📚 Subject: विज्ञान (Science)
📝 Chapter: 8 – बल तथा दाब (Force and Pressure)
Bihar Board Class 8 Science Chapter 8 Notes: बल तथा दाब
क्या आपने कभी सोचा है कि कोई वस्तु कैसे चलती है, कैसे रुकती है या कैसे अपनी दिशा बदलती है? जब हम किसी गेंद को धक्का देते हैं या किसी दरवाजे को खींचते हैं, तो हम वास्तव में उस पर बल (Force) लगा रहे होते हैं। इस अध्याय Bihar Board Class 8 Science Chapter 8 Question Answer में हम बल और दाब की प्रकृति, इसके प्रकार और दैनिक जीवन में इसके प्रभावों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
📘 8.1 बल – अपकर्षण या अभिकर्षण
हम प्रतिदिन कई ऐसे कार्य करते हैं जिनमें वस्तुओं को उठाना, खोलना, बंद करना, ठोकर मारना, खींचना या धक्का देना शामिल होता है। विज्ञान की भाषा में इन क्रियाओं को विशिष्ट नाम दिए गए हैं:
- अपकर्षण (Push): किसी वस्तु को अपने से दूर धकेलना। (जैसे – मेज पर रखी पुस्तक को खिसकाना)।
- अभिकर्षण (Pull): किसी वस्तु को अपनी ओर खींचना। (जैसे – कुएँ से पानी की बाल्टी खींचना)।
परिभाषा: विज्ञान में किसी वस्तु पर लगने वाले धक्के (अपकर्षण) या खिंचाव (अभिकर्षण) को ही बल (Force) कहते हैं। अतः वस्तुओं को दी गई गति बल लगने के कारण ही होती है।
📘 8.2 बल अन्योन्यक्रिया के कारण लगते हैं
क्या कोई बल अकेले कार्य कर सकता है? नहीं। बल लगने के लिए यह आवश्यक है कि कम से कम दो वस्तुओं के बीच अन्योन्यक्रिया (Interaction) हो।
उदाहरण:
- यदि कोई व्यक्ति स्थिर कार के पीछे खड़ा है, तो कार नहीं चलेगी। लेकिन जब वह कार को धक्का (बल) लगाता है, तो व्यक्ति और कार के बीच अन्योन्यक्रिया होती है और कार आगे बढ़ती है।
- रस्साकशी के खेल में दोनों टीमें रस्से को विपरीत दिशा में खींचती हैं, यहाँ भी टीमों और रस्से के बीच अन्योन्यक्रिया हो रही है।
निष्कर्ष: दो वस्तुओं के बीच अन्योन्यक्रिया के कारण ही उनके बीच बल लगता है।
📘 8.3 बलों की खोजबीन (Net Force)
किसी वस्तु पर बल एक दिशा में या विपरीत दिशाओं में लग सकता है। इसका वस्तु पर क्या प्रभाव पड़ता है, इसे समझना महत्वपूर्ण है।
- एक ही दिशा में लगे बल: यदि किसी वस्तु पर दो या दो से अधिक बल एक ही दिशा में लगाए जाते हैं, तो वे जुड़ जाते हैं। (जैसे – दो दोस्तों द्वारा मिलकर एक भारी बक्से को एक ही दिशा में धकेलना)।
- विपरीत दिशा में लगे बल: यदि किसी वस्तु पर दो बल विपरीत दिशा में कार्य करते हैं, तो उस पर लगने वाला कुल (नेट) बल दोनों बलों के अंतर के बराबर होता है।
- संतुलित बल: यदि विपरीत दिशाओं में लगने वाले दोनों बल बराबर (समान) हों, तो वस्तु पर लगने वाला नेट (कुल) बल शून्य (Zero) हो जाएगा और वस्तु अपनी जगह से नहीं हिलेगी।
याद रखें: बल की प्रबलता प्रायः इसके परिमाण (Magnitude) से मापी जाती है। बल के बारे में बताते समय हमें उस दिशा का भी उल्लेख करना पड़ता है जिसमें बल कार्य कर रहा है। यदि दिशा या परिमाण बदल जाए, तो बल का प्रभाव भी बदल जाता है।
📘 8.4 बल वस्तु की गति की अवस्था में परिवर्तन कर सकता है
जब किसी वस्तु पर बल लगाया जाता है, तो उसकी गति की अवस्था (State of Motion) बदल सकती है।
