Bihar Board Class 8 Science Chapter 10 Solutions: Sound

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🎓 Class: 8 📚 Subject: Science (विज्ञान) 📝 Chapter: 10 (ध्वनि)

Bihar Board Class 8 Science Chapter 10 Solutions – ध्वनि (Sound)

प्रिय छात्रों और शिक्षकों, Bihar Board Class 8 Science Chapter 10 Solutions में आपका स्वागत है। हमारे दैनिक जीवन में ध्वनि (Sound) का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है। विद्यालय की घंटी की ध्वनि अथवा दरवाजे पर खटखटाने की आवाज़ सुनकर हमें तुरंत पता चल जाता है कि कोई आया है। ध्वनि एक दूसरे से संपर्क करने में हमारी सहायता करती है और हमारे चारों ओर विभिन्न प्रकार की ध्वनियाँ मौजूद हैं !

इस अध्याय में हम विस्तार से जानेंगे कि ध्वनि कैसे उत्पन्न होती है, यह एक स्थान से दूसरे स्थान तक कैसे पहुँचती है, और हम इसे कैसे सुन पाते हैं। चलिए, इस रोमांचक विषय की शुरुआत करते हैं!

📘 10.1 ध्वनि कंपित वस्तुओं द्वारा उत्पन्न होती है

विज्ञान की भाषा में, किसी वस्तु की अपनी माध्य स्थिति के इधर-उधर या आगे-पीछे होने वाली गति को कंपन (Vibration) कहते हैं। यह एक सिद्ध तथ्य है कि ध्वनि कंपित वस्तुओं द्वारा ही उत्पन्न होती है !

महत्वपूर्ण बिंदु: जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो वह ध्वनि उत्पन्न करती है। जब उसका कंपन करना बंद हो जाता है, तो ध्वनि भी बंद हो जाती है।

कुछ स्थितियों में वस्तु के कंपन हमें आसानी से दिखाई दे जाते हैं। लेकिन अधिकांश स्थितियों में उनका आयाम (amplitude) इतना कम होता है कि हम उन्हें अपनी आँखों से देख नहीं पाते, फिर भी हम इन कंपनों का अनुभव अवश्य कर सकते हैं!

📖 कुछ प्रमुख वाद्ययंत्र और उनके कंपायमान भाग

विभिन्न वाद्ययंत्रों में ध्वनि उत्पन्न करने के लिए अलग-अलग भाग कंपन करते हैं। आइए इस तालिका के माध्यम से इसे समझें:

क्रम संख्या वाद्ययंत्र ध्वनि उत्पन्न करने वाला कंपमान भाग
1 वीणा तानित डोरी/तार
2 तबला तानित झिल्ली
3 बाँसुरी वायु-स्तंभ (Air column)
4 मंजीरा (झाँझ) धातु की प्लेट
5 एकतारा तानित तार
6 हारमोनियम वाक्-तंतु (Reeds)
7 जलतरंग जल-स्तंभ
क्या आप जानते हैं? मंजीरा, घटम तथा नूट (मिट्टी के बर्तन) जैसे वाद्ययंत्र हमारे देश के अनेक भागों में बजाए जाते हैं । इन वाद्ययंत्रों को केवल पीटा या आघात किया जाता है, जिससे पूरा बर्तन कंपन करता है और ध्वनि निकलती है।

📘 10.2 मनुष्यों (मानवों) द्वारा उत्पन्न ध्वनि

जब हम बोलते हैं, गाना गाते हैं या भौंरे की तरह गुंजन करते हैं, तो हमारे शरीर का एक विशेष भाग कंपित होता है। मानवों में ध्वनि वाकयंत्र अथवा कंठ (larynx) द्वारा उत्पन्न होती है।

यह श्वासनली के ऊपरी सिरे पर स्थित होता है। वाकयंत्र या कंठ के आर-पार दो वाक्-तंतु (Vocal Cords) इस प्रकार तानित होते हैं कि उनके बीच में वायु के निकलने के लिए एक संकीर्ण झिरी बनी होती है !

