Bihar Board Class 8 Science Chapter 6 Solutions: जंतुओं में जनन
आपने पाचन, परिसंचरण एवं श्वसन प्रक्रम के बारे में पिछली कक्षाओं में पढ़ा होगा। ये सभी प्रक्रम प्रत्येक जीव की उत्तरजीविता (Survival) के लिए आवश्यक हैं। आप पौधों में जनन के प्रक्रम के विषय में भी पढ़ चुके हैं। जनन जाति (स्पीशीज) की निरंतरता बनाए रखने के लिए अत्यधिक आवश्यक है। कल्पना कीजिए कि यदि जीव प्रजनन नहीं करते तो क्या होता? जीवों में जनन का विशेष महत्त्व है क्योंकि यह एक जैसे जीवों में पीढ़ी दर पीढ़ी निरंतरता बनाए रखना सुनिश्चित करता है।
इस Bihar Board Class 8 Science Chapter 6 Solutions के माध्यम से हम जानेंगे कि जंतु किस प्रकार जनन करते हैं और उनकी प्रक्रियाएं क्या-क्या हैं।
📘 जंतुओं और उनकी संतति (बच्चे)
क्या आपने विभिन्न जंतुओं के बच्चों को देखा है? कुछ जंतुओं के बच्चों के नाम नीचे दी गई सारणी में स्पष्ट किए गए हैं:
| क्र.सं. | जंतु | संतति (बच्चे) |
|---|---|---|
| 1. | मनुष्य | शिशु |
| 2. | बिल्ली | बिलौटा |
| 3. | कुत्ता | पिल्ला |
| 4. | तितली | इल्ली (कैटरपिलर) |
| 5. | मुर्गी (कुक्कुट) | चूज़ा |
| 6. | गाय | बछड़ा |
| 7. | मेंढक | टैडपोल |
📘 6.1 जनन की विधियाँ
पौधों की ही तरह जंतुओं में भी जनन की दो मुख्य विधियाँ होती हैं। वे इस प्रकार हैं:
- (i) लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)
- (ii) अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
📘 6.2 लैंगिक जनन
पौधों की ही तरह जंतु भी नर एवं मादा युग्मक बनाते हैं जो संलयित होकर युग्मनज (Zygote) बनाते हैं। यह युग्मनज विकसित होकर एक नया जीव बनाता है। इस प्रकार का जनन जिसमें नर तथा मादा युग्मक का संलयन होता है, उसे लैंगिक जनन कहते हैं। आइए हम मनुष्य में जनन भागों का पता लगाएँ तथा जनन प्रक्रम का अध्ययन करें।
नर जनन अंगों में एक जोड़ा वृषण, दो शुक्राणु नलिका तथा एक शिश्न (लिंग) होते हैं। वृषण नर युग्मक उत्पन्न करते हैं जिन्हें शुक्राणु (Sperm) कहते हैं। वृषण लाखों शुक्राणु उत्पन्न करते हैं।
चित्र 6.1 : मानव में नर जननांग।
शुक्राणु यद्यपि बहुत सूक्ष्म होते हैं, पर प्रत्येक में एक सिर, एक मध्य भाग एवं एक पूँछ होती है। वास्तव में हर शुक्राणु में कोशिका के सामान्य संघटक पाए जाते हैं। शुक्राणु की पूँछ उसे तैरने और गति करने में सहायता करती है।
चित्र 6.2 : मानव शुक्राणु।
मादा जननांगों में एक जोड़ी अंडाशय, अंडवाहिनी (डिंबवाहिनी / Fallopian tube) तथा गर्भाशय (Uterus) होता है। अंडाशय मादा युग्मक उत्पन्न करते हैं जिसे अंडाणु (डिंब / Ovum) कहते हैं।
चित्र 6.3 : मानव में मादा जननांग।
मानव (स्त्रियों) में प्रति मास दोनों अंडाशयों में से किसी एक अंडाशय से एक विकसित अंडाणु अथवा डिंब का निर्मोचन अंडवाहिनी में होता है। गर्भाशय वह भाग है जहाँ शिशु का विकास होता है। शुक्राणु की तरह अंडाणु भी एकल कोशिका है।