गति की अवस्था: किसी वस्तु की गति की अवस्था का वर्णन उसकी चाल (Speed) तथा गति की दिशा (Direction) से किया जाता है। विराम (रुकी हुई) अवस्था को शून्य चाल की अवस्था माना जाता है।
बल लगाने से गति में निम्नलिखित परिवर्तन हो सकते हैं:
- विराम से गति में लाना: एक रुकी हुई फुटबॉल को किक मारने (बल लगाने) पर वह गतिशील हो जाती है।
- चाल को बढ़ाना: यदि लगाया गया बल वस्तु की गति की दिशा में हो, तो वस्तु की चाल बढ़ जाती है। (जैसे – चलते हुए टायर को डंडे से लगातार धकेलना)।
- चाल को घटाना या रोकना: यदि लगाया गया बल वस्तु की गति की विपरीत दिशा में हो, तो वस्तु की चाल कम हो जाती है या वह रुक जाती है। (जैसे – गोलकीपर द्वारा आती हुई गेंद को रोकना)।
- दिशा बदलना: क्रिकेट में बल्लेबाज जब गेंद पर बल्ले से प्रहार करता है, तो गेंद की दिशा बदल जाती है।
छात्रों को स्पष्ट करें कि बल लगने का अर्थ यह नहीं है कि वस्तु हमेशा गति करेगी ही। उदाहरण के लिए, यदि हम किसी मजबूत दीवार को धक्का दें, तो हम बल तो लगा रहे हैं, लेकिन दीवार अपनी जगह से नहीं हिलती क्योंकि हमारा बल पर्याप्त नहीं है।
📘 8.5 बल किसी वस्तु की आकृति में परिवर्तन कर सकता है
बल केवल गति या दिशा ही नहीं बदलता, बल्कि यह वस्तुओं के आकार (Shape) और आकृति में भी परिवर्तन ला सकता है। Bihar Board Class 8 Science Chapter 8 Question Answer के इस भाग में हम इसके व्यावहारिक उदाहरण देखेंगे:
- गुंथा हुआ आटा: जब हम गुंथे हुए आटे की लोई को बेलकर चपाती बनाते हैं या हाथों से दबाते हैं, तो बल के कारण उसकी आकृति बदल जाती है।
- रबर बैंड या स्प्रिंग: जब किसी रबर बैंड को खींचा जाता है या साइकिल की गद्दी पर बैठा जाता है (जिससे स्प्रिंग दबता है), तो बल के प्रभाव से उनकी आकृति में परिवर्तन होता है।
- स्पंज: स्पंज को दबाने पर उसका आकार छोटा हो जाता है।
सारांश (बल के मुख्य प्रभाव):
- किसी वस्तु को विराम अवस्था से गति में ला सकता है।
- गतिशील वस्तु की चाल में परिवर्तन कर सकता है।
- गतिशील वस्तु की दिशा में परिवर्तन कर सकता है।
- वस्तु की आकृति में परिवर्तन ला सकता है।
- इनमें से कुछ अथवा सभी प्रभावों को एक साथ उत्पन्न कर सकता है।
📘 8.6 सम्पर्क बल (Contact Forces)
वे बल जो किसी वस्तु के सीधे सम्पर्क (छूने) में आने पर ही कार्य करते हैं, सम्पर्क बल कहलाते हैं। ये मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
हमारी मांसपेशियों के क्रियास्वरूप लगने वाले बल को पेशीय बल कहते हैं। पानी की बाल्टी उठाना, स्कूल बैग को धकेलना या भोजन को चबाना—ये सभी पेशीय बल के कारण संभव हैं। जानवर (जैसे बैल, घोड़े, ऊँट) भी भारी सामान खींचने या कठिन कार्य करने के लिए अपने पेशीय बल का उपयोग करते हैं। क्योंकि पेशीय बल तभी लगाया जा सकता है जब मांसपेशियां वस्तु के सम्पर्क में हों, इसलिए यह एक सम्पर्क बल है।
जब कोई वस्तु किसी दूसरी सतह पर चलती है, तो उनकी सतहों के बीच एक बल उत्पन्न होता है जो गति का विरोध करता है। इसे घर्षण बल कहते हैं। फर्श पर लुढ़कती गेंद कुछ दूर जाकर घर्षण के कारण ही रुक जाती है। नाव खेना बंद करने पर नाव भी पानी और नाव की सतह के बीच लगने वाले घर्षण के कारण रुक जाती है। घर्षण बल हमेशा गति की दिशा के विपरीत कार्य करता है।
📘 8.7 असम्पर्क बल (Non-Contact Forces)