Bihar Board Class 8 Science Chapter 10 Solutions - Voice Box

चित्र 10.8 : मानवों में वाकयंत्र और वाक्-तंतुओं की कार्यप्रणाली

  • जब फेफड़े वायु को बलपूर्वक झिरी से बाहर निकालते हैं, तो वाक्-तंतु कंपित होते हैं जिससे ध्वनि उत्पन्न होती है।
  • पुरुषों के वाक्-तंतुओं की लंबाई लगभग 20 mm होती है।
  • महिलाओं में इसकी लंबाई लगभग 15 mm होती है।
  • बच्चों के वाक्-तंतु बहुत छोटे होते हैं।

वाक्-तंतुओं की लंबाई में इसी अंतर के कारण ही पुरुषों, महिलाओं तथा बच्चों की वाक् ध्वनियाँ (आवाज़) एक-दूसरे से भिन्न-भिन्न होती हैं!

📘 10.3 ध्वनि संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है

जब आप कुछ दूरी पर खड़ी अपनी सहेली को पुकारती हैं, तो आपकी आवाज़ उस तक कैसे पहुँचती है? ध्वनि को संचरण (एक जगह से दूसरी जगह जाने) के लिए हमेशा किसी न किसी माध्यम की आवश्यकता होती है

निर्वात (Vacuum) क्या है?

जब किसी बर्तन या स्थान में से वायु (हवा) पूरी तरह निकाल दी जाती है, तो उसे निर्वात कहा जाता है। यह बात हमेशा याद रखें कि ध्वनि निर्वात में संचरित नहीं हो सकती

क्या ध्वनि द्रवों में संचरित होती है? हाँ! ध्वनि द्रवों (पानी) में भी गमन कर सकती है। यही कारण है कि ह्वेल तथा डॉलफिन जल के अंदर इसी प्रकार संदेशों का आदान-प्रदान कर पाते हैं।

क्या ध्वनि ठोसों में संचरित होती है? बिल्कुल! ध्वनि लकड़ी या धातु जैसे ठोस पदार्थों में भी आसानी से चल सकती है। आपने बचपन में जो ‘खिलौना टेलीफोन’ बनाया होगा, उसमें भी ध्वनि डोरियों (ठोस) के माध्यम से ही गमन करती है!

📘 10.4 हम ध्वनि को अपने कानों द्वारा सुनते हैं

हमारे कान के बाहरी भाग की आकृति एक कीप (फनल) जैसी होती है। जब ध्वनि इसमें प्रवेश करती है, तो यह एक नलिका से गुजरती है जिसके सिरे पर एक पतली तानित झिल्ली होती है। इसे कर्ण पटह (eardrum) कहते हैं।

Human Ear Diagram - Bihar Board Class 8 Science Chapter 10 Solutions

चित्र 10.16 : मानव कान (कर्ण) और कर्ण पटह की संरचना

कर्ण पटह एक तानित रबड़ की शीट के समान होता है। जब ध्वनि के कंपन कर्ण पटह तक पहुँचते हैं, तो वे इसे कंपित करते हैं। इसके बाद कर्ण पटह इन कंपनों को आंतर कर्ण (inner ear) तक भेज देता है, और वहाँ से संकेतों को मस्तिष्क (brain) तक भेज दिया जाता है। इस प्रकार हम ध्वनि को सुन पाते हैं!

Teacher Tip
हमें कभी भी अपने कानों में कोई तीखी, नुकीली या कठोर वस्तु नहीं डालनी चाहिए। यह कर्ण पटह को क्षति पहुँचा सकती है जिससे सुनने की शक्ति कम हो सकती है।

📘 10.5 कंपन का आयाम, आवर्तकाल तथा आवृत्ति

किसी वस्तु का बार-बार इधर-उधर गति करना कंपन या दोलन गति (Oscillatory motion) कहलाता है। ध्वनि की पहचान और उसके गुण समझने के लिए दो मुख्य कारक होते हैं – आयाम तथा आवृत्ति!