चित्र 6.4 : मानव अंडाणु।
📘 निषेचन (Fertilization)
जनन प्रक्रम का पहला चरण शुक्राणु और अंडाणु का संलयन है। जब शुक्राणु, अंडाणु के संपर्क में आते हैं तो इनमें से एक शुक्राणु अंडाणु के साथ संलयित हो जाता है। शुक्राणु और अंडाणु का यह संलयन निषेचन कहलाता है।
निषेचन के समय शुक्राणु और अंडाणु संलयित होकर एक हो जाते हैं। निषेचन के परिणामस्वरूप युग्मनज (Zygote) का निर्माण होता है। इसी युग्मनज से एक नए व्यष्टि (जीव) का प्रारंभ होता है।
निषेचन के प्रक्रम में स्त्री (माँ) के अंडाणु और नर (पिता) के शुक्राणु का संयोजन होता है। अतः नयी संतति में कुछ लक्षण अपनी माता से तथा कुछ लक्षण अपने पिता से वंशानुगत होते हैं।
📘 आंतरिक और बाह्य निषेचन
आंतरिक निषेचन (Internal Fertilization): वह निषेचन जो मादा के शरीर के अंदर होता है, आंतरिक निषेचन कहलाता है। मनुष्य, गाय, कुत्ते, तथा मुर्गी इत्यादि अनेक जंतुओं में आंतरिक निषेचन होता है।
बाह्य निषेचन (External Fertilization): वह निषेचन जिसमें नर एवं मादा युग्मक का संलयन मादा के शरीर के बाहर (आमतौर पर जल में) होता है, बाह्य निषेचन कहलाता है। यह मछली, स्टारफिश, और मेंढक जैसे जलीय प्राणियों में होता है।
कुछ स्त्रियों की अंडवाहिनी अवरुद्ध होती है, जिससे शुक्राणु अंडाणु तक नहीं पहुँच पाते और वे शिशु उत्पन्न करने में असमर्थ होती हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर (चिकित्सक) ताज़ा अंडाणु एवं शुक्राणु एकत्र करके उचित माध्यम में कुछ घंटों के लिए एक साथ रखते हैं जिससे IVF अथवा इनविट्रो निषेचन (शरीर से बाहर कृत्रिम निषेचन) हो सके। अगर निषेचन हो जाता है तो युग्मनज को लगभग एक सप्ताह तक विकसित किया जाता है, जिसके पश्चात् उसे माता के गर्भाशय में स्थापित किया जाता है। शिशु का विकास परखनली में नहीं, बल्कि माता के गर्भाशय में ही पूर्ण होता है।
📘 भ्रूण का परिवर्धन (Development of Embryo)
निषेचन के परिणामस्वरूप युग्मनज बनता है जो विकसित होकर भ्रूण (Embryo) में परिवर्धित होता है। युग्मनज लगातार विभाजित होकर कोशिकाओं के गोले में बदल जाता है। तत्पश्चात् कोशिकाएँ समूहीकृत होने लगती हैं तथा विभिन्न ऊतकों और अंगों में परिवर्धित हो जाती हैं। इस विकसित होती हुई संरचना को भ्रूण कहते हैं।
भ्रूण गर्भाशय की दीवार में रोपित होकर विकसित होता रहता है। धीरे-धीरे विभिन्न शारीरिक अंग जैसे हाथ, पैर, सिर, आँखें, कान इत्यादि विकसित हो जाते हैं। भ्रूण की वह अवस्था जिसमें सभी शारीरिक भागों की पहचान हो सके, गर्भ (Foetus) कहलाता है। जब गर्भ का विकास पूरा हो जाता है तो माँ नवजात शिशु को जन्म देती है।
📘 मुर्गियों और बाह्य निषेचन वाले जंतुओं में भ्रूण का विकास
मुर्गी में भी आंतरिक निषेचन होता है। परन्तु क्या मनुष्य और गाय की तरह मुर्गी भी बच्चों को जन्म देती है? आप जानते ही हैं कि मुर्गी बच्चों को जन्म नहीं देती। तब, चूज़े कैसे जन्म लेते हैं?