वे बल जो वस्तुओं के सीधे सम्पर्क में न होने पर भी दूर से ही कार्य करते हैं, असम्पर्क बल कहलाते हैं।
- चुंबकीय बल (Magnetic Force): एक चुंबक दूसरे चुंबक या लोहे के टुकड़े पर बिना छुए ही आकर्षण या प्रतिकर्षण बल लगा सकता है।
- स्थिरवैद्युत बल (Electrostatic Force): एक आवेशित वस्तु द्वारा किसी दूसरी आवेशित या अनावेशित वस्तु पर लगाया गया बल स्थिरवैद्युत बल कहलाता है। (जैसे – कागज की शीट से रगड़ा हुआ प्लास्टिक का स्ट्रॉ दूसरे स्ट्रॉ को आकर्षित या प्रतिकर्षित करता है)।
- गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Force): पृथ्वी हर वस्तु को अपनी ओर खींचती है, जिसे गुरुत्व बल कहते हैं। पेड़ से पत्ते गिरना या नल खोलने पर पानी का नीचे गिरना गुरुत्व बल के कारण होता है। ब्रह्मांड में हर छोटी-बड़ी वस्तु एक-दूसरे को आकर्षित करती है, इसे गुरुत्वाकर्षण बल कहते हैं।
📘 8.8 दाब (Pressure)
क्या दाब और बल में कोई संबंध है? हाँ! जब हम किसी लकड़ी के तख्ते में कील ठोकते हैं, तो हम नुकीले सिरे से कील ठोक पाते हैं, चौड़े सिरे से नहीं। ऐसा इसलिए है क्योंकि बल कितने क्षेत्रफल (Area) पर लग रहा है, यह बहुत महत्वपूर्ण है।
परिभाषा: किसी पृष्ठ के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले बल को दाब (Pressure) कहते हैं।
\[ \text{दाब} = \frac{\text{लगाया गया बल}}{\text{जिस क्षेत्रफल पर बल लगाया जाता है}} \] \text{दाब} = \frac{\text{लगाया गया बल}}{\text{जिस क्षेत्रफल पर बल लगाया जाता है}} \[ \text{ दाब } = \frac{\text{बल}}{\text{ क्षेत्रफल जिस पर यह लगता है जिस।।।।।वव(।व( पर यह लगता है }} \]इस सूत्र से स्पष्ट है कि यदि बल समान हो, तो पृष्ठ का क्षेत्रफल जितना कम होगा, दाब उतना ही अधिक होगा। कील के नुकीले सिरे का क्षेत्रफल बहुत कम होता है, इसलिए यह लकड़ी में आसानी से घुस जाती है।
चित्र 8.13: सिर पर कपड़े को गोल लपेट कर भारी बोझ उठाते हुए कुली (दाब का उदाहरण)।
दैनिक जीवन में दाब के उदाहरण:
- कंधे पर लटकाने वाले बैग की पट्टियां चौड़ी बनाई जाती हैं ताकि कंधे पर कम दाब पड़े।
- काटने वाले औजारों (चाकू आदि) के किनारे तेज (तीक्ष्ण) होते हैं ताकि कम क्षेत्रफल पर अधिक दाब लगाकर आसानी से काटा जा सके।
- कुली भारी सामान उठाते समय सिर पर कपड़े को गोल लपेट कर रखते हैं। इससे उनके सिर और बोझ का सम्पर्क क्षेत्रफल बढ़ जाता है और उनके सिर पर लगने वाला दाब कम हो जाता है।
📘 8.9 द्रवों तथा गैसों द्वारा लगाया गया दाब
केवल ठोस वस्तुएं ही दाब नहीं लगातीं, बल्कि द्रव (Liquids) और गैसें (Gases) भी दाब डालती हैं।
- द्रव का दाब: पानी या कोई भी द्रव जिस बर्तन में रखा जाता है, उसकी दीवारों और तली पर दाब डालता है। बर्तन की तली पर पानी द्वारा लगाया जाने वाला दाब पानी के स्तम्भ की ऊँचाई पर निर्भर करता है। साथ ही, द्रव एक समान गहराई पर समान दाब डालते हैं।
- गैसों का दाब: गैसें भी बर्तन की दीवारों पर दाब डालती हैं। जब हम गुब्बारा फुलाते हैं, तो अंदर की हवा गुब्बारे की दीवारों पर दाब डालती है जिससे वह फूल जाता है। साइकिल की ट्यूब में हवा का दाब उसे टाइट रखता है।
📘 8.10 वायुमंडलीय दाब (Atmospheric Pressure)