  • आवृत्ति (Frequency): प्रति सेकंड होने वाले दोलनों की संख्या को दोलन की आवृत्ति कहते हैं। इसे हर्ट्ज (Hz) में मापा जाता है।
  • प्रबलता (Loudness): ध्वनि की प्रबलता इसके आयाम (amplitude) पर निर्भर करती है। जब आयाम अधिक होता है तो ध्वनि प्रबल होती है, और जब आयाम कम होता है तो ध्वनि मंद होती है।
  • तारत्व (Pitch / Shrilledness): आवृत्ति ध्वनि की तीक्ष्णता या तारत्व को निर्धारित करती है। अधिक आवृत्ति = अधिक तीखी ध्वनि (अधिक तारत्व)।

ध्वनि की प्रबलता (Loudness) और उसके स्रोत:
ध्वनि की प्रबलता को डेसिबेल (dB) मात्रक में व्यक्त करते हैं। नीचे दी गई सारणी में कुछ सामान्य ध्वनियों की प्रबलता दी गई है:

स्रोत ध्वनि की प्रबलता (डेसिबेल में)
सामान्य श्वास 10 dB
मंद फुसफुसाहट 30 dB
सामान्य बातचीत/वार्तालाप 60 dB
व्यस्त यातायात 70 dB
औसत फैक्टरी 80 dB

नोट: 80 dB से अधिक प्रबल शोर शरीर के लिए कष्टदायक होता है।

तारत्व (Pitch) के कुछ उदाहरण: ढोल मंद आवृत्ति से कंपित होता है, इसलिए इसका तारत्व कम होता है। इसके विपरीत, सीटी की आवृत्ति अधिक होती है, इसलिए यह उच्च तारत्व की ध्वनि उत्पन्न करती है। इसी तरह एक महिला की आवाज़ किसी पुरुष की अपेक्षा अधिक आवृत्ति की तथा अधिक तीखी होती है।

📘 10.6 श्रव्य तथा अश्रव्य ध्वनियाँ

क्या हम हर प्रकार की ध्वनि सुन सकते हैं? नहीं! मनुष्य के कान सभी आवृत्तियों की ध्वनियाँ नहीं सुन सकते।

  • श्रव्य ध्वनियाँ (Audible Sounds): मानव कानों के लिए श्रव्यता (सुनने) का परास 20 Hz से 20,000 Hz (20 kHz) तक है।
  • अश्रव्य ध्वनियाँ (Inaudible Sounds): 20 Hz से कम और 20,000 Hz से अधिक आवृत्ति की ध्वनियाँ मानव कान द्वारा नहीं सुनी जा सकतीं। इन्हें अश्रव्य कहते हैं।

कुत्तों में 20,000 Hz से अधिक आवृत्ति की ध्वनियों को सुनने की क्षमता होती है। इसीलिए पुलिसकर्मी उच्च आवृत्ति वाली सीटियों का उपयोग करते हैं जिसे कुत्ते तो सुन लेते हैं, लेकिन मनुष्य नहीं सुन पाते। चिकित्सा क्षेत्र में उपयोग होने वाले अल्ट्रासाउंड (ultrasound) उपकरण भी 20,000 Hz से अधिक आवृत्ति पर कार्य करते हैं!

📘 10.7 शोर तथा संगीत

हमारे चारों ओर की ध्वनियाँ हमेशा सुखद नहीं होतीं। जो अप्रिय ध्वनियाँ हमें कष्ट पहुँचाती हैं (जैसे निर्माण स्थल की आवाज़, ट्रकों के हॉर्न), उन्हें शोर (Noise) कहते हैं।

दूसरी ओर, जो ध्वनियाँ कानों को सुखद लगती हैं (जैसे वाद्ययंत्रों की ध्वनियाँ), उन्हें सुस्वर ध्वनि या संगीत (Music) कहा जाता है। परंतु, यदि संगीत भी अत्यधिक प्रबल (तेज़) हो जाए, तो वह भी शोर बन जाता है!

📘 10.8 ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution)

वातावरण में अत्यधिक या अवांछित ध्वनियों की उपस्थिति को ध्वनि प्रदूषण कहते हैं। इसके प्रमुख कारण हैं: वाहनों की ध्वनियाँ, विस्फोट (पटाखों का फटना), मशीनें, और लाउडस्पीकर। घरों में ऊँची आवाज़ में चलने वाले टीवी, ट्रांजिस्टर रेडियो, और रसोईघर के कुछ उपकरण भी इसके लिए उत्तरदायी हैं!

