब्बे (लोहे पर टिन का लेपन)
उत्तर: अशुद्ध कॉपर की छड़ को बैटरी के धन (+) टर्मिनल से संयोजित किया जाना चाहिए। कारण: जब कॉपर सल्फेट विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो धन (+) टर्मिनल पर मौजूद अशुद्ध कॉपर की छड़ से शुद्ध कॉपर टूटकर विलयन में घुलने लगता है। वही शुद्ध कॉपर विलयन से होते हुए ऋण (-) टर्मिनल पर लगी पतली शुद्ध कॉपर की छड़ पर जमा (निक्षेपित) हो जाता है। इस प्रकार अशुद्धियाँ पीछे छूट जाती हैं और ताँबे का शोधन हो जाता है।
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Suraj Kumar Mishra