हमारे चारों ओर वायु का एक आवरण है जिसे वायुमंडल कहते हैं। यह वायुमंडल पृथ्वी के तल से कई किलोमीटर ऊपर तक फैला हुआ है। इस वायु द्वारा लगाए गए दाब को वायुमंडलीय दाब कहते हैं।
यदि हम एक इकाई क्षेत्रफल के ऊपर हवा से भरा एक लंबा बेलन खड़ा मानें, तो उसमें हवा का भार (गुरुत्व बल) ही वायुमंडलीय दाब के बराबर होगा।
चित्र 8.18: किसी चिकने पृष्ठ पर दबाया हुआ रबड़ का चूषक (वायुमंडलीय दाब का उदाहरण)।
रबड़ का चूषक (Rubber Sucker): जब हम किसी चिकने पृष्ठ पर रबड़ के चूषक को दबाते हैं, तो उसके और पृष्ठ के बीच की हवा बाहर निकल जाती है। इस पर बाहर से वायुमंडलीय दाब लगता है जिससे यह पृष्ठ से चिपक जाता है। इसे खींचने के लिए इतना बल लगाना पड़ता है जो वायुमंडलीय दाब से अधिक हो।
छात्रों के मन में यह सवाल आ सकता है कि यदि हमारे ऊपर वायुमंडलीय दाब इतना अधिक (लगभग 225 kg भार के बराबर) है, तो हम दबकर पिचक क्यों नहीं जाते? इसका कारण यह है कि हमारे शरीर के अंदर का दाब भी वायुमंडलीय दाब के बराबर होता है, जो बाहर के दाब को संतुलित कर देता है।
क्या आप जानते हैं? (मैगडेबर्ग के अर्धगोले)
17वीं शताब्दी में जर्मनी के वैज्ञानिक ऑटो वॉन गेरिक (Otto von Guericke) ने बर्तनों से हवा निकालने वाले पम्प का आविष्कार किया। उन्होंने धातु के दो खोखले अर्धगोले लिए (व्यास 51 cm) और उन्हें जोड़कर बीच की हवा निकाल दी। वायुमंडलीय दाब इतना अधिक हो गया कि 8-8 घोड़ों की दो टोलियां (कुल 16 घोड़े) विपरीत दिशा में खींचने के बावजूद उन अर्धगोलों को अलग नहीं कर पाईं!
📘Bihar Board Class 8 Science Chapter 8 Question Answer (NCERT Textbook Questions and Answers)
यहाँ Bihar Board Class 8 Science Chapter 8 Question Answer दिए गए हैं, जो आपके NCERT / BSEB पाठ्यक्रम पर आधारित हैं। इन समाधानों (Solutions) से आप परीक्षा की तैयारी बेहतर ढंग से कर सकते हैं।
उत्तर:
धक्के (अपकर्षण) के उदाहरण:
- मेज पर रखी पुस्तक को आगे खिसकाना।
- फुटबॉल को किक मारना (पैर से धकेलना)।
खिंचाव (अभिकर्षण) के उदाहरण:
- कुएँ से पानी से भरी बाल्टी को ऊपर खींचना।
- कमरे का दरवाजा खोलना (अपनी ओर खींचना)।
उत्तर:
- हाथों से गुंथे हुए आटे को दबाकर या बेलकर रोटी (चपाती) बनाना।
- साइकिल की गद्दी पर बैठने से उसमें लगी स्प्रिंग (कमानी) का दब जाना।
उत्तर:
- कुएँ से पानी निकालते समय हमें रस्सी को खींचना (अभिकर्षण) पड़ता है।
- एक आवेशित वस्तु अनावेशित वस्तु को आकर्षित करती है।
- सामान से लदी ट्रॉली को चलाने के लिए हमें उसको धकेलना (अपकर्षण) या खींचना पड़ता है।
- किसी चुंबक का उत्तरी ध्रुव दूसरे चुंबक के उत्तरी ध्रुव को प्रतिकर्षित करता है।
शब्द: पेशीय/सम्पर्क/असम्पर्क/गुरुत्व/घर्षण/आकृति/आकर्षण
उत्तर:
- धनुष को खींचने के लिए धनुर्धर एक बल लगाती है जिसके कारण, इसकी आकृति में परिवर्तन होता है।
- धनुष को खींचने के लिए धनुर्धर द्वारा लगाया गया बल पेशीय बल का उदाहरण है।
- तीर की गति की अवस्था में परिवर्तन के लिए उत्तरदायी बल का प्रकार सम्पर्क बल का उदाहरण है।
- जब तीर लक्ष्य की ओर गति करता है तो इस पर लगने वाले बल गुरुत्व तथा वायु के घर्षण के कारण होते हैं।
उत्तर:
| स्थिति (a-d) | बल लगाने वाला कारक (Agent) | जिस पर बल लग रहा है (Object) | बल का प्रभाव (Effect) |
|---|---|---|---|