ध्वनि प्रदूषण से हानियाँ:
  • लगातार शोर के कारण अनिद्रा (नींद न आना), अति तनाव (उच्च रक्त-चाप), और चिंता जैसी स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं।
  • लगातार प्रबल ध्वनि के प्रभाव में रहने से व्यक्ति की सुनने की क्षमता अस्थायी या स्थायी रूप से कम हो सकती है (श्रवण क्षति)।

ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित रखने के उपाय:

  • वाहनों, इंजनों, और औद्योगिक मशीनों में रवशामक युक्तियाँ (silencers) लगानी चाहिए।
  • ध्वनि उत्पन्न करने वाले उद्योगों को आवासीय क्षेत्रों से दूर स्थापित करना चाहिए।
  • स्वचालित वाहनों के हॉर्न का कम से कम उपयोग करना चाहिए।
  • सड़कों तथा भवनों के आस-पास पेड़ लगाने चाहिए, ताकि ध्वनि आवासों तक न पहुँच पाए।
क्या आप जानते हैं? गोलकुण्डा किले का अजूबा!

भारत में हैदराबाद के निकट स्थित गोलकुण्डा किला अपने वास्तु अजूबों के लिए प्रसिद्ध है। इसके निकास द्वार के पास स्थित गुम्बद के नीचे ताली बजाने पर उत्पन्न ध्वनि इतनी गूँजती है कि इसे लगभग एक किलोमीटर दूर किले के शीर्ष पर सुना जा सकता है! इसका उपयोग पुराने समय में एक चेतावनी प्रणाली के रूप में किया जाता था ताकि सुरक्षाकर्मी किले के भीतर की फौज को सतर्क कर सकें!

Golconda Fort in Hyderabad - Bihar Board Class 8 Science Chapter 10 Solutions

चित्र : हैदराबाद का भव्य गोलकुण्डा किला

📘 अभ्यास प्रश्न – Bihar Board Class 8 Science Chapter 10 Solutions

प्रश्न 1. सही उत्तर चुनिए – ध्वनि संचरित हो सकती है:

(क) केवल वायु या गैसों में

(ख) केवल ठोसों में

(ग) केवल द्रवों में

(घ) ठोसों, द्रवों तथा गैसों में

उत्तर की विस्तृत व्याख्या: ध्वनि को संचरित (एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने) होने के लिए हमेशा किसी न किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता होती है। यह माध्यम ठोस (जैसे लकड़ी), द्रव (जैसे पानी) या गैस (जैसे हवा) कुछ भी हो सकता है। इसलिए विकल्प (घ) सही है।


प्रश्न 2. निम्न में से किस वाक् ध्वनि की आवृत्ति न्यूनतम होने की सम्भावना है:

(क) छोटी लड़की की

(ख) छोटे लड़के की

(ग) पुरुष की

(घ) महिला की

उत्तर की विस्तृत व्याख्या: वाक् ध्वनि की आवृत्ति वाक्-तंतुओं (vocal cords) की लंबाई और मोटाई पर निर्भर करती है। पुरुषों के वाक्-तंतु सबसे लंबे (लगभग 20 mm) और मोटे होते हैं, जिसके कारण उनके कंपन की आवृत्ति न्यूनतम होती है और उनकी आवाज़ भारी (कम तारत्व वाली) होती है।


प्रश्न 3. निम्नलिखित कथनों में सही कथन के सामने “T” तथा गलत कथन के सामने ‘F’ पर निशान लगाइए:

(क) ध्वनि निर्वात में संचरित नहीं हो सकती। (T)

व्याख्या: यह कथन सत्य है क्योंकि ध्वनि को आगे बढ़ने के लिए किसी न किसी माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) की आवश्यकता होती है। निर्वात में कोई कण नहीं होते, इसलिए वहाँ ध्वनि संचरित नहीं हो सकती।

(ख) किसी कंपित वस्तु के प्रति सेकंड होने वाले दोलनों की संख्या को इसका आवर्तकाल कहते हैं। (F)

व्याख्या: यह कथन असत्य है। प्रति सेकंड होने वाले दोलनों की संख्या को ‘आवृत्ति’ (Frequency) कहते हैं। एक दोलन पूरा करने में लगे समय को आवर्तकाल कहते हैं।

(ग) यदि कंपन का आयाम अधिक है तो ध्वनि मंद होती है। (F)