निषेचन के फौरन बाद ही युग्मनज लगातार विभाजित होता रहता है और अंडवाहिनी में नीचे की ओर बढ़ता रहता है। इसके नीचे बढ़ने के साथ-साथ इस पर सुरक्षित परत चढ़ती जाती है। मुर्गी के अंडे पर दिखाई देने वाला कठोर कवच भी ऐसी ही सुरक्षित परत है।
कठोर कवच के पूर्ण रूप से बन जाने के बाद मुर्गी अंडे का निर्मोचन करती है (अंडा देती है)। मुर्गी के अंडे को चूज़ा बनने में लगभग 3 सप्ताह का समय लगता है। मुर्गी को ऊष्मायन (Incubation) के लिए अंडों पर बैठना पड़ता है। अंडे के अंदर चूज़े का विकास इसी अवधि में होता है। पूर्ण रूप से विकसित होने के बाद कवच के प्रस्फुटन (टूटने) से चूज़ा बाहर आता है।
बाह्य निषेचन वाले जंतुओं में: बाह्य निषेचन वाले जंतुओं में भ्रूण का विकास मादा के शरीर के बाहर ही होता है। भ्रूण अंडावरण के अंदर विकसित होता रहता है। भ्रूण का विकास पूर्ण होने पर अंडजोत्पत्ति (Hatching) होती है। आपने तालाब अथवा झरने में मेंढक के अनेक टैडपोल तैरते हुए देखे होंगे।
📘 जरायुज एवं अंडप्रजक जंतु
हमने जाना कि कुछ जंतु विकसित शिशु को जन्म देते हैं, जबकि कुछ जंतु अंडे देते हैं जो बाद में शिशु में विकसित होते हैं। जनन के आधार पर जंतुओं को दो भागों में बाँटा गया है:
- जरायुज जंतु (Viviparous Animals): वह जंतु जो सीधे ही शिशु को जन्म देते हैं, जरायुज जंतु कहलाते हैं। उदाहरण: गाय, कुत्ता, बिल्ली, मनुष्य आदि।
- अंडप्रजक जंतु (Oviparous Animals): वे जंतु जो अंडे देते हैं, अंडप्रजक जंतु कहलाते हैं। उदाहरण: मुर्गी, मेंढक, छिपकली, तितली, कौआ आदि।
बाहर अंडे देने वाले जंतुओं के अंडों का अवलोकन करना सरल है, लेकिन जरायुज जंतुओं के अंडे आप एकत्र नहीं कर सकते क्योंकि वे अंडे नहीं देते, बल्कि पूर्ण विकसित शिशु को जन्म देते हैं।
📘 शिशु से वयस्क: कायांतरण (Metamorphosis)
नवजात जन्मे प्राणि अथवा अंडे के प्रस्फुटन से निकले प्राणि, तब तक वृद्धि करते रहते हैं जब तक वे वयस्क नहीं हो जाते। कुछ जंतुओं में नवजात जंतु वयस्क से बिलकुल अलग दिखाई पड़ सकते हैं।
मेंढक का जीवन चक्र: मेंढक में अंडे से प्रारम्भ करके वयस्क बनने की विभिन्न अवस्थाओं (चरणों) को देखा जा सकता है:
अंडा ➔ टैडपोल (लार्वा) ➔ वयस्क
टैडपोल वयस्क मेंढक से भिन्न दिखाई देते हैं। टैडपोल रूपांतरित होकर वयस्क में बदल जाता है जो छलाँग लगा सकता है और तैर सकता है। कुछ विशेष परिवर्तनों के साथ टैडपोल (लार्वा) का वयस्क में रूपांतरण कायांतरण (Metamorphosis) कहलाता है।
मनुष्य में जन्म के समय से ही नवजात शिशु में वयस्क समान शारीरिक अंग मौजूद होते हैं, इसलिए मनुष्य में कायांतरण नहीं होता।
📘 6.3 अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
अत्यंत छोटे जंतु जैसे हाइड्रा एवं सूक्ष्मदर्शीय जंतु जैसे अमीबा में जनन अलग प्रकार से होता है। इस प्रकार के जनन में नर और मादा युग्मक की आवश्यकता नहीं होती है।