| (a) रस निकालने के लिए नींबू के टुकड़ों को उँगलियों से दबाना। | उँगलियों का पेशीय बल | नींबू के टुकड़े | नींबू की आकृति बदलती है और रस बाहर निकलता है। |
| (b) दंत मंजन की ट्यूब से पेस्ट बाहर निकालना। | हाथों की उँगलियों का पेशीय बल | टूथपेस्ट की ट्यूब | ट्यूब की आकृति बदलती है और पेस्ट गतिमान होकर बाहर आता है। |
| (c) दीवार में लगे हुए हुक से लटकी कमानी के दूसरे सिरे पर लटका एक भार। | लटकाया गया भार (गुरुत्व बल) | कमानी (स्प्रिंग) | कमानी की आकृति बदलती है (वह लंबी खिंच जाती है)। |
| (d) ऊँची कूद करते समय एक खिलाड़ी द्वारा एक निश्चित ऊँचाई की छड़ (बाधा) को पार करना। | खिलाड़ी की टाँगों की मांसपेशियाँ (पेशीय बल) | खिलाड़ी का अपना शरीर | खिलाड़ी के शरीर की गति की अवस्था और दिशा बदल जाती है (वह ऊपर उछलता है)। |
उत्तर: जब लोहार हथौड़े से गर्म लोहे को पीटता है, तो वह अपना पेशीय बल (सम्पर्क बल) लगाता है। इस बल के प्रभाव से लोहे के टुकड़े की आकृति (Shape) बदल जाती है और उसे मनचाहा आकार दिया जा सकता है।
उत्तर: गुब्बारे को कपड़े से रगड़ने पर उस पर आवेश (Charge) उत्पन्न हो जाता है। अतः, दीवार और गुब्बारे के बीच आकर्षण के लिए उत्तरदायी बल स्थिरवैद्युत बल (Electrostatic Force) है, जो कि एक असम्पर्क बल है।
उत्तर: बाल्टी पर दो मुख्य बल कार्य कर रहे हैं:
- पेशीय बल (Muscular Force): हमारे हाथ द्वारा ऊपर की ओर लगाया गया बल।
- गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Force): पृथ्वी द्वारा बाल्टी पर नीचे की ओर लगाया गया बल।
चूँकि ये दोनों बल परिमाण में बराबर और दिशा में एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत हैं, इसलिए बाल्टी पर लगने वाला कुल (नेट) बल शून्य (Zero) हो जाता है। यही कारण है कि बाल्टी की गति की अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होता और वह स्थिर रहती है।
उत्तर: रॉकेट पर मुख्य रूप से लगने वाले दो बल हैं:
- गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Force): पृथ्वी का गुरुत्व बल जो रॉकेट को नीचे की ओर खींचने का प्रयास करता है।
- घर्षण बल (Frictional Force): वायुमंडल की हवा का घर्षण बल जो रॉकेट की ऊपर की ओर गति का विरोध करता है। (इसके विरुद्ध रॉकेट के इंजनों द्वारा ऊपर की ओर प्रणोद/बल लगाया जाता है)।
- पानी का दाब
- पृथ्वी का गुरुत्व
- रबड़ के बल्ब की आकृति
- वायुमंडलीय दाब
उत्तर: (घ) वायुमंडलीय दाब
(व्याख्या: जब हम बल्ब दबाकर हवा बाहर निकाल देते हैं, तो ड्रॉपर के अंदर दाब कम हो जाता है। बाहर पानी की सतह पर लग रहा वायुमंडलीय दाब अधिक होने के कारण वह पानी को ड्रॉपर के अंदर धकेल देता है।)
📥 Download PDF Notes
Bihar Board Class 8 Science Chapter 8 Question Answer सम्पूर्ण नोट्स और प्रश्न-उत्तर की PDF फाइल प्राप्त करने के लिए हमारे टेलीग्राम चैनल से जुड़ें।
Join Telegram Channelहमें उम्मीद है कि Bihar Board Class 8 Science Chapter 8 Question Answer का यह पूरा गाइड आपको अच्छे अंक लाने में मदद करेगा।
आप हमारी वेबसाइट पर Bihar Board के अन्य विषयों के नोट्स और Solutions भी पढ़ सकते हैं।
This content is intellectually owned by BSEBHub.in.
Concept & Created by:
Suraj Kumar Mishra