व्याख्या: यह कथन असत्य है। ध्वनि की प्रबलता उसके आयाम पर निर्भर करती है। यदि कंपन का आयाम अधिक होगा, तो ध्वनि ‘प्रबल’ (तेज़) होगी, न कि मंद।

(घ) मानव कानों के लिए श्रव्यता का परास 20 Hz से 20,000 Hz है। (T)

व्याख्या: यह कथन सत्य है। एक सामान्य मानव कान केवल 20 हर्ट्ज से लेकर 20,000 हर्ट्ज तक की आवृत्तियों वाली ध्वनि को ही सुन सकता है।

(ङ) कंपन की आवृत्ति जितनी कम होगी तारत्व उतना ही अधिक होगा। (F)

व्याख्या: यह कथन असत्य है। आवृत्ति और तारत्व (pitch) एक-दूसरे के सीधे समानुपाती होते हैं। कंपन की आवृत्ति जितनी कम होगी, ध्वनि का तारत्व भी उतना ही ‘कम’ होगा।

(च) अवांछित या अप्रिय ध्वनि को संगीत कहते हैं। (F)

व्याख्या: यह कथन असत्य है। कानों को अप्रिय लगने वाली अवांछित ध्वनि को ‘शोर’ (Noise) कहते हैं, संगीत नहीं।

(छ) ध्वनि प्रदूषण आंशिक श्रवण अशक्तता उत्पन्न कर सकता है। (T)

व्याख्या: यह कथन सत्य है। लगातार प्रबल ध्वनि (शोर प्रदूषण) के प्रभाव में रहने से व्यक्ति के कानों के पर्दे (कर्ण पटह) को नुकसान पहुँच सकता है, जिससे श्रवण शक्ति (सुनने की क्षमता) कम हो सकती है।


प्रश्न 4. उचित शब्दों द्वारा रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:

(क) किसी वस्तु द्वारा एक दोलन को पूरा करने में लिए गए समय को आवर्तकाल कहते हैं।

(ख) प्रबलता कम्पन के आयाम से निर्धारित की जाती है।

(ग) आवृत्ति का मात्रक हर्ट्ज (Hz) है।

(घ) अवांछित ध्वनि को शोर कहते हैं。

(ङ) ध्वनि की तीक्ष्णता कंपनों की आवृत्ति से निर्धारित होती है।


प्रश्न 5. एक दोलक 4 सेकंड में 40 बार दोलन करता है। इसका आवर्तकाल तथा आवृत्ति ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

प्रश्नानुसार,
कुल दोलनों की संख्या = 40
कुल लिया गया समय = 4 सेकंड

आवृत्ति (Frequency): प्रति सेकंड होने वाले दोलनों की संख्या को आवृत्ति कहते हैं।
आवृत्ति = कुल दोलनों की संख्या ÷ कुल समय
आवृत्ति = 40 ÷ 4 = 10 हर्ट्ज (Hz)

आवर्तकाल (Time Period): एक दोलन पूरा करने में लगे समय को आवर्तकाल कहते हैं।
आवर्तकाल = 1 ÷ आवृत्ति
आवर्तकाल = 1 ÷ 10 = 0.1 सेकंड


प्रश्न 6. एक मच्छर अपने पंखों को 500 कम्पन प्रति सेकंड की औसत दर से कंपित करके ध्वनि उत्पन्न करता है। कंपन का आवर्तकाल कितना है?

उत्तर:

यहाँ दिया गया है:
मच्छर के पंखों की आवृत्ति (1 सेकंड में कंपनों की संख्या) = 500 हर्ट्ज (Hz)

हम जानते हैं कि,
आवर्तकाल = 1 ÷ आवृत्ति
आवर्तकाल = 1 ÷ 500 सेकंड
आवर्तकाल = 0.002 सेकंड

अतः, मच्छर के पंखों के कंपन का आवर्तकाल 0.002 सेकंड है।


प्रश्न 7. निम्न वाद्ययंत्रों में उस भाग को पहचानिए जो ध्वनि उत्पन्न करने के लिए कंपित होता है:
(क) ढोलक (ख) सितार (ग) बाँसुरी

उत्तर:

  • (क) ढोलक: इसमें ध्वनि उत्पन्न करने के लिए तानित झिल्ली (Stretched membrane) कंपित होती है।
  • (ख) सितार: इसमें ध्वनि उत्पन्न करने के लिए तानित तार या डोरी (Stretched string) कंपित होती है।
  • (ग) बाँसुरी: इसमें ध्वनि उत्पन्न करने के लिए वायु-स्तंभ (Air column) कंपित होता है।

प्रश्न 8. शोर तथा संगीत में क्या अंतर है? क्या कभी संगीत शोर बन सकता है?