हाइड्रा में एक या अधिक उभार दिखाई दे सकते हैं। यह उभार विकसित होते नए जीव हैं जिन्हें मुकुल (Bud) कहते हैं। हाइड्रा में भी एक एकल जनक से निकलने वाले मुकुल से नए जीव का विकास होता है। इस प्रकार के जनन को जिसमें केवल एक ही जनक नए जीव को जन्म देता है, अलैंगिक जनन कहते हैं। हाइड्रा में मुकुल से नया जीव विकसित होता है इसलिए इस प्रकार के जनन को मुकुलन कहते हैं।
चित्र 6.11 : हाइड्रा में मुकुलन।
अलैंगिक जनन की अन्य विधि अमीबा में दिखाई देती है। अमीबा एककोशिक जीव होता है। इसमें केन्द्रक के दो भागों में विभाजन से जनन क्रिया प्रारम्भ होती है। इसके बाद कोशिका भी दो भागों (कोशिकाओं) में बँट जाती है जिसके प्रत्येक भाग में केन्द्रक होता है। परिणामस्वरूप एक जनक से दो अमीबा बनते हैं।
इस प्रकार के अलैंगिक जनन को जिसमें जीव विभाजित होकर दो संतति उत्पन्न करता है द्विखंडन (Binary Fission) कहलाता है। मुकुलन एवं द्विखंडन के अतिरिक्त कुछ अन्य विधियाँ भी हैं जिनके द्वारा एकल जीव संतति जीवों को जन्म देते हैं।
चित्र 6.12 : अमीबा में द्विखंडन।
किसी समरूप कोशिका या किसी अन्य जीवित भाग अथवा सम्पूर्ण जीव को कृत्रिम रूप से उत्पन्न करने की प्रक्रिया क्लोनिंग (Cloning) कहलाती है। किसी जंतु की सफलतापूर्वक क्लोनिंग सर्वप्रथम इयान विलमट और उनके सहयोगियों ने एडिनबर्ग, स्कॉटलैंड के रोज़लिन इंस्टीट्यूट में की। उन्होंने एक भेड़ को क्लोन किया जिसका नाम डॉली रखा गया। डॉली का जन्म 5 जुलाई 1996 को हुआ। यह क्लोन किया जाने वाला पहला स्तनधारी था।
डॉली एक फिन डॉरसेट भेड़ की स्वस्थ क्लोन थी जिसने प्राकृतिक लैंगिक जनन द्वारा अनेक संततियों को जन्म दिया। दुर्भाग्य से फेफड़ों के रोग के कारण 14 फरवरी 2003 को डॉली की मृत्यु हो गई।
📘 अध्याय का सारांश (आपने क्या सीखा)
- जंतु दो विधियों द्वारा प्रजनन करते हैं: (i) लैंगिक जनन तथा (ii) अलैंगिक जनन।
- नर युग्मक एवं मादा युग्मक के संलयन द्वारा जनन को लैंगिक जनन कहते हैं। मनुष्य में नर युग्मक ‘शुक्राणु’ तथा मादा युग्मक ‘अंडाणु’ कहलाता है।
- अंडाणु एवं शुक्राणु का संलयन ‘निषेचन’ कहलाता है, जिससे ‘युग्मनज’ का निर्माण होता है।
- मादा के शरीर के अंदर होने वाला निषेचन ‘आंतरिक निषेचन’ और जो बाहर (पानी में) होता है उसे ‘बाह्य निषेचन’ कहते हैं।
- युग्मनज विभाजित होकर भ्रूण बनाता है, जो गर्भाशय की दीवार में स्थापित होकर विकसित होता है। भ्रूण की पूर्ण विकसित अवस्था ‘गर्भ’ कहलाती है।
- शिशु को जन्म देने वाले जंतु जरायुज और अंडे देने वाले जंतु अंडप्रजक कहलाते हैं।
- लार्वा का कुछ उग्र-परिवर्तनों द्वारा वयस्क जंतु में बदलने की प्रक्रिया ‘कायांतरण’ कहलाती है।
- केवल एक ही जीव की भागीदारी वाला जनन ‘अलैंगिक जनन’ कहलाता है (जैसे: हाइड्रा में मुकुलन, अमीबा में द्विखंडन)।
यहाँ हमने Bihar Board Class 8 Science Chapter 6 Solutions के सभी महत्वपूर्ण अभ्यास प्रश्नों के उत्तर बहुत ही सरल भाषा में तैयार किए हैं। अगर आप परीक्षा में अच्छे अंक लाना चाहते हैं, तो इन Bihar Board Class 8 Science Chapter 6 Solutions को ध्यानपूर्वक पढ़ें। नीचे दिए गए Bihar Board Class 8 Science Chapter 6 Solutions नोट्स आपके रिवीजन के लिए सबसे उत्तम हैं।