उत्तर:

शोर (Noise) और संगीत (Music) में अंतर:

शोर (Noise) संगीत (Music)
जो ध्वनियाँ हमारे कानों को अप्रिय (खराब) लगती हैं और कष्ट पहुँचाती हैं, उन्हें शोर कहते हैं। जो ध्वनियाँ हमारे कानों को सुखद (अच्छी) लगती हैं और आनंद देती हैं, उन्हें सुस्वर ध्वनि या संगीत कहते हैं।
उदाहरण: ट्रैफिक की आवाज़, जनरेटर की आवाज़, कारखानों की मशीनों की आवाज़। उदाहरण: हारमोनियम की ध्वनि, सितार के तार की ध्वनि, बाँसुरी की धुन।

क्या कभी संगीत शोर बन सकता है?
हाँ, यदि संगीत की प्रबलता (Loudness) बहुत अधिक बढ़ जाए, यानी उसे बहुत तेज़ आवाज़ (डीजे या बड़े लाउडस्पीकर) में बजाया जाए, तो वह सुखद लगने के बजाय कानों को कष्ट देने लगता है और शोर में बदल जाता है।


प्रश्न 9. अपने वातावरण में ध्वनि प्रदूषण के स्रोतों की सूची बनाइए।

उत्तर: हमारे वातावरण में ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं:

  1. सड़कों पर चलने वाले स्वचालित वाहनों (बस, ट्रक, कार, बाइक) की तेज़ ध्वनियाँ और हॉर्न।
  2. कारखानों में चलने वाली भारी मशीनों की आवाज़।
  3. विस्फोट, जिसमें त्योहारों और शादियों में फोड़े जाने वाले पटाखों की तेज़ आवाज़ शामिल है।
  4. तेज़ आवाज़ में बजने वाले लाउडस्पीकर और डीजे (DJ)।
  5. घरों में उच्च आवाज़ में चलाए जाने वाले टेलिविज़न (TV) और ट्रांजिस्टर रेडियो।
  6. रसोईघर के कुछ उपकरण (जैसे मिक्सर-ग्राइंडर), कूलर और वातानुकूलक (AC) की ध्वनियाँ।

प्रश्न 10. वर्णन कीजिए कि ध्वनि प्रदूषण मानव के लिए किस प्रकार से हानिकारक है?

उत्तर: ध्वनि प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के लिए कई प्रकार से हानिकारक है। इसके प्रमुख दुष्प्रभाव निम्नलिखित हैं:

  • अनिद्रा (Sleeplessness): अत्यधिक शोर के कारण मनुष्य ठीक से सो नहीं पाता, जिससे अनिद्रा की समस्या उत्पन्न होती है।
  • अति तनाव (Hypertension): लगातार शोर में रहने से उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) की शिकायत हो जाती है।
  • मानसिक विकार: ध्वनि प्रदूषण से व्यक्ति में चिंता (Anxiety), चिड़चिड़ापन और अन्य मानसिक विकार उत्पन्न हो सकते हैं।
  • श्रवण क्षति (Hearing Loss): लगातार प्रबल ध्वनि (शोर) के प्रभाव में रहने वाले व्यक्ति के कानों के पर्दे को नुकसान पहुँच सकता है, जिससे उसकी सुनने की क्षमता अस्थायी अथवा स्थायी रूप से कम हो सकती है।

प्रश्न 11. आपके माता-पिता एक मकान खरीदना चाहते हैं। उन्हें एक मकान सड़क के किनारे पर तथा दूसरा सड़क से तीन गली छोड़ कर देने का प्रस्ताव किया गया है। आप अपने माता-पिता को कौन-सा मकान खरीदने का सुझाव देंगे? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: मैं अपने माता-पिता को सड़क से तीन गली छोड़ कर स्थित मकान खरीदने का सुझाव दूँगा।

कारण (व्याख्या): सड़क के किनारे स्थित मकान में मुख्य मार्ग पर चलने वाले वाहनों के कारण अत्यधिक शोर (ध्वनि प्रदूषण) होगा। इसके अलावा वाहनों के धुएँ से वायु प्रदूषण भी अधिक होगा। लगातार शोर के कारण शांति नहीं मिलेगी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ (जैसे तनाव, अनिद्रा) होने का खतरा रहेगा। इसके विपरीत, सड़क से तीन गली दूर वाले मकान में वाहनों का शोर बहुत कम पहुँचेगा, जिससे वहाँ का वातावरण अधिक शांत, स्वच्छ और रहने के लिए स्वास्थ्यवर्धक होगा।


प्रश्न 12. मानव वाक्यंत्र का चित्र बनाइए तथा इसके कार्य की अपने शब्दों में व्याख्या कीजिए।

उत्तर:

मानव वाकयंत्र (Larynx) - Bihar Board Class 8 Science Chapter 10 Solutions

चित्र 10.8 : मानव का वाकयंत्र या कंठ (Larynx)

वाक्यंत्र की कार्यविधि (Working of Larynx):
मानवों में ध्वनि वाकयंत्र अथवा कंठ द्वारा उत्पन्न होती है। यह श्वासनली के ऊपरी सिरे पर स्थित होता है। इसके आर-पार दो वाक्-तंतु (Vocal Cords) तने हुए होते हैं और उनके बीच में हवा निकलने के लिए एक बहुत पतली झिरी (दरार) होती है।
जब हम बोलते हैं, तो हमारे फेफड़े हवा को बलपूर्वक इस झिरी से बाहर निकालते हैं। हवा के दबाव से वाक्-तंतुओं में कंपन (vibration) पैदा होता है। इसी कंपन के परिणामस्वरूप ध्वनि (आवाज़) उत्पन्न होती है। वाक्-तंतुओं से जुड़ी मांसपेशियाँ इन तंतुओं को तना हुआ या ढीला कर सकती हैं, जिससे हमारी आवाज़ पतली या भारी होती है।


प्रश्न 13. आकाश में तड़ित तथा मेघगर्जन की घटना एक समय पर तथा हमसे समान दूरी पर घटित होती है। हमें तड़ित पहले दिखाई देती है तथा मेघगर्जन बाद में सुनाई देता है। क्या आप इसकी व्याख्या कर सकते हैं?

उत्तर: हाँ, ऐसा प्रकाश और ध्वनि की चाल (गति) में भारी अंतर के कारण होता है।

आकाश में बिजली चमकने (तड़ित) और बादलों के गरजने (मेघगर्जन) की घटना एक ही समय पर होती है। लेकिन प्रकाश की गति (Speed of Light) लगभग 3,00,000 किलोमीटर प्रति सेकंड होती है, जबकि हवा में ध्वनि की गति (Speed of Sound) मात्र लगभग 340 मीटर प्रति सेकंड होती है। चूँकि प्रकाश की गति ध्वनि की गति से बहुत अधिक तीव्र है, इसलिए तड़ित (प्रकाश) हमारी आँखों तक तुरंत पहुँच जाती है और हमें पहले दिखाई देती है, जबकि ध्वनि को हम तक पहुँचने में कुछ अतिरिक्त सेकंड का समय लगता है।


शिक्षक हेतु सुझाव (Teacher Tip)

कक्षा में ‘ध्वनि’ अध्याय पढ़ाते समय बच्चों से क्रियाकलाप (Activities) अवश्य करवाएं। बच्चों को धातु के बर्तन पर चम्मच से आघात करके उसे छूने को कहें ताकि वे ‘कंपन’ को महसूस कर सकें। जलतरंग का क्रियाकलाप (गिलासों में पानी भरकर आवाज़ निकालना) बच्चों के लिए बहुत मनोरंजक होता है और इससे वे ‘आवृत्ति’ (Frequency) के सिद्धांत को आसानी से समझ पाते हैं।

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BSEBHub: Bihar Board & NCERT Solutions| Author: Suraj Mishra
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