📘 Bihar Board Class 8 Science Chapter 6 Solutions: अभ्यास प्रश्न उत्तर
इस भाग में कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 6 (जंतुओं में जनन) के सभी अभ्यास प्रश्नों के उत्तर पाठ्यपुस्तक के अनुसार दिए गए हैं।
उत्तर: जनन सजीवों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण प्रक्रम है क्योंकि इसके द्वारा जीव अपनी जाति (स्पीशीज) की निरंतरता को बनाए रखते हैं। यदि जीव प्रजनन नहीं करेंगे, तो कुछ समय बाद पृथ्वी पर उनकी प्रजाति विलुप्त हो जाएगी। जीवों में जनन यह सुनिश्चित करता है कि एक जैसे जीवों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी अस्तित्व बना रहे।
उत्तर: मनुष्य में आंतरिक निषेचन होता है। जनन प्रक्रम का पहला चरण नर युग्मक (शुक्राणु) और मादा युग्मक (अंडाणु) का संलयन है। संभोग की प्रक्रिया के दौरान, जब नर के वृषण से उत्पन्न लाखों शुक्राणु मादा की अंडवाहिनी (Fallopian tube) में अंडाणु के संपर्क में आते हैं, तो उनमें से कोई एक शुक्राणु अंडाणु के साथ संलयित हो जाता है। शुक्राणु और अंडाणु के इस संलयन की प्रक्रिया को ही निषेचन (Fertilization) कहते हैं। निषेचन के परिणामस्वरूप युग्मनज (Zygote) का निर्माण होता है, जो आगे चलकर भ्रूण और फिर शिशु के रूप में विकसित होता है।
(क) आंतरिक निषेचन होता है :
- मादा के शरीर में
- मादा के शरीर से बाहर
- नर के शरीर में
- नर के शरीर से बाहर
उत्तर: (i) मादा के शरीर में
(ख) एक टैडपोल जिस प्रक्रम द्वारा वयस्क में विकसित होता है, वह है :
- निषेचन
- कायांतरण
- रोपण
- मुकुलन
उत्तर: (ii) कायांतरण
(ग) एक युग्मनज में पाए जाने वाले केन्द्रकों की संख्या होती है :
- कोई नहीं
- एक
- दो
- चार
उत्तर: (ii) एक (शुक्राणु और अंडाणु के केन्द्रक संलयित होकर एक ही केन्द्रक बन जाते हैं)।
- (क) अंडप्रजक जंतु विकसित शिशु को जन्म देते हैं। (असत्य) – वे अंडे देते हैं।
- (ख) प्रत्येक शुक्राणु एक एकल कोशिका है। (सत्य)
- (ग) मेंढक में बाह्य निषेचन होता है। (सत्य)
- (घ) वह कोशिका जो मनुष्य में नए जीवन का प्रारंभ है, युग्मक कहलाती है। (असत्य) – वह कोशिका युग्मनज (Zygote) कहलाती है।
- (ङ) निषेचन के पश्चात् दिया गया अंडा एक एकल कोशिका है। (सत्य)
- (च) अमीबा मुकुलन द्वारा जनन करता है। (असत्य) – अमीबा द्विखंडन द्वारा जनन करता है।
- (छ) अलैंगिक जनन में भी निषेचन आवश्यक है। (असत्य) – इसमें युग्मकों का संलयन (निषेचन) नहीं होता।
- (ज) द्विखंडन अलैंगिक जनन की एक विधि है। (सत्य)
- (झ) निषेचन के परिणामस्वरूप युग्मनज बनता है। (सत्य)
- (ञ) भ्रूण एक एकल कोशिका का बना होता है। (असत्य) – भ्रूण बहुकोशिकीय होता है।
उत्तर: युग्मनज और गर्भ में दो मुख्य भिन्नताएँ निम्नलिखित हैं:
| युग्मनज (Zygote) | गर्भ (Foetus) |
|---|---|
| 1. यह शुक्राणु और अंडाणु के संलयन से बनी एक ‘एकल कोशिका’ (Single cell) होती है। | 1. यह भ्रूण के विकास की अंतिम अवस्था है और कोशिकाओं का एक विशाल ‘बहुकोशिकीय’ समूह होता है। |
| 2. इस अवस्था में किसी भी शारीरिक अंग की पहचान नहीं की जा सकती है। | 2. इस अवस्था में हाथ, पैर, सिर, आँखें और कान जैसे सभी शारीरिक अंगों की पहचान की जा सकती है। |
उत्तर: अलैंगिक जनन: जनन की वह विधि जिसमें केवल एक ही जनक (या तो नर या मादा) नए जीव को जन्म देता है, अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction) कहलाता है। इस विधि में युग्मकों का संलयन या निषेचन नहीं होता है।
जंतुओं में अलैंगिक जनन की दो विधियाँ:
- मुकुलन (Budding): यह विधि ‘हाइड्रा’ में पाई जाती है। इसके शरीर पर एक या एक से अधिक छोटे उभार निकलते हैं जिन्हें मुकुल कहते हैं। यही मुकुल धीरे-धीरे वृद्धि करते हैं और स्वतंत्र होकर नया हाइड्रा जीव बन जाते हैं।
- द्विखंडन (Binary Fission): यह विधि ‘अमीबा’ जैसे सूक्ष्म एककोशिकीय जीवों में पाई जाती है। इसमें सबसे पहले अमीबा का केन्द्रक दो भागों में विभाजित होता है। इसके बाद कोशिका (शरीर) भी दो भागों में बँट जाती है, जिससे एक जनक से दो नई संतति अमीबा उत्पन्न हो जाते हैं।
उत्तर: मादा के जनन अंग गर्भाशय (Uterus) की दीवार में भ्रूण का रोपण (Implantation) होता है, जहाँ उसका निरंतर विकास होता रहता है।
उत्तर: कुछ जंतुओं में अंडे से निकलने वाले नवजात (लार्वा) बिल्कुल वयस्क के समान नहीं होते। लार्वा का कुछ उग्र-परिवर्तनों द्वारा वयस्क जंतु में बदलने की प्रक्रिया को ‘कायांतरण (Metamorphosis)’ कहते हैं।
उदाहरण: मेंढक के अंडे से टैडपोल (लार्वा) निकलता है। टैडपोल पानी में तैरता है, लेकिन बाद में कुछ भारी परिवर्तनों (पूँछ का गायब होना, पैरों का विकास) के बाद यह छलाँग लगाने वाले तैरने वाले वयस्क मेंढक में कायांतरित हो जाता है। रेशम कीट (इल्ली से शलभ बनना) भी इसका एक उदाहरण है।
उत्तर:
| आंतरिक निषेचन (Internal Fertilization) | बाह्य निषेचन (External Fertilization) |
|---|---|
| 1. इसमें नर तथा मादा युग्मक का संलयन मादा के शरीर के अंदर होता है। | 1. इसमें नर तथा मादा युग्मक का संलयन मादा के शरीर के बाहर (प्रायः जल में) होता है। |
| 2. इस विधि में मादा एक या कम संख्या में अंडे/संतति उत्पन्न करती है (जैसे मुर्गी में एक अंडा, मनुष्य में एक शिशु)। | 2. इस विधि में मादा सैकड़ों-हजारों की संख्या में अंडे देती है क्योंकि जल प्रवाह या अन्य जंतुओं के कारण कई अंडे नष्ट हो जाते हैं। |
| 3. उदाहरण: मनुष्य, गाय, कुत्ता, मुर्गी आदि। | 3. उदाहरण: मेंढक, मछली, स्टारफिश आदि जलिय प्राणी। |
बाएँ से दाईं ओर
1. यहाँ अंडाणु उत्पादित होते हैं
3. वृषण में उत्पादित होते हैं
4. हाइड्रा का अलैंगिक जनन है
ऊपर से नीचे की ओर
1. यह मादा युग्मक है
2. नर और मादा युग्मक का मिलना
4. एक अंडप्रजक जंतु
छात्रों को मुर्गी के अंडों (जो बाज़ार में खाने के लिए मिलते हैं) और निषेचित अंडों के बीच का अंतर समझाना उपयोगी है। बाज़ार वाले अंडे (Farm eggs) प्रायः अनिषेचित (Unfertilized) होते हैं, जिनसे चूज़े नहीं निकलते। साथ ही, तालाब में मेंढक के अंडों और टैडपोल के विकास को लाइव देखना बच्चों में विज्ञान के प्रति गहरी रुचि जगाता है!
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Suraj Kumar Mishra